धम्म दान महादान’ धन से विचारों का प्रचार ही उत्थान का एकमात्र मार्ग है


 
 
धम्म दान महादान’ धन से विचारों का प्रचार ही उत्थान का एकमात्र मार्ग है
 
 
“धम्म दान महादान’ धन से विचारों का प्रचार ही उत्थान का एकमात्र मार्ग हैबाबा साहेब द्वारा लिखित “भगवन बुद्धा और उनका धम्म” जैसी 300-400 पन्नो की किताब मार्किट में करीब 300-400 रूपए की ही बिकती है। इतने रूपए हमारे गाँव में बसने वाली जनता के लिए खर्च करना मुश्किल है।पर उन तक बाबा साहेब और भगवान् बुद्धा का सन्देश पहुचना जरूरी है ,तो ये समाज के सक्षम लोगों का फर्ज बनता है की वे ऐसी पुस्तकें गाँव में पहुचने के लिए समयबुद्धा मिशन ट्रस्ट की मदत करें। किताबें एक हज़ार के लौट में छपती  हैं, 300-400 पन्नो की किताब के कागज़,टाइप और छपाई का एक हज़ार किताबों के लौट की लगत करीब  50000 है या कहें  1 किताब का खर्च करीब 50 रूपए मात्र आता है जो की 300-400  रूपए की बिकती है। हम जानते हैं की एक हज़ार से कम के लौट में छापी नहीं होगी और होगी तप बहुत महंगी पड़ेगी दूसरा  एक आदमी अकेला 50000 रूपए आज की तरीक में खर्च नहीं करेगा, जागरण या साईं संध्या करवा लेगा पर  बौध धम्म के नाम पर तो नहीं करगा पर क्या एक आदमी 5000 रूपए भी खर्च नहीं करेगा।Image1121
 
इस हिसाब से पचास हज़ार की रकम इकट्टा करने के लिए पाच हज़ार के दस दानदाता चाहिए जिससे 1000 किताबे छपेंगी और हर किसी के हिस्से में सौ किताबें आएँगी बाटने के लिए जिसे वो हमसे ले सकता है या हमारे संसथान को दूर गाँव में बांटने के लिए छोड़ सकता है। कई लोग अपनी तस्वीर और दान को दिखाना चाहते हैं तो वो भी इस किताब में छापा जा सकता है । 
 
क्या कोई है जो ऐसा करने का इच्छुक हो, जब 10 आदमी हो जयगे तभी पैसे लिए जायेंगे वो भी चेक से या ड्राफ्ट से। इसी तरह अगर बीस आदमी हो जाये तो हर आदमी को केवल ढाई हज़ार देना होगा और उसे 50 किताबें मिल जाएँगी।
 
इसी तरह हम हर साल कलेंडर छापते हैं जिसमें केवल बौध की तस्वीर ही नहीं होती बल्कि लिखित सन्देश भी होते हैं जैसे
 
-बौध धर्म पर 10 बुनियादी सवाल-जवाब जैसे हमारा धार्मिक किताब,चिन्ह,स्थल,परंपरा  त्यौहार अदि क्या है
-भगवन बुद्ध के प्रभावशाली वचन
-धम्म प्रचार के चुने हुए प्रभावशाली सन्देशdhammpad_boudhopadishsangrah_hindi10832_medium
 
अच्छा कलेंडर आज-कल करीब दस हज़ार के हज़ार छपते हैं, ज्यादा छपवाने पर उससे भी कम लगत आती है। मतलब अगर आप 1000 रूपए दान देते हैं तो आपको मिलता है एक सौ कलेंडर जिसे आप अपने हिसाब से बाँट सकते हैं ।केलेंडर की विशेषता है की ये साल भर टगा रहता है किताब की तरह कोने में नहीं होता और पूरा साल अनेकों लोग इससे प्रेरणा लेते हैं ।
 
नोट: समय बुद्धा मिशन ट्रस्ट के सभी कार्यकर्त्ता उछ शिक्षित, जुझारू, संगर्शील और आर्थिक रूप से सक्षम हैं जिनमे टुच्चापन नहीं है । बौध धम्म के प्रचार में समर्पित लोग ही कृपया आवेदन करे, बदनामी फ़ैलाने और हिम्मत तोड़ने वाले अलग रहें ।
 
आवेदन के लिए कृपया jileraj@gmail.com पर मेल करें  अपनी इच्छा प्रकट करें। एक लौट के मेम्बर पूरे होने के बाद आपको धन के लिए संपर्क किया जायेगा कृपया तब विश्वास न तोड़े ।
 
हमारा मकसद बौध धम्म का प्रचार है पर ये भी एक कडवा सच है की धन के  ये नहीं हो सकता । हम ये भी जानते हैं की अजनबी को धन देना एक विश्वास और अविश्वास का मुद्दा है । यदि आप ट्रस्ट में न देना चाहे तो   ट्रस्ट का ये काम आप लोग अपने खास विश्वस्निये दोस्त के साथ मिल कर भी कर सकते हो ।
 
 
ध्यान रहे अगर आप सौ रूपए कमाते हैं तो उसमें से अगर 5 रूपए धम्म संगठन पर खर्चा नहीं किया तो  पूरे  बचाने  के चक्कर में वो दिन दूर नहीं जब पूरे 100 रुपये छीनने वाले सामने होंगे ।
 
ध्यान रहे :
 
धन से धर्म चलता है, धर्म से संगठन चलता है और संगठन से सुरक्षा होती है और सुरक्षा ही सर्वोपरि जरूरत है, बाकि की सभी चीज़े जैसे रोटी,कपडा,माकन,शिक्षा,संसाधन,संतान अदि आत्म  सुरक्षा के बाद ही आते हैं ।
 
बुद्धा धम्म को हम नहीं बढेंगे तो कौन बढ़ायेगा|नीरसता और अलास्ये त्यागो कुछ तो करो

अलसस्स कुतो सिप्पं,
असिप्पस्स कुतो धनं।
अधनस्स कुतो मित्तं,
अमित्तस्स कुतो सुखं।
असुखस्स कुतो पुञ्ञंण,
अपुञ्ञसस्स कुतो वरं॥ बर्मीस भिक्खु छक्किभिन्दिसिरि के ग्रन्थ लोकनीति से उद्धृत

भाव : आलसी व्यक्ति को शिल्प अर्थात् उद्यमी कला तथा परिश्रम की प्राप्ति नहीं होती। शिल्प रहित व्यक्ति को धन की प्राप्ति असंभव है। धनहीन के मित्र नहीं होते और मित्रहीन व्यक्ति सुखी नहीं रहता। बिना सुख के पुण्य नहीं मिलता तथा पुण्य रहित मानव श्रेष्ठ नहीं कहलाता। सार यह है कि आलस्य सभी वस्तुओं को नष्ट कर देता है। भगवान् बुद्ध का अन्तिम सन्देश भी अप्रमाद रहित कार्य करने हेतु प्रेरित करने वाला था। (वयधम्मा संखारा, अप्पमादेन सम्पादेथ। महापरिनिब्बानसुत्त) अतः अब समय है इस तन्द्रा तथा आलस्य को त्यागकर अपना दीपक स्वयं बनने की। (अत्त दीपो भव।)

 

इसके अलावा ऐसे बाहर के कई संगठन / प्रकाशक हैं जो बुद्ध साहित्य से जुडी किताबों का निशुल्क वितरण का काम करते हैं , उनसे संपर्क किया जा सकता है । ऐसे ही ताईवान की एक संस्था है , “ The Corporate Body of the Buddha Educational Foundation, Taiwan ” जो अंगेजी के अलावा हिन्दी और अन्य कई भारतीय भाषा में पुस्तके छापती और वितरित करती है। डा अम्बेडकर की “ भगवान बुद्ध और उनका धम्म “ मुझे इसी संस्था से निशुल्क प्राप्त हुय़ी थी , इसके अलावा और ही कई पुस्तकें मैं यहाँ से मँगा चुका हूँ ।

“ The Corporate Body of the Buddha Educational Foundation, Taiwan ” की साईट पर जाने के लिये http://www.budaedu.org/en/book/ पर जायें । कम संख्या मे व्यक्तिगत रूप से मगाने के लिये आन्लाइन फ़ार्म भरें और अधिक संख्या के लिये फ़ैक्स/मेल/ से संपर्क करें जिसका विवरण इनकी साइट पर उपलब्ध है ।

हिन्दी / पालि/और अन्य भारतीय भाषाओं में पुस्तकों की लिस्ट http://www.budaedu.org/en/book/II-08main.php3 पर उपलब्ध है । इसके अलावा अगर आप कम्पयूटर पर pdf के जरिये पढना चाहते हैं तो कुछचपुस्तकों को सीधे अपने सेट मे डाउअनलोड भी कर सकते हैं । इसके लिये http://www.budaedu.org/ebooks/6-IN.php पर जाये । हाँ , डा अम्बेडकर की “ भगवान बुद्ध और उनका धम्म “ पुस्तक pdf में उपभ्ध नही है , इसको सीधे फ़ार्म भरकर ही मँगाया जा सकता है ।

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