बुद्ध के पाँच उपदेश हैं…Dr Prabhat Tandon


बहुत से लोग बुद्ध धम्म को दुखवादी (pessimistic ) समझते हैं लेकिन अगर हम भगवान बुद्ध द्वारा प्रदान किये गये पंचशील सिद्दांत को गौर से देखें तो यह जीवन के प्रति सहज दृष्टिकोण का परिचय देते हैं । यह पंचशील सिद्दांत क्या गलत है या क्या सही है की परिभाषा तय नही करते बल्कि यह हमे सिखाते हैं कि अगर हम होश रखें और जीवन को गौर से देखें तो हमारे कुछ कर्म हमको या दूसरों को दु:ख पहुंचाते हैं और कुछ हमे प्रसन्नता का अनुभव भी कराते हैं ।

बुद्ध के पाँच उपदेश हैं :

प्राणीमात्र की हिंसा से विरत रहना ।
चोरी करने या जो दिया नही गया है उसको लेने से विरत रहना ।
लैंगिक दुराचार या व्यभिचार से विरत रहना ।
असत्य बोलने से विरत रहना ।
मादक पदार्थॊं से विरत रहना ।

बुद्ध के यह पाँच उपदेशों को हम व्यवाहार के “प्रशिक्षण के नियम” के रुप मे समझे न कि किसी आज्ञा के रुप मे । यह ऐसा अभ्यास है जिसका विकास करके ध्यान, ज्ञान, और दया को पा सकते हैं ।
हम इन पाँच उपदेशों को कैसे समझते है यह हमारे विवेक पर निर्भर करता है । जैसे कुछ लोग चीटीं को मार नही सकते लेकिन माँस खाते हैं या फ़िर कुछ सिर्फ़ शाकाहारी ही होते हैं । कुछ मदिरा को हाथ भी नही लगाते और कुछ दिन मे सिर्फ़ एक आध पैग लगाते हैं क्योकि इससे उनको लगता है कि इससे उनको सूकून मिलता है या कुछ हमेशा नशे मे धुत रहते हैं । यह पाँच उपदेश यह नही सिखाते कि क्या सही है बल्कि अगर हम ईमानदारी से तय करे कि हमारे लिये क्या मददगार है और क्या हानिकारक ।
इसी तरह अगर हमे दूसरों की आलोचना करने की गहरी आदत है तो हम चौथे उपदेश को अभ्यास के लिये चुन सकते हैं । और अगर हमे टी.वी. या इन्टर्नेट का नशा सा है तो हम पाँचवे नियम को भी चुन सकते हैं । बुद्ध ने जब यह पाँच उपदेश दिये थे तन उनका तात्पर्य मादक तत्वों से ही रहा होगा लेकिन वक्त के साथ मनोरंजन की गतिविधिया भी असंख्य हो गयी ।हँ , अगर हमसे कोइ सिद्दांत टूट भी जते है तब इस बात का अवशय ख्याल रखें कि हम अपराध बोध और पछतावे मे अन्तर अवशय रखें ।

इन उपदेशॊ का प्रयोजन हमे प्रसन्न रखना है और दुख से दूर रखना है । अगर हमारी वजह से किसी को चोट पहुची हो तो हमे दुख भी होता है और स्वाभाविक रूप से पश्चाताप भी । हम इस बात का ध्यान रखे और इससे सबक लें । पछ्तावे के यह क्षण बिना किसी अवशिष्ट भावनाओं को छोड़कर चले जाते हैं । लेकिन कभी –२ पछतावा और प्रायशिचित आत्म घृणा और दुख का कारण बनाता है । तब हम इस बात का ध्यान रखें और आत्म घृणा और अपराध बोध की बेकार की आदत से बचें क्योंकि यह भी आदत स्व दुख पहुँचाने की आदत सी है ।

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12 thoughts on “बुद्ध के पाँच उपदेश हैं…Dr Prabhat Tandon

  1. बुद्ध ने धर्म को प्रदर्शित किया है कि पहले दो अतियों (तपन और भोग ) को त्यागो और फिर साक्षात करो सैंतीस बोधिपक्षिय धर्मों का —
    सैंतीस बोधिपक्षिय धर्म
    चार सतिपट्ठान
    चार सम्यक प्रधान
    चार ऋद्धिपाद
    पाँच अध्यात्मिक इन्द्रियाँ
    पाँच बल
    सात सम्यक प्रधान
    आठ आर्य अष्ठान्गिक मार्ग

    भगवान् ने कहा है कि धर्म को पुष्ट किया जाता है प्रज्ञा, शील ,समाधि द्वारा ||

    तो पहले अतियो का त्याग जरूरी है फिर प्रज्ञा इन्द्रिय को बलवान करना है , तब ही आप शीलों का पालन कर पायेंगे अन्यथा मोह के कारण शील टूट जाता है |

  2. Bhagwan budhha humare bhagwan hai jo aaj tak ke koi bhagwan nahi hai unhone koi jaati vardan nahi kiya sabhi ko ek saman mana daya ho bhagwan budhha ki

    • Jesus Christ ke baare me pado ,air jaan jaoge ki God kya hota hai?
      God pavitra hai ( Jo bhog- vilas nhi krta, Jo manaviye bhog- vilas ke dwara na avatar leta hai) ,God sarvagyani arthat Jo sanpoorn brahmand ke bishay me sab kuchh janta hai, God sarvaveyapi hai vo har jagah janha bhi uske log pukare upasthit ho jaye ek hi samay per har jagah, God ke upar death ka koi adhikar nhi hota hai vah to death ke upar khud hi samarthi hai, God sabhi ko bahut pyar karta hai isliye hm sabhi ko uski zaroorat hai, hamare paapon ki kshama koi nhi de sakta , keval Jesus Christ Jo pavitra hai, dayaloo hai, kshama karne vala hai, uddhar ek matra yeshu mashi me hi hai, aur kisi naam me nhi .

      • GOD meand generate operate ands destroy. Ye manav kalpna hai. jise bhakt mansikta ke log sach maante hain buddhiman log kalpna mante hain.
        mudde ki baat ye hai ki aapki samajh ka level kay hai ….

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