क्या कोई ईश्वर है भी ? ….बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये


क्या ईश्वर है ?स्वामी विवेकानंद के अनुसार इश्वर को सर्वशक्तिमान,सर्वज्ञ, सर्वव्याप्त, दयालु, न्यायकर्ता ,होना चाहिए अगर इश्वर में ये गुण नहीं तो वो इश्वर नहींअब आइये इन गुणों से इश्वर को जानने का प्रयास करते हैं की क्या इश्वर में ये गुण है , सबसे पहले हम इश्वर के सर्वशक्तिमान वाले गुण की विवेचना करते हैं , क्या इश्वर सर्वशक्तिमान है , इश्वर के सर्वशक्तिमान होने का अर्थ है की उसके पास इतनी शक्ति हो की कभी भी कुछ भी कर सकता है ,

लेकिन विश्व के इतिहास में इश्वर ने कभी भी कुछ भी नहीं किया , उसी के नाम पर कितने ही कबीले आपस में लड़-लड़ कर नष्ट हो गए , हजारों सालों से आज तक उसी के नाम पर इंसान ,इंसान से जुदा होकर लड़ रहा है , देश ,देश से जुदा होकर लड़ रहा है कहाँ है इश्वर और उसकी महाशक्ति ,

साम्राज्यवादियों ने शताब्दियो तक सैंकड़ो देशों के करोड़ों इंसानों को गुलाम बना कर रखा, शताब्दियो तक सैकड़ों पीड़ियो ने अपनी हड्डियों तक गला दीं इनकी गुलामी में,कहाँ था इश्वर और उसकी महाशक्ति

हिटलर ने ६ करोड़ इंसानों का क़त्ल किया क्या हिटलर से कमजोर था इश्वर , अमेरिका ने जापान पर अपने एटम बमों द्वारा हमला कर लाखों को क़त्ल किया हजारों को अपंग बनाया , तब क्या अमेरिका के अटमबमों को रोकने की शक्ति इश्वर में नहीं थी ,अगर शक्ति थी तो रोका क्यूँ नहीं

चंगेज खान, हलाकू, तैमूर लंग, हिटलर , जिन्होंने करोड़ों इंसानों का खून बहाया , करोड़ों औरतों ,बच्चों को अनाथ, बेसहारा,और बेघर करने वाले इतिहास के इन महान अत्याचारियो को ईश्वर क्यूँ नहीं रोक पाया , शताब्दियों तक इनके अत्याचारों से उत्पीडित ,व्यथित, इंसानों पर उसे दया क्यूँ नहीं आई

अरे कैसा निष्ठुर इश्वर है जो आंसुओं के अथाह समुन्दर को देखकर भी तठस्थ बना रहा , क्यूँ नहीं अपनी महाशक्ति का प्रयोग किया ,क्या उनसे कमजोर था ,या उनसे डर गया था ऐसा कमजोर और डरपोक इश्वर सर्वशक्तिमान तो क्या दयालु भी नहीं हो सकता ,बल्कि उसका नाम तो चंगेज खान ,हलाकू,तैमूर,और हिटलर के साथ ही जोड़ने लायक है, अगर वो है तो…..

क्यूंकि इन सबसे सर्वशक्तिमान होते हुए भी उसने इन्हीं का साथ दिया या सिर्फ मूकदर्शक बन के बस देखता रहा , क्या इसलिए की बाद में न्याय करेगा ? अरे बाद में मिला न्याय क्या किसी अन्याय से कम है ?जब तुम्हे न्याय करना था तब तुम सोते रहे और कहते हो की बाद में देखेंगे , नहीं चाहिए तुम्हारी झूठी तसल्ली, और ना ही तुम्हारे जैसे किसी इश्वर की हमें जरूरत है जो शक्तिहीन हो, निर्दई हो, और अन्याई हो

क्या ऐसा इश्वर जो शक्तिहीन, निर्दई, और अन्याई हो वो सर्वज्ञ , या सर्वव्याप्त हो सकता है , अगर वो सर्वज्ञ और सर्वव्याप्त हुआ तो ये दुनिया के लिए अभिशाप ही सिद्ध होगा , लेकिन शुक्र है की वो सर्वज्ञ और सर्वव्याप्त नहीं है

कैसे आइये देखते है – अगर वो सर्वज्ञ है तो जब कोई दुखों से व्यथित होकर आत्महत्या को मजबूर होता है तो क्यूँ नहीं वो सर्वज्ञ होने का परिचय देते हुए उसके मरने से पहले ही उसके दुखों को दूर कर देता , उसकी आर्थिक सहायता करता या उसके क्लेशों को पहले ही जान कर उसका समाधान कर देता , जिससे उसके पीछे उसके बच्चे अनाथ न होते ,इसकी बीवी को बिधवा होने का दर्द न सहना पड़ता

देश में ५०-५५ किसान प्रतिदिन आत्महत्या करते हैं , अभी इसी साल जनवरी से अब तक केवल इन आठ महीनों में ही देश के केवल एक जिले में ५०६ किसानों ने आत्महत्या की , इश्वर सर्वज्ञ था तो क्यूँ नहीं इनकी समस्याओं का निदान किया , या इन्हें निदान का रास्ता बताया ,जिससे आज इनके पीछे दुखी लाखों लोग बर्बाद नहीं होते ,क्या उसे इसका पता नहीं था, था तो क्यूँ बेमौत मरने दिया इन्हें ?

क्या ऐसा इश्वर जो शक्तिहीन ,निर्दई,अन्याई,अज्ञानी हो वो सर्वव्याप्त हो सकता है ,नहीं कभी नहीं, प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में १० लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में बेमौत मारे जाते हैं , लाखों औरतों का प्रतिवर्ष बलात्कार होता है इनमें से हजारों औरतों को बलात्कार के बाद बेरहमी से मार दिया जाता है , दूधपीते बच्चों तक से बलात्कार होते हैं ,दहेज़ के लिए कितनी ही औरतों को जिन्दा जला दिया जाता है , पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष लाखों लोग आतंक का शिकार होते हैं , करोड़ों जिंदगियां नालों, फुटपाथों और झुग्गियों में सड़ रहीं हैं, प्रतिवर्ष करोड़ों बच्चे कुपोषण का शिकार होकर मर रहे हैं,

कहाँ हैं वो सर्वव्याप्त ईश्वर क्या उसे ये दिखाई नहीं दे रहा है या दीखते हुए भी वो इतना असहाय है की कुछ कर नहीं सकता , ऐसे अंधे और असहाय ईश्वर की हमें कोई आवश्यकता नहीं जो सर्वव्याप्त होते हुए भी कुछ न कर सके

समयबुद्धा ने कहा  है : “धर्म और इश्वर वो औज़ार और साधन है जिससे  सत्ताधारी लोग आम जनता को एक विचार मत में पिरो कर अपनी सत्ता में उनका विश्वास बनाये रखते हैं, आम जनता कि इससे बस इतना भला होता है कि उसकी कौम को सत्ताधारी से सुरक्षा मिल जाती है”
शकील प्रेम “अनार्य’
shakeel.prem@gmail.com

7 thoughts on “क्या कोई ईश्वर है भी ? ….बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये

  1. Who Is VivekaNand ????

    By Name (Shakil) seems u are / were Muslim!!!

    Best Difination of Allah is in Quran-

    In Quran- Surah- Ikhlas- (Surah No-112)

    Say: He is Allah, the One and Only! Allah, the Eternal, Absolute; He begetteth not nor is He begotten. And there is none like unto Him.

    Allah has given all Humans to Power of Choice, and told (In Quran) and do what ever they want / Can (abe to do).

    On the day of Judgement he Do all the things whatever u asked in this above article.

    I requested to u plz read Quran and try to understand it Bro.

    hi mojahid,

    It is strange you dont know vivekananda, Plz look outside ISLAM the is world full of different belief and thinkings.

    Thanks for you comments and intrest in seeking ultimate truth , If you really want to understand religion and god then you must first understand Buddha’s PRATITASAMUTPAAD (patichyasamutpad) siddhanta Theory. Buddhism never ask anybody to agree with its theory , they just say it is available if you wish you go through with it and if you like accept it. Buddhism in not a religion its a path which anybody can use to make his life more meaningful, Religion is just group of people with common set of thinking.

    Just remember god is belief and belief is god and nothing else.

    Take care..

  2. ईशवर है या नही ? इस प्रशन पर भगवान बुद्ध प्राय: मौन रहे । अनाथपिण्डक के साथ चर्चा करते हुये श्रावस्ती मे बुद्ध ने अनाथपिण्डक को कुछ इस तरह समझाया – “ यदि यह सृष्टि किसी ईश्वर द्वारा बनाई गई होती , तो इसमे कुछ भी परिवर्तन न होता , कुछ भी वितुष्ट नही होता , दु:ख दर्द नाम की कोई चीज न होती । सही या गलत कुछ न होता । क्योकि पवित्र और अपवित्र सभी चीजों के मूल में वही होता । यदि दु:ख और सुख , प्रेम और घृणा जो सभी प्राणियों के चित्त मे निवास करती है ,ईशवर की कृति होती , तो उसी ईशवर मे भी उस दुख सुख का निवास होना चाहिये , प्रेम और घृणा का घर होना चाहिये । और यदि उस ईशवर मे भी यह सब कुछ है तो उसे परिपूर्ण कैसे मान सकते है ? यदि ईशवर सभी प्राणियों का निर्माता है और सभी प्राणियों को उसके सामने सर झुकाये खडा रहाना है तो शील के अभ्यास का क्या प्रयोजन ? पुण्य पाप करना समान होगा , क्योंकि सभी कर्म तो ईशवर की कृति हैं और अपने कर्ता की दृष्टि मे वे समान ही होगें । और यदि यह मान लिया जाये दु:ख सुख का कारण और भी होगा , जिस का कारण ईशवर नही है तब जो भी विधमान है उस सभी को बिना कारण के उत्पन्न क्यों न मान लिया जाये ? फ़िर यदि ईशवर को कर्ता माना जाये तो प्रशन यह उठता है कि उस की रचना सोद्देशय है या निरुद्देशय ? यदि यह माना जाये कि सोद्देशय तो ईशवर को परिपूर्ण नही माना जा सकता , क्योंकि सोद्देशय का मतलब है किसी की इच्छा की पूर्ति । इसलिये ईशवर का जि विचार है वह तर्क की कसोटी पर सही नही उतरता ।

    ( अशवघोष का बुद्ध चरित )

    • इश्वर की जिस शक्ति की बात लोग करते हैं वो वास्तव में मानव की अपनी इच्छा शक्ति मात्र है ..

      • अगर इश्वर नहीं तो आप सकती हिन् शून्य को कैसे मानते हो…

      • In Buddhism path . question of God does not matter, If you believe in god or dont believe in god, Buddhism path is equally benificial for you. Buddha himself never ever proposed or supported ‘GOD CONCEPT’. With Buddhism you can be happy and enlighted even without believing in GOD THEORY

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