इस संसार मे चार तरह के लोग है… गौतम बुद्ध धम्म देशना

buddha deshna

चारिका करते समय भगवान बुद्ध ने उन भिक्खुओ को, जो साथ चल रहे थे,यह उपदेश दिया…

भिक्खुओ ! इस संसार मे चार तरह के लोग है।

1) जिसने न अपना भला किया और न किसी दूसरे का भला किया,

2) जिसने दूसरों का भला किया, किन्तु अपना भला नहीं किया,

3) जिसने अपना भला किया, किन्तु दूसरों का भला नहीं किया तथा

4) जिसने अपना भी भला किया तथा दूसरों का भी भला किया।

जिस आदमी ने न अपना भला करने का प्रयास किया और न दूसरों का भला करने का प्रयास किया वह स्मशान की उस लकड़ी की तरह है जो दोनों सिरो पर जल रही है और जिसके बीच मे मैल लगा है। वह न गाँव मे ही जलावन के काम आती और न जंगल मे। इस तरह का आदमी न संसार के किसी काम का होता है, न अपने किसी काम का।

जो अपनी हानी करके दूसरों का उपकार करता है ,वह दोनों मे अधिक अच्छा है।

लेकिन भिक्खुओ ! चारो तरह के आदमियो मे सबसे अच्छा तो वही है, जिसने दूसरों का भला करने का भी प्रयास किया है और अपना भला करने का भी प्रयास किया है। 

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Concern Quotes of SAMAYBUDDHA

“बहुजनों (SC/ST/OBC/Converted Minorities)  के सम्पन्न वर्ग का आंबेडकर मिशन के लिए अज्ञानता,अरुचि और नीरसता ही वो कारण हैं जिसकी वजह से न केवल बहुजनों का बल्कि समस्त भारत का भविष्य दुखमय नज़र आता है|इसका एक कारन ये भी है की विरोधी मीडिया आंबेडकर विचारधारा को बाकी बहुजनों से दूर रखकर केवल एस०सी० तक ही सीमित रखना चाहती है| एस०सी० वर्ग में भी जो लोग शिक्षित और सम्पन्न है उन्हें संगर्ष की जरूरत नहीं लगती और जो दुखी है उसके पास संगर्ष करने को पहले तो समय नहीं और अगर समय हो भी जाये तो धन के आभाव में उनकी आवाज़ कहीं नहीं पहुचती|चंद लोग संगर्ष कर रहे हैं और बाकि लोग कब तक केवल मूक दर्शक बने रहेंगे|आंबेडकर संगर्ष की वजह से जिन शूद्रों के जीवन में सम्पन्नता आई है वो आज इस मिशन के बारे में सुनना तक नहीं चाहते|वो दिन दूर नहीं जब इन्हें अहसास करा दिया जायेगा की ये कौन है कहाँ से आये है|ये जिन्दगी का नियम है की वही हारता है जो सुख में संगर्ष छोड़ देता है, ध्यान रहे भविष्य उसका होता है जो वर्तमान में संगर्ष करता है|

“धन से धर्म चलता है और संगठन से सुरक्षा होती है,इसलिए ध्यान रहे अगर आपने अपने  धन और समय का १०% धम्म और संगठन को नहीं दिया तो वो दिन दूर नहीं जब सब बचाने  के चक्कर में सब कुछ छीनने वाला सामने होगा| (पर इसके लिए सभी क्षेत्रों के लीडर्स खासकर बौध भंते को, और अधिक प्रयत्नशील होकर  जनता का विश्वास जीतना पड़ेगा)”… समयबुद्धा

अपने समाज के प्रतिभावान लोगों की पहचान और उनकी उन्नति में सहयोग करने से सारे समाज का भला होता है|मैंने जयपुर में जातिगत छात्रावास देखें हैं जैसे मीना छात्रावास, राजपूत छात्रावास,जाट छात्रावास अदि जिनमें दूर दराज गाँव से प्रतिभावान किन्तु गरीब छात्र को हर प्रकार की सहायता देकर उसे समाज का एक जबरदस्त सहायक बना लिया जाता है|ये छात्रावास दान से चलते हैं जिसकी जैसी क्षमता वैसा उसका दान जैसे किसी ने पंखे दिए किसी ने किताबें किसी ने कुछ टन आटा-चावल दिया किसी ने नकदी, इस प्रकार ये एक जातिगत एन0जी0ओ० का काम होता है| इस तरह आरक्षण से कहीं कहीं ज्यादा लाभ सक्षम समाज अपने समाज को दे रहा है|क्या हमें भी ऐसा नहीं करना चाहिए….. समयबुद्धा

अगर कुछ नहीं करना चाहते किसी पर विश्वास नहीं है तो एक काम तो कर सकते हो हर साल पांच  दस हज़ार की अम्बेडकरवादी किताबें, साहित्य ,सी डी  अदि   खरीद कर दूर दराज गाँव  अपने लोगों में तो बाँट ही सकते हो  ,अपने लोगों को जगा  तो सकते हो ?