सम्राट अशोक और ईरान में बौद्ध धर्म



**सम्राट अशोक और ईरान में बौद्ध धर्म **

शाक्यमुनि बुद्ध के जीवन के दौरान लगभग 5/6th BCE , ईरान में बौद्ध धर्म का पहला प्रवेश करने के ऐतिहासिक उदाहरण मिलते है !! ईरान के आधुनिक विद्धवानो द्वारा ईरान के लोगों की सांस्कृतिक रितिरिवाजोकी अनदेखी की गई है, “ईरान में बौद्ध धर्म” इस विषय की जांच करते समय संक्षिप्त पृष्ठभूमि का परीक्षण किताबी कागज से साथ शुरू होता है। बुद्ध की शिक्षा फारसी साम्राज्य में प्रवेश करते समय वहा की सामाजिक परिस्थितियों के तहत इन क्षेत्रके लोगों में परिवर्तन हुवा था, और आज के उनके धार्मिक रितिरिवाज और पोषाख में प्राचीन ईरानी लोगो की बौद्ध संस्कृती का गहरा प्रभाव दिखाई देता है………….

ऐतिहासिक शाक्यमुनी बुद्ध की शिक्षा ईरान में प्रचार का पहला उदाहरण लगभग 5/6th शताब्दी BCE. में ‘किंवदंती’ बैक्ट्रिया (आधुनिक अफगानिस्तान) के कबीलों द्वारा बुद्ध के जीवन के दौरान किया गया है। बुद्ध के बुद्धत्व प्राप्ति के आठवें सप्ताह में बर्मा के दो व्यापारी भाई जो बुद्ध के शिष्य बन गये थे और बल्ख को लौट (बैक्ट्रिया) कर बौद्ध विहार का निर्माण करने के लिए अपना धन समर्पित (दान) किया था, इस कहानी की ऐतिहासिक वैधता के लिए और ठोस सबूतों के लिए ‘बल्ख रिकॉर्ड’ की गवाही आज भी वहा के एक मसज्जिद को ‘बुखारा’ कहते है। यह एक प्रमुख बौद्ध क्षेत्र में दिखाई देता है, ‘बुखारा’ का अर्थ होता है ‘विहारा’ !! 7 वीं शताब्दी में ईरान लगभग 90 % बुद्ध के शिक्षा के प्रभाव के परिणाम दिखाई देते है और इसी दौरान 7 वीं शताब्दी से अरब मुस्लिम आक्रमण की सुरुवात से बौद्ध नैतिक सांस्कृतिक शिक्षा के सभ्यता के पतन को सुरवात होते नजर आती है…………………

Qandahar, अफगानिस्तान में मिले बौद्ध शिक्षा के नैतिक मानकों promulgating शिला लेख खंभे और 1962 में ग्रीक में मिले शिलालेख को की पूरी तरह Ashokas शिलालेखों के हिस्से के रूप में पहचान हो चुकी है । पहली शताब्दी के दौरान बल्ख रिकॉर्ड के बौद्ध विहार और ग्रीक विद्वान अलेक्जेंडर बहुपठित ईरान के साथ बौद्ध धर्म के रिश्ते का उल्लेख विशेष रूप से संदर्भित करता है । और सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म को संरक्षण से ब्राम्हणवर्ण एक अल्प संप्रदाय बनकर रह गया था, जिसके परिणाम स्वरूप पुष्पमित्र शुंग द्वारा ब्रहदत के ह्त्या के बाद, पुष्पमित्र शुंग और Kanva के कमजोर शासन द्वारा बैक्ट्रिया के यूनानी राजा इस अवधि का फायदा उठाया और गांधार, पंजाब और सिंधु घाटी से चलकर पाटलिपुत्र पर विजय प्राप्त की, Menander अपने शासनकाल के दौरान धार्मिक सहिष्णुता और परोपकार के साथ बौद्ध समुदाय के आदेश के तहत बुद्ध के शिक्षा की नीति अपनाई, वह भदंत नागसेन द्वारा बौद्ध धर्म का अनुयाई था………..

मध्य एशिया के आधुनिक ईरान के क्षेत्र ईरान के लोगों द्वारा बसाया गया ऐसा लगता नहीं, बल्कि यह क्षेत्र ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, अफगानिस्तान, उत्तर – पश्चिम पाकिस्तान जो सम्राट अशोक के अखंड भारत के रूप में भारत के हिस्सों में सामिल किया गया था। ईरानियों का ईरान यह क्षेत्र तुर्की लोगों के बाद मध्य एशिया के पठार में फैला हुवा नजर आता है और ईरान के विस्तार की तुलना तुर्की के साथ की जा सकती है। छठी शताब्दी BCE के बीच में फारसियों के Achaemanid के कबीले का पारस का उप राजा ‘साइरस’ जो मध्य एशिया में प्रभुत्व के रूप के तहत 553 BCE में एक विद्रोह के शक्ति को जन्म देकर परिणामस्वरूप अपदस्थ नेतृत्व होने के परिणाम दिखाई देते है……………

भारतीय मौर्य राजवंश (324-187 BCE) के राजा अशोक के शासनकाल के तहत, बौद्ध धर्म ईराक के आसपास के क्षेत्र में प्रचार हुवा था, सम्राट अशोक अपने साम्राज्य को दूर के भागों में बौद्ध के शिक्षा के तहत साम्राज्य का भी विस्तार किया था । सम्राट अशोक ने बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं को बुद्ध की शिक्षाओं का प्रसार करने के लिए उत्तर – पश्चिम प्रदेशों और ईरान के क्षेत्र में भेजा गया था, और सम्राट अशोक द्वारा स्थापित रॉक शिलालेखों के अवशेष आज भी मध्य एशिया के ईरानके पठार और उत्तर – पश्चिम प्रदेशों में बौद्ध सांस्कृतिक सभ्यता की दास्तान गहवा देती है और बौद्ध धर्म की ईरानी सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही लेकिन ईरानी विद्वानों द्वारा इस इतिहास की अनदेखी की है…………………

 

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