Highlights तृतीये बौद्ध सम्मलेन तालकटोरा स्टेडियम नई दिल्ली 12-nov-2017

 

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संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डाॅ भीम राव अम्बेडकर के 127 वी जयन्ती पर आप सभी को हार्दिक शुभामनाऐ।क्या आपको पता है बाबासाहब डॉ.अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ‘ दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी’ पर शोध किया जिसके आधार पर भारत में “रिजर्व बैंक” की स्थापना हुईं।

संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डाॅ भीम राव अम्बेडकर के 127 वी जयन्ती पर आप सभी को हार्दिक शुभामनाऐ।

 

क्या आपको पता है बाबासाहब डॉ.अंबेडकर जी ने अपने डाॅक्टर ऑफ सायंस के लिए ‘ दि प्राॅब्लेम ऑफ रूपी’ पर शोध किया जिसके आधार पर  भारत में “रिजर्व बैंक” की स्थापना हुईं।

डॉ भीमराव अंबेडकर
ग्रन्थ:- समता स्वतंत्रता एवं बन्धुता पर आधारित भारतीय संविधान
योग्यता:- निम्नलिखित।
*वे निम्नलिखित 9 भाषाओं के ज्ञाता थे।*
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
9) पाली
*बाबा साहेब अंबेडकर ने संसद में निम्नलिखित 9 विधेयक पेश किये थे।*
1) महार वेतन बिल
2) हिन्दू कोड बिल
3) जनप्रतिनिधि बिल
4) खोती बिल
5) मंत्रीओं का वेतन बिल
6) मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
7) रोजगार विनिमय सेवा
8) पेंशन बिल
9) भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
*बाबासाहब ने निम्नलिखित 9 सत्याग्रह (आंदोलन)किये थे।*
1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेड का आंदोलन 23/9/1931
*बाबासाहब अंबेडकर ने निम्नलिखित संगठनों अथवा संस्थाओं की स्थापना की थी।*
1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा – 20 जुलाई 1924
2) समता सैनिक दल – 24 सितम्बर 1924
3) स्वतंत्र मजदूर पार्टी – 16 अगस्त 1936
4) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलाई 1942
5) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
6) भारतीय बौद्ध महासभा –
4 मई 1955
7) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून 1928
8) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलाई 1945
9) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
10) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
*बाबा साहेब ने निम्नलिखित पत्र पत्रिकाएं प्रकाशित की थी।*
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
*बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए थे।*
*बाबासाहब अंबेडकर ने निम्नलिखित सम्मान प्राप्त किये थे।*
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
*बाबासाहब अंबेडकर के पास निम्नलिखित अपनी निजी पुस्तकें थी।*
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000
किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25 खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें-
बुद्ध धम्म,
पालि साहित्य,
मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
*बाबासाहब अंबेडकर की उपाधि।*
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक (अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।
*बाबासाहब अंबेडकर की कुछ अन्य विशेषताएँ*
1) पानी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहले महापुरुष।
2) लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी
जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव
3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नंबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय
4) विश्व के छह विद्वानों में से एक
6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी.
यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय
7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा
करनेवाले महामानव
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उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति का रंग भगवा किए जाने के बाद चौतरफा बहुजन विरोध को देखते हुए अब उसे दोबारा नीला पेंट कर दिया गया है

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति का रंग भगवा किए जाने के बाद चौतरफा विरोध को देखते हुए अब उसे दोबारा नीला पेंट कर दिया गया है। बदायूं में बीएसपी नेता हिमेंद्र गौतम ने आंबेडकर की मूर्ति के रंग को फिर से नीले रंग में बदल दिया। बता दें कि बदायूं के कुवरगांव पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले दुगरैया गांव में शनिवार सुबह आंबेडकर की मूर्ति को नुकसान को पहुंचाया गया था।

इसके बाद सोमवार को इसका नई मूर्ति बनवाने के साथ उसका रंग भगवा कर दिया गया था। यही नहीं अक्सर कोट और ट्राउजर में दिखने वाले आंबेडकर की मूर्ति को शेरवानी पहनाई गई थी। उनका हाथ जो पार्लियामेंट को जीत लेने का ईशारा करता है वो हाथ भी नीचे करके इशारा ख़तम किया |बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति का लोकार्पण करते वक्त पूर्व जिलाध्यक्ष क्रांति कुमार और डीएसपी वीरेन्द्र यादव के साथ बीएसपी के जिलाध्यक्ष हेमेंद्र गौतम भी मौजूद थे। अब इसे स्थानीय बीएसपी नेता हिमेंद्र गौतम ने इसे दोबारा से नीला पेंट करवा दिया है।

https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/others/bsp-leader-himendra-gautam-repainted-ambedkar-statue-in-badaun/articleshow/63693534.cms

 

मिटा न सको विचारधारा ख़तम करके पूजने लगो निति के तहत डॉ आंबेडकर का भगवाकरण,नाम के साथ रामजी और पोषक का कलर नीले से बदलकर भगवा करने से हुई शुरुआत

लो जी डॉ आंबेडकर का भगवाकरण, नया देवता लांच हुआ है ‘जय भीम राम जी’ , इनकी आरती और वि** अवतार की कहानी जल्द आएगी
मिटा न सको तो पूजने लगो,डॉ आंबेडकर रइटिंग एंड स्पीचेस २२ वॉल्यूम मार्किट से गायब करने के बाद उनको देवता बनाने की प्रक्रिये तेज़
सावधान प्राचीन बहुजन महापुरुषं की तरह डॉ आंबेडकर भी देवता बनकर पूजने न लगें ब्राह्मणों का कमाई का साधन बनने से बचाओ

यूपी में भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के साथ लगातार छेड़छाड़ और क्षतिग्रस्त होने की खबरों के बीच अब मूर्ति के रंग में बदलाव सुर्खियों में है। यूपी के बदायूं जिले में लगी आंबेडकर की मूर्ति का रंग बदलकर नीला से भगवा कर दिया है। अक्सर कोट और ट्राउजर में दिखने वाले आंबेडकर की मूर्ति को भगवा रंग की शेरवानी पहनाई गई है।

बता दें कि बदायूं के कुवरगांव पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले दुगरैया गांव में शनिवार सुबह आंबेडकर की मूर्ति को नुकसान को पहुंचाया गया था। अब इसी मूर्ति की मरम्मत के बाद इसका रंग बदलने से कई दलित संगठनों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के बदायूं जिले के अध्यक्ष भारत सिंह जाटव ने कहा, ‘आंबेडकर की प्रतिमा में उनके कोट का रंग बदलने से समुदाय के लोग गुस्से में है।’

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यदि आप सजग नहीं रहे तो ब्राह्मणवादी मीडिया आपको अपने ही लोगों से नफरत करने वाला और ब्राह्मणवादी अत्यचारिओं से प्रेम करने वाला बना देगा| जो इतिहास से सबक नहीं सीखता तो इतिहास उसे सबक सिखाता है

ध्यान न देना = असफलता और दुःख
ध्यान देना = सफलता और सुख

जैसे ये सूत्र आपकी स्कूल कालेज की कक्षा में लागू था वैसे ही जीवन में हमेशा लागू रहता है |आप जितनी TIME टीवी, अखबार,प्रचार अदि के देते हैं मतलब उतना समय आप ब्राह्मणवाद पर ध्यान देते है, वो जरूरी भी है| पर अगर उसका 10% टाइम भी आप अपने खुद के बुद्धिज़्म/अम्बेडकरवाद पर दोगे तब आपमें जबरदस्त परख क्षमता विकसित हो जायेगी| अम्बेडकरवाद ब्राह्मणवाद का एंटीवायरस है, अगर आपने ये एंटीवायरस अपने दिमाग में डाल लिए तो फिर ब्राह्मणवाद में से अच्छे को गृहण करने लगोगे और बुराई से बचने लगोगे| वार्ना संत रविदास का वो कथन सच हो जाएगा :

कहे रविदास सुनों भई लोगों ब्राह्मण के गुण है तीन
सम्मान हरे,धन संपत्ति लूटे, और बुद्धि ले छीन

यदि आप सजग नहीं रहे तो ब्राह्मणवादी मीडिया आपको अपने ही लोगों से नफरत करने वाला और ब्राह्मणवादी अत्यचारिओं से प्रेम करने वाला बना देगा, ठीक वैसे जैसे आपके पूर्वजों के हत्यारे देवी देवता को आप पूजने लगे

http://thewirehindi.com/39182/sc-st-act-dalit-agitation-narendra-modi-government/

अपने को श्रेस्ट कहने वाले ब्राह्मणों ने ऐसा क्या किया की वो श्रेस्ट कहलाये जाएँ , बाकि के SC/ST/OBC/Minorities ने तो बहुत कुछ किया जिससे उनका देशप्रेम साबित होता है , आइये जाने कौन कैसे श्रेस्ट है

ज़िन्होने खेती बाडी करके अन्न,भोजन,वस्त्र पैदा किया ,वे लोग श्रेष्ठ नहीं !

जिन्होंने चमड़े से जूते, चप्पल बनाने का आविष्कार कर, समस्त मानव जाति के पैरों को सुरक्षित, सुन्दर और निरापद बनाकर समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने सम्पूर्ण पर्यावरण की सफाई करके सुन्दर और स्वच्छ समाज बनाकर समाज की सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने लकड़ी से फर्नीचर (खाट, पलंग, आलमारी, मेज, कुर्सी, दरवाजे आदि) का आविष्कार कर, समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने मिट्टी के बर्तन बनाने का आविष्कार करके समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने  खेती के औजारों का (हल, खुरपी, फावड़ा आदि) आविष्कार करके “अन्न पैदा करने की तकनीक” देकर भूखों मरते, जंगलों में कन्द-मूल और फल के लिए भटकते मानव की, समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने लोहे से “मानव हितकारी यन्त्रों” का आविष्कार किया, साग सब्जी उगाकर या पशु पालन से समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने घर, इमारतें बनाने का आविष्कार करके, प्रकृति और मौसम के क्रूर थपेड़ों से मानव को बचाकर समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहींं।
जिन्होंने रेशम, कपास और तमाम प्राकृतिक रेशों से कपड़े बुनने का आविष्कार कर मानव को जो, जंगलों में नंगे, ठंड और भीषण गर्मी में पेड़ की छाल पत्ते और मरे जानवरों की खाल लपेटने को बाध्य था, को सुन्दर वस्त्र देकर सभ्य और सुसंकृत बनाकर समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन्होंने नौकायें और बड़ी-बड़ी पानी के जहाज बनाकर यातायात को सरल बनाकर पूरे मानव सभ्यता को उन्नतिशील और ऐश्वर्यपूर्ण बनाकर, समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहीं।
जिन शिल्पकारों ने मिट्टी पत्थरों और तमाम प्राकृतिक संसाधनों से श्रेष्ठ, कलात्मक मूर्तियों का निर्माण करके इस समाज और दुनिया को कला और संस्कृति की अनन्त ऊँचाइयों पर पहुँचाकर कर समाज सेवा की, वे लोग श्रेष्ठ नहींं।
लेकिन जिन्होने लंबे समय से समाज को अंधविश्वास, ढकोसले, पाखंण्ड, लोक-परलोक, स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य, मोक्ष प्राप्ति, कपोल-राशिफल,कल्पित भविष्य-फल, पुनर्जन्म, जातिवाद, छूआ-छूत, अश्पृश्यता आदि नारकीय तमाम ढकोसलों के सहारे समाज को पीछे ढकेलकर समाज को अकर्मण्यता और भाग्यवादी बनाकर कर पीछे की तरफ ढकेलने वाले,  वे ही आज तथाकथित जातिमात्र से श्रेष्ठ है, यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
भारत टैक्नोलोजी में पीछे इसी वजह से है कि यहां “नॉन टैक्निकल” जातियां, श्रेष्ठ और प्रभावशाली रहीं हैं और “टैक्निकल” जातियां भेदभाव से शोषित रहीं है।
#jaiyoddhey