28-Nov-2012 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना: “बुद्ध धर्म अपने चरम पर जाकर भी भारत में मजोरिटी में क्यों नहीं आ सका”…समयबुद्धा


“मुझे सुन कर बहुत दुःख होता है जब कोई बहुजन दुसरे बहुजन के बारे में ये कहता है की वो बौध धर्म में कन्वर्ट हो गया| उस बेचारे की भी क्या गलती जो अपना इतिहास ही नहीं जानता उससे और क्या उम्मीद की जाए|इतिहास में भी बहुत बड़ी गड़बड़ और मिलावट है क्योंकि इतिहास जीतने वाला लिखवाता है और बौद्ध धम्म के विरोधीयों ने कैसा इतिहास लिखा होगा ये समझा जा सकता है|ये बात अपने दिमाग में अच्छी तरह बैठा लो की बौद्ध धम्म ही भारत की बहुसंख्यक जनता का धर्म था जिसे कई प्रकार के षडियंत्रों  द्वारा मात दी गई थी|अधिक जानकारी के समयबुद्धा की वेब साईट पर फ्री में उपलब्ध पुस्तक DECLINE AND FALL OF BUDDHISM(A tragedy in Ancient India) by Dr. K. Jamanadas डाउनलोड करें और पढ़ें | आगे से कन्वर्ट वाली बात न कहें बल्कि ये कहें की बहुत सह लिए अब हम सब वापस अपने धर्म बौद्ध धम्म में लौट रहे हैं|”…समयबुद्धा

बुद्ध धर्म अपने चरम पर जाकर भी भारत में मजोरिटी में क्यों नहीं आ सका :

१. बुद्ध धर्म में चमत्कार और देवतावाद की कोई जगह नहीं जबकि ये संसार चमत्कार को नमस्कार करता है इसीलिए ये चमत्कारों की अफवाह के सहारे स्वतः नहीं फैलता इसको समझने के लिए लगन चाहिए

२. इस्लाम के रसूल मुहम्मद में अपनी सभी बातों को इश्वर की बात बता कर कुरान की स्तापना की,इशू मसीह ने खुद को इश्वर का पुत्र बताया ओए इसलिय उनकी सभी बाते ईश्वरीय बातों के रूप में बाएबल द्वारा समाज में प्रचारित हूई, लेकिन बुद्ध ने कभी किसी इश्वर के होने या खुद को इश्वर होने का कोई दावा नहीं किया, भगवन बुद्ध ने खुद के धर्म को मानव द्वारा मानव के लिए खोजा गया मद्धम मार्ग कहा |केवल ‘समय’ ही  इश्वर की परभाषा को प्रमाणित करता है, केवल समय ही इश्वर  है

३. बुद्ध धर्म की कोई एक धार्मिक पुस्तक नहीं मुख्य रूप से ३ पुस्तकें है जिन्हें त्रिपिटक कहा जाता है (अन्गुत्तार्खुद्दक्सार,दिघमाज्झिमासार और सम्युत्तासार ), हाँ पर आम आदमी के लिए बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने “भगवन बुद्ध और उनका धर्म” नमक ग्रन्थ की रचना की को इसकी पूर्ति करता है | .

४. धर्म का प्रचार प्रसार जिनके लोगों पर था यानि की बौध भिक्षु, इन्हें खुद भगवन बुद्ध ने आर्थिक,सामाजिक,और शारीरिक रूप से कमजोर रहने को कहा,ऐसी स्तिथि में बहुत कम लोग स्वेचा से भिक्षु बनते हैं, भिक्षा मांगना अर्थात परासरी होना इस धर्म की सबसे बड़ी कमी रही ,इसके विपरीत हिंदुत्व मैं बहुत खामियां होने के बावजूद दान पे आधारित मंदिर,शातिर पुरोहित और आपर धन संचय व् चमत्कारिक अफवाहों के गटजोड़ की वजह से आज भी फल फूल रहा है

५. सामंतवादी और ब्रहामंवादी ताकतों ने इस धर्म को बहुत अधिक दबाया गुजरे वक़्त में बौध भिक्षुओं को बड़ी तादात में मारा कटा गया.हर संभव निति अपने गई बौध धम्म को भारत से उखाड़ फेकने के लिए, अधिक जानकारी के लिए इसी वेब साईट पर फ्री में पीडीऍफ़ में उपलब्ध पुस्तक

DECLINE AND FALL OF BUDDHISM
(A tragedy in Ancient India)

by Dr. K. Jamanadas

डाउनलोड करें और पढ़ें |

७.संसार को कोई भी धर्म उस देश की राज सत्ता पर काफी हद तक आश्रित होता है, भारत सरकार में हिन्दू सामंतवादी लोगों की भरमार है जो कभी बुद्ध धर्म को नहीं उठने देंगे,  हमारी सच्ची मुक्ति केवल सत्ता प्राप्त करने में ही होगी, जब हम सरकार में होंगे तभी हम किसी का भला कर सकते हैं |

८. बुद्ध धर्म के ग्रंथों को नज़रन्दाज किया उनकी भाषा पली प्राकृत को भारत सरकार ने  शिक्षा के सिलेबस में प्रचारित नहीं रक्खा |

९ . मीडिया में धर्म ज्ञान का कोई प्रचार नहीं, बुद्ध धर्म का कोई चैनल नहीं जबकि हिन्दुओं का आस्था और संस्कार, मुस्लिमों का पीस टीवी और क्यू टीवी, क्रिस्टियन का गोड टीवी जैसे कई चैनल हैं

१०.कटु सत्य ये है की ये धर्म अहिंसा पर आधारित सच्चा धर्म है जो धर्म के नाम पे हिंसक कर्म कंडों की खिलाफत करता है, बाकि धर्म धर्म के नाम पर सामाजिक गुट है, ये धर्म सामाजिक गुटबाजी में पीछे रह गया है|

११ आम आदमी चमत्कार को नमस्कार करता है,उसे कोई ऐसा चाहिए ही चाहिए जिसके आगे वो अपने सुख दुःख रख सके| जब लोगों के जीवन  में  दुःख  आते  हैं तब  अनइश्वरवाद के प्रचार के चलते  लोग इस सदधर्म को छोड़ कर अपने भले के लिए किसी देव्तावादी या ईश्वरवादी धर्म की शरण लेते हैं | जबकि  बौध धम्म में समय को इश्वरिये शक्ति  माना  गया है जो सब कुछ कर सकने में समर्थ है  और इसी का प्रचार करना  बौध धम्म को पुनः सदा के लिए चरम पर स्थापित  कर देगा|

 

– समयबुद्धा

jileraj@gmail.com

समयबुद्ध मिशन ट्रस्ट (दिल्ली) बौद्ध चिन्तक, सुधारक, दार्शनिक, दृष्टा, मार्गदाता एव गुरु मान्यवर समयबुद्धा जी के विचारों एव दूरदृष्टी से समस्त बहुजन समाज की क्षमता बढ़ाना को समर्पित है|

3 thoughts on “28-Nov-2012 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना: “बुद्ध धर्म अपने चरम पर जाकर भी भारत में मजोरिटी में क्यों नहीं आ सका”…समयबुद्धा

  1. बुद्ध अनुयायियोंके लिए उपयुक्त लेख.|धन्यवाद|

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