अहिंसा पर तथागत बुद्ध के विचार, हिंसा आवश्यक है वहाँ तथागत बुद्ध ने अनुमति दी थी


अहिंसा पर तथागत बुद्ध के विचार: –

तथागत बुद्ध हिंसा के खिलाफ थे , लेकिन न्याय के पक्ष में थे |जब क़भी न्याय के लिए, हिंसा आवश्यक है वहाँ तथागत बुद्ध ने अनुमति दी थी.

तथागत बुद्ध और सिंह सेनापति (वैशाली कमांडर) की बातचीत नीचे दी गई

सिंह सेनापति ने तथागत बुद्ध से पूछा

“भगवंत, अहिंसा के विचारों का प्रचार और प्रसार करते है,इसका मतलब भगवंत यह चाहते हैं कि अपराधियों को दंडित नहीं किया जाए ?
हमारे बच्चों की रक्षा, पत्नी के सम्मान , प्रतिष्ठा की रक्षा और संपत्ति की रक्षा के लिए हम युद्ध पर नहीं जाए ?
अहिंसा के नाम पर हम अपराधी से हानि और नुक़सान भुगते ? अगर युद्ध सत्य और न्याय के लिए है तो भी भगवंत सभी प्रकार के युद्ध को मना करते है ?

तथागत बुद्ध ने सिंह सेनापति को उत्तर दिया ”

तुम ने मेरी सलाह का गलत अर्थ लगाया है ,अपराधी को दंडित करना होगा लेकिन निर्दोष को मुक्त करना होगा.न्यायाधीश एक आपराधिक सज़ा देना हिंसा करना नहीं हैं,सज़ा कारण के लिए अपराधी के अपराध जिम्मेदार है. न्यायाधीश हिंसा के लिए के जिम्मेदार नहीं है ,केवल न्यायाधीश कानून लागू करता है.

जो मनुष्य न्याय , नैतिकता , सुरक्षा और आजादी के लिए संघर्ष  करता है वह हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं है ,शांति के सभी तरीके जब असफल होते है तब
जो युद्ध शुरू करते हैं, वह हिंसा के लिए जिम्मेदार है ,किसी भी स्थिति में दुष्ट विचारों के लोगों के सामने आत्मसमर्पण करने का नहीं.किसी भी स्थिति में दुष्ट विचारों के लोगों के सामने घुटने टेकना नहीं.

SOURCE: https://www.facebook.com/rajkamalbauddh/posts/10200185419866736?notif_t=close_friend_activity

 

आपके विरोधी तो इतने कुटिल हैं ही वो हिंसा और अन्याय को ही धर्म बताकर जनता का विश्वास अपने पक्ष में कर लेते हैं,बहुजनों को ये बात समझने की बहुत ज्यादा जरूरत है, हिंसा हिंसा है अन्याय अन्याय है कहीं भी किसी भी सच्चे धर्म   में इस जायज़ नहीं ठहराया जा सकता |

बौद्ध धर्म और बर्मा या मयन्मार राष्ट्रवाद के विषय में निम्न आर्टिकल जरूर पढ़ें

http://blog.sureshchiplunkar.com/2013/07/buddhist-terror-and-osama-of-myanmar.html

elephant dhamm chakra

समयबुद्धा का इस विषय में कहना है की

“बौद्ध संस्कृति में हम ‘हाथी’ को कई प्रकार के राजनेतिक एव धार्मिक चिन्ह के रूप में प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि हमारी हिंसा जंगल में हाथी की हिंसा के सामान है|जिस तरह हाथी मासाहारी जानवरों की तरह पहल करके हिंसा नहीं करता पर जब उसे छेड़ा जाए तो वो इतना हिंसात्मक हो जाता है की सब तहस नहस कर डालता है| उसी तरह भारत का  बहुजन या बौद्ध भी है पहल करके बिना वजह हिंसा नहीं करता|हाथी की हिंसा में ध्यान देने वाली बात ये है की उसको हिंसा की जरूरत इसलिए नहीं पड़ती क्योंकि उसकी ताकत का सबको अंदाजा होता है,ये बात हिरन पर लागू नहीं हो सकती|इसीलिए किसी ने सही कहा है की अगर शांति चाहिए तो युद्ध के लिए तयार रहो|”

3 thoughts on “अहिंसा पर तथागत बुद्ध के विचार, हिंसा आवश्यक है वहाँ तथागत बुद्ध ने अनुमति दी थी

  1. Pingback: आज की परिस्थिथि में आत्म सुरक्षा जरूरी है या करुणा और मैत्री ? | SAMAYBUDDHA-The Buddhist Philosopher

  2. i agree on ur information. yes buddha told that nonviolance means dont kill to any animal and dont angree and insult to any person without any reason.and do not take drink,nonveg,smoking and tobako also.it means that we r never weak we r strong but we have controlled our mind and we have calm mind and clean mind

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