बुद्ध ने कहा, भूखा आदमी धर्म को नहीं समझ सकता


धर्मकीर्ति
एक समय बुद्ध पांच सौ भिक्षुओं के साथ भ्रमण करते हुए आलवी नगर पहुंचे। वहां के निवासियों ने बुद्ध का बड़ा आदर-सत्कार किया। एक दिन उन्होंने बुद्ध को भिक्षु संघ सहित भोजन के लिए आमंत्रित किया। नगर का एक गरीब किसान भी बुद्ध के नगर में आने की बात सुनकर, उनके पास धर्म का उपदेश सुनने जाना चाहता था, किंतु सुबह ही उसका एक बैल घास चरते-चरते घर से दूर चला गया। किसान यह देखकर परेशान हो गया। वह बिना कुछ खाए जल्दी से उसे खोजने निकल पड़ा, ताकि बैल घर लाने के बाद, उपदेश सुनने बुद्ध के पास जा सके।india povertyदोपहर हो गई। अंतत: अपना बैल उसे एक तालाब के पास चरता हुआ मिला। वह बड़ा खुश हुआ। उसे घर ला कर दूसरे मवेशियों के साथ बांधने के बाद वह झटपट धर्म-उपदेश सुनने चल पड़ा। सभा में उसने बुद्ध की वंदना की और एक ओर बैठ गया। लेकिन भूख और थकावट उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। इसी कारण उपदेश सुनने में भी उसका मन नहीं लग रहा था।बुद्ध किसान का चेहरा देखकर समझ गए कि वह बहुत भूखा है। उन्होंने तुरंत अपने एक भिक्षु को बुला कर कहा, इस किसान को भोजन खिलाओ। उसने किसान को पेट भर भोजन कराया। उसके भोजन कर लेने के बाद ही बुद्ध ने अपना उपदेश पुन: प्रारंभ किया। उपदेश सुनकर उसे परम ज्ञान की प्राप्ति हुई।किसान के जाने के बाद भिक्षु आपस में चर्चा करने लगे, भगवान के कार्य देखो, आज उन्होंने एक गरीब किसान को देखते ही भोजन कराया। बुद्ध ने उनकी बातें सुनकर कहा, ‘हां भिक्षुओं! वह बहुत भूखा था। भूख का सताया हुआ आदमी धर्म को नहीं समझ सकता। इसलिए पहले मैंने उसे भोजन करवाया।’ बुद्ध ने कहा, ‘भिक्षुओं! भूख सबसे बड़ा रोग है।’

अपनी कठोर तपस्या के दौरान बुद्ध इस बात का अनुभव स्वयं कर चुके थे कि भूख मनुष्य को शारीरिक और मानसिक कमजोरी प्रदान करती है। बुद्ध ने दुख से निवृत्ति का मार्ग खोजने के लिए कठोर तपस्या की। उन्होंने एक फली खाकर दिन बिताया। बाद में एक सरसों का दाना व एक चावल खाकर दिन पूरा किया। जब वे एक ही दाना खाकर गुजारा करने लगे, तो उनका शरीर बहुत कमजोर हो गया। शरीर का मांस सूख कर हड्डियों से सट गया।

आज देश में करोड़ों लोग भूख से पीड़ित हैं। भूख के कारण लाखों लोग तरह-तरह की बीमारियों से पीड़ित हैं। पेट की आग बुझाने के लिए लोग अनेक प्रकार के अपराध, जैसे-चोरी, डकैती, हत्या करने से भी नहीं चूकते। जुआ, जेब तराशी, सट्टा एवं चैन स्नैचिंग जैसे अपराध भी भूख के कारण ही बढ़ रहे हैं। स्मैक, अफीम, गांजा एवं अवैध शराब का धंधा भी किसी हद तक भूख से ही जुड़ा हुआ है, जिससे हजारों लोग बिना मौत मर रहे हैं। भूख को शांत करने के लिए अनेक औरतें देह-व्यापार जैसे घिनौने काम में लगी हुई हैं।

भारत में भूख गंभीर समस्या बन चुकी है। समाचार पत्रों में अक्सर देखा जाता है कि भूख से पीड़ित हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कई व्यापारी व्यापार में घाटा हो जाने के कारण भूखे रहने लगे, अंत में उन्होंने परिवार सहित जहर खा लिया।

बुद्ध ने अनुभव किया कि मनुष्य का जीवन अमूल्य है। इसी जीवन में रहकर मनुष्य जीवन के उद्देश्यों की प्राप्ति कर सकता है।

भूख की समस्या के निदान के लिए बुद्ध ने दस पारमिताओं में से पहली पारमिता दान करने की बात कही है। इसके अलावा मनुष्य को मनुष्य के प्रति मैत्री भावना एवं करुणा का भाव रखने और भौतिक पदार्थों के प्रति उपेक्षा रखकर अपरिग्रह का पालन करते हुए त्यागी बनने की बात की है। इसके अभ्यास से भूख को किसी हद तक शांत किया जा सकता है।

बुद्ध ने राजा के कर्त्तव्य को बताते हुए कहा है कि राजा को चाहिए कि भूख से पीड़ित लोगों के खाने की व्यवस्था करे। साथ ही साथ उन्हें आर्थिक सहायता देकर व्यवसाय के लिए भी प्रोत्साहित करे। इन दोनों ही तरीकों से भूख पर विजय पाई जा सकती है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s