अंधश्रधा को मिटाना ही बौद्ध धम्म के लक्ष्यों में एक प्रमुख लक्ष्य है,डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या बौद्ध विचारधारा का दमन है


dabholkar baudhaडॉ. नरेंद्र दाभोलकर सुबह की सैर के बाद घर लौट रहे थे। करीब 7.20 बजे ओंकारेश्वर पुल पर पीछे से आए बाइक सवार युवकों ने उन पर गोलियां दाग दीं। सिर और पीठ पर गोलियां लगने से दाभोलकर की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस को हमलावरों की बाइक का नंबर (7756) पता चल गया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मदद से एक हत्यारे का स्केच भी तैयार किया गया है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।

डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने 80 के दशक में अंधविश्वास, कर्मकांड के खिलाफ नासिक जिले से जागरूकता अभियान शुरू किया था। 1989 में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (एमएएनएस) का गठन किया जो वैज्ञानिक तरीके से जादू-टोना और अंधविश्वासों को गलत सिद्ध करता है। संगठन की 200 शाखाओं के पांच हजार कार्यकर्ता गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाते हैं। दाभोलकर के प्रयासों से ही महाराष्ट्र में जादू-टोना विरोधी विधेयक भी पेश किया गया, लेकिन कुछ सदस्यों के विरोध के कारण पिछले कई सत्रों में यह पारित नहीं हो सका।

जादू-टोना, चमत्कार जैसे अंधविश्वासों के खिलाफ 25 वर्षो से जागरूकता अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की मंगलवार को पुणे में बाइक सवार दो युवकों ने गोली मार कर हत्या कर दी गई। वारदात के विरोध में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पुणे में बुधवार को सर्वदलीय बंद का आह्वान किया गया है।

पुणे के सुप्रसिध्द समाजसेवी, लेखक, पत्रकार और अंधश्रध्दा निर्मूलन समिति के संस्थापक डा.नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या वैज्ञानिक विचारो के समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। डॉ.दाभोलकर की हत्या राजाराम मोहनराय, ज्योतिबा फुले, डॉ आंबेडकर, स्वामी विवेकानंद के आंदोलन पर हमला है. उग्रवादियों की ओर से उनका विरोध भी कठोरता से किया जाता था. महाराष्ट्र में नरबलि, जादू टोना और काले जादू जैसी बुरी प्रथाओं के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों के अगुआ थे । उनकी हत्या से देश में अंधश्रद्धा, धर्मांधता तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, अघोरी प्रथा और नरबलि का तांत्रिको, पंडा, पूजारियो, पीर-फ़क़ीर, साधू-संतो और ढोंगी बाबाओ से खतरनाक गठजोड़ कायम हो सकता है। लड़का पाने की आस में चिंतित महिलाओं का शारीरिक शोषण, बाबाओं का जादू-टोना, सोना-चांदी, धन दुगुना करने के नाम पर ठगी, भौतिक सफलता के लिए बच्चों की बलि ऐसे कई अंधविश्वासों का समाज में आज भी बोलबाला है। साधु के भेस में शैतानों के कारनामे अब फल-फूल सकते है.

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति प्रमुख और प्रमुख समाजसेवी डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के वक्त दाभोलकर मॉर्निंग वॉक कर रहे थे और जैसे ही ओंकारेश्वर मंदिर के पास पहुंचे बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। जख्मी हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

दाभोलकर मराठी साहित्य का एक बड़ा नाम थे और महाराष्ट्र में नरबलि, जादू टोना और काले जादू जैसी बुरी प्रथाओं के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों के अगुआ माने जाते थे।

डॉ नरेन्द्र दाभोलकर के प्रयासों के चलते जल्द ही महाराष्ट्र सरकार प्रदेश में जादू टोना विधेयक (अंधश्रधा विधेयक का बदला हुआ नाम ) लाने जा रही थी। दाभोलकर पिछले 16 साल से काले जादू के खिलाफ एक कड़े कानून की मांग कर रहे थे। उन के इस प्रयास को कुछ हिंदू राष्ट्रवादी संगठनो का विरोध भी झेलना पड़ा था। दाभोलकर साधना साप्ताहिक के संपादक भी थे।

अंधश्रधा का अर्थ होता है  बिना सोचे समझे पुरोहित की बात मानना जिसका परिणाम केवल अपनी बर्बादी और पुरोहित वर्ग की आबादी होता है |पुरोहितवादी कर्मकांड ,बलि, परा प्रकृति में विश्वास, भूत प्रेत ,जादू टोना,चुड़ैल डाकिनी आदि काल्पनिक भय से कमाने वाले लोगों की सभी विचारधारा,ईश्वरवादी सिद्धांत को तोड़ मरोड़ कर जनता को ठगने ली नीतियाँ,ईश्वरवादी परम्पराओं के नाम पर शोषण, बलात्कार, लूट, क़त्ल आदि| अंध श्रद्धा ही वो वजह है जिसने हमारे देश भारत को सदियों से बर्बाद कर रखा है |

अंधश्रधा को मिटाना ही बौद्ध धम्म के लक्ष्यों में एक प्रमुख लक्ष्य है,जिससे आम जनता के दुखों को ख़तम किया जा सके|जो भी व्यक्ति अंधश्रधा  को मिटाना चाहता है वो असल में बौद्ध धम्म का ही मिशन आगे ले जा रहा है| डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर अपने सरे जीवन इसी बौद्ध लक्ष्य के लिए काम करते रहे और इसी मकसद के लिए वो शहीद हुए| धिक्कार है उस पुरोहित वर्ग पर जो अपना पेट भरने के लिए भोली भली आम जनता को बरगलाकर उनको लूटती है| इससे भी ज्यादा धिक्कार है की उस जनता को बचने वाले की यही लोग ऐसे हत्या करवा देते हैं| ये तो विचारों की लड़ाई है अगर इधर विचार हैं तो तुम भी अपने विचार दो और फैसला जनता पर छोड़ दो वो किसे चुनती है|विचारों को दबाने के लिए हतियार उठाना और हिंसा कर के महास्वार्थी  धम्मविरोधियों ने साबित कर दिया है की सदियों बाद  आज भी ये लोग नहीं बदले और आज भी  अपने स्वार्थ के लिए षडियन्त्र और हत्या का सहारा लेने में पीछे नहीं हटेंगे |

समयबुद्धा मिशन का समस्त जनसंघ  डॉ. नरेंद्र दाभोलकर  को भावभीनी स्राधांजलि देता है|डॉ. नरेंद्र दाभोलकर   अमर रहे अमर रहे  और उनके विचार जनता को सद्बुद्धि देते रहें |

further reading link:

One thought on “अंधश्रधा को मिटाना ही बौद्ध धम्म के लक्ष्यों में एक प्रमुख लक्ष्य है,डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या बौद्ध विचारधारा का दमन है

  1. पढे-लीखे, अपने आपको सेलीब्रीटी समजनेवाले एवम् खास तोर से पोलीटीशीयन्स अंधश्रद्धा और कालेजादु के दलदल में फस रहे है… ईसी लीए भारत में अंधश्रद्धानीर्मुलन कानुन की जरुरत है. ईस कानुन को डॉ. दाभोलकर लॉ नाम दीया जाय तब ईस वीरनर को सच्ची अंजली अर्पीत मानी जाएगी…

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s