ओशो के विचार में अम्बेडकर

osho36ओशो के विचार में अम्बेडकर
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स्त्री है दीन ! उसको पुरुष ने कह रखा है

कि तुम दीन हो ! और मजा यह है कि स्त्री ने भी मान रखा है कि वह दीन है!
असल में हजारों साल तक भारत  में शुद्र समझता था कि वह शुद्र है; क्योंकि हजारों साल तक ब्राहमणों ने समझाया था कि तुम शुद्र हो ! अम्बेडकर के पहले, शुद्रों के पांच हजार साल के इतिहास में कीमती आदमी शुद्रों में पैदा नहीं हुआ ! इसका यह मतलब नहीं कि शुद्रों में बुद्धि न थी और अम्बेडकर पहले पैदा नहीं हो सकता था ! पहले पैदा हो सकता था,लेकिन शुद्रों ने मान रखा था कि उनमें कभी कोई पैदा हो ही नहीं सकता ! वे शुद्र हैं, उनके पास बुद्धि हो नहीं सकती ! अम्बेडकर भी पैदा न होता, अगर अंग्रेजों ने आकर इस मुल्क के दिमाग में थोडा हेर-फेर न कर दिया होता तो आंबेडकर भी पैदा नहीं हो सकता था !

हालांकि जब हमको हिंदुस्तान का विधान बनाना पड़ा, कान्सिटटयूशन बनाना पड़ा, तो ब्राहमण काम नहीं पड़ा, वह शुद्र अम्बेडकर काम पड़ा ! वह बुद्धिमान से बुद्धिमान आदमी सिद्ध हो सका !
लेकिन दौ सौ साल पहले वह भारत  में पैदा नहीं हो सकता था ! क्योंकि शूद्रों ने स्वीकार कर लिया था, खुद ही स्वीकार कर लिया था कि उनके पास बुद्धि नहीं है ! स्त्रियों ने भी स्वीकार कर रखा है कि वे किसी न किसी सीमा पर हीन हैं !….ओशो नारी और क्रांति (पेज संख्या.१७)

 

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ambedkar rajniti

बुद्ध बोले- चरित्रहीन स्त्री स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती है जब तक इस गांव के पुरुष चरित्रहीन न हों…Vipin Kushwaha

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संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की। एक बार वह एक गांव में गए। वहां एक स्त्री उनके पास आई और बोली- आप तो कोई राजकुमार लगते हैं। क्या मैं जान सकती हूं कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है? बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया कि तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए उन्होंने संन्यास लिया। यह शरीर जो युवा व आकर्षक है, पर जल्दी ही यह वृद्ध होगा, फिर बीमार व अंत में मृत्यु के मुंह में चला जाएगा। मुझे वृद्धावस्था, बीमारी व मृत्यु के कारण का ज्ञान प्राप्त करना है। उनसे प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांववासी बुद्ध के पास आए व आग्रह किया कि वे इस स्त्री के घर भोजन करने न जाएं क्योंकि वह चरित्रहीन है।

बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा- क्या आप भी मानते हैं कि वह स्त्री चरित्रहीन है?मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर कहता हूं कि वह बुरे चरित्र वाली है। आप उसके घर न जाएं। बुद्ध ने मुखिया का दायां हाथ पकड़ा और उसे ताली बजाने को कहा। मुखिया ने कहा- मैं एक हाथ से ताली नहीं बजा सकता क्योंकि मेरा दूसरा हाथ आपने पकड़ा हुआ है।

बुद्ध बोले- इसी प्रकार यह स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती है जब तक इस गांव के पुरुष चरित्रहीन न हों। अगर गांव के सभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत ऐसी न होती इसलिए इसके चरित्र के लिए यहां के पुरुष जिम्मेदार हैं। यह सुनकर सभी लज्जित हो गए। बुद्धम् सरणं गच्छामि। धम्मम् सरणं गच्छामि। संघम् सरणं गच्छामि।