बहुजन शब्द का क्या अर्थ है ? ओ0 बी0 सी0 (OBC) वास्तव में कौन हैं ?


“बहुजन” का अर्थ है वो सभी लोग जो इस देश में बहुतायत में रहे हैं जिन्हें आज अनुसूचित-जाती, जनजाति, अतिपिछड़ा वर्ग एवं कन्वर्टेड माएनोरिटी के नाम से जाना जाता है|अर्जुनसेन गुप्ता कमिटी के पुराने आंकड़ों के अनुसार देश में कुल 84 करोड़ गरीब हैं जिसमें 77 प्रतिशत लोग बहुजन वर्ग के हैं| रिपोर्ट ने इन्हें सांस्कृतिक रूप से ‘पिछड़ी’, ‘सामाजिक भेदभाव की शिकार’ और ‘शिक्षा वंचित’ के रूप में संबोधित किया गया है| (देखें 21.07.2001 नवभारत टाएम्स के सम्पादकिये में स्वतंत्र जैन का लेख) | बहुतायत में होते हुए भी अपने ही देश में बेहाल जीवन जिया और आज भी जी रहे हैं, क्योंकि ये लोग संगठित नहीं है, लगभग 6000 से भी ज्यादा जातियों में बंटे हुए हैं| हर जाती का अपना अलग झंडा है, झंडा से यहाँ अर्थ है अपना देवी देवता,पंचायत या ऐसा कुछ भी जिसके नाम पर वो जाती एक जगह इकट्ठी हो जाती है|

भारत में जो ओ.बी. सी. वर्ग है वह दरअसल वर्ण व्यवस्था में शोषित वर्ण में ही आते हैं |इनकी आबादी भारत में 50 % से ज्यादा है, ब्रह्मण धर्म (हिन्दू धर्म) का मूल आधार यही वर्ग है| एस. सी. वर्ग तो अस्पृश्य के अंतर्गत आते है और एस.टी. तो इन सब से बाहर| आप ही सोचें यह कैसा धर्म, कैसा ईश्वर है, कैसा इसका सिद्धांत है जो आपसी फूट और बटवारे की बातें करता है | ओ.बी. सी. वर्ग अभी तक सच्चाई से अनभिज्ञ है उनकी भी क्या गलती जिस कौम का

2095633020_262520a10dइतिहास ही नस्ट कर दिया गया हो वो कैसे और क्या समझें| दूसरा इन सभी को वर्ण व्यस्था में निचा रखने के बावजूद थोड़ी आज़ादी भी दी गई थी| जिसे दुःख नहीं वो संगर्ष नहीं करता इसीलिए वर्ण व्यस्था में जिस जाती को सबसे ज्यादा प्रताड़ित किया गया वही आन्दोलन हो रहा है|क्या ओबीसी का कहीं कोई आंदोलन दिख भी रहा है ? सवर्ण फल फूल रहे हैं और ओबीसी पुरोहितवादी षडियन्त्र से बेखबर तन मन धन से उनका साथ दे रहे हैं| सदियों की नींद हैं टूटने में समय तो लगेगा ही और जब वो जानेंगे तब सब झंडे छोड़ कर केवल एक स्थाई और सच्चा झंडा बौध धर्म के नीचे सभी संगठित हो जायेंगे | असल में जो अम्बेदिकर मिशन से जुड़ जाता है वही सब कुछ जान जाता है| जो जान भी गए हैं वो सत्ताधारी के साथ देने को मजबूर है क्योंकि ये जिन्दगी का नियम है की ये दुनिया केवल विजेता का साथ देती है| इनका साथ चाहिए तो वेजेता बनो|

बहुजन लोग वो लोग हैं वर्ण व्यस्था ने जिनके हिस्से केवल काम ही काम दिया,उनको अपने ही देश में गुलाम बना दिया| कमाल देखिये की हजारों साल तक ऐसी अमानविये वर्ण व्यस्था को लागू करने वाले सत्ता की मलाई लूटते रहे और इस देश के बहुजन गैर बराबरी से भरा नर्किये जीवन बिताते रहे|जो सफाई करता था वो पीढ़ी दर पीढ़ी हजारों साल सफाई ही करता रहा, जो गाये भैंस चराने और दूध का धंधा करता था वो हजारों साल जानवर ही पालता चरता रह गया,जो कपडे धोता था वो कपडे ही धोता रह गया, भारत की परास्त राजा-प्रजा को तो अछूत ही बना दिया अदि सूची बहुत लम्बी है|जब डॉ आंबेडकर का संविधान लागू हुआ उसी दिन के बाद से स्तिथि बदली है| आज बहुजन भी राजा बनने की कोशिश कर रहा है और बन भी रहा है| आज किसी वर्ग विशेष को कानूनी रूप से देश के संसाधनों पर एकाधिकार करने का हक नहीं है| क्या ओ0बी0सी० इस बात का अहसास है या अब भी वो यही कहते रहेंगे की सफाई करने वाले से कपडे धोने वाला ऊँचा है, फल फूल की खेती करने वाले से जानवर चराने वाला ऊंचा है, ये ऊंचा है वो नीचा है,इससे घृणा करो उसका इतना सम्मान करो की अपना सब कुछ दे दो अदि अदि|कब समझेंगे की ये सब फुट डालो और शाशन करो की नीति है, हम सब शुरू से अंत तक भारत की संतान हैं आपस में भाई हैं, भारत को स्वर्ग बनाने के लिए हमें ही एकता पर जोर देना है जाती तोड़ो देश जोड़ो, वापस अपने घर बौध धम्म में लौट चलो |

dalit tyago

अफ्रीकन अश्वेत क्रांति के महानायक श्री मेल्कॉम ने कहा है “अगर हम सतर्क नहीं रहे तो तो मीडिया आपको दबाये गए लोगों से नफरत करने वाला और उनका दबाने वाले को चाहने वाला बना देगा|” ध्यान रहे हमारा व्यक्तित्व जिन तत्यों से बना है जरूरी नहीं वे सभी सत्ये हों  बल्कि इस बात से बनता है की हम किस माहौल  में पैदा  हुये और पले- बढे| जरा सोचो आज मीडिया में भगवन बुद्ध के देश में भगवन बुद्ध की बात क्यों नहीं हो रही , सम्राट अशोक जिसके काल में भारत का स्वर्णिम युग था उसकी बात क्यों नहीं हो रही|जिस देश में रोज हजारों लोग भूखे सो तो जाते हैं पर सुबह का सूरज देखने को नहीं उठते उसमें दुनिया के १० सबसे अमीर लोग भी हों ये कैसा अन्याय है | आप वही तो जानोगे और उसी बात पर बहस करगे न जो आपको इस मीडिया और इस शिक्षा व्यस्था ने सिखाया है|अगर वाकई अपना और समस्त मानव सभ्यता का भला करना चाहते हो बौध धम्म की तरफ लौट चलो बस इतना ध्यान रहे की अपने स्लेट पर से पहले जो भी लिखा है उसे मिटा के नए सिरे से सत्य को जानो|

ओ0 बी0 सी0 के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर उपलब्ध हिंदी पुस्तक पढ़ें

http://books.google.co.in/books?id=sM-1MNcR9AMC&printsec=frontcover&dq=Kya+Hai+O.B.C.&hl=en&sa=X&ei=rhL4UOD3I8j7rAfFloHIBA&ved=0CDYQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false

भारत की 80% बहुजन असल में बौध जनता है जिसे मनुवादियों ने षडियंत्र के तहत अलग अलग महापुरुष देकर अलग अलग खूंटे से बांध दिया है| इसे हमारे लोग समझ नहीं पा रहे हैं, जब हम बुद्धा की बात करते हैं तो वे वाल्मीकि, रविदास, कबीर अदि की बात करते हैं, निसन्देह ये भी बुद्धा के समतुल्य हैं, पर जब तक हम एक सर्वमान्य सिद्धांत को नहीं पकड़ेंगे एक झंडे के नीचे नहीं आ पाएंगे|आपसे प्रार्थना है की मानो या न मानो पर धम्म को जानो और इस झंडे के नीचे संगठित हो जाओ|

 

…समयबुद्धा

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