25-May-2013 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना:- आज हमारा सबसे बड़ा त्यौहार बुद्ध पूर्णिमा है आओ जाने कि- बौद्ध धम्म क्या है,ये अन्य धर्मों से कैसे अलग है?…समयबुद्धा


बौध धम्म क्या है,ये अन्य धर्मों से कैसे अलग है ?biddha outlineBuddhism_Dharma_Chakra

‘बौद्ध’ शब्द बुद्धि से बना है जिसका अर्थ है “जागृत मस्तिष्क” जो सत्य को सत्य और असत्य की असत्य की दृष्टी से देखने में सक्षम हो|ये वो दर्शनशास्त्र है जिसकी शुरुआत लगभग ५६३ बी0 सी० में जन्मे महामानव सिद्धार्थ गौतम ने ३५ साल की उम्र में बोधिसत्व की प्राप्ति के बाद अपने अनुभव को देशना स्वरुप संसार को दिए|ये धम्म मार्ग पिछले ढाई हज़ार से भी ज्यादा सालों से मानव का कल्याण करता आ रहा है और आगे भी हमेशा करता रहेगा क्योंकि इसका मूल ज्ञान अन्य धर्मों की तरह समय के साथ पुराना और अस्वीकार्य नहीं होता| जनसँख्या की दृष्टी से कहें तो आज सरे संसार में बौद्ध धम्म को मानने वाले तीसरे नम्बर पर हैं, लगभग चार सौ मिलियन लोग इससे  लाभान्वित हैं|पहले ये एशिया महाद्वीप में ज्यादा प्रचलित था इसीलिए बुद्धा लो लाइट ऑफ़ एशिया भी कहते थे,पर अब इसे यूरोप आस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे उन्नत देश तेज़ी से अपना रहे हैं क्योंकि उनमें बौद्ध धम्म को समझने के लिए  वैज्ञानिक मानसिकता का प्रचार उपयुक्त मात्र में उपलब्ध है|DCP_0669

बौद्ध धम्म असल में धर्म शब्द  की परिभाषाओं से कहीं आगे का तत्व ज्ञान  है इसी लिए इसे हम धर्म न बोलकर धम्म बोलते हैं जिससे की इसे अन्य धर्मों के समतुल्य न समझा जाए । बौद्ध धम्म को हम धर्म इसलिए नहीं कहते क्योकि ये अन्य धर्मों की तरह केवल आस्था, गुटबाजी, पुरोहितवाद,  ईश्वरवाद और उनसे जुडी मान्यताओं पर नहीं चलता| इसका लक्ष्य मानव में ऐसे मानसिक योग्यता पैदा करना है जिससे वो असत्य को पहचान और नकार सके, सत्य, प्रमाणिकता और तर्क की क्षमता विकसित करता है| बौध धम्म ऐसी कसौटी या सन्दर्भ हवाला (रेफरेंस) का काम करता है जिसकी सहायता से व्यक्ति मानव संसार में व्याप्त हर तरह के इश्वरिय सिद्धांत या पैगम्बर के सन्देश का सही आंकलन करके कर्मकांड, परंपरा, धर्मादेशो, मान्यताओं अदि को परख सके चुन सके और नकार सके|

भगवान् बुद्ध ने कहा है: “तुम किसी बात को इसलिए मत स्वीकार करो क्योंकि ये पहले कभी नहीं सुनी,इसलिए मत स्वीकार करो क्योंकि ये सदियों से चली आ रही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये हमारे बुजुर्गो ने कही हैं,किसी चीज को इस लिए मत मानो की ये किसी धर्मग्रन्थ के अनुकूल है| है, किसी चीज को इस लिए मत स्वीकार करो क्योंकि कहने वाले का व्यक्तित्व आकर्षक है|किसी चीज को इस लिए मत सीकर करो क्योंकि ये स्वेव मैंने कही है|किसी चीज को मानने से पहले यह सोचो की क्या ये सही हैं,किसी चीज को मानने से पहले ये सोचो की क्या इससे आप का विकास संभव है, किसी चीज को मानने से पहले उसको बुद्धि की कसोटी पर कसो और स्वानुभव से हितकर जानो तो ही मानो नहीं तो मत मानो”KONICA MINOLTA DIGITAL CAMERA

बौध धम्म की ये विशेषता है की आप चाहे किसी भी धर्मिक समुदाय से सम्बन्ध रखते हो ये आपसे उसे छोड़कर उसे अपनाने को नहीं कहता|आप अपने समुदाय या धर्म में रहकर भी धम्म मार्ग से लाभान्वित हो सकते हैं|इसीलिए शायद बौध धम्म के लिए निम्न अंग्रेजी कहावत मशहूर है “Buddhism is not just for community it is for entire Humanity  ” अर्थात बौद्ध धम्म किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं ये तो सम्पूर्ण मानवता के लिए है|

सत्य और अहिंसा के मार्ग को दिखाने वाले भगवान बुद्ध दिव्य आध्यात्मिक विभूतियों में अग्रणी माने जाते हैं। भगवान बुद्ध के बताए आठ सिद्धांत को मानने वाले भारत समेत दुनिया भर में करोड़ो लोग हैं।
भगवान बुद्ध के अनुसार धम्म जीवन की पवित्रता बनाए रखना और पूर्णता प्राप्त करना है। साथ ही निर्वाण प्राप्त करना और तृष्णा का त्याग करना है। इसके अलावा भगवान बुद्ध ने सभी संस्कार को अनित्य बताया है। भगवान बुद्ध ने मानव के कर्म को नैतिक संस्थान का आधार बताया है। यानी भगवान बुद्ध के अनुसार धम्म यानी धर्म वही है। जो सबके लिए ज्ञान के द्वार खोल दे । और उन्होने ये भी बताया कि केवल विद्वान होना ही पर्याप्त नहीं है। विद्वान वही है जो अपने की ज्ञान की रोशनी से सबको रोशन करे। धर्म को लोगों की जिंदगी से जोड़ते हुए भगवान बुद्ध ने बताया कि करूणा शील और मैत्री अनिवार्य है। इसके अलावा सामाजिक भेद भाव मिटाने के लिए भी भगवान बुद्ध ने प्रयास करते हुए बताया था कि लोगों का मुल्यांकन जन्म के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर होना चाहिए । भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर दुनिया भर के करोड़ों लोग चलते है। जिससे वो सही राह पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाते हैं

यदि आप देश  की किसी भी धर्म कौम या झंडे से ज्यादा प्रेम करते हैं,

यदि आप समानता के पक्षधर हैं

यदि आप भारत की सभी समस्याओं की जड़ में पहुचना चाहते हो

यदि आप अपने जीवन में दुखों से मुक्ति चाहते हो

यधि आपको धार्मिक सत्य जानना है

तो बस बौध धम्म के सिधान्तों और साहित्य को एक बार कुछ समय दे दो मानना  न मानना बाद की बात है|

आज बौध धर्म का सबसे बड़ा नुक्सान ये बात कर रही है की ये दलितों का धर्म है जिसके वजह से इसे लोग समझने के लिए भी तयार नहीं जबकि ये वो मत है की इसे जो भी एक बार ठीक से समझ ले उसे फिर दुनिया में किसी भी धर्म के सिद्धांत खोकले लगते हैं।

भगवान् बुद्धा ने कहा है :

मोह में हम किसी की बुराइयाँ नहीं देख सकते और घृणा में हम किसी की अच्छाईयाँ नहीं देख सकते  

धम्म विरोधी अवसरवादियों द्वारा फैलाई गई घृणा के कारन आज आम जनता दुखी है पर दुःख दूर करने के स्रोत तक नहीं जाना चाहती।आपसे आग्रह है की एक बार इसे जानकार तो देखो मानना न मानना तो बाद की बात है|

बुद्ध पूर्णिमा (25-MAY-2013)पर विशेष

समयबुद्धा (बौद्ध दार्शनिक एव उपदेशक)

jileraj@gmail.com

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