जब तुम तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था? आज जब तुम पर थोडा पैसा आ गया तब इसने तुमको क्यों अपनाया ?….जे के मौर्य


shoodra

आज संविधान और आंबेडकर मिशन के चलते दलित लोग जब थोडा सक्षम हो गए तब बजाये आंबेडकर मिशन को मजबूत करने के ये लोग मन्दिरबाजी और पुरोहित पालन कर रहे हैं| ये वो दिन भूल गए जब इनको मंदिर में गुसने और पुरोहित को चूने पर मार मार कर मार डाला जाता था| अरे अगर अम्बेडकरमीशन का साथ नहीं दे सकते तो कम से कम अपने शोषक को पालना तो बंद करो वर्ना वही स्तिथि दोबारा आ जायेगी| वह रे अहसान फरामोश कौम…..

देखिये श्री जे के मौर्या जी का ये बेतरीन लेख:

1. जब तुमको गाँव से बाहर बस्ती बनाकर रहने के लिए मजबूर किया गया था । तब 5000 साल तक आपका ईश्वर कहाँ था ?

2. जब आपको 5000 साल तक शिक्षा से वंचित रखा गया तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

3. जब 5000 साल तक आपको संपत्ति रखने का अधिकार नहीं था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?…

4. जब आपको गले में हांड़ी लटकाकर चलने के लिए मजबूर किया गया तब पाँच हजार साल तक आपका ईश्वर कहाँ सोया हुआ था ?

5. जब पाँच हजार साल तक आपको पीछे झाड़ू बाँधकर चलने के लिए मजबूर किया गया तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

6. जब आपके प्राणों का मूल्य कुत्ते, बिल्ली, मेंढक के प्राणों के बराबर समझा जाता था तब पाँच हजार साल तक आपका ईश्वर कहाँ था ?

7. जब आपको सुबह शाम चलने पर प्रतिबन्ध था सिर्फ दोपहर को कोई थाली वगैरह बजाते हुए चलने दिया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

8. जिस पानी में कुत्ते बिल्ली मल मूत्र विसर्जित करते रहते थे उसी पानी को आपको पीने नहीं दिया जाता था । तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

9. जब आपकी बहू बेटियों को किसी जानवर की तरह कोई भी ले जा सकता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

10. जब आपको सिर्फ काम कराने के लिए बंधुआ मजदूर की तरह प्रयोग किया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

11. जब आपको मंदिर में नहीं घुसने दिया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

12. जब आपको धर्म कर्म से वंचित रखा गया था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

13. जब आपके छूने से ही ये लोग अपवित्र हो जाते थे तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

14. जब कोई तुम्हारी बीमारी का इलाज तुम्हारी जाति की वजह से करने से इंकार कर देता था और तुम इलाज के आभाव में तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

15. जब पानी के अभाव में तुम प्यासे ही तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था ?

आज जब भारतीय संविधान के वजह से जब आपको इन सबसे मुक्ति मिल गयी और अधिकार मिल गए तो तुम्हारे करोडो ईश्वर पैदा हो गए ?

jk maurya 

Shri J K MAURYA

http://ibnlive.in.com/news/orissa-dalit-mp-denied-entry-in-temple/162457-37-64.html

4 thoughts on “जब तुम तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था? आज जब तुम पर थोडा पैसा आ गया तब इसने तुमको क्यों अपनाया ?….जे के मौर्य

    • Ishwar hoga tabhi to marega. Ishwar ek aisi parikalpna hai jiske naam par shoshak janta ka shoshan karta hai, janta apni durdasha ke liye ISHWAR ko jimmedar tahrati hai aur SHOSHAK saaf bach jaata hai. To shoshak JANTA ka shoshan seede na karke via ISHWAR karta hai.

  1. SHUDRA MANDIR ME PRAVESH NAHI KARE ?? SARA BHARAT DESH SHUDRO 65% HAI ISE ” DESH ME VIDESHI BRAHMANO ” NE YAH MANDIR KYU BANAYA HAI ???? AUR YAH BOARD PADNEWALE SHUDRA SHAYAD APNE DESH ME JINDA NAHI HAI ? NAHI TO VO MANDIR KO AUR MANDIR KE THEKEDARA KO BATA DETE HAMARE DESH ME PRAVESH NAHI KARE ……….

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