इंसान के पतन के बारह कारण-भगवान् बुद्ध


एक बार भगवान् बुद्ध सवाथी के निकट अनाथपिन्दक के जेतवन में विहार कर रहे थे, अर्ध रात्रि होने पर एक महापुरुष, महाज्ञानी और देव सामान व्यक्ति तथागत के पास आया,उसका व्यक्तित्व ऐसा था मानी जेतवन को प्रकाशित कर रहा हो |वह तथागत को श्रद्धा पूर्वक अभिवादन करके खड़ा हो गया और निवेदन किया की

“मैं आपकी सेवा में एक प्रश्न पूछने के लिए आया हूँ , कृपया बताये की व्यक्ति का पतन किन कारणो से होता है ”

इसपर भगवान बुद्ध ने पतन के कारणों का वर्णन करने को स्वीकार कर लिया और कहा “हे देव उन्नतिशील आदमी को सरलता से पहचाना जाता है और पतन की और अग्रसर व्यक्ति को विलासी और दिखावे से पहचाना जाता है| मनुष्य के पतन के १२ कारण होते हैं ”

– धर्म या या भलाई के मार्ग से द्वेष करने वाले का पतन होता है और धर्म या या भलाई के मार्ग से प्रेम करने वाले की उन्नति होती है |यह उसके पतन का पहला कारण है|( यहाँ धर्म से भगवान् बुद्ध का अर्थ पुरोहितवाद,कोई किताब,कोई चिन्ह, कोई मूर्ति या देवी देवता नहीं है बल्कि भलाई और जीवन की मुख्या धरा है)

-असतपुरुष उसे अच्छे लगते हैं, सत् पुरुष उसे अच्छे नहीं लगते अपितु वो उनसे घृणा करता है, वह असत्पुरुष के धर्म को पसंद करता है| यह उसके पतन का दूसरा कारण है

-वह निन्द्रलू (निकम्मा) होता है उसे वही लोग अच्छे लगते हैं जो परिश्रमी नहीं होते,सुस्त होते हैं और क्रोध प्रदर्शित करते हैं | यह उसके पतन का तीसरा कारण है

-धनी और समर्थ होकर भी अपने वृद्ध माता पिता और छोटे भाई बहन का पालन पोषण नहीं करता,फलस्वरूप संसार में अकेला और कुंठित रहता है- यह उसके पतन का चौथा कारण है

-भले आदमी को, सदगुरु को, परिजनों को और साधू को झूठ बोलना और धोखा देना ,यह उसके पतन का पांचवा कारण है

-जो अपनी धन संपत्ति का अकेले ही आनंद भोगता है समाज के किसी काम नहीं आता यह उसके पतन का छठा कारण है

-जो व्यक्ति अपनी जाती,गोत्र ,धन,सामर्थ्ये,शक्ति और ज्ञान का अभिमान करता है और अपने रिश्ते नातों का तिरस्कार करता है,ये उसके पतन का सातवाँ कारण है

-जो व्यक्ति विलासी है,शराबी है,जुआरी है और जो अपनी व अपने पूर्वजों की जमापूंजी अपव्यय करता है ता बिना सोचे समझे लुटता है -यह उसके पतन का आठवाँ कारण है

 -जो अपनी पत्नी से संतुस्ट न रहकर वैस्यायों तथा पर स्त्री के पास जाता है ,यह उसके पतन का नौवां कारण है

-वृद्ध व्यक्ति होने के बावजूद जो नाव युवती को ले आता है तो उसकी ईर्षा के कारण वो चैन से नहीं सो सकता ,यह उसके पतन का दसवां कारण है

-जो असयामित फिजूल खर्च करने वाले आदमी या स्त्री को अपने धन संपत्ति का अधिकारी और रखवाला बना देता है ये उसके पतन का ग्यारवाँ कारण है

-जो क्षत्रिये कुल में जन्मा हो और अल्प साधन रखने वाला हो अर्थात असक्षम हो किन्तु बहुत ज्यादा मह्ताव्कंग्शी होने के कारण राज्ये की अभिलाषा रखता हो यह उसके पतन का बारवा कारण है ‘हे देव! पतन के इन कारणों को जान ले और यदि तू इनपर विजय प्राप्त कर लेगा तो तू सुरक्षित ओत खुशहाल रहेगा |’

 

 

 

 

“जो विश्व में समृधि पाना चाहते है , उन्हें छः दोषों से दूर रहना चाहिए : लम्बी निद्रा या अज्ञान- हमारे इर्द गिर्द क्या हो रहा है इसकी जानकारी न होना , तन्द्रा ,भय , क्रोध , आलस्य और कंजूसी”...SAMAYBUDDHA

4 thoughts on “इंसान के पतन के बारह कारण-भगवान् बुद्ध

  1. भगवान बुद्ध ने मानवमात्र के बहुत से पक्षों और शाशवत सरोकारों को सम्बोधित किया है . इनमें से अधिकतर उनके द्वारा दी गई देशनाऒं से सम्बधित है जो उनके अनुयायियों , भिक्षुकों और जिज्ञासुओ को समय-२ पर दी गई हैं . आपके द्वारा वर्णित इस लेख से व्यग्धपज्ज सुत्त का स्मरण हो गया . व्यग्धपज्ज सुत्त मे बुद्ध समद्ध गृहस्थ को निर्देश देते हैं कि कैसे वे अपनी समृद्दि का संरक्षण और संवर्धन कर सकते हैं और कैसे धन के विनाश से बच सकते हैं . अकेला धन न तो सम्पूर्ण मानव का निर्माण करता है और न ही समरसता पूर्ण समाज का .
    भगवान बुद्ध की देशनाओं को ऐसे ही समाज मे फ़ैलाते रहे , आभार !!

    प्रभात/चिन्तन
    http://www.preachingsofbuddha.blogspot.com/
    http://sacredversesofdhammapada.blogspot.com/
    http://dailywordsofthebuddha.blogspot.com/
    http://drprabhattandon.wordpress.com/drprabhattandon/

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