बौद्ध धम्म को आसान हिंदी में समझने के लिए समयबुद्धा प्रवचनों के लिए कृपया YOUTUBE चैनल “Buddhism in HINDI” ज्वाइन करें, अपने सभी साथियों से ज्वाइन करवाएं

बौद्ध धम्म को आसान हिंदी में समझने के लिए समयबुद्धा प्रवचनों के लिए कृपया YOUTUBE चैनल “Buddhism in HINDI” ज्वाइन करें, अपने सभी साथियों से ज्वाइन करवाएं
 
 

Advertisements

धीरे धीरे लोगों का EVM मशीन पर शक पक्का पड़ता जा रहा है, खासकर बहुजन समाज के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया है,वामन मेश्राम का आंखे खोलने वाला ये वीडियो जरूर सुने , आप भी चुनाव आयुक्त को इसी तरह का पत्र लिख सकते हैं

 

हरियाणा हिसार,14 अक्टूबर।तथागत बुद्ध के सैंकड़ों अनुयायियों ने धम्म प्रवर्तन/वापसी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को हिसार लघुसचिवालय से लेकर अग्रोहा बौद्ध स्तूप तक धम्म यात्रा निकाली।भारतीय बौद्ध महासभा,धम्म भूमि पलवल,समता सैनिक दल व अन्य संगठनों ने मिलकर इस धम्म कार्यक्रम का आयोजन किया………..Rajesh Rathi FB post

धम्मप्रवर्तन/वापसी दिवस 14-oct पर बुद्ध अनुयायियों ने हिसार से अग्रोहा तक निकाली धम्म यात्रा

लघुसचिवालय में डॉ आंबेडकर को माल्यापर्ण के बाद अग्रोहा बौद्ध स्तूप पर हुई धम्म देशना

हिसार,14 अक्टूबर।तथागत बुद्ध के सैंकड़ों अनुयायियों ने धम्म प्रवर्तन/वापसी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को हिसार लघुसचिवालय से लेकर अग्रोहा बौद्ध स्तूप तक धम्म यात्रा निकाली।भारतीय बौद्ध महासभा,धम्म भूमि पलवल,समता सैनिक दल व अन्य संगठनों ने मिलकर इस धम्म कार्यक्रम का आयोजन किया था।यात्रा की शुरुआत लघुसचिवालय स्थित संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।उसके उपरांत मोटरसाइकिल व गाड़ियों के काफिले से यात्रा अग्रोहा पहुंची।

धम्म देशना करने पहुँचे भन्ते धम्मशील,भन्ते क्षमाशील अग्रोहा बौद्ध स्तूप पर पहुंचे और बुद्ध वन्दना कर स्तूप की गरिमा के साथ अनुयायियों को धम्म की राह बताई।त्रिशरण व पंचशील पाठ के बाद कार्यक्रम के वक्ताओं ने कहा कि 44 साल अध्ययन के बाद 14 अक्टूबर 1956 को बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर ने रूढ़िवादी,वर्णवादी व भेदभाव युक्त धर्म को छोड़कर मानवतावादी बुद्ध धम्म को लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर की धरती पर आत्मसात किया था।इसी उपलक्ष्य में हर साल बुद्ध धम्म के अनुयायी 14 अक्टूबर को तथागत बुद्ध और डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए धम्म प्रवर्तन दिवस मनाते है।मुख्यवक्ता डॉ जगराम ने कहा कि अग्रोहा की भूमि पर तथागत बुद्ध के पवित्र कदम पड़े थे।

यहां पर विशाल बौद्ध विहार होता था जिसमे हजारों बौद्ध भिक्षु निवास करते थे।सम्राट अशोक द्वारा चौरासी हजार बुद्ध शिलालेखों का निर्माण करवाया गया जिसमें अग्रोहा स्तूप व हिसार की लाट की मस्जिद भी शामिल है।लेक़िन मानवतावाद विरोधी शक्तियो ने अग्रोहा के साथ देश भर के बौद्ध स्तूपों को नष्ट कर दिया।डॉ जगराम ने कहा की बुद्ध की संस्कृति संसार भर में फैली हुई है।उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म को आगे बढ़ाने व इसके प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट होकर काम करना पड़ेगा।बुद्ध की राह ही मानवता की असली राह है।देश मे जो धार्मिक कट्टरता का माहौल बन चुका है उसे केवल बुद्ध के बताए शांति के मार्ग से ठीक किया जा सकता है।भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष राजेश बौद्ध ने बताया कि महाकारुणिक बुद्ध की ऐतिहासिक भूमि अग्रोहा का पता भारतीय पुरातत्विक विभाग की खुदाई के बाद लगा।लेकिन सरकार बौद्ध स्तूप की लगातार उपेक्षा कर रही है।स्तूप की सेंकडो एकड़ भूमि यहाँ कब्जाई जा चुकी है।बुद्ध स्तूप की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर अनुयायियों का एक दल जल्द ही उचित कदम उठाएगा।

मंगलकामना व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।इस मोके पर पूनम बौद्ध, सोनू विशरवाल,जगदीश बौद्ध,विनोद शिला, सज्जन,नरेश खोखर,रविन्द्र चौहान,राजेंद्र बौद्ध,कमलेश बरबड़,तेलूराम अग्रोहा,इंद्राज बौद्ध,राजबीर सोरखी,विक्रम अटल,राजेश,रमेश बोद्ध,सोनू,सन्दीप मंगाली व अन्य मौजूद थे।

 

https://www.facebook.com/Rajesh.Rathi.Hisar

 

 

 

आप सभी को धम्म क्रांति/वापसी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें, आज 14अक्टूबर को ही सन 1956 में डा बी.आर. अम्बेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों समेत सार्वजानिक जलसा करके बौद्ध धर्मं में लौटने की दीक्षा ली थी| इसी अवसर पर उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए जो 22 प्रतिज्ञाएँ तय की थी वो इस पोस्ट में प्रस्तुत हैं

हमारी २२ प्रतिज्ञा

आप सभी को धम्म क्रांति/वापसी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें, आज 14अक्टूबर को ही सन 1956 में डा बी.आर. अम्बेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों समेत सार्वजानिक जलसा करके बौद्ध धर्मं में लौटने की दीक्षा ली थी| इसी अवसर पर उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए जो 22 प्रतिज्ञाएँ तय की थी वो इस पोस्ट में प्रस्तुत हैं



डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं में लौटने के अवसर पर,14 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ निर्धारित कीं.ब्राह्मणवादी कर्मकांडों के भव्य धार्मिक इमारतें, मीडिया प्रचार,संगीत, खुसबू-धुआं, भीड़,ढोल नगाड़े में इतना आकर्षण है की हमारा भोला भला व्यक्ति भटक सकता है ये बात डॉ आंबेडकर अच्छी तरह जानते थे इसीलिए उन्होंने इन प्रतिज्ञाओं की जरूरत महसूस हुई होगी| पर ये भी सच है की इन प्रतिज्ञाओं की जड़ और इतिहास जाने बिना लोग इनको जानकर भी मान नहीं पाते, उन्हें ये प्रितिग्य अजीब तो लगती हैं पर कभी इनकी जड़ तक पहुचने की कोशिश नहीं करते, और हिन्दू दलित बने रहते हैं |उन्होंने इन शपथों को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके.ये 22 प्रतिज्ञाएँ हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं. प्रसिद्ध 22 प्रतिज्ञाएँ निम्न हैं:

1- मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
2- मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
3- मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
4- मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
5- मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
6- मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
7- मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
8- मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
9- मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
10- मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
11- मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
12- मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा.
13- मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
14- मैं चोरी नहीं करूँगा.
15- मैं झूठ नहीं बोलूँगा
16- मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
17- मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
18- मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
19- मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
20- मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
21- मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
22- मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा

डा बी.आर. अम्बेडकर

तृतीय सम्यक बौद्ध सम्मेलन एवं  *”गीतों भरी शाम बाबासाहेब के नाम ” आप सभी प्रबुद्ध साथियों का फिर से हार्दिक स्वागत है। इस वर्ष *यूथ फॉर बुद्धिस्ट इंडिया* 12 नवम्बर, 2017 (रविवार) को फिर लेकर आ रहा है उत्तर भारत का सबसे भव्य सम्मेलन, आग्रहकर्ता समस्त अम्बेडकरवादी समाज youth for Buddhist India

*क्या आपने अपना रेल*🚂  *या* ✈ *प्लेन का*  🔖 *टिकट रिजर्वेशन कराया क्या ?????????*
*अगर नहीं तो आज ही करवाइये ।*
      *12 नवंबर 12 बजे से*
और दिल ❤ थाम कर बैठिये इस वर्ष *यूथ फॉर बुद्धिस्ट इंडिया* 12 नवम्बर, 2017 (रविवार) को फिर लेकर आ रहा है उत्तर भारत का सबसे भव्य सम्मेलन
〰〰〰〰〰〰〰〰〰
🎊 *तृतीय सम्यक बौद्ध सम्मेलन* “🎊
एवं
*”गीतों भरी शाम बाबासाहेब के नाम “*
*******************************
आप सभी प्रबुद्ध साथियों का फिर से हार्दिक स्वागत है।
🔆आप जरूर आएं और साथ में परिवार👪, दोस्तों👬👭, रिश्तेदारो 👪👪को भी लाएं ।
🔆समाज निर्माण के लिए अपने साथ नए साथियों को जोडें और इस भव्य प्रोग्राम में साथ लेकर आए और बौद्धमय भारत के निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाए।
🔆सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार भव्य प्रस्तुतियों के साथ
🔆  👬भारतवर्ष के नए उदीयमान कलाकारों और ढेरों नई प्रतिभाओं की नवीनतम प्रस्तुतियों के साथ । *”तृतीय सम्यक बौद्ध सम्मेलन “* समाज के प्रतिष्ठित एवं बुद्धिजीवी युवाओं को समर्पित होगा ।
🔆समाज के प्रतिष्ठित एवं बुद्धिजीवीयों का धम्मगर्भित संबोधन।
🔆इस प्रोग्राम को सफल बनाने में आप सभी धम्म ध्वजवाहकों की ऐतिहासिक गरिमामयी उपस्थिति बहुत आवश्यक है।
🔆समाज के सभी प्रतिष्ठित संगठन अपनी विशेष उपस्थिति दर्ज करा कर समाज के संगठित होने का परिचय दे।
*******************************
1⃣2⃣नवंबर 2⃣0⃣1⃣7⃣ रविवार
*स्थान: तालकटोरा स्टेडियम,नई दिल्ली*
🚊 *निकट मैट्रो स्टेशन – आर के आश्रम*
तन मन धन के सहयोग की अपेक्षा सहित
(सभी दान देने वाले प्रबुद्ध साथियों को संस्था का हिसाब किताब जानने का पूरा अधिकार है )
〰〰〰〰〰〰〰〰〰
☕🍔🍚 *रात्रि भोजन की व्यवस्था है*
कृपया समय से पधारकर अपना और अपनो का स्थान सुनिश्चित करें।
जय भीम नमो बुद्धस्स्
Please share all missionary group
*आयोजक: यूथ फॉर बुद्धिस्ट इंडिया*
बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध(संरक्षक )
हरि भारती,अध्यक्ष
सुधीर भास्कर,सचिव
श्याम भंडारी,उपाध्यक्ष
सतप्रकाश गौतम,उपाध्यक्ष
मिलिंद कुलरत्न, उपाध्यक्ष
संदीप बौद्ध,कोषाध्यक्ष
विश्व बन्धु,सहसचिव
हेमन्त बौद्ध, सहसचिव
तरन्नुम बौद्ध, सहसचिव
डीएस गौतम,सहकोषाध्यक्ष
सुनील मेघवाल,सं0सचिव
डॉ.रामवीर सिंह,सं.सचिव
प्रणवीर व्यास,प्र0 सचिव
महेंद्र सिंह,प्रचार सचिव

कांचा इलैया की किताबें आम तौर पर लाखों में बिकती हैं. उनकी जिस किताब Post Hindu India पर विवाद फैलाने की कोशिश हो रही है, उसकी सारी कॉपी अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इस हफ्ते देखते ही देखते बिक गईं. स्टॉक खत्म हो गया…Dilip C Mandal

कौन डरता है कांचा से.

कांचा इलैया की इस किताब पर सारा विवाद इसकी हिंदी कॉपी आने के बाद हुआ. इसका पहला मतलब यह है कि नौ साल से इसकी इंग्लिश कॉपी बिक रही है. अमूमन देश भर की लाइब्रेरी में है. लेकिन मूर्खों को कोई दिक्कत नहीं हुई. अब किताब आम जनता तक पहुंच रही है, तो उनको मिर्ची लग गई है.

इस किताब में आखिर ऐसा क्या है?
क्यों लग रही है मिर्ची?

किताब दरअसल भारत के आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों के श्रम से उपजे ज्ञान का आख्यान है.

पहला चैप्टर बताता है कि किस तरह आदिवासियों ने ज्ञान का सृजन किया.

दूसरा चैप्टर चमार जाति की ज्ञान क्षेत्र में उपलब्धियों को बताता है.

तीसरा चैप्टर महार जाति के ज्ञान सृजन को रेखांकित करता है.

ऐसे ही एक चैप्टर यादव जाति के ज्ञान और अन्य चैप्टर नाई जाति की उपलब्धियों को दर्ज करता है.

कांचा खुद पशुपालक जाति से हैं और मानते हैं कि जो श्रमशील जातियां हैं. वही ज्ञान का सृजन कर सकती हैं. निठल्ले लोग ज्ञान की सृजन नहीं कर सकते.

यह विश्वस्तर पर स्थापित थ्योरी है और कांचा कोई नई बात नहीं कह रहे हैं.

इसलिए आप पाएंगे कि यूरोप में भी ज्यादातर आविष्कार वर्कशॉप और उससे जुड़ी प्रयोगशालाओं में हुए.

भारत में ज्ञान गुरुकुलों में रहा और इसलिए भारत आविष्कारों की दृष्टि से एक बंजर देश है. बिल्कुल सन्नाटा है यहां.

कांचा की किताब के आलोचक यह नहीं बता रहे हैं कि उन्हें मिर्ची किस बात से लग रही हैं. वे बस हाय हाय कर रहे हैं कि बहुत ज्यादा मिर्ची है.

यह सच भी है कि किताब में भरपूर मिर्च है. निठल्ले समुदायों की खाल खींचकर कांचा ने उस खाल को धूप में सुखा दिया है.

कांचा की किताबें आम तौर पर लाखों में बिकती हैं. उनकी जिस किताब Post Hindu India पर विवाद फैलाने की कोशिश हो रही है, उसकी सारी कॉपी अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इस हफ्ते देखते ही देखते बिक गईं. स्टॉक खत्म हो गया.

हिंदी अनुवाद ‘हिंदुत्व मुक्त भारत’ नाम से अब भी उपलब्ध है. 250 रुपए की है. खरीद लीजिए. पता नहीं, कल मिले या न मिले.

विचार को रोकने की कोशिश मत करो. कोई फायदा नहीं होगा. यह राख झाड़कर जिंदा हो जाने वाला विचार है.

Dilip C Mandal खरीदिए. हालांकि अभी उपलब्ध नहीं है. https://www.amazon.in/Post-Hindu-India…/dp/817829902X

हिंदी एडिशन खरीद सकते हैं. https://www.amazon.in/Hindutva-Mukt-Bharat…/dp/B06ZZMKWX3

मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया,ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व जान गया है।

मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया और इतना बड़ा बनाया की सवर्ण मीडिया भी इसे कवर करने पे मजबूर है। इससे पहले भी बहुत से ऐसे दलित मुद्दे हुए हैं जब सारा समाज एकजुट होकर प्रतिकार कर रहा है।ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व सीख गया है। संगठित और राजनैतिक रूप से जगी हुई कौम की आबादी कम हो फिर भी वो अपना वर्चस्व कायम कर सकते हैं, और यहाँ तो बहुजन मेजोरिटी में है, अकेली चमार जाती भारत के मुसलमानो से ज्यादा है।

इस सब में बहुजनो को ध्यान रखना होगा की ये सब राजनैतिक मुद्दे हो सकते हैं पर असल मुक्ति केवल शिक्षा और ज्ञान लेने से ही संभव है, अकेली मूछ कुछ न दे पाएगी पर हाँ अगर उस मूंछ के पीछे एक पढ़ा लिखा बुद्धिमान होगा जो संगठन को सबसे बड़ा मानता होगा तब मुक्ति संभव है

क्या है पूरा मुद्दा जानने के लिए इन लिंक को देखें

http://thewirehindi.com/20406/dalit-atrocities-within-a-week-in-gujrat/

http://www.bbc.com/hindi/india-41502688