दून विश्वविद्यालय में हुआ बौद्ध अध्ययन में अन्तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की शोध-पत्रिका ‘संगायन’ का विमोचन


    
दून विश्वविद्यालय में हुआ बौद्ध अध्ययन में अन्तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की शोध-पत्रिका ‘संगायन’ का विमोचन

1956 में जब बाबा साहेब अम्बेदिकर ने बौध धम्म में वापस लौटने का उद्गोष किया था उसी साल बौध धम्म चक्र के ढाई हज़ार साल पूरे हो चुके थे| जैसा की बौध साहित्य में तय था वो समय आ गया जब बौध धम्म के पुनर उत्थान को अब कोई नहीं रोक सकता| जैसे जैसे विज्ञानं बढेगा बाकि धर्मों  के धार्मिक सिधांत अप्रचलित होते जायेंगे और बौध सिद्धांत का सत्य सबपर जाहिर हो जायेगा| परिणाम सभी बौध की तरफ लौटने लगेंगे| अब वो समय दूर नहीं जब प्रबुद्ध भारत सारे संसार को प्रकाशमान करेगा|

आप खुद ही सोचिये 1956 से पहले बौध के कितने अनुयायाई थे आज कितने है और बिना धन और मीडिया के कैसे दिन दूनी रात चौगनी गति से बढ़ते जा रहे हैं|आज जहाँ सुनो बौध संस्कृति अनार्य संस्कृति या अम्बेदिकरवाद का बोलबाला है, मीडिया हमारा नहीं है अन्यथा ये उदघोष सारा संसार देखता| ये तो हम सभी आसानी से समझ सकते हैं की अब विज्ञानं की बढ़ने से इस देश की महास्वार्थी मौकापरस्त पाखंडी कौम कैसे भी नहीं रोक सकते| इसी कड़ी में एक छोटे से प्रयास की जानकारी यहाँ दे रहे हैं :

  Sangayana Cover page-page-001 sanghyanमहात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र के प्रभारी अध्यक्ष डॉ.सुरजीत कुमार सिंह द्वारा संपादित बौद्ध अध्ययन की अंतरराष्ट्रीय स्तर की अर्द्ध वार्षिक शोध पत्रिका ‘संगायन’ के प्रथम अंक का लोकार्पण हाल ही में भारतीय बौद्ध अध्ययन सोसाइटी की 12 वीं वार्षिक कांग्रेस में 02 नवम्बर, 2012 को देहरादून के दून विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की निदेशक प्रो.दीप्ति त्रिपाठी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बी.के.जैन, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार की पूर्व कुलपति प्रो.सुधारानी पांडे, नवनालंदा महाविहार के पूर्व निदेशक प्रो. उमाशंकर व्यास, भारतीय बौद्ध अध्ययन सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो.सत्य प्रकाश शर्मा, 12 वीं बौद्ध अध्ययन काँग्रेस के महासचिव प्रो.भागचंद्र जैन और भारतीय बौद्ध अध्ययन सोसाइटी के महासचिव प्रो.वैद्यनाथ लाभ मंचस्थ थे। इस अवसर पर देश-विदेश के बौद्ध अध्ययन व पालि भाषा से जुड़े विद्वान व शोधार्थी उपस्थित थे।
       

  ‘संगायन’ शोध पत्रिका का प्रकाशन पालि भाषा एवं साहित्य अनुसंधान परिषद के द्वारा किया गया है। संगायन पत्रिका के संपादक मण्डल में पालि भाषा एवं साहित्य अनुसंधान परिषद के संरक्षक व अध्यक्ष प्रो. भिक्षु सत्यपाल महाथेर, प्रो.एम.के.दास, प्रो.के.टी.एस.सराओ, प्रो.वैद्यनाथ लाभ, प्रो.संघसेन सिंह, प्रो. अंगराज चौधरी और प्रो.भालचंद्र खांडेकर शामिल हैं। पत्रिका में देश भर के बौद्ध विद्वान और चिंतकों के अंग्रेजी एवं हिंदी में शोध आलेख प्रकाशित किये गये हैं। ‘संगायन’ के प्रधान संपादक डॉ.सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले समय में इस पत्रिका में विदेशों के बौद्ध चिंतकों के शोध लेख भी प्रकाशित किये जायेंगे। उन्होंने आशा जताई कि बौद्ध धम्म के वैश्विक प्रचार-प्रसार को इस पत्रिका से माध्यम से और बल मिलेगा।

 

http://www.youtube.com/watch?v=5RJ8XsSdgew

2 thoughts on “दून विश्वविद्यालय में हुआ बौद्ध अध्ययन में अन्तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की शोध-पत्रिका ‘संगायन’ का विमोचन

  1. Sir I have material pic related with Pawapuri where Lord Buddha take their last meal i want to share it with u please call or send ur number 9458657722

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