बौध धर्म पर लौटना भारत देश के लिए बेहद जरूरी क्यों है:
अंग्रेजी शाशन में अंग्रेजी के प्रचार के कारण अंग्रेजों ने शिक्षा के दरवाज़े सबके लिए खोल दिए, जिससे संस्कृत जैसे कोड भाषा में छिपा कर रखी शिक्षा धीरे धीरे जनसाधारण तक पहुचने लगी
शिक्षा के दरवाज़े सबके लिए खुलने से सभी ब्रह्मण धर्म जिसे आजकल हिन्दू धर्म कहते हैं, के बारे में समझने लगे हैं की इसका पूरा डिजाइन एक वर्ग विशेष के संवर्धन और तरक्की और भारत के मूलनिवासियो में फूट डालो शाशन करो पर आधारित है
सभी समझने लगे की भारत के सारे मूलनिवासिओं को विभिन्न जातीय सम्प्रदायों में बाँट कर देश का ऐसा सत्यानाश किया है की दुनिया में से जो भी ऐरा गैरा आया सबने भारत पर राज किया है|इतिहास गवाह है की भारत पर अनेकों अनेक विदेशी आक्रमण हुए जिनमे से नों आक्रमण बेहत भीषण थे| ऐसा इसलिए हुया क्योंगी हम जातिओं में बटे थे जिसकी वजह से कभी संगठित नहीं होते |
हमारी शिक्षा व्यस्था हमें ये तो पढ़ाती है की हमारा देश सालों तक गुलाम रहा पर ये नहीं बताती ऐसा जातिगत बटवारा और विदेशी ताकतों के आगे संगठित न होना इसकी वजह से होया, भारत देश के सभी समस्याओं की जड़ जातिगत बटवारे में है और जाती तब तक नहीं ख़तम होगी जब तक ब्राहमण धर्म ख़त्म नहीं होगा |
पूरे इतिहास में केवल बौध काल या सम्राट अशोक के काल में ही पूरा भारत एकजुट और शक्तिशाली था, उस सुराज की याद में हम आज भी अशोक चिन्हों को आज की सरकार में इस्तेमाल करते हैं |
इस समस्या का एक ही जवाब है “बौधमय भारत”, केवल बौध धर्म ही विशुद्ध भारतीय धर्म है जो पूर्णतय वैज्ञानिक दृष्टीकोण पर आधारित है| इस धर्म में पाखंड और सामाजिक बटवारे की कोई जगह ही नहीं है
बौध धर्म हर उस व्यक्ति का धर्म है जो मन से समानता चाहता है और जियो और जीने दो की नीति पर चलता है , समानता (अवसरों की) इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत देश की सभी समस्याओं की जड़ जनता का जातिगत और सांप्रदायिक बटवारा है |
सामाजिक असमानता या जातिगत आकड़ों पर पार्टी और वोट के आधार पर बनी सरकार कोई भी देश हित का एक सर्व सम्मत फैसला नहीं ले पाती| देश हित के फैसलों के ऊपर वोट बैंक हित हावी हो जाता है |
ये तय है की जो भी हिंदुत्व के पाखंड को समझ जाता है वो इसे छोड़ना चाहता है |जैसे जैसे ब्राहमण धर्म की पोल खुलती जा रही है लोग इसे छोड़कर विदेशी धर्मों की तरफ रुख कर रहे हैं क्यों स्वदेशी बौद्ध धर्म का बेहद कम प्रचार के कारण इस बेहतरीन विकल्प के बारे में नहीं सोचते और विदेशी धर्म के मिशन के जाल में फस जाते हैं |
विदेशी धर्म भारत की एकता और अखंडता के लिए कितने लायक है आप खुद समझ सकते हैं और हिंदुत्व असमानता और पाखंड को बढ़ता है| इस अवैज्ञानिक धर्म में किसी भी गेर हिन्दू को शामिल करने का कोई प्रवेश द्वार नहीं हैं |
ऐसे में केवल पूर्णतः स्वदेशी बौद्ध धर्म ही भारत की धार्मिक जरूरत का बेहतरीन विकल्प है | केवल बौद्ध धम्म के ही पास ही सभी अधायात्मिक जिज्ञासाओं का सही और वैज्ञानिक वर्णन है< हम सभी जानते हैं की बौद्ध धर्म आस्था पर नहीं प्रमाणिकता पर आधारित है |
भारत देश ही नहीं परमाणु बम्ब के जखीरे पर बैठी ये दुनिया के लिए भी बौद्ध धर्म बेहतरीन मार्ग और विकल्प है
विशेष कर भारत देश में जिस तरह हर कौम देश और सत्य-मार्ग को छोड़कर केवल अपनी कौम को ही बढ़ावा देने में लगे हैं, उससे भारत देश का भविष्य बहुत डरावना हो सकता है, गृह युद्ध और अपना अपना देश मांगने की स्तिथि को समझा जा सकता है |
इन सभी बातों को असल में बुद्धिजीवी हिन्दू भी समझते हैं पर आंबेडिकरवादियों द्वारा इस धर्म को अपनाने की वजह से खुल कर बौद्ध धर्म को नहीं अपनाते | भगवान् बुद्ध ने कहाँ है की “मोह में हम किसी की बुराई नहीं देख सकते और घृणा में हम किसी की अच्छाई नहीं देख पाते “
बौद्ध धर्म हर कसोटी पर खरा उतरता है यही कारण है की जो भी इसे ठीक से जान जाता है वो कहीं नहीं जाता, उसे फिर सभी धर्मों की सच्चाई और जड़ें साफ़ दिकने लगती है |
इस धर्म का प्रचार मीडिया में इसलिए नहीं होता क्योंकि ये सभी धर्मों में व्याप्त अंधविश्वास की काट करता है जिससे कई धर्म के नाम पर कमाई करने वालों के हितों पर घूर अघात होता है
पर जो भी हो धीरे धीरे ही सही सत्य फ़ैल ही जाता है
