धर्म असल में क्या है, बौद्ध धम्म और अन्य धर्मों में क्या फर्क है …Udham Charmkar


darshnik skeka

DHAMMA or DHARMAधर्म का प्रयोजन क्या है – भिन्न-भिन्न धर्मो ने इसके भिन्न-भिन्न उत्तर दिए है | इस प्रश्न का एक सामान्य सा दिया जाने वाला उत्तर है मानव को ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर लगाना और उसे अपनी आत्मा के मोक्ष का महत्तव समझाना | बहोत से धर्मो के अनुसार तिन प्रकार के राज्य है स्वर्ग का राज्य (ईश्वर का सीधा शासन), पृथ्वी का राज्य और नरक का राज्य (शैतान का शासन) | कुछ धर्म कहते है की स्वर्ग का राज्य धर्म-राज्य है क्योकि वहा ईश्वर का सीधा शासन है | वो बताते है जो ईश्वर और उसके पैगम्बर पे ईमान लाता है वह ही स्वर्ग पहुच पता है और जीवन में जितने भी भोग विलास के साधन है वो सभी स्वर्ग में प्राप्त करता है | सभी धर्मो का यही उपदेश है कि मानव के जीवन का उद्देश्य इस स्वर्ग के राज्य को प्राप्त करना और कैसे प्राप्त करना यही होना चाहिए |

तो मेरे मित्रो क्या यही धर्म है ? क्या यही धर्म-राज्य है ? भोग विलास के साधनों की प्राप्ति |

इस घुप्प अंधकार में सिर्फ तथागत ही सूर्य के सामान दिखाई देते है | तथागत का कहना था धर्म का राज्य पृथ्वी पर ही है और वह धर्म-पथ पर चल कर प्राप्त किया जा सकता है | धर्म का उद्देश्य है मानव के दुःख का अंत करना न की किसी काल्पनिक ईश्वर, स्वर्ग अथवा जन्नत की प्राप्ति | आदमी-आदमी के साथ जो अनुचित व्यव्हार करता है उसी से मानव का सारा दुःख जन्म लेता है | बुद्ध ने लोगो से कहा की यदि तुम अपने दुःख का अंत करना चाहते हो तो हर किसी को दुसरे के साथ न्याय सांगत, धर्म-संगत और समान व्यव्हार करना चाहिए तभी पृथ्वी धर्म का राज्य बनेगी |

मेरी समझ से बुद्ध का धर्म ही सच्चा धर्म है और सिर्फ तथागत का धर्म ही धर्म-राज्य की स्थापना कर सकता है |

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“बौद्ध धम्म में वो बात है कि मीडिया, धन और राजनेतिक सरक्षण से सदियों का रटाया ईश्वर और पुरोहित श्रेस्टता कि पट्टी को लोगों के जहन से सिर्फ एक साल में धोकर साफ़ कर सकता है बशर्ते सिर्फ एक साल के लिए बौद्ध धम्म को मीडिया धन और राजनेतिक सरक्षण दे कर देख लो, धर्म की लोग किसी भी तरह व्याख्या करें पर असल में धर्म किसी कौम के लिए संसार में अपना अस्तित्व बचाये रखने की नीति के सिवाए और कुछ नहीं|भारत के बहुजनों का धर्म सदियों से बौद्ध धम्म रहा है पर इतिहास में सत्ता के संगर्ष के दौरान बौद्ध धम्म नीति हार गई और बहुजन अपनी सुरक्षा के लिए ईसाइयत और इस्लाम की तरफ चले गए, जो नहीं गए वही आज के दलित हैं| आज हम वापस अपने धम्म में लौट रहे हैं पर हमें बहुजन सुरक्षा नीति को बदलना और विकसित करना ही होगा अन्यथा फिर से हार निश्चित है| जो जाना वो समझ गया धम्म सबसे बेहतर है पर यहाँ सुरक्षा और फायदा कहाँ तो चाहकर भी अपना नहीं पा रहे|”….समयबुद्धा

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