धम्म भाषा पली में ‘भगवान’ शब्द का अर्थ इश्वर नहीं बल्कि जिसने तृष्णाओं को भंग कर दिया हो वह भगवान्‌ है…Dr Prabhat Tandon


धम्म भाषा पली में  ‘भगवान’ शब्द का अर्थ इश्वर नहीं बल्कि जिसने तृष्णाओं को भंग कर दिया हो वह भगवान्‌ है

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बुद्ध धम्म की सबसे बडी विशेषता उसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण है , बुद्ध धम्म परलोक वाद , ईशवरवाद और आत्मा की सत्ता मे यकीन नही करता । विशव मे फ़ैले अनगिन्त धर्मों मे से बुद्ध धम्म अपनी अलग छवि रखता है और यह छवि बुद्ध के वैज्ञानिक दृष्टिकोण में है । लेकिन फ़िर भी यह एक ताज्जुब  सा लगता है कि बुद्ध धम्म के अनुयायी गौतम बुद्ध को भगवान् की उपाधि देते हैं । यह उपाधि बुद्ध की उन शिक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है जिसमें उन्होनें कहा है :

न हेत्थ देवो ब्रह्मा वा , संसारस्सत्थिकारको ।

सुद्ध्धम्मा पवतन्ति , हेतुसम्भार्पच्चया ॥

(विसुद्धि २१६८९,पच्चयपरिग्गहकथा )

संसार का निर्माण करने वाला न कोई देव है न ब्रम्हा । हेतु-प्रत्यय यानि कारणॊं पर आधारित मात्र शुद्ध धर्म प्रवतरित हो रहे हैं ।

तुम्हेहि किच्चमातप्पं , अक्खातारो तथागता ॥

धम्मपद २७६, मग्गवग

मैं तो मार्ग आख्यात करता हूँ, तुम्हारी मुक्ति के लिये तपना तो तुम्हें ही पडेगा ।

ईशवरीय सत्ता के अभाव में मानव जीवन कैसे अपनी जीवन यात्रा आरम्भ करे । बुद्ध ने इस पर कहा कि तुम स्वालम्बी बनॊ । (अत्तदीपा भवथ अत्तसरणा ) । तुम ही अपने स्वामी हो ( अत्ता हि अत्तनो नाते ) । किसी भी पर्वत , वन , आराम , वृख्श , चैत्य आदि को देवता मानकर उसकी शरण मे मत जाओ क्योंकि इनसे दु:ख मुक्ति संभव नही है ।

भगवान् शब्द का शाब्दिक अर्थ

आम भाषा में भगवान शब्द का अर्थ है ईशवर या परमात्मा , सर्वशक्तिमान , सृष्टि का रचयिता , पालनहारक और इसका संहार करने वाला जिसका नाम जपने से , ध्यान लगाने से वह प्रसन्न हो जाता है और भक्तो के पापों को क्षमा करके उन्हें भवसागर से पार निकाल लेता है ।

लेकिन फ़िर बुद्ध अनुयायियों द्वारा बुद्ध को भगवान् शब्द की उपाधि क्यूं । इसके लिये थोडा और गहराई में जाना पडेगा । पालि भाषा मॆ कई शब्द संस्कृत भाषा के अनुरुप ही हैं लेकिन कही-२ उनके  शाब्दिक अर्थ अलग-२  हैं ।

पालि भाषा मे भगवान् का अर्थ

पालि का भगवान् अथवा भगवतं दो शब्दों से बना है – भग + वान् । पालि में भग मायने होता है – भंग करना , तोडना , भाग करना उपलब्धि को बांटना आदि और वान् का अर्थ है धारण्कर्ता , तृष्णा आदि । यानि जिसने तृष्णाओं को भंग कर दिया हो वह भगवान्

पालि ग्रंथों मे बुद्ध के लिये प्रयुक्त भगवान् अथवा भगवा शब्द को परिभाषित करने के बहुत से उदाहरण है :

 भग्गरागोति भगवा : जिसने राग भग्न किया कर लिया वह भगवान्‌

भग्ग्दोसोति भगवा : जिसने द्धेष भग्न किया हो वह भगवान्‌

भग्गमोहोति भगवा , भग्गमानोति भगवा , भग्ग किलेसोति भगवा , भवानं अंतकरोति भगवा भग्गकण्ड्कोति भगवा..: जिसने मोह भंग कर लिया , अभिमान नष्ट कर लिया , क्लेष भग्न कर लिया , भव संस्कारों का अंत कर लिया , कंटक भग्न कर लिये वह भगवान्

भग्गमोहोति भगवा: मोह भग्न कर लिया , इस अर्थ में भगवान्

भग्गमानोति भगवा : अभिमान नष्ट कर लिया , इस अर्थ में भगवान्

भग्गदिट्ठीति भगवा : दार्शिनिक मान्याताओं को भग्न कर लिया , इस अर्थ में भगवान्

भग्गकण्डकोति भगवा: कंटक भग्न किया , इस अर्थ में भगवान्

भग्गकिलेसोति भगवा: क्लेश , काषाय भग्न कर लिये , इस अर्थ में भगवान्

भजि विभजि पविभजि धम्म्रतन्तिभगवा : भजि यानी जिसने धर्म रत्न का भजन किया , यानी सेवन , इस माने भगवान्

ऐसे न जाने कितने उदाहरण हैं जिसमॆ भगवान शब्द का अर्थ संस्कृत के शाब्दिक अर्थ  से बिल्कुल  अलग दिखता है ।

पालि में एक सुत्त है :

इतिपि सो भगवा , अरहं , सम्मासम्बुद्धो,

विज्जाचरणसम्पन्नो सुगुतो लोकविदू ,

अनुत्तरो पुरिस सम्म सारथी सत्था देवमनुस्सानं , बुद्धो भगवति ॥

ऐसे जो अहर्त है , सम्यक् सम्बुद्ध हैं , संपूर्ण जागृत हैं , लोभ , द्धेष और मोह से मुक्त ऐसे भगवन् हैं , सर्वज्ञ हैं , ज्ञान और आचरण में परिपूर्ण हैं , सुगति प्राप्त हैं , वर्तमान और भूत भविष्य को जानने वाले हैं , यथावादी तथाकारी , जैसा कहते हैं वैसा करते हैं , ऐसे आचरण वाले हैं , आदमी कोलोभ , द्धेष और मोह से छुडाने वाले अप्रतिम सारथी हैं , देवता और मनुष्यों के सास्ता हैं , गुरु हैं , उपदेशक हैं , ऐसे मनुष्यों मे अनुपम श्रेष्ठतम् भगवान् बुद्ध हैं ।

संदर्भित ग्रंथ एंव वेबसाइट

http://www.preachingsofbuddha.blogspot.in/2013/06/blog-post.html

१. गौतम बुद्ध और उनके उपदेश रचयिता आनन्द श्रीकृष्ण

२. बुद्ध का चक्रवर्ती साम्राज्य लेखक श्री राजेश चन्द्रा

३. भगवान बुद्ध और उनका धर्म लेखक डां भीमराव अम्बेड्कर

४ वीकीपीडिया

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