बुद्ध धम्म और आंबेडकरवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और एक दूसरे के पूरक हैं , यही वो विचारधारा है जिसने इतिहास में भारत को स्वर्णिम काल दिखाया था और आगे भी दिखा सकती है


bahujanआजकल हर किसी के मन में धम्म के बड़ते वर्चस्व के प्रति बहुत जिज्ञासा है लोग इसे अम्बेडकरवाद के नाम से भी पुकारने लगे हैं| इसी जिज्ञासा का सटीक उत्तर देने के लिए ये पोस्ट लिखा गया है|

बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और एक दुसरे के बिना अधूरे हैं| ये असल में मानवता को बढ़ावा देने वाली विचारधारा है जिसमें सबका भला होता है मनवादी विचारधारा की तरह किसी एक वर्ग विशेष ही भला नहीं होता|

गेरबरबरी वाली वर्णव्यस्था और जातिवाद खिलाफत, अपमानित ,अमानवीय ,अवैज्ञानिक ,अन्याय एवं असमान सामाजिक व्यवस्था से दुखी मानव कि इसी जन्म में आंदोलन से मुक्ती कर ,समता –स्वतंत्र –बंधुत्व एवं न्याय के आदर्श समाज में मानव और मानव(स्त्री पुरुष समानता भी ) के बीच सही समंध स्थापित करनेवाली क्रांतिकारी मानवतावादी विचारधारा को बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद कहते है |

जाती-वर्ग-स्त्रीपुरुष-रंगभेद कि व्यवस्था मी क्रांतिकारी बदलाव लाकर एक न्यायमुक्त, समान,बराबरी,वैज्ञानिक ,तर्कसंगत एवं मानवतावादी सामाजिक व्यवस्था बनाने वाले तत्वज्ञान को बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद कहते है | जिससे मानव को इसी जन्म में मुक्त किया जा सके |ये अगले जन्म का दिलासा नहीं देता

व्यक्तिगत बुद्धि विकास के अंतिम लक्षय को प्राप्त करने कि दृष्टी से समता-स्वातंत्र्य-बंधुत्व और न्याय इन लोकतंत्र निष्ठ मानवी मुल्यो को आधारभूत मानकर संपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन (समग्र –क्रांती) लानेवाले दर्शन को (तत्वज्ञान) को बुद्ध धम्म और आंबेडकरवाद कहते है |

४.ब्राम्हणवाद और मनुवाद पर आधारित गैरबराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर अमन और न्याय से भरी मानवतावादी व्यवस्था बनानेवाली विचारधारा बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है | संपूर्ण मानव का निर्माण समता-स्वातंत्र्य-बंधुत्व एवं न्याय के आधार पार करनेवाली सामाजिक व्यवस्था बनाने कि विचारधारा को बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद कहते है | ऐसी व्यवस्था में सबको विकास एवं समान संधी मिलती है|

बिन्दुवार सारांश इस प्रकार है

१.गैर बराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर मानवतावादी व्यवस्था कि निर्मिती करना यह बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है|

२.बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद यह मानव मुक्ती का विचार है | यह वैज्ञानिक दृष्टीकोन है |

३.इंसानियत का नात हि बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

४. मानव गरिमा (human dignity) के लिये चलाय गया आंदोलन बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

५.मानव का इसी जन्म में कल्याण करने वाली विचारधारा बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

६.सबकी मुक्ति का-विकास का –मानव कल्याण का मार्ग हि बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

७. इंसान को जन्म देनेवाली ,जीवन जिने का मार्ग देनेवाली विचारधारा बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

८. मानसिक उत्थान-सामाजिक, आर्थिक,राजनैतिक एवं सांस्कृतिक बदलाव को बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद कहा जा सकता है |

९.बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद एक ऐसा विचार एवं आंदोलन है ,जो अन्याय और शोषण के खिलाफ है और उस के जगह एक मानवतावादी वैकल्पिक व्यवस्था बनाता है | यह संपूर्ण वैज्ञानिक दृष्टीकोन पार आधारित है |

१०.मनुवाद और ब्राम्हणवाद का नाश करने वली क्रांतिकारी विचारधारा को बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद केहते है |

११. बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद केवल यह विचार का दर्शन ही नही है बल्की यह सामाजिक शैक्षणिक-धार्मिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन में बदलाव लाने का एक संपूर्ण आंदोलन है |

१२. बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद यह ऐसी विचारधारा है जो हमें मानवतावाद कि और ले जाती है | व्यवस्था के गुलाम लोगो को गुलामी से मुक्त कर मानवतावाद स्थापित करना ही बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है |

१३.संपूर्ण मानव का निर्माण समता –स्वतंत्र –बंधुत्व एवं न्याय के आधार पर करनेवाली सामाजिक व्यवस्था बनाना यह बुद्ध धम्म और आंबेडकर वाद है | इस समाज व्यवस्था में सबका सर्वांगीण विकास और सबको समान संधी मिलती है |

निसंदेह समस्त भारतवर्ष के लिए बौद्ध धम्म विचारधारा अत्यंत आवश्यक और लाभकारी है| पर क्योंकि ये उन लोगों के विरोध में हैं जो हमेशा से सत्ता में रहे हैं तो उन्होंने इसको फलने फूलने और सभी भारतियों ता न पहुचने के लिए इसके खिलाफ घृणा फैलाई है| घृणा फैलाना एक बहुत बड़ा षडियंत्र है जिसके कारन आम जनता बौद्ध धम्म और आंबेडकर विचारधारा को पढना या सुनना ही नहीं चाहती| जब जानेगी नहीं तो मानेगी कैसे, एक तरह से घृणा ने इस विचारधारा का सामूहिक बहिष्कार सा कर रखा है|

इसका सीधा फायदा मनुवादियों को होता है और नुक्सान उन बहुजनों को होता है जो इस विचारधारा से दूरी बनाये रखते हैं|

भगवान् बुद्धा ने कितना सही कहा है ”

“मोह में हम किसी की बुराई नहीं देख पाते और घृणा में हम किसी की अच्छाई नहीं देख पाते|”

यही कारन है की आज मीडिया में सबकी बात होती है पर भारत को समस्त इतिहास में स्वर्णिम समय दिलाने वाले बौद्ध धम्म और उसके मानने वाले महापुरुषों जैसे सम्राट अशोक महान, आंबेडकर, जैसे महानतम लोगों की बात तक नहीं होती|क्या आपको ये कमाल नहीं लगता की भारत देश में उसके अपने भगवान् बुद्धा का कोई स्थान नहीं जबकि सारा विश्व बुद्धा की तरफ चल पड़ा है|

One thought on “बुद्ध धम्म और आंबेडकरवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और एक दूसरे के पूरक हैं , यही वो विचारधारा है जिसने इतिहास में भारत को स्वर्णिम काल दिखाया था और आगे भी दिखा सकती है

  1. धन्यवाद. …..
    आपके द्वारा
    बौद्ध धर्म एवम आंबेडकरवाद का प्रचार एवम प्रसार करने की दिशा सही कदम उठाया गया है.

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