इश्वर के काल्पनिक सिद्धांत को अब बहुजन ही नहीं समस्त विश्व समझ रहा है


भगवान् बुद्ध ने कहा था – ईश्वर ने सृष्टि का निर्माण किया या नहीं – इस विषय पर विचार करना वैसा ही है जैसे किसी व्यक्ति को एक तीर आकर चुभ जाय तो वह उस तीर से हुए घाव का इलाज करने की बजाय यह सोचने लगे और पता करने लगे कि तीर कहाँ से आया?? किसने चलाया? किसने बनाया?? भगवान् ने कहा – सर्वं दुखं — यह संसार दुःख का एक समुद्र है .. इसमें रहते हुए यदि तुमने एक भी रोते हुए ह्रदय को हंसा दिया तो सहस्रों स्वर्ग तुम्हारे ह्रदय में विकसित होंगें.

आस्तिक कौन होता है ? जो व्यक्ति किसी अनदेखी अनजानी सत्ता के अस्तित्व को आँख मींच कर, बिना सोचे विचारे ही, दिमाग को बंद कर दिल से स्वीकार कर लेता है और तर्क नहीं करना चाहता है आस्तिक कहलाता है । वो किसी बात को इसलिए नहीं मानता है कि वो सही है बल्कि इसलिए मानता है कि और लोग उसको मानते है और इसमें उसका भय छिपा रहता है कि अगर वो अनजानी शक्ति के खिलाफ कुछ बोलेगा तो उसका अनिष्ट होगा और मरने के बाद भी उसको नर्क की भयानक यातनाये सहनी पड़ेंगी। किसी भी धर्म से जुड़ा व्यक्ति आस्तिक होता है
नास्तिक कौन है ? जो व्यक्ति किसी भी बात को तर्कों और विज्ञानं की कसौटी पर कसता है और आँख मींच कर किसी का अनुसरण नहीं करता है । किसी सर्वोच्च सत्ता के अस्तित्व में यकीन नहीं करता और अपनी बातो के समर्थन में तर्क देता है । बो दिल से नहीं दिमाग से सोचता है नास्तिक कहलाता है और नास्तिक का किसी धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं होता है…Ahibaran Singh

2000 वर्ष तक कोई भी इश्वर हमारी मदद करने को नहीं आया | किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा कि ये भी इन्सान है इनको भी जीने का अधिकार है | किसी भी इश्वर ने ये नहीं सो…चा कि इनको भी मैंने बनाया है फिर मै इनको मंदिर में प्रवेश करने से क्यों रोकूँ ? किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा कि इनकी भी आवश्यकताए है,इनको भी सुविधापूर्वक, सरल जीवन जीने का अधिकार है | किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा जिस पानी को पशु पी सकते है वो पानी इन इंसानों के पीने से कैसे अपवित्र हो सकता है ? किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा इनकी भी जरूरते है इसलिए इनको भी भविष्य के लिए धन और संपत्ति संचय200px-Dr_Bhimrao-Ambedkar करने का अधिकार है |किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा जो लोग गाय का मूत्र पीकर अशुद्ध नहीं होते है वो किसी इन्सान की छाया पड़ने से कैसे अपवित्र हो सकते है ? किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा कि इनको भी ऊपर उठने का अधिकार है और इनको भी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है ? किसी भी इश्वर ने ये नहीं सोचा कि जब ये धरती पशु पक्षियों और इन तथाकथित उच्च वर्ण के लोगो के मलमूत्र से अपवित्र नहीं होता है तो फिर इन लोगो के थूक और पदचाप से कैसे अपवित्र हो सकती है ? फिर उस इश्वर को मै क्यों मानु जिस इश्वर ने इंसानों में ही फर्क किया और इंसानों को ६७४३ से अधिक श्रेणियों यानि कि जातियों में बाँट दिया | जिस इश्वर ने ये नहीं सोचा सभी को समानता का अधिकार है और सबको आजादी से जीने का अधिकार है, उस इश्वर को मै क्यों मानू ? मै उस इन्सान को मानता हूँ जिसने इन सभी बातो को जाना और हमको हर तरह की से मुक्ति दिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया | उन्होंने सारा जीवन हमको पशु से इन्सान बनाने के लिए बलिदान कर दिया और हमको इन्सान बना कर ही दम लिया | मेरे इश्वर तो वही बाबा साहब है जिनकी वजह से मै आज आजाद हूँ | नकी वजह से मैंने शिक्षा प्राप्त की, वही मेरे इश्वर है | जिनकी वजह से मै आज सिर उठाकर चल सकता हूँ वही बाबा साहब मेरे इश्वर है और मै उन बाबा साहब को नमन करता हूँ

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