बौद्ध विहारों पर कैसे कब्ज़ा करके वहां से बौद्धों को भगाया जा रहा है…धम्मउदय जाटव


india land of buddha
दिल्ली में हमारी कोलोनी में बहुजनों ने बहुत मेहनत क़ुरबानी और संगर्ष के बाद कुछ एकड़ पहाड़ी की बेकार कंटीली पथरीली जमीन पर बौद्ध विहार और बाबा साहब की मूर्ती लगाई| धीरे धीरे जब आबादी बढ़ी तो वही जमीन कोलोनी के बीच में आ गई| जब इस जमीन का महत्व और कीमत बढ़ी तो उस इलाके के मनुवादी लोगों की नज़र उसपर गई|आज ये बौद्ध विहार चमारों ने अपनी मूर्खता से खो दिया और बाबा साहब की मूर्ती बाउनड्री से बाहर महत्व हीन सी खड़ी है ये ऐसे हुआ:

१. सबसे पहले तो वहां जो बौद्ध विहार बना वो छोटा सा कमजोर से दो कमरे बनाये गए और बाबा साहब की मूर्ती लगाई गई| इसकी वजह ये रही की हमारे लोगों ने इसको बनाने को दान नहीं देते अगर देते भी हैं तो लेने वाली टीम गबन कर जाती है इस वजह से विश्वास का माहौल ही विकसित नहीं हो पाया|जैसे तसे बाबा साहब की मूर्ती लगाई गयी वो भी लोगों ने तोड़ दी|

२. धीरे धीरे वहां सवर्णों ने उठाना बैठना शुरू कर दिया और वहा की गतिविधियों पर नज़र रखने लगे|इन लोगों ने मौका पाकर बाबा साहब की मूर्ती तोड़ दी फिर हमारे लोगों ने नयी मूर्ती लगाई|इस बात को देखते हुए बहुत मेहनत से दान इकठा किया गया और एक बड़ा हौल बनाया गया| इसपर सवर्णों ने दिल्ली सरकार से शिकायत कर दी और उस हौल को तोड़ दिया गया| आज भी वो वह पर टूटा पड़ा है| इस तरह दान देना भी बेकार हो जाता है क्योंकि सर्कार में बैठे मनुवादी हमारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं|

३. फिर जब बहुजनों ने रैली की प्रदर्शन किया तो सरकार ने बौद्ध विहार को बनवाने का आश्वासन दिया| उसे के बाद वहां पर काम शुरू करवा दिया | वहा एक बड़ा हौल बनाया गया पर जब वो बन कर तयार हो गया तो उसे बौद्ध विहार नहीं बनाने दिया गया उसको सार्वजानिक बारात घर घोषित कर दिया गता और उसकी बुकिंग तहसील से होने लगी|

४. फिर हमारे लोगों ने बौद्ध विहार को उन्हीं २ कच्चे कमरों में चलन जारी रखा और वह पर संगर्ष समिति बनाई गयी| इस समिति में वहां का जो गाँव था उसके चमारों ने वहां पर यूपी बिहार एम् पी पंजाब आदि से आये हुए बहुजनों को शामिल नहीं होने दिया गया जबकि इन्हीं लोगों के पास शिक्षा और जनसँख्या और धन था| इन गाँव के चमारों ने कहा की इस बौद्ध विहार पर हम ही राज करेंगे अगर नहीं कर पाए तो चाहे गाँव के सवर्णों को दे देंगे पर बहार से आये चमारों को नहीं देंगे|किसी को उनके राज करने पर अप्पति नहीं थी लोग ये चाहते थे की काबिल और मजबूत लोग ही वहां की समिति की अध्यक्षता करें डरपोक बूढ़े मूर्ख कम्जॊर और गुलामी की मानसिकता वाले लोग इसको बचा नहीं पायेंगे|

५. इसी तरह लड़ाई चलती रही धीरे धीरे हमारे लोगों ने वहां संगर्ष करना कम कर दिया उधर वहां शादी दावतें होने लगी जिससे अन्य जनता का वह पर दखल बहुत ज्यादा बढ़ गया|

६. जैसा की मैंने बताया इतना होने के बावजूद दो कच्चे कमरों में बौद्ध विहार चलता रहा| वहां के सवर्णों ने एक भ्रष्ट बौद्ध भंते को वहा पर बैठा दिया वो वहां पर सभी प्रकार के गंदे काम करने लगा| इससे लोगों की आस्था उस बौद्ध विहार में कम हो गई| तो चमारों ने उस बौद्ध भंते को वहां से मार मार कर भगाया और एक अन्य भंते को वहां पर रखा|

७. जब सवर्णों को पता चला और उन्होंने देखा की ये चाल कामयाब नहीं हुई तो उन्होंने फिर वहां पर उसी कोलोनी के भंगी जो की लड़ने मरने को तयार थे को उस बारात घर की सफाई का ठेका दिलवा दिया| ये भंगी लोग उस बारात घर में सफाई के नाम पर चार पांच हज़ार रुपये की रिश्वत लेते हैं| धीरे धीरे भंगियों ने वह पर कब्ज़ा कर लिए| इन्हि भंगियों ने उस नए बौद्ध भंते को मार कर भगा दिया|

८. सवर्णों की चाल देखो की उन्होंने सीधे बहुजनों जाटव चमारों से टक्कर नहीं ली , भंगी को आगे कर दिया और भागी अपने ही भाइयों से उनका हक़ छीन कर मनुवादियों को दे रहा है|

इस सब से हमें क्या शिक्षा मिलती है|

धर्म या धम्म क्या होता है- ये किसी भी कौम की सुरक्षा नीति होती है| इस घटना से हमें ये शिक्षा भी मिलती है की बौध धम्म की वर्तमान नीतियों से क्द्धर नहीं हो पायेगा| इनमें बदलाब और नयी निति बनानी पड़ेंगी|अगर हम संगठित नहीं, अगर हमारी सरकार नहीं, अगर हम शिक्षित नहीं, अगर हम धम्म दान नहीं करेंगे तो इसी तरह हमसे हमारे मेहनत से प्राप्त उपलब्धियों को छीन लिया जाएगा| जब तक हमारे लोग ये नहींसमझेंगे के केवल अच्छी बातों से हमारा भला नहीं होगा धन का अम्बार लगाना होगा बौद्ध विहारों में तब तक ऐसे ही लुटते पिटते रहोगे|

जरा सोच कर देखो की अगर वहां पर बौद्ध विहार न होकर वह ये संगर्ष किसी मंदिर मस्जिद के लिए हुआ हॊत तो आज वहां बहुत ही आलिशान मंदिर मस्जिद होता और ये बारातघर की तब सरकार को भी जरूरत नहीं लगती

ऐसी स्तिथि लगभग सभी जगह पर है

tisharan sheel

3 thoughts on “बौद्ध विहारों पर कैसे कब्ज़ा करके वहां से बौद्धों को भगाया जा रहा है…धम्मउदय जाटव

  1. बहुजन समाज को अधिक सतर्क रहना चाहिए. शिक्षा व राजनीतिक जागरूकता की कमी के कारण उनके अधिकारों का हनन हो रहा है. इन परिस्थितियों के बदलने की अभी संभावना प्रतीत नहीं होती.

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