जो अपने को बौद्ध धम्म की विचारधारा पर चलने वाला कहते है पर असली जिन्दगी में हिन्दुस्म से उबर नहीं पाए है


jano tabi manoजो अपने को बौद्ध धम्म की विचारधारा पर चलने वाला कहते है पर असली जिन्दगी में हिन्दुस्म से उबर नहीं पाए है ,जिनकी आदतें अभी पंचशील धारण नहीं कर पाई है पर मंचों पर सफ़ेद कपडे धारण करके बड़े बड़े भासनबाजी के व्यक्ख्यान देते है दूसरों को ज्ञान बाटते हुए खुद अज्ञानता वाले काम करते ,उनके घरों में महिलाओं से दोयम दर्जे का व्यवहार होता है ,नारी को जो बराबरीका दर्जा नहीं देते ,मंच पर आपने आपको विद्वान् और मंच्शीन लोगों को महाविदवान कहते नहीं थकते ,जो आपने मित्रों के साथ बराबरीका दर्जा न देकर विश्वासघात करते ,चोरी करते ,अपने कुकृत्यों को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ते ,जिनका सूरा-सुन्दरी ,धुम्रपान ही साथी है |जो दिन रात दूसरों को नीच दिखाने का कार्य करते ,समाज को धोका देते हुए खुद को समाजवादी बताते ,अपनी चिकनी,चुपड़ी बातों से भोले भाले लोगों को धोका देते ,अपनी मक्कारी भरी सफ़लता से खुश होते ,इनसब दोषों के वावजूद अपने को धम्म का अगुआ घोषित करते ,ऐसे व्यक्तियों मेरी अपील है कि वो धम्म का सही अनुसरण करें | अतः आप अपने बुद्धि विवेक का इस्तेमाल करे किसी के आँख बंद कर फालोवर न बने |

क्योकि तथागत गौतम बुद्ध ने कहा था —

हे कालामो ! आओ सुनो ; तुम किसी बात को केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि यह अनुश्रुत है |केवल इसलिए मत स्वीकार करो,कि यह बात परंपरागत है |केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि यह बात इसी प्रकार कही गई है | केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि यह तर्क संगत है |केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि यह हमारे धर्मग्रन्थों के अनुकूल है |केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि यह न्याय(शास्त्र) सम्मत है केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि आकार प्रकार सुन्दर है |केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि कहने वाले का व्यक्तित्व आकर्षण है|केवल इसलिए मत स्वीकार करो कि कहने वाला हमारा पूज्य है |अतः हे कालामो !जब तुम स्वतः के अनुभव से अपने आप ही यह जन लो कि ये बातें अनुकूल है |ये बातें सदोष है |ये बातें विज्ञ पुरषों द्वारा निन्दित है |इन बातों के अनुसार चलने से अहित होता है ,तो हे कालामो ! तुम उन बातों को छोड़ दो 
अतः हे कालामो !जो लोभी है लोभ से अविभूत,जो अ-संयत है |वह प्राणी हत्या भी करता है ,चोरी भी करता है ,परस्त्री गमन (व्याभिचार) भी करता है |झूठभी बोलता है ,दूसरों को भी वैसीकरने कि प्रेरणा देता है जो दीर्घ काल तक उसके अहित का तथा दुःख का कारण होता है 
,तो हे कालामो ! तुम उन बातों को छोड़ दो

साभार –भगवान् बुद्ध और उनका धम्म—लेखक–डॉ बी.आर.अम्बेडकर
संकलन–धम्मसेवा में रत—डॉ.एस.के.राज.–पनकी कानपूर —

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