27-Jan-2013 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना:- “बौद्ध धम्म पर लौटना भारत देश के लिए बेहद जरूरी क्यों है”…समयबुद्धा


बौध धर्म पर लौटना भारत देश  के लिए बेहद जरूरी क्यों है:

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अंग्रेजी शाशन में अंग्रेजी के प्रचार के कारण अंग्रेजों ने शिक्षा के दरवाज़े सबके लिए खोल दिए, जिससे संस्कृत जैसे कोड भाषा में छिपा कर रखी शिक्षा धीरे धीरे जनसाधारण तक पहुचने लगी

शिक्षा के दरवाज़े सबके लिए खुलने से सभी ब्रह्मण धर्म जिसे आजकल हिन्दू धर्म कहते हैं, के बारे में समझने लगे हैं की इसका पूरा डिजाइन एक वर्ग विशेष के संवर्धन और तरक्की और भारत के मूलनिवासियो में फूट डालो शाशन करो पर आधारित है

सभी समझने लगे की भारत के सारे बहुजनों को विभिन्न जातीय सम्प्रदायों में बाँट कर देश का ऐसा सत्यानाश किया है की दुनिया में से जो भी ऐरा गैरा आया भारत पर आक्रमण करके जीत गया, सबने भारत पर राज किया है|इतिहास गवाह है की भारत पर अनेकों अनेक विदेशी आक्रमण हुए जिनमे से नों आक्रमण बेहत भीषण थे| ऐसा इसलिए हुया क्योंकि हम जातिओं में बटे थे जिसकी वजह से कभी संगठित नहीं होते |यही आज भी भारत कि दुर्दशा की मुख्य वजह है |

हमारी शिक्षा व्यस्था हमें ये तो पढ़ाती है की हमारा देश सालों तक गुलाम रहा पर ये नहीं बताती की ऐसा जातिगत बटवारा और विदेशी ताकतों के आगे संगठित न होना की वजह से हुआ, भारत देश के सभी समस्याओं की जड़ जातिगत बटवारे में है और जब तक जाती और वर्ण आधारित व्यस्था ख़तम नहीं होगी जब तक भारत की आम जनता यानि बहुजन दुखी रहेगा|

बहुजन का मतलब है वो जनता जो आज एस0 सी0/ एस0 टी0 /ओ0 बी0 सी0 और कंवर्टेड मिनोरिटी के नाम से जानती जाती है जिन्हें धर्म ग्रंथों में शूद्र कहा गया है|ये लोग संगठित नहीं हैं जब एक जाती पर विपत्ति आती है तब दूसरी चुप बैठती है इस तरह सबका अलग अलग शोषण होता रहता है|

भारत का इतिहाद विदेशी आक्रमणों के सामने कमजोर पड़ने का हारने का इतिहास है| पूरे इतिहास में केवल बौद्ध काल या सम्राट अशोक के काल में ही पूरा भारत एकजुट और शक्तिशाली था, उस अच्छे शाशन की याद में हम अशोक चिन्हों को आज की सरकार में इस्तेमाल करते हैं |

इस समस्या का एक ही मूल कारन है वर्ण व्यस्था और जातिवाद और एक ही समाधान है “बौधमय भारत”, केवल बौद्ध धम्म ही विशुद्ध भारतीय धर्म है जो पूर्णतय वैज्ञानिक दृष्टीकोण पर आधारित है| इस धर्म में पाखंड और सामाजिक बटवारे की कोई जगह ही नहीं है| आज का भारत का संविधान में समानता,सबको बराबरी के अधिकार,न्याय को धर्म ईश्वर और पुरोहित से भी बड़ा मानना,सबको धार्मिक छूट,वोट का अधिकार जैसे बौद्ध शाशन प्रणाली को बाबा साहब आंबेडकर ने शामिल करके साबित कर दिया है की भारत केवल बौद्ध शाशन प्रणाली से ही संगठित रह सकता है| सोच कर देखिये की अगर किसी धार्मिक कट्टरपंती ने संविधान बनाया होता और पहले की तरह कुछ जातिओं को बड़ा और कुछ को अधिकार वंचित रखा होता तो कितना बुरा होता|

बौध धर्म हर उस व्यक्ति का धर्म है जो मन से समानता चाहता है और जियो और जीने दो की नीति पर चलता है , समानता (अवसरों की) इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत देश की सभी समस्याओं की जड़ जनता का जातिगत और सांप्रदायिक बटवारा है |

आज सामाजिक असमानता या जातिगत आकड़ों पर पार्टी और वोट के आधार पर बनी सरकार कोई भी देश हित का एक सर्व सम्मत फैसला नहीं ले पाती| देश हित के फैसलों के ऊपर वोट बैंक हित हावी हो जाता है | इस सबका खामियाजा भारत और इसकी जनता भुगत रही है|

इतिहास गवाह है की जो भी हिंदुत्व के पाखंड को समझ जाता है वो इसे छोड़ना चाहता है |जैसे जैसे ब्राहमण धर्म की पोल खुलती जा रही है लोग इसे छोड़कर विदेशी धर्मों की तरफ रुख कर रहे हैं जो भारत के लिए अच्छा नहीं| वो ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि स्वदेशी बौद्ध धर्म का बेहद कम प्रचार के कारण इस बेहतरीन विकल्प के बारे में नहीं सोचते और विदेशी धर्म के मिशन के जाल में फस जाते हैं |

विदेशी धर्म भारत की एकता और अखंडता के लिए कितने लायक है आप खुद समझ सकते हैं और हिंदुत्व असमानता और पाखंड को बढ़ता है| इस अवैज्ञानिक धर्म में किसी भी गेर हिन्दू को शामिल करने का कोई प्रवेश द्वार नहीं हैं |फर्ज कीजिये की अगर बहार से कोई कोई अंग्रेज ब्राह्मण धर्मी या हिन्दू बनना चाहे तो उसे किस जाती में शामिल किया जायेगा|

ऐसे में केवल पूर्णतः स्वदेशी बौद्ध धर्म ही भारत की धार्मिक जरूरत का बेहतरीन विकल्प है | केवल बौद्ध धम्म के ही पास ही सभी अधायात्मिक जिज्ञासाओं का सही और वैज्ञानिक वर्णन है| हम सभी जानते हैं की बौद्ध धर्म आस्था पर नहीं प्रमाणिकता पर आधारित है |

भारत देश ही नहीं परमाणु बम्ब के जखीरे पर बैठी ये दुनिया के लिए भी बौद्ध धर्म बेहतरीन मार्ग और विकल्प है|

विशेष कर भारत देश में जिस तरह हर कौम देश और सत्य-मार्ग को छोड़कर केवल अपनी कौम को ही बढ़ावा देने में लगे हैं, उससे भारत देश का भविष्य बहुत डरावना हो सकता है, गृह युद्ध और अपना अपना देश मांगने की स्तिथि को समझा जा सकता है |

इन सभी बातों को असल में बुद्धिजीवी हिन्दू भी समझते हैं पर आंबेडिकरवादियों द्वारा इस धर्म को अपनाने की वजह से खुल कर बौद्ध धर्म को नहीं अपनाते |भारत विरोधी लोगों ने अम्बेडकरवादीओं के लिए धृणा प्रचारित की है और कोई भी इनकी लाइन में खड़ा नहीं होना चाहता| भगवान् बुद्ध ने कहाँ है की “मोह में हम किसी की बुराई नहीं देख सकते और घृणा में हम किसी की अच्छाई नहीं देख पाते “ यही कारन है की संसार के विश्व गुरु रहे लोग आज दलित बनकर
अपने को कमजोर समझने पर मजबूर हैं|

बौद्ध धर्म हर कसोटी पर खरा उतरता है यही कारण है की जो भी इसे ठीक से जान जाता है वो कहीं नहीं जाता, उसे फिर सभी धर्मों की सच्चाई और जड़ें साफ़ दिखने लगती है | आज दुनिया के उन्नत देशों में बौद्ध धम्म का प्रसार बहुत तेज़ी से हो रहा है जैसे अमेरिका, आस्ट्रेलिया यूरोप आदि क्योंकि यहाँ के लोग धार्मिक पाखंड में अंधे नहीं हैं वो तर्क को समजते हैं इसलिए बौद्ध धम्म को भी समझ पा रहे हैं, जब समझ रहे हैं तो अपना रहे हैं|

बौद्ध धम्म का भारत के मीडिया में प्रचार इसलिए नहीं होता क्योंकि ये सभी धर्मों में व्याप्त अंधविश्वास की काट करता है जिससे कई धर्म के नाम पर कमाई करने वालों के हितों पर घोर अघात होता है| इसका प्रचार होने से पहले की तरह भारत से जाती और वर्ण व्यस्था का नाश हो जायेगा और जनता सुखी हो जायेगी पर वो लोग दुखी हो जायेंगे जो जाती और वर्ण व्यस्था के समर्थक हैं, आजशक्ति और धन इन्हीं के हाथों में हैं |

पर जो भी हो धीरे धीरे ही सही सत्य फ़ैल ही जाता है सबका समय आता है आम जनता और बहुजन का भी समय आएगा, जैसे जैसे विज्ञानं बढ़ेगा वैसे वैसे पाखंड कम होता जायेगा फलस्वरूप लोग समझने लगेगें और जाती और वर्ण व्यस्था कमजोर पड़ती जायेगी परिणाम स्वरुप देश का धन जमीन संसाधन और शिक्षा अधि जनता में बाटने लगेगी पहले की तरह राजे महाराजे जमींदार पुरोहित तक ही सीमित नहीं रह जायेगी|यकीन नहीं होता तो सारे बहुजन जिन्हें हम आज एस0 सी0/ एस0 टी0 /ओ0 बी0 सी0 और कंवर्टेड मिनोरिटी के नाम से जानते हैं, वो अपनी आज की स्थिति अपने ३-४ पीढ़े पहले के ही पूर्वजों से तुलना करें तप पता चल जायेगा की आंबेडकर संविधान ने उन्हें वो दिया है वो हज़ारों साल तक मनुविधान ने उनसे छीने रखा|पहले कैसा बुरा हाल था नहीं पता तो मुंशी प्रेमचंद का साहित्य पढ़ो आंबेडकर का साहित्य पढ़ो सब समझ में आ जायेगा| अब घृणा करना बंद करो और जानो बौद्ध धम्म को इसी में है आपका कल्याण, जानो सो सही मानना न मानना तो बाद की बात है …

जियो और जीने दो, बहुजन हिताए बहुजन सुखाये

….समयबुद्धा 27-Jan-2013

https://www.youtube.com/watch?v=Twbh6_ZRDVo

dhamma and dharma

 

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