क्रांति,मनु की योजना,वर्ण व्यस्था और भारत के बहुजन…ओशो रजनीश


osho36हिन्दू सोसायटी उस बहुमंजिली मीनार कि तरह है जिसमे प्रवेश करने के लिए न कोई सीढ़ी है न दरवाजा। जो जिस मजिल में पैदा हो जाता है उसे उसी मंजिल में मरना होता है .
—–डॉ भीमराव अम्बेडकर

 

 

So everybody is satisfied deep down, and that’s why revolution never
happened in India, and cannot happen. In every country where revolution
happens, it is the intelligentsia of the country which provokes it. They don’t
do the revolution, but they give the ideology. But in India the brahmin is the
intelligentsia. Every revolution will go against him; naturally, he cannot give
the ideology of revolution. He will give ideologies that prevent any dream of
revolution, of change. Of course the king, the warriors, cannot be in favor of
revolution because it is going to be against them. They will be thrown out of
their thrones. The businessmen cannot be for revolution, either, because all
revolutions are against the rich.

And the poor man cannot even imagine revolution, because he has not
been allowed any kind of education. He has been prohibited from any contact
with the society of the three higher classes. He lives outside the town: he
cannot live inside the town. The poor people’s wells are not deep, they
cannot put much money into making wells. The businessmen have big, deep
wells and the king has his own; but even in times when rains have not come
and his wells are dry, the sudra is not allowed to take water from any other
well. He may have to go ten miles to fetch water from a river.

He is so hungry that it is difficult to manage one meal a day, which has

no nourishment in it – how can he think of revolution? He knows that this is
his fate. He has been told and conditioned by the priest that this is his fate:
“God has given you an opportunity to show your trust. This poverty is
nothing, it is a question of a few years. If you can remain faithful, great is
the reward.” So on the one hand the priest goes on preaching to them
against any change, and on the other hand they cannot conceive of change
because they are undernourished.

And you have to understand one thing: that the undernourished person
loses intelligence. Intelligence blossoms only when you have everything that
your body needs, plus something more. That plus becomes your intelligence,
because intelligence is a luxury. A person who has only one meal a day has
nothing, no energy left for intelligence to grow. It is the intelligentsia that
creates the ideas, new philosophies, new ways of life, new dreams for the
future; but that intelligentsia is already on the top. In fact, India has done
something of tremendous importance: no other country has been able to
maintain the status quo in such a scientific way. And you will be surprised;
the man who did it was Manu. After five thousand years, his sutras are still
followed exactly.

In this century, only two persons outside India have appreciated Manu.
One is Friedrich Nietzsche, the other is Adolf Hitler. Adolf Hitler was a disciple
of Friedrich Nietzsche. Friedrich Nietzsche was the philosopher of Nazism:
Adolf Hitler was simply practicing what Nietzsche had preached. The
relationship is exactly as between Marx and Lenin. Marx was the philosopher
who gave the whole ideology of communism, and Lenin put it into reality.
The same was the relationship between Friedrich Nietzsche and Adolf Hitler.
It is not a coincidence that they should both appreciate a book written
five thousand years before in India. Both appreciated it because they could
see what a grand master-planner Manu must have been, to have made a
system that is still alive. He prevented revolution for five thousand years, and
perhaps he will prevent it forever. There may never be a revolution in India.

Source:

Book Title: The Last Testament, Vol. 2.       //  Chapter 6: The Intelligent Way

http://www.osho.com/library/online-library-revolution-lenin-india-f65a91d0-351.aspx

==========================हिंदी रूपांतरण ===========================================================

तो सब लोग तहे दिल से संतुष्ट होंगे, और यही वजह है कि भरत देश में कभी क्रांति नहीं हुई 
और न ही कभी हो सक्ति है। दुनियां में जिस भी देश में क्रन्ति होति है उस क्रन्ति 
कि शुरुआत उस देश के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग करते है, वो असल मे खुद 
क्रांति नहीं करते हैं, लेकिन वे इसकी विचारधारा देते है. भारत में ब्राह्मण 
बुद्धिजीवी वर्ग है, हर क्रांति स्वाभाविक रूप से उसके खिलाफ चली जायेगी , इसलिए वह कभी 
क्रांति की विचारधारा नहीं दे सकता| वो तो ऐसी विचारधारा देगा जो क्रन्ति के किसी भी सपने को रोक सके| 
बेशक राजा, योद्धा, क्षत्रिये भी क्रन्ति के पक्ष में नहीं हो सकते 
हर क्रांति उनके खिलाफ चली जायेगी. वे राज गद्दि से उतार दिये जायेंगे
व्यापारी भी क्रांति के पक्ष में नहीं हो सकता क्योंकि
सभी क्रांतियां अमीर के खिलाफ होतीं हैं|

गरीब आदमी तो क्रांति की कल्पना भी नहीं कर सकते क्योंकि उसको तो किसी भी प्रकार कि 
शिक्षा की अनुमति ही नहीं दी गई. उसे अपने से उपर के तीन वर्णों से किसी भी संपर्क से मना कर दिया गया 
वो शहर के बाहर रहता है
वो शहर के अंदर नहीं रह सकता.

गरीब लोगों के कुँए इतने गहरे नहीं हैं
वे कुँए बनाने में ज्यादा पैसा नहीं डाल सकते हैं. व्यवसायियों के पास अपने बड़े और गहरे कुँए है
और राजा के पास अपने कुँए है ही।
अगर कभी बारिश नहीं आए और उसके कुँए सूख रहे होते हैं, तो भी शूद्र को अन्य किसी के कुएं से पानी लेने की अनुमति नहीं है
उसको किसी नदी से पानी लाने के लिए दस मील दूर जाना पड़ सकता है.

वो इतना भूखा है की दिन मे एक बार के भोजन का प्रबंधन करना भी मुश्किल है 
उसको कोई पोषण नहीं मिलता,वे कैसे क्रांति के बारे में सोच सकते हैं? वह यह जानता है कि
कि यही उसकी किस्मत है: पुजारी ने उनको यही बताया है यही उनकी मानसिकता में जड़ कर गया है|
“इश्वर ने आप को अपने पर भरोसा दिखाने का मौका दे दिया है. यह गरीबी 
कुछ भी नहीं है, यह कुछ वर्षों के लिए ही है,आप वफादार रह सकते हैं तो आपको महान फ़ल मिलेगा” 
तो एक तरफ़ तो पुजारी किसी भी परिवर्तन के खिलाफ उन्हें ये उपदेश देता जाता है
है, और दूसरी तरफ वे परिवर्तन कर भी नहीं सकते क्योकि वे कुपोषण का शिकार हैं.

और आप के लिये एक बात समझने की है कि कुपोषित व्यक्ति बुद्धि बल खो देता है. बुद्धि बल वहीँ खिलता है जहाँ वो सब कुछ होता है है जिसकी
शरीर को जरूरत है,इतना ही नहीं इसके साथ साथ ‘कुछ और’ भी चाहिए. ये जो ‘कुछ और’ और है यही तो बुद्धि हो जाता है,
बुद्धि एक लक्जरी है. एक दिन में केवल एक बार भोजन करने वाला व्यक्ति
के पास कुछ भी नहीं है, बुद्धि विकसित करने के लिए उस्के पास कोई ऊर्जा नहीं है. यह बुद्धिजीवी वर्ग है जो
विचारों, नए दर्शन, जीवन के नए तरीके, भविष्य के लिए नए सपने बनाता है|
लेकिन यहाँ बुद्धिजीवि तो शीर्ष पर पहले से ही है. वास्तव में भारत मे जबरदस्त महत्व का काम किया गया है
विश्व का कोई अन्य देश इतना सक्षम नहीं है कि 
इस तरह के किसी वैज्ञानिक तरीके से यथास्थिति बनाए रखें. और आप हैरान होंगे
ये एक आदमी ने किया, वो मनु था. हजारों साल बाद उसके सूत्र अभी भी 
वास्तव में वैसे के वैसे पालन किये जा रहे हैं|
इस सदी में भारत से बाहर केवल दो व्यक्तियों ने मनु की सराहना की है.

एक फ्रेडरिक नीत्शे है, अन्य एडॉल्फ हिटलर है. एडोल्फ हिटलर फ्रेडरिक नीत्शे का एक शिष्य था
फ्रेडरिक नीत्शे फ़ासिज़्म के दार्शनिक था:
एडोल्फ हिटलर बस नीत्शे की सीख का अभ्यास कर रहा था.
रिश्ते बिल्कुल मार्क्स और लेनिन के बीच के रूप में है. मार्क्स दार्शनिक था
जिसने साम्यवाद की पूरी विचारधारा दे दी है, और लेनिन ने उसे साकार किया
उसी तरह फ्रेडरिक नीत्शे और एडॉल्फ हिटलर के बीच रिश्ता था.
यह एक संयोग नहीं है कि उन दोनों ने भारत में लिखित पुस्तक की सराहना की
. दोनों ने इसकी सराहना की क्योंकि दोनों ही देख सकते थे कि 
मनु कितना भव्य मास्टर योजनाकार रहा होगा जिसने एक ऐसी व्यवस्थ बना दी 
जो अभी भी जिंदा है। उसने हजारों साल के लिए क्रांति को रोका, और
शायद वह हमेशा के लिए इसे रोका पाएगा. शायद भारत में कभी क्रांति नहीं हो सकती है.

Source:

Book Title: The Last Testament, Vol. 2.       //  Chapter 6: The Intelligent Way

http://www.osho.com/library/online-library-revolution-lenin-india-f65a91d0-351.aspx

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some more

स्त्री है दीन ! उसको पुरुष ने कह रखा है कि तुम दीन हो ! और मजा यह है कि स्त्री ने भी मान रखा है कि वह दीन है!

असल में हजारों साल तक हिंदुस्तान में शुद्र समझता था कि वह शुद्र है; क्योंकि हजारों साल तक ब्राहमणों ने समझाया था कि तुम शुद्र हो ! अम्बेडकर के पहले, शुद्रों के पांच हजार साल के इतिहास में कीमती आदमी शुद्रों में पैदा नहीं हुआ !

इसका यह मतलब नहीं कि शुद्रों में बुद्धि न थी और अम्बेडकर पहले पैदा नहीं हो सकता था ! पहले पैदा हो सकता था,

लेकिन शुद्रों ने मान रखा था कि उनमें कभी कोई पैदा हो ही नहीं सकता ! वे शुद्र हैं, उनके पास बुद्धि हो नहीं सकती ! अम्बेडकर भी पैदा न होता, अगर अंग्रेजों ने आकर इस मुल्क के दिमाग में थोडा हेर-फेर न कर दिया होता तो आंबेडकर भी पैदा नहीं हो सकता था !
हालांकि जब हमको हिंदुस्तान का विधान बनाना पड़ा, कान्सिटटयूशन बनाना पड़ा, तो ब्राहमण काम नहीं पड़ा, वह शुद्र अम्बेडकर काम पड़ा ! वह बुद्धिमान से बुद्धिमान आदमी सिद्ध हो सका !
लेकिन दौ सौ साल पहले वह हिंदुस्तान में पैदा नहीं हो सकता था ! क्योंकि शूद्रों ने स्वीकार कर
लिया था, खुद ही स्वीकार कर लिया था कि उनके पास बुद्धि नहीं है ! स्त्रियों ने भी स्वीकार कर रखा है कि वे किसी न किसी सीमा पर हीन हैं !….ओशो नारी और क्रांति (पेज संख्या.१७)

4 thoughts on “क्रांति,मनु की योजना,वर्ण व्यस्था और भारत के बहुजन…ओशो रजनीश

    • very good, You know the truth. and the truth is that in ISLAMIC popolation 80% actually are BAHUJAN of BHARAT, who were sufferers of BRAHMANIC VARNVYASTHA. These population was earliar Buddhist and later shoodra. Then they embraced ISLAM to be SAFE.Now since we are slowly knowing truth so it is good to start going towards truth i.e. The Buddha and his dhamma….means the awakning…means science of developing Brain…..means being pure…..means being PURE BHARATIYE….means identifying forfathers…means serving HUMANKIND…means a lot and lot more….Welcome Mr Akhtar to the world of infinite possibilities to go towards NIRVANA…..

  1. S.C,ST,OBC,.Adivasis,Banvasis , Dravids and minorities form vast majority of Indian population.They are living under similar pitiable conditions.They should come together and capture political power of our country democratically. Only then the dreams of Baba Sahab can take shape.

    • Yes you are right, but remember there is no use of awakning or knowing truth if every BAHUJAN of INDIA consider his own community and its local flag. If every bahujan community will fight alone then DEFEAT is sure as it happened in history.For example dhobi is fighting with is flag of dhobi,dhanuk,kahar,chamar,bhangi,minorities,cristians ets and when they will be suppressed no other bahujan will say a word against it.

      We have to select one common and universal FLAG that is well accepted with all posibilities of development.Such flag is only one i.e. BUDDHISM. all other flags were actually desighned and handed over to bahujan community by manuvadis.they have written history of that community, whatever efforts one do he will reach to this desighned history not the real history of being real BHARTIYE….only BUDDHISM can take them to real roots and give every kind of knowledge and support both at personel level as well as country level.

      Our universal flag can be BUDDHISM only.

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