JOIN SamayBuddha Mishan


shoodra achoot dalit 

            
 ध्यान दे:
 
 भगवान् बुद्ध द्वारा बताये गए मार्ग और शिक्षा को जानने के लिए
https://samaybuddha.wordpress.com/  पर जाकर बाएँ तरफ दिए Follow Blog via Email में अपनी ईमेल डाल  कर फोल्लो पर क्लिक करें, इसके बाद आपको एक CONFIRMATION  का बटन बनी हुए   मेल आएगी निवेदन है की उसे क्लिक  कर के कनफिरम करें इसके बाद आपको हर हफ्ते बौध धर्म की जानकारी भरी एक मेल आयेगी |भगवान् बुद्धा ने कहाँ है
 
“सत्य जाने के मार्ग में इंसान बस दो ही गलती करता है ,एक वो शुरू ही नहीं करता दूसरा पूरा जाने बिना  ही छोड़ जाता है “
 
भले ही हमारा मीडिया में शेयर न हो हम अपना मीडिया खुद हैं  
दोस्तों अगर हम में से हर कोई हमारे समाज के फायदे की बात अपने दस साथिओं जो की हमारे ही लोग हों को मौखिक बताये या SMS या ईमेल या अन्य साधनों से करें तो केवल ७ दिनों में हर बुद्धिस्ट भाई के पास  हमारा सन्देश पहुँच सकता है | इसी तरह हमारा विरोध की बात भी 9 वे दिन तक तो देश के हर आखिरी आदमी तक पहुँच जाएगी | नीचे लिखे टेबल को देखो, दोस्तों जहाँ चाह वह राह, भले ही हमारा मीडिया में शेयर न, हो हम अपना मीडिया खुद हैं :
1ST DAY =10
2ND DAY =100
3RD DAY =1,000
4TH DAY =10,000
5TH DAY =100,000
6TH DAY =1,000,000
7TH DAY =10,000,000
8TH DAY =100,000,000
9TH DAY =1,000,000,000
10TH DAY =1,210,193,422
 
बौध साहित्य बहुत विस्तृत है, अकेला कोई उतना नहीं कर सकता जितना की हम सब मिल कर कर सकते हैं| ये केवल मेरे अकेले की वेबसाईट नहीं,आपकी भी है ,आपसे अनुरोध है की आप बौध धर्म पर अपने आर्टिकल हिंदी में jileraj@gmail.com पर भेजे जिसे हम आपके नाम सहित या जैसा आप चाहें यहाँ पब्लिश करेंगे| आईये किताबों में दबे बौध धम्म के कल्याणकारी ज्ञान को मिल जुल कर जन साधारण के लिए उपलब्ध कराएँ |

15 thoughts on “JOIN SamayBuddha Mishan

  1. मनुवाद का एक जबाव मानववाद, मानववाद

    एक जैसी संस्कृति तथा सभ्यता के होते हुए भी हिन्दू एक नहीं। परस्पर बंटे हुए हैं जातियों और विभिन्न सम्प्रदायों में। यदि कोई प्रश्न करें कि “हिन्दू धर्म क्या है?” एक सीधा सा उत्तर दिया जा सकता है- जातियों का परस्पर तथा श्रेणीगत विभाजन। कारण है कि भारत में कई महात्मा, संत अथवा साधुजनों ने हिंदू धर्म अथवा सनातन धर्म को विभिन्न ढंग से व्याख्यायित किया है। कोई कहता है कि जीवन जीने की कला है। कोई कहता है कि ईश्वर के साथ समागम का रास्ता है। कोई कहता है कि पर्व तथा त्यौहारों में बसता है यह। अरे मूर्खों की कतारों के पथ प्रदर्शनकर्त्ताओं शब्दों का जंजाल बनाना छोड़ दो। यह न जीने की कला है, न ईश्वर का मेलक, न न पर्व त्यौहारों में बसा हुआ; यह तो केवल अज्ञानता का बंधन है। जातिवादी ताकतों तथा चरमपंथी लोगों की हुकूमत करने का ढंग है। एक जैसे तीज-त्यौहार, पर्व-व्रत, उपवास, कला, रहन-सहन का ढंग, एक जैसे देवी-देवता यहाँ तक की रक्त की एकरूपता होते हुए भी जातियों का बंटवारा ही इसका मूल उद्देश्य है।

    एक प्रश्न हिंदू धर्म का ध्वज उठाने वालों से यदि कोई अन्यधर्मी हिंदू धर्म स्वीकार करना चाहे तो आप उसे किस जाति में रखोगे? मानव को जातियों में बंटा हुआ पुतला बनाकर रख दिया है। गद्दारों की कतार में ये लोग पहले नम्बर पर आयेंगे। मानवतावाद विरोधियों को जबाव देने का समय है। एकजुट होकर प्रत्येक जाति को अस्मिता का अनुभव करना होगा जिससे मानव मुक्ति का पथ प्रशस्त होगा। वर्चस्ववादी ताकतें यद्यपि मजबूत होती हैं, किन्तु सत्य का रास्ता झूठ से कहीं महान होता है। अपनी गुलामी को दूर करने का एक ही विकल्प बचता है कि हम इस गंदी व्यवस्था को ही त्याग दें। बढें नये सूरज की तरफ।

    याद करो जब चीन के हांगवंशीय राजा के सपने में पश्चिम से आता हुआ स्वर्ण प्रभास से ओजस्वित व्यक्ति का दर्शन हुआ, जिसे देखने के लिए वह व्याकुल हो गया तथा उसे बुलाने के लिए उसने अपने सैनिक भेजे। बाद में उसे पता चला कि यह तो भगवान् बुद्ध का प्रताप था और वह उनकी शरण में चला गया। आज पुनः आप जैसे पथ भटके हुए लोगों को एकजुट होने की जरूरत है और बुद्ध की शरण में आने की जरूरत है। देखो, जगत् में कोई किसी का उद्धार नहीं करता। मानव अपना स्वामी आप होता है। (अत्ता हि अत्तनो नाथो, को हि नाथो परो सिया। धम्मपद) मानवीय मूल्यों तथा समता का पथ पुकार रहा है। ज्ञान अपने आप आपको आवाज दे रहा है। सत्य को सत्य समझने का शंखनाद हो रहा है। मैत्री का झरना कलरव कर रहा है। चरमपंथी तथा जातिवादी शक्तियाँ बुद्ध के प्रभास के सामने टिक नहीं पा रही। आप अगर आज भी ऐसे ही बने रहे तो मानवता हार जाएगी। मनुवाद अथवा जातिवाद जैसी शक्तियों को जीतने न दें। मानवमुक्ति का उपाय करते रहें।

    • आपके विचार जानकार ख़ुशी हुई की हमारे लोग सोच और नीति ज्ञान में कितने आगे निकल आये हैं| समय बुद्धा मिशन का मुख्य मकसद यही है की हमारे लोगों को सक्षम बनायें मानसिक रूप से उन्हें इस लायक बनायें की वे आने वाले मौके को पहचान कर उसका दोहन कर सकें|

      जैसा की समयबुद्धा ने कहा है

      “अगर आपमें क्षमता नहीं है तो आपके सगे भाई के राजा बनने पर भी आप कोई फायदा नहीं उठा पाएंगे पर यदि आपमें क्षमता है तो आप अपने दुश्मनों से भी फायदा निकाल सकते हैं, इसलिए व्यक्तिगत, सामाजिक और निति क्षमता बढ़ाने में लगे रहो|संसार में हर किसी का हर कर्म बस अपने आप के अस्तित्व को बचाए रखने का वक्ती संगर्ष होता है, ये सारी जद्दोजहद बस नस्लों का संगर्ष है जिसमें क्षमताओं का युद्ध है, जो चलता आया है और चलता रहेगा, इसलिए केवल अपनी क्षमता बढ़ाने पर केन्द्रित रहो ”

      “निति, ज्ञान, उत्साह और समर्पण न होने ही वो कारण हैं जिसके बिना कोई व्यक्ति या समाज एक बंजर भूमि की तरह हो जाता है जिसमे कितनी ही खाद बीज पानी (विचार, कानूनी और आर्थिक सहायता, मौके आदि) डालो परिणाम कुछ नहीं निकलता”

      बहुजन उत्थान के लिए जो भी मेहनत की जाती है वो बहुजन में क्षमता न होने की वजह से लाभ नहीं हो पता| बहुजन क्षमता बढाओ अभियान ही समयबुद्धा मिशन है जो समयबुद्धा के मार्ग दर्शन और बौध धम्म के स्थाई झंडे के नीचे चल रहा है |

      आप जैसे ज्ञानी और कर्मठ मान्यवर को सदर अभिनन्दन |कृपया इस मिशन से जुड़ने का न्योता स्वीकार करें|

      नमो बुद्धी जय भीम

      • I am Vikas Singh, doing PhD in Buddhist Philosophy from Jawaharlal Nehru University. I have completed my MA in Sanskrit and Mphil in Pali language. My Mob. No. is +91-9711570933

  2. अलसस्स कुतो सिप्पं,
    असिप्पस्स कुतो धनं।
    अधनस्स कुतो मित्तं,
    अमित्तस्स कुतो सुखं।
    असुखस्स कुतो पुञ्ञंण,
    अपुञ्ञसस्स कुतो वरं॥ बर्मीस भिक्खु छक्किभिन्दिसिरि के ग्रन्थ लोकनीति से उद्धृत

    भाव : आलसी व्यक्ति को शिल्प अर्थात् उद्यमी कला तथा परिश्रम की प्राप्ति नहीं होती। शिल्प रहित व्यक्ति को धन की प्राप्ति असंभव है। धनहीन के मित्र नहीं होते और मित्रहीन व्यक्ति सुखी नहीं रहता। बिना सुख के पुण्य नहीं मिलता तथा पुण्य रहित मानव श्रेष्ठ नहीं कहलाता। सार यह है कि आलस्य सभी वस्तुओं को नष्ट कर देता है। भगवान् बुद्ध का अन्तिम सन्देश भी अप्रमाद रहित कार्य करने हेतु प्रेरित करने वाला था। (वयधम्मा संखारा, अप्पमादेन सम्पादेथ। महापरिनिब्बानसुत्त) अतः अब समय है इस तन्द्रा तथा आलस्य को त्यागकर अपना दीपक स्वयं बनने की। (अत्त दीपो भव।)

  3. “बौध्द”धम्म सबसे वरीष्ट धम्म है।”बौध्द”धम्म का ग्यान प्राप्त करना चाहते है,तो”बौध्द” धम्म आ जाऒ ,”जयभिम” “नमो बुध्दाय” “358”धम्मपाल लोखंडे मु॰पो॰जयभिमनगर लोखंडे वस्ती तळणी ता.हदगांव जि.नांदेड पिनकोड:431743 मो॰8378081789 ईमेल आयडी:dhammapal.lokhande@gmail.com (feacbook opan)

    • very nice
      if we want to progress in spiritual health will strong then
      our body healthy
      then we earn wealth
      and politically strong

      we are request to all no loose comment on any community
      thank you all
      jai bhim
      jai bharat

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