Emperor Asoka Temple at Ningbo City, Zhejiang Province,Chaina…Article by Satyajit Maurya


“Emperor Asoka Temple at Ningbo City, Zhejiang Province,Chaina”

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चीन देश के बौद्ध धर्म ग्रंथों के रिकॉर्ड के अनुसार चीन देश में सम्राट अशोक का नाम अयुवंग (Ayuwang) है। बुद्ध की विश्वबन्धुता की शिक्षा कई सदियों तक भारत के आसपास के देशों में मैत्री और सौम्सय की कड़ियों के बंधन में बन्धी थी और बन्धी है। बुद्ध की शिक्षा सीमाओं के परे प्रबल प्रचार हो रहा था, किन्तु भारतीय बौद्धानुयायियों को बुद्ध का ‘विश्व धम्म’ के रूप में उभरने की कोई अनुभूति नहीं थी । जब फाहियान चीन देश के ‘हान’ प्रदेश से जेतवन बौद्ध संघाराम (श्रावस्थी, उत्तर प्रदेश) में पहुचा तब भिक्षुओं का संघ फाहियान की अगवानी करते हुए आश्चर्य हुवा की “सिमावर्तीय देशो के वासी भी हमारे नियमो की खोज करने यहाँ तक आ सकते है”।379756_330660583709987_1120752531_n

यदि 2300 वर्ष पूर्व चीन भारत को अनेक वस्तुए भेज रहा था, तो भारत भी उसे बौद्ध धम्म द्वारा समृद्ध बना रहा था। 7-8AD तक विश्व जगत में भारत की पहचान बुद्धत्तरभारत के नाम से थी और है। जिन बातो को दोहरा रहा हूँ, वह इतिहास का अंग बन चुकी है। तभी इन सीधी-सपष्ट बातों की स्विकारोक्ति होनी… ही चाहिए क्यों की सम्राट अशोक ने 3-BCE से बुद्ध के विश्वबन्धुता के शिक्षा सर्वव्यापी-सर्वग्राही सहिष्णुता का प्रबल प्रचार एशिया के साथ पश्चिमी देशो में 84000 स्तुपो-शिलालेखों द्वारा और वाद-संवाद की आचार-सहिंता का व्यापक प्रचार भी किया था।

सम्राट अशोक के कार्यकाल के दौरान निर्माण किये गए 84000 हजार स्तुपो और शिलालेखों में से 19 संघाराम चीन देश में निर्माण किये गए थे, और सम्राट अशोक को चीन देश में अयुवंग (Ayuwang) से जाना जाता है । बुद्ध के महापरिनिर्वान के बाद बुद्ध के शरीर अवशेष धातुओ आठ भागों में अलग करके उनपर स्तूप बनवाये गए थे। और इसी अवशेष धातुओं को सम्राट अशोक ने 84,000 भागों विभाजित करके चीन देश के राजा को देकर उनपर स्तूप बनवाने ले आदेश दिए थे और चीन देश के सम्राट ने 19 बौद्ध स्तूप बनवाकर एक स्तूप सम्राट अशोक के नाम से चीन देश के पश्चिमी जिन वंश (Ningbo City, Zhejiang) (265-316) में बनाया था । जहा बुद्ध के सिर के अवशेष धातु रखे है। मौजूदा सम्राट अशोक के विहार की इमारत को क्विंग राजवंश (1644-1840) के बाद पुनर्निर्माण किया गया और इस नवीनीकरण का काम 1980 में पूरा किया गया, और बौद्ध सांस्कृतिक मूल्यों की देखभाल की जा राही है……..

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