बौध धम्म के उद्देश्य


 बौध धम्म के उद्देश्य:

भागवान बुद्ध ने कहा है :- “किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये सदियों से चली आ रही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये हमारे बुजुर्गो ने कही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये हमारे लोगो ने कही हैं,किसी चीज को मानने से पहले यह सोचो की क्या ये सही हैं,किसी चीज को मानने से पहले ये सोचो की क्या इससे आप का विकास संभव है, किसी चीज को मानने से पहले उसको बुद्धि की कसोटी पर कसोऔर आप को अच्छा लगे तो ही मानो नहीं तो मत मानो…”

अन्य धर्मों की तरह बौध धर्म/धम्म का उद्देश्य किस इश्वरी और उसकी किताब के बहाने सामाजिक संगठन बनाकर व्यक्ति को इश्वर भरोसे छोड़ना नहीं है अपितु उसे इस लायक बनाना है की वो अपना भला खुद कर सके इसीलिए भगवन बुद्ध कहते हैं “अतः दीपो भव” अर्थात अपना दीपक खुद बनो किसी पर भी निर्भर न रहो|बौद्ध धम्म की उत्पति ही इसलिए हुई की प्रत्येक व्यक्ति मनोवैज्ञानिक रूप से इस काबिल बन जाये की वो नेतिकता के मूल उदेश्य को समझ सके. क्युकी यह सर्वमान्य है की एक व्यक्ति में सभी कुछ योग्यता होती है. बस इस योग्यता को बहार किस प्रकार से या किस माध्यम से निकाला जाये यह मुख्य है. और सिर्फ शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जो इस योग्यता को बाहर निकलती है

भारत भूमि विभिन्न धर्म,संस्कृति का देश है |आज के इस अंक में हम यहाँ भगवान बुद्ध एवं उनके आम जन को दिए गए संदेशो के विषय में .जानने का प्रयास करेंगे !कपिलवस्तु में जयसेन नाम का एक शाक्य रहता था ! सिंहहनु उसका पुत्र था ! सिंहहनु का विवाह कच्चाना से हुआ था ,उसके पाँच पुत्र थे ! शुद्धोधन,धौतोधन,शु क्लोदन,शाक्योदन,तथ ा अमितोदन ! पाँच पुत्रों के अतिरिक्त सिंहहनु की दो लड़किया थी, अमिता तथा प्रमिता ! परिवार का गोत्र आदित्य था ! शुद्धोधन का विवाह महामाया से हुआ था !dhamma and dharma
आज से लगभग पूर्व २५०० वर्ष पूर्व नेपाल की तराई में ५६३ ईस्वी वैशाख पूर्णिमा के दिन कपिलवस्तु (ऐसे संकेत मिलते है कि इस नगर का नाम महान बुद्धिवादी मुनि कपिल के नाम पर पड़ा है ) के लुम्बिनी नामक वन मे शाक्य कुल में राजा शुद्धोदन के यहाँ महामाया की कोख से एक बालक का जन्म हुआ !जन्म के पांचवे दिन नामकरण संस्कार किया गया ! बालक का नाम सिद्धार्थ रखा गया !उसका गोत्र गौतम था !इसीलिए वह जनसाधारण में सिद्धार्थ गौतम के नाम से प्रसिद्द हुआ ! सिद्धार्थ के जन्म के सातवे दिन ही उनकी माता का देहांत हो गया !अतः प्रजापति गौतमी ने उनका पालन पोषण किया ! सिद्धार्थ का एक छोटा भाई भी था ,उसका नाम नन्द था ! वह शुद्धोदन का महाप्रजापति से उत्पन्न पुत्र था !उसके चाचा की भी कई संताने थी ! महानाम तथा अनुरुद्ध शुक्लोदन के पुत्र थे तथा आनंद अमितोदन का पुत्र था देवदत्त उसकी बुआ अमिता का पुत्र था ! महानाम सिद्धार्थ की अपेक्षा बड़ा था आनंद छोटा !
बुद्ध धर्म के बारे में आम भारतीय बहुत कम या नहीं के बराबर ही जानता है ! या फिर जो विद्यार्थी मिडिल स्कूल , हाई स्कूल , या कॉलेज में इतिहास पढ़ते , उन्हें एक सामान्य जानकारी के रूप में बुद्ध धर्म के सिद्धांतों के बारे में जानकारी हो जाती है ! हममे से अधिकाँश लोग ये जानते है कि बुद्ध ने ईश्वर , आत्मा , परमात्मा आदि को नकार दिया है !  इसलिए कई लोग इसे नास्तिको का धर्म भी कह देते है ! जिस इश्वरिये शक्ति को प्रमाणित नहीं किया जा सकता उसे नहीं स्वीकारा  जा सकता, केवल समय को ही  सर्व शक्ति समर्थ इश्वरिये शक्ति के सभी परिभाषाओं पर प्रमाणित किया जा सकता है इसलिए हम समय को सर्व शक्ति समर्थ स्वीकार करते हैं |
 तो क्या हम ये समझ ले की एक ऐसा धर्म जिसकी मातृभूमि भारत देश रहा हो ! जो इस भारत भूमी में पला बड़ा हो , जो महान सम्राट अशोक , कनिष्क , हर्षवर्धन के समय में अपने चरमोत्कर्ष पे रहा हो और विश्व के कई देशो में जिसके मानने वाले आज भी हो , उनकी प्रासंगिकता आज एकदम से ही समाप्त हो गई ?

ऐसा नहीं है, असल में बौध साहित्य बहुत व्यापक है जिसे हर व्यक्ति नहीं पढ़ पता और इस देश के सत्ताधारी लोग सच में बौध धर्म को उभारना नहीं चाहते |इस साहित्य को मीडिया में नहीं आने देते,कितने आश्चर्ये की बात है की इस देश में सभी धर्मीं के टीवी चैनल व् टीवी प्रोग्राम हैं पर भगवान् बुद्ध के देश में उन्ही के लिए एक चैनल तक नहीं | जबकि वे लोग ये बात अच्छी तरह जानते हैं की केवल यही विशुद्ध भारतीये  धर्म भविष्य में देश को अखंड और उन्नत कर सकता है| ये कितने दुःख की बात है की इन लोगों ने देश की धार्मिक रूप से असंतुस्ट आम जनता को विदेशी धर्म  की तरफ मुड़कर अलगाववाद की तरफ धकेल दिया है जो देश की अखंडता के लिए खतरनाक हो सकता है|

मनुष्य जिन दु:खों से पीड़ित है, उनमें बहुत बड़ा हिस्सा ऐसे दु:खों का है, जिन्हें मनुष्य ने अपने अज्ञान, ग़लत ज्ञान या मिथ्या दृष्टियों से पैदा कर लिया हैं उन दु:खों का प्रहाण अपने सही ज्ञान द्वारा ही सम्भव है, किसी के आशीर्वाद या वरदान, देवपूजा,यग,ब्रह्मणि कर्मकांडों, ज्योतिष आदि  से उन्हें दूर नहीं किया जा सकता। सत्य या यथार्थता का ज्ञान ही सम्यक ज्ञान है। हम अपने जन्म से मरण तक जो भी करते हैं उस सबका एक ही अंतिम मकसद होता है- स्थाई खुशी या निर्वाण  अत: सत्य की खोज- ‘निर्वाण या स्थाई ख़ुशी’ के लिए परमावश्यक है। खोज अज्ञात सत्य की ही की जा सकती है,यदि सत्य किसी शास्त्र, आगम या उपदेशक द्वारा ज्ञात हो गया है तो उसकी खोज नहीं। अत: बुद्ध ने अपने पूर्ववर्ती लोगों द्वारा या परम्परा द्वारा बताए सत्य को और वेद पुराण जैसे हर काल्पनिक धर्म ग्रंथों को नकार दिया और अपने लिए नए सिरे से सत्य की खोज की। बुद्ध स्वयं कहीं प्रतिबद्ध नहीं हुए और न तो अपने शिष्यों को उन्होंने कहीं बांधा। उन्होंने कहा कि मेरी बात को भी इसलिए चुपचाप न मान लो कि उसे बुद्ध ने कही है। उस पर भी सन्देह करो और विविध परीक्षाओं द्वारा उसकी परीक्षा करो। जीवन की कसौटी पर उन्हें परखो, अपने अनुभवों से मिलान करो, यदि तुम्हें सही जान पड़े तो स्वीकार करो, अन्यथा छोड़ दो। यही कारण था कि उनका धर्म रहस्याडम्बरों से मुक्त, मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत एवं हृदय को सीधे स्पर्श करता था। संसार में केवल गौतम बुद्ध का सिद्धांत ही ऐसा है तो हर युग में हर परिस्थिथि में एक सा ही लाभकारी  है जबकि अन्य धर्मों के सिद्धांत वैज्ञानिक  तरक्की और समय गुजरने के बाद झूठे साबित होते जाते हैं | ऐसा इसलिए है क्योंकि बौध धम्म में ऐसा कुछ भी स्वीकार नहीं होता जिसका प्रमाण उपलब्ध न हो, यही बौध धम्म का सार है | 

किसी भी धर्म की कुल जनसँख्या का अमूमन 10% बुद्धिजीवी वर्ग धर्म का अध्यन करता है और समझता है पर 90% आम आदमी रोज़ी रोटी कमाने और अपने धर्म के गिने चुने  सवालों के जानने और मानने  तक ही सीमित रहता है|जैसे- हमारा पूजनीय इश्वर कोन है,हमरी धार्मिक किताब,चिन्ह,पूजास्थल क्या है,हमारे त्यौहार कौन से है और उनको कैसे मानते हैं | आजकल भारत देश के मूलनिवासयों का रुझान बौध धर्म की तरफ बहुत बढ़ रहा है क्योंकि केवल यहीं धर्म से जुडी सभी जरूरतों की पूर्ण संतुस्टी मिल पाती है| कई जगह ऐसी पारिस्थि देखी गई है की जो लोग खुद को  बौध  कहते हैं उन्हें भी इन गिनेचुने  आम सवालों का जवाब भी नहीं मालूम होता | बौध साहित्य बहुत व्यापक है जिसे हर व्यक्ति नहीं पढ़ पता | ऐसे में  सर्व जीव हितकारी बौध धर्म को हर खास-ओ-आम तक उन्ही की रूचि अनुसार पहुचाने की मानव सेवा करने के लिए “समय-बुद्ध मिशन ट्रस्ट” प्रयासरत है

4 thoughts on “बौध धम्म के उद्देश्य

  1. भागवान बुद्ध ने कहा है :- किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये सदियों से चली आ रही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये हमारे बुजुर्गो ने कही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये हमारे लोगो ने कही हैं,किसी चीज को मानने से पहले यह सोचो की क्या ये सही हैं,किसी चीज को मानने से पहले ये सोचो की क्या इससे आप का विकास संभव है, किसी चीज को मानने से पहले उसको बुद्धि की कसोटी पर कसोऔर आप को अच्छा लगे तो ही मानो नहीं तो मत मानो…

  2. aap dwara edit kiyagaya bauddha dhamma ke uddesh namak article bahut hi sargrabhit he sadhuvad aapko.

    G.P.Chaudhary

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