डॉ अम्बेडकर ने जितना उपकार भारत के बहुजनों पर किया है उससे कहीं ज्यादा इस देश के बाकि लोगों के लिए किया है पर अफ़सोस लोग उन्हें सिर्फ सविधान निर्माता और दलितों की आजादी के मसीहा के रूप में जानते है।इस लेख को पढ़िए और जानिये उनके द्वारा किये गए वो अविस्मरणीय कार्य जो सबके लिए थे

डॉ भीमराव अम्बेडकर के बारे में लोग उन्हें सिर्फ सविधान निर्माता और दलितों की आजादी के मसीहा के रूप में जानते है। उनके द्वारा किये गए वो अविस्मरणीय कार्य जो दलितों के लिए नहीं अपितु सबके लिए थे:-
1. सरदार पटेल के तीव्र विरोध के बावजूद उन्होंने महिलाओ सहित सभी को वोट का सवैधानिक अधिकार दिलाया।
2. महिलाओ को पुरुषो के समान वेतन दिलवाने का श्रेय उन्ही को जाता है।
3. महिलाओ के लिए प्रसूति अवकाश की व्यवस्था की।
4. 12 घण्टे काम करने की अवधी को घटाकर 8 घण्टे किए, इसी कड़ी में हफ्ते में 1 दिन के जरूरी अवकाश की व्यवस्था की।
5. व्यापर यूनियन को सरकारी मान्यता दिलवाई ताकि वो कानूनन अपनी मांग उठा सके।
6. भारत में एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज की व्यवस्था की ताकि सरकार के किसी विभाग के बंद होने पर कर्मचारियों को नौकरियों से न निकाला जाए।
7. कामगार वर्ग के हितो की रक्षा के लिए बिमा स्कीम लागू की।
8. हर 5 साल में वित्त आयोग की व्यवस्था की।
9. 1925 में अपनी पी०एच०डी० की थीसिस “प्रोब्लम ऑफ़ रुप्पी- ईट्स प्रोब्लम एंड ईट्स सोल्युशन” को हिल्टन यंग कमीशन से साझा किया और भारत में रिज़र्व बैंक की स्थापना करवाई।
10. एक न्यूनतम वेतनमान की व्यवस्था की।
11. उद्योग और कृषि के उत्पादन को बढ़ाने के लिए सस्ती व प्रचुर मात्रा में बिजली की जरूरत की सिफारिश की और बिजली विभाग, निगम और ग्रीड की स्थापना सुनश्चित की।
12. भारतीय सांख्यिकीय एक्ट बनाया जो देश में महंगाई उन्मूलन, मजदूरी, आय, लोन, बेगारी आदि सम्बंधित योजनाओ के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े मुहैया करवाता है।
13. मजदूरो के हितों की रक्षा के लिए मजदूर विकास कोष की स्थापना।
14. देश के विकास में तकनीक और कुशल कामगार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए टेक्निकल ट्रेनिंग और स्किल्ड वर्कर के लिए स्कीम बनाई।
15. बिजली के साथ सिंचाई की उचित व्यवस्था हो, इसकी देखरेख के लिए उन्होंने दो तकनीकी संगठन की व्यवस्था की, जो आज सेंट्रल वाटर कमीशन एवम् सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथोरिटी के नाम से जाने जाते है।
16. बिजली एवं सिंचाई के लिए प्रोजेक्ट बनाए जिनमे दामोदर वेल्ली, भाखड़ा नागल, सोन रीवर वेल्ली, हीराकुण्ड प्रोजेक्ट प्रमुख है।
17. हर 6 महीने में महंगाई भत्ते की व्यवस्था उन्ही की देन है।
18. कर्मचारियों के लिए प्रोवीडेंट फंड की स्थापना की।
19. कानूनन हड़ताल करने का हक़ दिलवाया ताकि अधिकारो की रक्षा के लिए विरोध प्रकट किए जा सके।
20. कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन की कानूनन व्यवस्था की।
फादर ऑफ़ मॉडर्न इंडिया बाबा साहब भीमराव जी अम्बेडकर
जय भीम जय भारत

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भारतीय मीडिया से अनुरोध है कि इन मुद्दों पे चर्चा करवाये,पर क्या ये ब्राह्मणवादी होने देंगे ?

भारतीय मीडिया से अनुरोध है कि इन मुद्दों पे चर्चा करवाये, ।
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1. भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा भूखे लोग रहते हैं।कुपोषण में ये देश नंबर वन है ।
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2. टीबी समेत कई बीमारियों में नंबर वन है भारत।मलेरिया से सबसे ज़्यादा मरने वालों की सूची में तीसरे नंबर पर है। डाइबिटीज़ में दूसरे नंबर पर।
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3. प्रति हज़ार आबादी पर एक डॉक्टर के वैश्विक पैमाने तक पहुंचने के लिए भारत को पांच लाख डॉक्टरों की भर्ती करनी होगी। इस मामले में भारत पाकिस्तान से भी बदतर है। (पाकिस्तान से जान-बूझकर तुलना की गई है)
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4. भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा ऐसे लोग रहते हैं, जिनको पीने के लिए साफ़ पानी नहीं मिलता।
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5. दुनिया में निरक्षरों की सबसे ज़्यादा संख्या भारत में है।
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6. मानव विकास सूचकांक में भारत 131वें नंबर पर है। जिन्हें आप इन्नी-मिन्नी देश मानते हैं वो आपसे बहुत आगे हैं।
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7. एक खुशहाली का भी इंडेक्स जारी होता है। भारत इसमें 118वें नंबर पर है। सोमालिया वगैरह से भी नीचे। हमेशा बम-गोलों से घिरे फ़लस्तीन से भी नीचे। भारत इतना दुखी क्यों है?
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8. क्योंकि भारत में 2015 में 798 सांप्रदायिक दंगे हुए। किसानों के बीच असंतोष बहुत बढ़ा और Agrarian riot एक साल में 327% बढ़ गया।
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9. भारत में प्रति हज़ार में 42 बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं।
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10. मीडिया की चिंताओं में ये सब नहीं देख पाते क्योंकि दुनिया में सबसे ज़्यादा अविश्वसनीय मीडिया की सूची में भारत दूसरे स्थान पर गिना गया।
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11. राजनीतिक दलों के एजेंडे में आप ये सब नहीं देख पाते क्योंकि आप गाय-गोबर को मुद्दा बना बैठे हैं।
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(सारे डेटा नामचीन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के हैं या फिर ख़ुद सरकार के। ख़ुद चेक कर लीजिए।)

ब्राह्मणवाद और आंबेडकरवाद भारतीय चिंतन परंपरा के दो अलग ध्रुव हैं। इनमें से एक घटेगा, तो दूसरा बढ़ेगा। एक मिटेगा, तो दूसरा बचेगा। आंबेडकर की नजर में आरएसएस जिन लोगों का संगठन है, वे बीमार हैं और उनकी बीमारी बाकी लोगों के लिए खतरा है।…DILIP C MANDAL

ब्राह्मणवाद और आंबेडकरवाद भारतीय चिंतन परंपरा के दो अलग ध्रुव हैं। इनमें से एक घटेगा, तो दूसरा बढ़ेगा। एक मिटेगा, तो दूसरा बचेगा। आंबेडकर की नजर में आरएसएस जिन लोगों का संगठन है, वे बीमार हैं और उनकी बीमारी बाकी लोगों के लिए खतरा है।
राष्ट्र निर्माता के रूप में बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की विधिवत स्थापना का कार्य 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाने की राजपत्र में की गई घोषणा के साथ संपन्न हुआ। संविधान दिवस संबंधी भारत सरकार के गजट में सिर्फ एक ही शख्सियत का नाम है और वह नाम स्वाभाविक रूप से बाबा साहेब का है। बाबा साहेब को अपनाने की बीजेपी और संघ की कोशिशों का भी यह चरम रूप है। लेकिन क्या इस तरह के अगरबत्तीवाद के जरिए बाबा साहेब को कोई संगठन आत्मसात कर सकता है? मुझे संदेह है।
इस संदेह का कारण मुझे आंबेडकरी विचारों और उनके साहित्य में नजर आता है।
इस बात की पुष्टि के लिए मैं बाबा साहेब की सिर्फ एक किताब एनिहिलेशन ऑफ कास्ट का संदर्भ ले रहा हूं। यादरहे कि यह सिर्फ एक किताब है। पूरा आंबेडकरी साहित्य ऐसे लेखन से भरा पड़ा है, जो संघ को लगातार असहज बनाएगा। एनिहिलेशन ऑफ कास्ट पहली बार 1936 में छपी थी। दरअसल यह एक भाषण है, जिसे बाबा साहेब ने लाहौर के जात-पात तोड़क मंडल के 1936 के सालाना अधिवेशन के लिए तैयार किया था। लेकिन इस लिखे भाषण को पढ़कर जात-पात तोड़क मंडल ने पहले तो कई आपत्तियां जताईं और फिर कार्यक्रम ही रद्द कर दिया। इस भाषण को ही बाद में एनिहिलेशन ऑफ कास्ट नाम से छापा गया।
दूसरे संस्करण की भूमिका में बाबा साहेब इस किताब का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए लिखते हैं कि –“अगर मैं हिंदुओं का यह समझा पाया कि वे भारत के बीमार लोग हैं और उनकी बीमारी दूसरे भारतीय लोगों के स्वास्थ्य और उनकी खुशी के लिए खतरा है, तो मैं अपने काम से संतुष्ट हो पाऊंगा।”
जाहिर है कि बाबा साहेब के लिए यह किताब एक डॉक्टर और मरीज यानी हिंदुओं के बीच का संवाद है। इसमें ध्यान रखने की बात है कि जो मरीज है, यानी जो भारत का हिंदू है, उसे या तोमालूम ही नहीं है कि वह बीमार है, या फिर वह स्वस्थ होने का नाटक कर रहा है और किसी भी हालत में वह यह मानने को तैयार नहीं है कि वह बीमार है। बाबा साहेब की चिंता यह है कि वह बीमार आदमी दूसरे लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। संघ उसी बीमार आदमी का प्रतिनिधि संगठन होने का दावा करता है। वैसे यह बीमार आदमी कहीं भी हो सकता है।कांग्रेस से लेकर समाजवादी और वामपंथी कम्युनिस्ट तक उसके कई रूप हो सकते हैं। लेकिन वह जहां भी है, बीमार है और बाकियों के लिए दुख का कारण है।
बीमार न होने का बहाना करता हुआ हिंदू कहता है कि वह जात-पात नहीं मानता। लेकिन बाबा साहेब की नजर में ऐसा कहना नाकाफी है। वे इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं कि भारत में कभी क्रांति क्यों नहीं हुई। वे बताते हैं कि कोई भी आदमी आर्थिक बराबरी लाने की क्रांति में तब तक शामिल नहीं होगा, जब तक उसे यकीन न हो जाए कि क्रांति के बाद उसके साथ बराबरी का व्यवहार और जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं होगा। इस भेदभाव के रहते भारत के गरीब कभी एकजुट नहीं हो सकते।
वे कहते हैं कि- आप चाहें जो भी करें, जिस भी दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश करें, जातिवाद का दैत्य आपका रास्ता रोके खड़ा मिलेगा। इस राक्षस को मारे बिना आप राजनीतिक या आर्थिक सुधार नहीं करते। डॉक्टर आंबेडकर की यह पहली दवा है। क्या संघ इस कड़वी दवा को पीने के लिए तैयार है? जातिवाद के खात्मे की दिशा में संघ ने पहला कदम नहीं बढ़ाया है। क्या वह आगे ऐसा करेगा? मुझे संदेह है।
डॉ. आंबेडकर के मुताबिक जाति ने भारतीयों की आर्थिक क्षमता को कुंद किया है। इससे नस्ल बेहतर होने की बात भी फर्जी सिद्ध हुई है क्योंकि नस्लीय गुणों के लिहाज से भारतीय लोग सी 3 श्रेणी के हैं और 95 प्रतिशत भारतीय लोगों की शारीरिक योग्यता ऐसी नहीं है कि वे ब्रिटिश फौज में भर्ती हो सकें। बाबा साहेब आगे लिखते हैं कि हिंदू समाज जैसी कोई चीज है ही नहीं। हिंदू मतलब दरअसल जातियों का जमावड़ा है। इसके बाद वे एक बेहद गंभीर बात बोलते हैं कि एक जाति को दूसरी जाति से जुड़ाव का संबंध तभी महसूस होता है, जब हिंदू-मुसलमान दंगे हों। संघ के मुस्लिम विरोध के सूत्र बाबा साहेब की इस बात में छिपे हैं। वह जाति को बनाए रखते हुए हिंदुओं को एकजुट देखना चाहता है, इसलिए हमेशा मुसलमानों का विरोध करता रहता है। दंगों को छोड़कर बाकी समय में हिंदू अपनी जाति के साथ खाता है और जाति में ही शादी करता है।
वे बताते हैं कि कोई भी आदमी आर्थिक बराबरी लाने की क्रांति में तब तक शामिल नहीं होगा, जब तक उसे यकीन न हो जाए कि क्रांति के बाद उसके साथ बराबरी का व्यवहार और जाति के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं होगा।
डॉ. आंबेडकर बीमार हिंदू की नब्ज पर हाथ रखकर कहते हैं कि आदर्श हिंदू उस चूहे की तरह है,जो अपने बिल में ही रहता है और दूसरों के संपर्क में आने से इनकार करता हैं। इस किताब में बाबा साहेब साफ शब्दों में कहते हैं कि कि हिंदू एक राष्ट्र नहीं हो सकते। क्या संघ के लिए ऐसे आंबेडकर को आत्मसातकर पाना मुमकिन होगा। मुझे संदेह है।
बाबा साहब यह भी कहते हैं कि ब्राह्मण अपने अंदर भी जातिवाद पर सख्ती से अमल करते हैं। वे महाराष्ट्र के गोलक ब्राह्मण, देवरूखा ब्राह्मण, चितपावन ब्राह्मण और भी तरह के ब्राह्मणों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि उनमें असामाजिक भावना उतनी ही है,जितनी कि ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों के बीच है। वे मरीज की पड़ताल करके बताते हैं कि जातियां एक दूसरे से संघर्षरत समूह हैं, जो सिर्फ अपने लिए और अपने स्वार्थ के लिए जीती हैं। वे यह भी बताते है कि जातियों ने अपने पुराने झगड़े अब तक नहीं भूलाए हैं। गैर ब्राह्मण इस बात को याद रखता है कि किस तरह ब्राह्मणों के पूर्वजों ने शिवाजी का अपमान किया था। आज का कायस्थ यह नहीं भूलता कि आज के ब्राह्मणों के पूर्वजों ने उनके पूर्वजों को किस तरह नीचा दिखाया था।
संघ के संगठन शुद्धि का अभियान चला रहे हैं। बाबा साहेब का मानना था कि हिंदुओं के लिए यह करना संभव नहीं है। जाति और शुद्धिकरण अभियान साथ साथ नहीं चल सकते। इसका कारण वे यह मानते हैं कि शुद्धि के बाद बाहर से आए व्यक्ति को किस जाति में रखा जाएगा, इसका जवाब किसी हिंदू के पास नहीं है। जाति में होने के लिए जाति में पैदा होना जरूरी है। यह क्लब नहीं है कि कोई भी मेंबर बन जाए। वे स्पष्ट कहते हैं कि धर्म परिवर्तन करके हिंदू बनना संभव नहीं है क्योंकि ऐसे लोगों के लिए हिंदू धर्म में कोई जगह नहीं है। क्या भारत का बीमार यानी हिंदू और कथित रूप से उनका संगठन आरएसएस, बाबा साहब की बात मानकर शुद्धिकरण की बेतुका कोशिशों को रोक देगा? मुझे संदेह है।
हिंदू के नाम पर राजीनीति करने वाले संगठन यह कहते नहीं थकते कि हिंदू उदार होते हैं। बाबा साहब इस पाखंड को नहीं मानते। उनकी राय में,मौका मिलने पर वे बेहद अनुदार हो सकते हैं और अगर वे किसी खास मौके पर उदार नजर आते हैं, तो इसकी वजह यह होती है कि या तो वे इतने कमजोर होते हैं कि विरोध नहीं कर सकते या फिर वे विरोध करने की जरूरत महसूस नहीं करते।
बाबा साहेब इस किताब में गैर हिंदुओं के जातिवाद की भी चर्चा करते हैं, लेकिन इसे वे हिंदुओं के जातिवाद से अलग मानते हैं। वे लिखते हैं कि गैर हिंदुओं के जातिवाद को धार्मिक मान्यता नहीं है। लेकिन हिंदुओं के जातिवाद को धार्मिक मान्यता है। गैर हिंदुओं का जातिवाद एक सामाजिक व्यवहार है, कोई पवित्र विचार नहीं है। उन्होंने जाति को पैदा नहीं किया। अगर हिंदू अपनी जाति को छोड़ने की कोशिश करेगा, तो उनका धर्म उसे ऐसा करने नहीं देगा। वे हिंदुओं से कहते हैं कि इस भ्रम में न रहें कि दूसरे धर्मों में भी जातिवाद है। वे हिंदू श्रेष्ठता के राधाकृष्णन के तर्क को खारिज करते हुए कहते हैं कि हिंदू धर्म बेशक टिका रहा, लेकिन उसका जीवन लगातार हारने की कहानी है। वे कहते हैं कि अगर आप जाति के बुनियाद पर कुछ भी खड़ा करने की कोशिश करेंगे, तो उसमें दरार आना तय है।
अपने न दिए गए भाषण के आखिरी हिस्से में बाबा साहेब बताते हैं कि हिंदू व्यक्ति जाति को इसलिए नहीं मानता कि वह अमानवीय है या उसका दिमाग खराब है। वह जाति को इसलिए मानता है कि वह बेहद धार्मिक है। जाति को मान कर वे गलती नहीं कर रहे हैं। उनके धर्म ने उन्हें यही सिखाया है। उनका धर्म गलत है, जहां से जाति का विचार आता है। इसलिए अगर कोई हिंदू जाति से लड़ना चाहता है तो उसे अपने धार्मिक ग्रंथों से टकराना होगा। बाबा साहब भारत के मरीज को उपचार बताते हैं कि शास्त्रों और वेदों की सत्ता को नष्ट करो। यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि शास्त्रों का मतलब वह नहीं है, जो लोग समझ रहे हैं। दरअसल शास्त्रों का वही मतलब है जो लोग समझ रहे हैं और जिस पर वे अमल कर रहे हैं। क्या संघ हिंदू धर्म शास्त्रों और वेदों को नष्ट करने के लिए तैयार है? मुझे शक है।
इस भाषण में वे पहली बार बताते हैं कि वे हिंदू बने रहना नहीं चाहते। संघ को बाबा साहेब को अपनाने का पाखंड करते हुए, यह सब ध्यान में रखना होगा। क्या राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ बाबा साहेब को अपना सकता है? बेशक। लेकिन ऐसा करने के बाद फिर वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं रह जाएगा।
 
Dilip C Mandal
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
संपादन- भवेंद्र प्रकाश

NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार जी ने दिल्ली पार्लियामेंट पर लगने वाला 14 अप्रैल डॉ अम्बेडकर जयंती का मेला अपने 48 मिनट के प्राइम टाइम में कवर किया था , इस वीडियो के देख कर आप समझ सकते हैं कितना विशाल और बढ़िया मेला लगता है, जरा देखो तो वीडियो दिल खुश हो जाएगा

ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ गीत-संगीत में उलझा दिया जाए। गीत संगीत मान सम्मान समाज की जाग्रति के लिए जरूरी है पर ये शुरुआत है यहाँ रुकना नहीं है हमारा भला पूजने गाने बजाने में नहीं होगा बल्कि उनकी विचारधारा जानने मानने और उसपर चलने से होगा …भुवनेश

विश्व के महानतम मानवतावादी महाज्ञानी महापुरुष बोधिसत्व बाबा साहब डॉ आंबेडकर महान की १२६वी जयंती पर हार्दिक शुभकामनायें

ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ गीत-संगीत में उलझा दिया जाए। गीत संगीत मान सम्मान समाज की जाग्रति के लिए जरूरी है पर ये शुरुआत मात्र है यहाँ रुकना नहीं है हमारा भला पूजने गाने बजाने में नहीं होगा बल्कि उनकी विचारधारा जानने मानने और उसपर चलने से होगा …भुवनेश

जब *अंबेडकर जयंती* आती है, तो पूरा बहुजन समाज *भीममय* हो जाता है और पार्कों में, मैदानों में “जय भीम” के नारे गूंजने लगते हैं – और फिर यही लोग पूरे *364* दिन जाकर सो जाते हैं, जब चुनाव आता है तो फिर जाग जाते हैं। पार्कों और मैदानों में भीड़भाड़ इकट्ठी हो जाती है, जैसे रामलीला में होती है। अगर आप सिर्फ घूमने-फिरने आए हैं, तो फिर ऐसी भीड़ का कोई मतलब नहीं।
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ऐसे सिर्फ टाइम पास हो सकता है, खुद के दिल को तसल्ली दी जा सकती है – मगर कुछ बदलाव नहीं हो सकता, कोई क्रांति नहीं हो सकती।
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मेरा निवेदन है कि आप लोग अंबेडकर की जय करने, अंबेडकर की मूर्ति के सामने अगरबत्ती जलाने के बजाए – अंबेडकर के विचार और उनके उद्देश्य के बारे में पढे। तभी मिशन को कुछ मदद मिलेगी, वरना ब्राह्मणवादियों ने तो अंबेडकर को बहुजन समाज से छीनने की मुहिम शुरू कर दी है।
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यहाँ हम अंबेडकर जयंती की तैयारी कर रहे हैं और वहाँ भाजपा UP मार ले गयी।
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ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ में उलझा दिया जाए। गीत-संगीत के कार्यक्रम भी शुरू हो चुके हैं।
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अम्बेडकर के सामने अगरबत्ती जलाओ, माल्यार्पण करो, पूजा शुरू कर दो, भीम चालीसा तो लिख ही दी गई है। कभी जाकर बौद्ध विहार की हालत देखिये। पूरे साल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर बौद्ध विहार में सफाई अभियान चलता है।

सही बात कही है किसी ने, अगर किसी महापुरुष के विचारों की हत्या करनी हो, कहीं उंसके विचार लोगों तक न पहुँच पाये और उसका मिशन आगे न बढ़ पाये – तो उस महापुरुष की पूजा करना शुरू कर दो, उसके मंदिर बनाओ, उसकी मूर्तियाँ बनाओ।
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महापुरुष के शरीर की हत्या उसकी असली हत्या नहीं है – असली हत्या तो है उसके विचारों को फैलने से, लोगों तक पहुँचने से रोक देना।
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*जय भीम – नीला सलाम*
|| भवतु सब्बमंगलं ||

समयबुद्धा मिशन की टीम की तरफ से विश्व के महानतम मानवतावादी महाज्ञानी महापुरुष बोधिसत्व बाबा साहब डॉ आंबेडकर महान की १२६वी जयंती पर हार्दिक शुभकामनायें | बाबासाहब डाॅ. अंबेडकर यह विश्व के एकमात्र ऐसे महान पुरुष हैं जिन्होंने 35 से अधिक विषयों का गंभीर अध्ययन और शोधकार्य किया

*विश्वरत्न बाबासाहब डाॅ. अंबेडकर यह विश्व के एकमात्र ऐसे महान पुरुष हैं जिन्होंने 35 से अधिक विषयों का गंभीर अध्ययन और शोधकार्य किया।*
*1) अर्थशास्त्र (Economics)*
*2) काॅमर्स (Commerce)*
*3) समाजशास्त्र (Sociology)*
*4) इतिहास (History)*
*5) भारत विद्या (Indology)*
*6) आचार निती (Ethics)*
*7) नृतत्वशास्त्र (Anthropology)*
*8) मिलिट्री साइंस (Military Science)*
*9) राजनितीशास्त्र (Political Science)*
*10) नैतिक दर्शन (Moral Philosophy)*
*11) पुरातत्व (Archeology)*
*12) कानून (Law)*
*13) संविधान (Constitution)*
*14) न्याय (Justice)*
*15) धर्म (Religion)*
*16) कृषि (Agriculture)*
*17) जलमार्ग (Navigation)*
*18) सिंचाई (Irrigation)*
*19) मानव अधिकार (Human Right)*
*20) पत्रकारिता (Journalism)*
*21) शासन (Administration)*
*22) संघठन (Organisation)*
*23) श्रमिक समस्याएँ (Labour Problems)*
*24) औद्योगिक समस्याएँ (Industrial Problems)*
*25) बांध अभियांत्रिकी (Dam Engineering)*
*26) भाषा विज्ञान (Science of Language)*
*27) पिछड़ी, अनुसूचित जाती व जनजातीय समस्याएँ (Backwards, Sheduled Caste and Sheduled Teibes Problems)*
*28) शिक्षा पद्धति (Education System)*
*29) जनगणना (Census)*
*30) भूमिसीमा (Land Holdings)*
*31) परिवार नियोजन (Family Planing)*
*32) ज्यूरिसप्रुडेंस (Jurisprudence)*
*33) अध्यात्मविद्या (Theology)*
*34) व्यवसायी कानून (Mercantine Law)*
*35) नृवंश विद्या (Ethrology)*
*36) चरित्रशास्त्र (Ethology)*
*37) अमेरिकी रेलों का अर्थशास्त्र (Economics of American Railways)*
*38) अमेरिकी इतिहास (American History)*
*39) भूगोल (Geography)…*
TARA CHAND: *बधाई. हो उस. देश को, उस देश के राष्ट्पति को जो सात समन्दर पार रहते हुए भी, उस देश के न होते हुए ईमानदारी  से सर्वे कराया । जो कार्य भारतीय सरकार को करना चाहिए था, पर नही किया ।*
वह कार्य *अमेरिका* ने कर दिखाया ।
*🗽अमेरिका🗽*
के विश्व प्रसिद्ध
*🏤कोलंबिया यूनिवर्सिटी🏤*
*मेँ मुख्य दरवाजे के अंदर कि ओर उन का फोटो लगाया हुआ है।*
👉 *point note down*
वहाँ ऐसा लिखा हैं,
*”हमे गर्व है कि, ऐसा छात्र हमारी यूनिवर्सिटी से पढकर गया है .. और उसने भारत का संविधान लिखकर उस देश पर बड़ा उपकार किया है !”*
👉 *कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 3⃣0⃣0⃣ साल पूरे होने के उपलक्ष्य मेँ, पूरे 3⃣0⃣0⃣ सालो मेँ इस यूनिवर्सिटी से सबसे होशियार छात्र कौन रहा? इसका सर्वे किया गया! उस सर्वे मे 6 नाम सामने आए , उसमे नं. 1⃣ पर नाम था*
👉 *के सम्मान मेँ कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मुख्य दरवाजे पर, उनकी कांस्य प्रतिमा लगायी गयी, उस मूर्ती का अनावरण अमेरिकन राष्ट्रपती बराक ओबामा के करकमलो   से किया गया!*
*उस मूर्ती के नीचे लिखा गया है*
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     *”सिम्बॉल ऑफ नॉलेज”*
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        यानि ज्ञान का प्रतीक
      *”सिम्बॉल ऑफ नॉलेज”*
*— डॉ. भीमराव अंबेडकर जी —*
को सत सत नमन!!
इस मैसेज को इतना फैला दो ताकी हर भारतीय को पता चलें
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*”Dr. B. R. Ambedkar”*
 *करें कि देश मे हर व्यक्ति बाबा साहब के बारे मे जान सकें….*
प्रश्न 1- डॉ अम्बेडकर का जन्म कब हुआ था
उत्तर- 14 अप्रैल 1891
प्रश्न 2- डॉ अम्बेडकर का जन्म कहां हुआ था
उत्तर- मध्य प्रदेश  इंदौर के  महू छावनी  में हुआ था
प्रश्न 3- डॉ अम्बेडकर के पिता का नाम क्या था
उत्तर- रामजी मोलाजी सकपाल था
प्रश्न 4- डॉ अम्बेडकर की माता का नाम क्या था
उत्तर- भीमा बाई
प्रश्न5- डॉ अम्बेडकर के पिता का क्या करते थे
उत्तर- सेना मैं सूबेदार थे
प्रश्न 6- डॉ अम्बेडकर की माता का देहांत कब  हुआ था
उत्तर-1896
प्रश्न 7- डॉ अम्बेडकर की माता के  देहांत के वक्त उन कि आयु क्या थी
उत्तर- 5  वर्ष
प्रश्न8- डॉ अम्बेडकर किस जाती से थे
उत्तर- महार जाती
प्रश्न 9- महार जाती को कैसा माना जाता था
उत्तर- अछूत (निम्न वर्ग )
प्रश्न10- डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं कहां बिठाया जाता था
 उत्तर- क्लास के बहार
प्रश्न 11- डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं पानी कैसे पिलाया जाता था
 उत्तर- ऊँची जाति का व्यक्ति ऊँचाई से पानी उनके हाथों परडालता था
प्रश्न12- बाबा साहब का विवाह कब और किस से हुआ
 उत्तर- 1906 में रमाबाई से
प्रश्न 13- बाबा साहब ने मैट्रिक परीक्षा कब पास की
उत्तर- 1907 में
प्रश्न 14- डॉ अम्बेडकर के बंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से क्या हुवा
उत्तर- भारत में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले पहले अस्पृश्य बन गये
प्रश्न 15- गायकवाड़ के महाराज ने डॉ अंबेडकर को पढ़ने कहां भेजा
 उत्तर- कोलंबिया विश्व विद्यालय न्यूयॉर्क अमेरिका भेजा
प्रश्न 16- बैरिस्टर के अध्ययन के लिए बाबा साहब कहां और कब गए
 उत्तर- 11 नवंबर 1917 लंदन में
प्रश्न 17- बड़ौदा के महाराजा ने डॉ आंबेडकर को अपने यहां किस पद पर रखा
उत्तर- सैन्य सचिव पद पर
प्रश्न 18- बाबा साहब ने सैन्य सचिव पद को क्यों छोड़ा
उत्तर- छुआ छात के कारण
प्रश्न 19- बड़ौदा रियासत में बाबा साहब कहां ठहरे थे
उत्तर- पारसी सराय में
प्रश्न 20- डॉ अंबेडकर ने क्या संकल्प लिया
उत्तर- जब तक इस अछूत समाज की कठिनाइयों को समाप्त ने कर दूं तब तक चैन से नहीं बैठूंगा
प्रश्न 21- डॉ अंबेडकर ने कौनसी पत्रिका निकाली
 उत्तर- मूक नायक
प्रश्न 22- बाबासाहेब वकील कब बने
 उत्तर- 1923 में
प्रश्न 23- डॉ अंबेडकर ने वकालत कहां शुरु की
उत्तर- मुंबई के हाई कोर्ट से
प्रश्न 24- अंबेडकर ने अपने अनुयायियों को क्या संदेश दिया
उत्तर- शिक्षित बनो संघर्ष करो संगठित रहो
प्रश्न 25- बाबा साहब ने बहिष्कृत भारत का प्रकाशन कब आरंभकिया
उत्तर- 3 अप्रैल 1927
प्रश्न 26- बाबासाहेब लॉ कॉलेज के प्रोफ़ेसर कब बने
उत्तर- 1928 में
प्रश्न 27- बाबासाहेब मुंबई में साइमन कमीशन के सदस्य कब बने
उत्तर- 1928 में
प्रश्न 28-  बाबा साहेब द्वारा विधानसभा में माहर वेतन बिल पेश कब हुआ
उत्तर- 14 मार्च 1929
प्रश्न 29- काला राम मंदिर मैं अछुतो के प्रवेश के लिए आंदोलन कब किया
 उत्तर- 03 मार्च 1930
प्रश्न 30- पूना पैक्ट किस किस के बीच हुआ
उत्तर- डॉ आंबेडकर और महात्मा गांधी
प्रश्न 31- महात्मा गांधी के जीवन की भीख मांगने बाबा साहब के पास कौनआया
उत्तर- कस्तूरबा गांधी
प्रश्न 32- डॉ  अम्बेडकर को गोल मेज कॉन्फ्रंस का निमंत्रण कब मिला
उत्तर- 6 अगस्त 1930
प्रश्न 33- डॉ अम्बेडकर ने पूना समझौता कब किया
उत्तर- 1932
प्रश्न 34- अम्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रधानचार्य नियुक्त कियागया
उत्तर- 13 अक्टूबर 1935 को,
प्रश्न 35- मुझे पढे लिखे लोगोँ ने धोखा दिया ये शब्द बाबा साहेब ने कहां कहे थे       उत्तर- आगरा मे 18 मार्च 1956
प्रश्न 36- बाबा साहेब के पि. ए. कोन थे
उत्तर- नानकचंद रत्तु
प्रश्न 37- बाबा साहेब ने अपने अनुयाइयों से क्या कहा था
उत्तर- इस करवा को मै बड़ी मुस्किल से यहाँ तक लाया हु !
इसे आगे नहीं ले जा सकते तो पीछे मत जाने देना
प्रश्न 38- देश के  पहले कानून मंत्री कौन थे
 उत्तर- डॉ अम्बेडकर
प्रश्न 39- स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना किस ने की
उत्तर- डॉ अम्बेडकर
प्रश्न 40- डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान कितने समय में लिखा
 उत्तर- 2 साल 11 महीने 18 दिन
प्रश्न 41- डा बी.आर. अम्बेडकर ने  बौद्ध धर्मं कब और कहा अपनाया
उत्तर- 14 अक्टूबर 1956,  दीक्षा भूमि,   नागपुर
प्रश्न 42- डा बी.आर. अम्बेडकर ने  बौद्ध धर्मं कितने लोगों के साथ अपनाया
 उत्तर- लगभग 10 लाख
प्रश्न 43- राजा बनने के लिए रानी के पेट की जरूरत नहीं,
तुम्हारे वोट की जरूरत है ये शब्द किस के है
 उत्तर- डा बी.आर. अम्बेडकर
प्रश्न 44- डा बी.आर. अम्बेडकर के दुवारा लिखित महान पुस्तक का क्या नाम है
उत्तर- दी बुद्ध एंड हिज धम्मा
प्रश्न 45- बाबा साहेब को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया
उत्तर-भारत रत्न