Buddhist/Ambedikarvadi/BAHUJAN related FILMs and Videos: special on 15aug2013


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1  तथागत बुद्धा 2007
तथागत बुद्धा 2007 में बनी हिन्दी भाषा  की बोलीवुड  फ़िल्म है,ये फिल्म भगवान् बुद्धा के जीवन चरित्र पर बनी है|

ये फिल्म इन्टरनेट YOUTUBE.com पर  प्रूरी व् सही प्रिंट में उपलब्ध है, आप वहां  से मुफ्त में डाउनलोड कर सकते है, लिंक निम्न प्रकार से है :
http://www.youtube.com/watch?v=00nUBDEhpC8

ये विडियो अब उपलब्ध नहीं है, कॉपी राईट  के चलते youtube  से डिलीट कर दिया गया है|

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पर BBC द्वारा बनाया गया ये विडियो भगवान् बुद्धा के जीवन पर बहुत अच्छी  डोकुमेंट्री है …

Origional English Documentry is available on following link

http://www.youtube.com/watch?v=YsEksMEE2Eg

इस  डोकुमेंट्री का हिंदी रूपांतरण और उसका असल अंग्रेजी लिंक यहाँ दिया जा रहा है :

To understand BUDDHA fully plz see…. Best discription of BUDDHA

भगवन बुद्धा वास्तव में कौन हैं  ये समझने के लिए ओशो का ये विडियो जरूर देखें

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2 दीक्षा 1991:
दीक्षा 1991 में बनी हिन्दी भाषा  की बोलीवुड  फ़िल्म है जिसके निर्देशक अरुण कॉल हैं। ये फिल्म कन्नड़ भाषा के लेखक श्री यु0 आर0 अनंतमूर्ति के उपन्यास पर आधारित है।इस फिल्म को 1992 का बेहतरीन फिल्म का रास्ट्रीय पुरुस्कार एव 1992 का फिल्मफेर बेस्ट क्रिटिक अवार्ड मिला है ,इतना ही नहीं ये फिल्म 1993 में अन्तर्रराष्ट्रिय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई थी। इस फिल्म के  निर्माता हैं National Film Development Corporation of India
इस फिल्म के मुख्य कलाकार हैं नाना पाटेकर ,मनोहर सिंह विजय कश्यप, राजश्री सावंत अदि हैं ।
इस फिल्म में बहुजन गुलाम युवक कोगा (नाना पाटेकर) ब्राह्मणवादी ज्ञान से प्रभावित होकर उसे सीखना चाहता है पर जब वो इसको पास से देखता और अनुभव करता है तो उसे अमानवीयता और धर्मिक अत्याचार ही दिखाई पड़ता है ।
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3. डॉ बाबासाहेब  आंबेडकर   2000
डॉ बाबासाहेब  आंबेडकर सन 2000 में रिलीज फिल्म है जो महान बाबा साहेब आंबेडकर के जीवन और संगर्ष को चित्रित करती है ।इस फिल्म के  निर्देशक जब्बर पटेल हैं और इस फिल्म का निर्माण सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार व महारास्ट्र सरकार की लागत और मार्गदर्शन में हुआ है। इस फिल्म का प्रबंधन नेशनल  फिल्म  डेवेलोपमेंट  कॉर्पोरेसन ऑफ़ इंडिया (NFDC) ने किया है, इसे जरूर देखें |इसी फिल्म की शुरुआत में एक भूमिका डाएलोग  है जिसे हम कह सकते हैं की स्वव भारत सरकार  कह रही है|  जिसका तात्पर्य ये है की
“इन भारतवासियों  को  समाज से काट कर रखा गया उन्हें तरक्की करने के सभी मौके छीन लिए गए| उन्हें न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से गुलाम बना दिया गया| ये गुलामी दुनिया भर के इतिहास की गुलामी से भी बत्तर थी क्योंकि इसमें हारे हुए इन भारतवासियों  के विचारों को गुलाम बना दिया था| ये रोमन साम्राज्य की गुलामी से बत्तर थी जो  अमेरिकी नीग्रो और जर्मन यहूदियों के साथ किया गया ये उससे कहीं ज्यादा बत्तर था| “
आखिर ये कब तक चलता रहता, बाबा साहेब आंबेडकर ने  समाज सुधारकों और धर्म गुरुओं की तरह केवल बातें बनाने तक ही सीमित नहीं रहे उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता को कानून का रूप दिया| अब कोई चाहे या न चाहे उसे समानता का बर्ताव करना ही पड़ेगा| इस बाबा साहेब के युग में कोई जन्म से नहीं अपनी क्षमता के हिसाब से जीवन यापन करता है| ये कानून कुछ महास्वार्थी देशद्रोही  मनुवादियों को छोड़कर सभी सम्प्रदायों के लिए अच्छा है |आज जैसी खुशहाली इस देश में कभी नहीं रही थी, केवल सम्राट अशोक के राज्ये में कुछ हद तक समानता थी| उस सुशाशन की याद और आदर्श में आज भी  देश में अशोक चक्र और अशोक स्तम्भ को भारत सरकार अपने  शाशन का प्रतीक मानती  हैं |
इस फिल्म का ट्रेलर YOUTUBE>COM पर उपलब्ध है जिसका लिंक इस प्रकार है :
पूरी फिल्म पाने की जानकारी के लिए jileraj@gmail.com पर संपर्क करे|

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 4. सदगति 1981:

सदगति 1981 में बनी हिन्दी भाषा  की बोलीवुड  फ़िल्म है जिसके निर्देशक सत्यजित राय हैं। ये फिल्म हिंदी के मशहूर लेखक श्री प्रेमचंद की कहानी सदगति पर आधारित है। इस फिल्म में मशहूर आर्टिस्ट ओम पुरी ,स्मिता पाटिल और मोहन अगासे ने मुख्य भूमिका निभाई है। इस फिल्म का निर्माण दूरदर्शन ,भारत सरकार ने किया है ।
इस फिल्म में दिखाया गया है की कैसे मानसिक रूप से गुलाम व्यक्ति  ब्राह्मणवाद से अपना शोषण होने देता है और शोषण सहते सहते मर जाता है।मानसिक  गुलामी दिनिया की सभी गुलामियों में सबसे बुरी गुलामी है,    ऐसी गुलामी से तो  अच्छा है की व्यक्ति संगर्ष करता हुआ मरना मारना स्वीकार कर ले ।
ये फिल्म इन्टरनेट YOUTUBE.com पर  प्रूरी व् सही प्रिंट में उपलब्ध है, आप वहां  से मुफ्त में डाउनलोड कर सकते है, लिंक निम्न प्रकार से है :
 
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5. फिल्म  तीसरी आजादी :
इस फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है पर ये फिल्म अम्बेडकरवाद और बहुजन के पूरे  इतिहास को एक ही फिल्म में बेहतरीन ढंग से दिखाती है जिसमें आर्ये-अनार्य युद्ध से शुरू करके बौध धर्म के उत्थान एव पतन और उसके बाद मनु विधान की रचना और भारतवासियों पर अमान्विये अत्याचार से लेकर बाबा साहेब अम्बेदिकर संगर्ष तक सब एक ही फिल्म में बुत खूबी से पिरो दिया गया है। इसे जरूर देखें , ये  इतनी सख्ती और नंगे तौर पर मनुवाद को उजागर करती है की असहनीय होने के कारन आसानी से उपलब्ध नहीं है । फिर भी

इस फिल्म का ट्रेलर YOUTUBE>COM पर उपलब्ध है जिसका लिंक इस प्रकार है :

http://www.youtube.com/watch?v=g6AmQW7esVI&feature=related

पूरी फिल्म पाने की जानकारी के लिए jileraj@gmail.com पर संपर्क करे|

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6.नाटक कफ़न- लेखक प्रेमचंद
देखिये निकम्मापन ही हद प्रेमचंद की लिखी और पंकज कपूर द्वारा अभिनीत नाटक कफ़न , लिंक इस प्रकार है

मानसिक गुलामी और उसके कारन लगी जंग से उपजा निकम्मापन ने दलितों को इस हद तक गिरा दिया था की उनसे जानवर अच्छे थे| इसीलिए डॉ अम्बेदिकर ने कहा है की “जुल्म करने वाले से सहने वाला ज्यादा गुनाहगार होता है” |
नीच क्यों नीच कहा जाता है, देखिये किस तरह जीते जी अपनी बीवी के प्रसूति के लिए निकम्मे कोई इंतजाम नहीं कर सके और वो तड़प तड़प के मर गई| इतना ही नहीं उसके मरने के बाद उसके कफ़न के लिए जो दया दान आया था उसकी शराब पी गए| क्या ऐसी लोगों का निकम्मापन नफरत के काबिल नहीं|

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7  शूद्र दा रएसिंग

तथाकथित आर्ये अनार्य युद्ध में हार का परिणाम गुलामी और गुलाम कौम ही शूद्र बन गए हैं उनपर हुए जुल्म की कहानी संजीव जैसवाल की इस फिल्म में देखने को मिलेगी|

मेरी व्यक्तिगत राये है की अब हमें अपने ऊपर अत्याचार की फिल्म न बनाकर अपने और अपने गौरवमयी बौध इतिहास की विजय गाथा को ज्यादा उभरने की जरूरत है. ऐसी फ़िल्में हमारी सभी आने वाली पीढ़ी को मानसिक रूप से कम्जॊर रखेंगी|जब खुद हम अपनी तारीफ करेंगे तभी दुनिया करेगी…

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कहानी हाथी का बंधन
एक आदमी कहीं से गुजर रहा था, तभी उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अचानक रुक गया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं!!! ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.
उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ? तब महावत ने कहा, ” इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”
आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!!
इन हाथियों की तरह ही हमारे  लोग भी मानसिक गुलामी का  शिकार हैं जिसकी वजह से सामर्थ होने के बावजूद संगर्ष नहीं करते,इसीलिए गुलाम को गुलामी का अहसास करना उसे आज़ाद करने से  ज्यादा जरूरी है

आज भी लाख समझाने के बावजूद ये लोग निकम्मेपन को छोड़कर संगर्ष नहीं करना चाहते, ये हाल अनपढ़ों का है और जो पढ़ लिख गए वो हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने में लीन हैं|अनपढ़ तो फिर भी किसी तरह हांक कर संगर्ष के लिए राजी हो जाते हैं पर पढ़े लिखे तो केवल बहस करने और अपने आप को ज्ञानी साबित करने के अलावा कुछ नहीं करते, उल्टा हो रहे संगर्ष को कमजोर करते हैं|इसीलिए समयबुद्धा   ने कहा है

“अपनी दुर्दाशी के लिए केवल उनकी दमन निति को दोषी ठहराने के अलावा उन दिनों को जरूर याद करना-कराना जब तुम्हें शिक्षित संगठित और संगर्ष रहने का पाठ पढ़ाने की कोशिश की जा रही थी और तुम उसे अनसुना करके अपने तुच्छ आयाशिओं में मगन थे” 

ऐसी फिल्मे मानसिक बल   को कम्जोर करती हैं , समयबुद्धा  का कहना है
 “किसी भी कौम का साहित्य और इतिहास उसके लोगों के मन,वचन और कर्मों को दिशा देते है इसलिए हार को नहीं विजय गाथा को प्रचारित करना चाहिए। हार को भी नज़रन्दाज नहीं करना बल्कि उसके सबक से अपना साहित्य बनाओ  “
आप खुद सोच कर देखो की  दलित कहलाने और बौध कहलाने में क्या सही है। कृपया नोट करे की  भारत के  समस्त इतिहास में केवल बौध राजाओं जैसे सम्राट अशोक का ही इतिहास जीत का है वरना बाद यही भरा पड़ा है की विदेशे आये और उन्होंने हमपर राज किया क्योंकि हम जातिओं और अलग विचारधाराओं में बटे  रहे|
julm sahna

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इसके अलावा कई और बेहतरीन फिल्मे हैं जो की अम्बेदिकर मिशन से जुड़े लोगों को जरूर देखनी चाहिए। ऐसी फिल्मों की जानकारी यदि आपके पास है तो उसका लिंक और उसके बारे में जानकारी कृपया jileraj@gmail.com पर भेजें। हम समाज के भले के लिए यहाँ उसे प्रकाशित करेंगे|

Team

SamayBuddha Mishan Trust

New Delhi

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