अम्बेडकर माह मनाओ , जन जागृति लाओ//14 april Ambedkar Jayanti should be National Holiday


अम्बेडकर माह मनाओ , जन जागृति लाओ।
महोदय
जैसा की आप जानते है की इस देश में SC /ST , OBC एवं अल्पसंख्यक तथा महिलाओ को सामाजिक न्याय दिलाने वाले बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर के जन्म दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों के कारण भारतीय समाज में अधिकारों और कर्तब्यों के प्रति जागरूकता200px-Dr_Bhimrao-Ambedkar आई तथा बौद्ध धम्म का पुनरुत्थान हुआ और भारतीय संविधान के आलोक में लोकतंत्र का उत्तरोत्तर विकास हो रहा है , जब एक दिन के कार्यक्रम से समाज में इतनी बड़ी जागरूकता आ सकती है तो अगर प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह में लगातार 30 दिन बाबा साहेब के विचारों को आधुनिक चुनौतियों के सन्दर्भ में समाज के सामने रखेंगे तो निश्चित रूप से समाज में समता एवं जागरूकता का संचार होगा।
अभी इस देश में वर्ण व्यवस्था पूरी तरह हावी है ,लगातार अगर हमने अपनी प्रन्संगिक मांगो को समाज के सामने नहीं रखा तो हमें कमजोर समझकर हमारा उत्पीडन जरी रहेगा . अभी वर्ण व्यवस्था का खात्मा होना शेष है, सेना में आरक्षण अभी नहीं मिला है, प्रमोशन में आरक्षण ख़त्म कर दिया गया , भारतीय न्यायिक सेवा का गठन कर न्यायपालिका में आरक्षण होना अभी शेष है। OBC का क्रिमिलयेर कांसेप्ट लागू करके रिजर्वेशन कम कर दिया गया , अल्पसंख्यको का प्रतिनिधित्व अभी तय नहीं हुआ है . महिलाओ के आरक्षण का मुद्दा अभी लटका हुआ है , सभी चीजे सरकारों के ऊपर नहीं छोड़ी जा सकती है

1951 में केंद्रीय कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देते हुए अपने पत्र में बाबा साहेब ने इस्तीफे का दूसरा कारण ओबीसी जातियों के लिए आयोग की नियुक्ति नहीं करना और ओबीसी की उपेक्षा करना बताया था. क्या ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों को लागू करने के लिए 1947 से 2013 तक राज्य या केन्द्र सरकार के किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया है?
बाबा साहेब के इस्तीफे के कारण ही दबाव में आकर पंडित नेहरू सरकार को ओबीसी के लिए ‘का…का कालेलकर आयोग’ का गठन करना पड़ा था. 1952 की लोकसभा में 52% से ज्यादा ओबीसी-समुदाय के सिर्फ 4.39% ही सांसद थे. यह बाबासाहेब ही थे जिन्होंने ओबीसी(शूद्र), एससी-एसटी(अति शूद्र) और महिलाओं के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया. उनको दलितों के उद्धारक के रूप में सीमित कर देना षड्यंत्र नहीं तो और क्या है?

शशक आंबेडकर को याद नहीं करना चाहती पर जनता भूलना नहीं चाहती दूसरी तरफ शशक जिसको याद करते करते हैं उसे जनता याद नहीं करना चाहती, अजीब विडंबना है| एक बहुत बढ़ी साजिश के तहत आंबेडकर और अम्बेडकरवाद को केवल दलितों तक सीमित रखने की कोशिश की जा रही है ताकि अम्बेडकरवाद देश की आम जनता को जग न दे| ओ बी सी वर्ग के लिए जितना बाबा साहेब ने किया किसी ने नहीं किया पर जैसा की भगवान् बुद्धा ने कहा है न “मोह में हम किसी की बुराई नहीं देख सकते और घृणा में किसी की अच्छाई” यही कारन है की मनुवाद द्वारा फैलाई बहुजनों के प्रति घृणा लोगों को अपने मसीहा को पहचानने और मानने से रोक रही है|

जब तक मिशनरी लोगो द्वारा समाज को जागरूक नहीं किया जायेगा तब तक हमारी अश्मिता खतरे में है . लखनऊ जनपद में 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक आंबेडकर माह के कार्यक्रम दिन,समय ,माह ,वक्ता , विषय बदलकर आयोजन किये जाते है। हम चाहते है कि इसी प्रकार से पुरे देश के हर जनपद में , हर गाँव में कार्यक्रम किये जाये और पढ़े लिखे लोगो, कर्मचारियों अधिकारियो एवं छात्रो के द्वारा सक्रिय भूमिका निभाई जाये ताकि पढ़े लिखे लोगो पर यह आरोप न लगे कि उन्होंने अपने समाज को धोखा दिया है

 

डॉ अम्बेडकर जयंती को राष्ट्रिय अवकाश घोषित कराने हेतु “हस्ताक्षर अभियान”
दिनांक:- 13-14 अप्रैल 201314 apr as nat hol
समय :- 13 अप्रैल की सुबह से 14 अप्रैल की शाम तक।
स्थान:- डॉ अम्बेडकर फाउंडेशन, जनपथ, नई दिल्ली।
हमने 1 लाख हस्ताक्षर कराने और लक्ष्य रखा है। कृपा इस आन्दोलन में सहयोग करे और इस मुहीम को सफल बनाये।
 
 

बाबा साहब आंबेडकर ने आपको क्या दिया ?
एडमिशन के लिए फॉर्म लेने गए, कैटेगिरी बताई और सस्ता फॉर्म लिया |
एडमिशन लेने गए, कैटेगिरी का सर्टिफिकेट लगाया और एडमिशन लिया |
जॉब लेने गए, कैटेगिरी का सर्टिफिकेट लगाया और जॉब ली |
और तो और
ये बेतुके स…वाल करने का हक भी बाबा साहब ने ही दिया है।
जब सब कुछ बाबा साहब ने दिया, तो बाबा साहब आंबेडकर के लिए लड़ाई से समय हम क्यों पीछे हटे ?
ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहीम को सहयोग करे और बाबा साहब के जन्मोत्सव को राष्ट्रिय अवकाश घोषित कराये।
जय भीम जय प्रबुद्ध भारत,नमो बुद्धाय

आयोजक:-
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ़ इंडिया(DASFI)
Dr. Ambedkar Student Front of India (DASFI)
वेबसा…इट :- www.dasfi.in

संपर्क करे :-
संजय बौद्ध
राष्ट्रिय अध्यक्ष, DASFI.
मो :- 9802402395
ई-मेल :- sboddh@gmail.com

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