16-MAR-2014 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना: बौद्ध धम्म पर दस बुनियादी सवाल जवाब.…समयबुद्धा


किसी भी धर्म की कुल जनसँख्या का अमूमन 10% बुद्धिजीवी वर्ग धर्म का अध्यन करता है और समझता है पर 90% आम आदमी रोज़ी रोटी कमाने और अपने धर्म के गिने चुने बुनियादी सवालों के जानने और मानने  तक ही सीमित रहता है|जैसे- हमारा पूजनीय इश्वर कोन है,हमरी धार्मिक किताब,चिन्ह,पूजास्थल क्या है,हमारे त्यौहार कौन से है और उनको कैसे मानते हैं | आजकल भारत देश के मूलनिवासयों का रुझान बौध धर्म की तरफ बहुत बढ़ रहा है क्योंकि केवल यहीं धर्म से जुडी सभी जरूरतों की पूर्ण संतुस्टी मिल पाती है| कई जगह ऐसी पारिस्थि देखी गई है की जो लोग खुद को  बौध  कहते हैं उन्हें भी इन गिनेचुने  आम सवालों का जवाब भी नहीं मालूम होता | बौध साहित्य बहुत व्यापक है जिसे हर व्यक्ति नहीं पढ़ पता | ऐसे में  सर्व जीव हितकारी बौध धर्म को हर खास-ओ-आम तक उन्ही की रूचि अनुसार पहुचाने की मानव सेवा करने के लिए समयबुद्ध मिशन ट्रस्ट प्रयासरत है, इसी कड़ी में प्रस्तुत है बौद्ध धर्म के बुनियादी सवाल जवाब:

 

प्रश्न 1    हमारा धार्मिक चिन्ह क्याहैं?  

200px-Ashoka_Chakra_svg

“धम्मचक्र या समयचक्र” है जिसके सभी अंगों का कुछ अर्थ है जो इस प्रकार है 

१. गोल घेरा दर्शाता है बौध धर्म की शिक्षा ही सम्पूर्ण है और समय ही ऐसा है जिसका कोई आदि  अंत नहीं है

२. आठ तीले  अष्टांगिक मार्ग दर्शातें हैं  जो समस्त विश्व ने बुद्धिस्म के चिन्ह के रूम में स्वीकृत है

३. बारह तीले प्रतीत्यसमुत्पाद का आरंभ के १२ सिद्धांतों को दर्शाते हैं

४. चौबीस  तीले प्रतीत्यसमुत्पाद का आरंभ के १२ और समाप्ति के १२ सिद्धांतों को दर्शाते हैं

५. चक्र का केंद्र अनुशाशन और ध्यान केन्द्रित करने को दर्शाता है

हमारा झंडा 

buddhist flag

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प्रश्न 2 …बौद्ध धर्म ग्रंथ (धार्मिकपुस्तकें) कौनसीहैं?

* त्रिपिटक

भगवान बुद्ध ने अपने हाथ से कुछ नहीं लिखा था। उनके उपदेशों को उनके शिष्यों नेपहले कंठस्थ किया, फिर लिख लिया। वे उन्हें पेटियों में रखते थे। इसी से नाम पड़ा, ‘पिटक’। पिटक तीन हैं:-

1) विनय पिटक :इसमें विस्तार से वेनियम दिए गए हैं, जो भिक्षु-संघ के लिए बनाए गए थे। इनमें बताया गया है कि भिक्षुओंऔर भिक्षुणियों को प्रतिदिन के जीवन में किन-किन नियमों का पालन करनाचाहिए।

2) सुत्त पिटक :सबसे महत्वपूर्ण पिटक सुत्त पिटक है। इसमें बौद्ध धर्मके सभी मुख्य सिद्धांत स्पष्ट करके समझाए गए हैं। सुत्त पिटक पाँच निकायों में बँटाहै:- (1) दीघ निकाय,(2) मज्झिम निकाय, (3) संयुत्तनिकाय, (4) अंगुत्तर निकाय और ( खुद्दक निकाय)
खुद्दक निकाय सबसे छोटा है। इसके 15 अंगहैं। इसी का एक अंग है ‘धम्मपद’। एक अंग है ‘सुत्त निपात’।

3) अभिधम्म पिटक :अभिधम्म पिटक में धर्म और उसके क्रियाकलापों कीव्याख्या पंडिताऊ ढंग से की गई है। वेदों में जिस तरह ब्राह्मण-ग्रंथ हैं, उसी तरहपिटकों में अभिधम्म पिटक हैं।

* धम्मपद : हिन्दू-धर्म में गीता का जो स्थान है, बौद्ध धर्म में वही स्थान धम्मपद का है। गीता धम्मपद सुत्त पिटक के खुद्दक निकाय का एक अंश है।धम्मपद में 26 वग्ग और 423 श्लोक हैं।बौद्ध धर्म को समझने के लिए अकेला धम्मपद ही काफी है। मनुष्य को अंधकार से प्रकाशमें ले जाने के लिए यह प्रकाशमान दीपक है। यह सुत्त पिटक के सबसे छोटे निकाय खुद्दकनिकाय के 15 अंगों में से एक है।

*गुजरे वक़्त में धर्म ग्रन्थ ने संविधान का काम किया है, इस नजरिये से देखा जाये तो  आज के युग में भारतीय संविधान धर्म ग्रन्थ के समतुल्य है, क्योंकि ये भी हमें व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने में बेहतरीन मार्ग दिखता है |

बौद्ध धम्म साहित्य में एक तरफ तो लिखा है फलां बात ऐसे है वहीँ कहीं दूसरी तरफ लिखा है फलां बात ऐसे नहीं ऐसे है|आज बौध धम्म की तरफ अग्रसर लोगों की सबसे बड़ी परेशानी ये है की वो किसको सही माने किसको गलत,किसको अपनाएं किसको छोड़ें|बौद्ध धम्म के पतन के लिए न केवल दमन से बल्कि विरोधियों ने भिक्षु बन कर बौद्ध साहित्य में बहुत ज्यादा मिलावट कर दी थी| वही मिलावट का साहित्य आज मार्किट में उपलब्ध है जिसका सार यही बनता है जी जीवन नीरस है कुछ मत करो|असल में बौद्ध धम्म मनुवादी षडियन्त्र और अन्याय के खिलाफ क्रांति है|आप किसी धम्म साहित्य की मत सुनो, बाबा साहब आंबेडकर की निम्न तीन पुस्तकों को शुरुआती ज्ञान से लेकर अंतिम रेफरेंस तक मनो :

१. भगवन बुद्धा और उनका धम्म

२. भगवन बुद्धा और कार्ल मार्क्स

३. प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति

इन तीनो पुस्तकों से आगे जाना असल में अपने को धम्म विरोधी मिलावट में फ़साना होगा|इन तीन पुस्तकों की रचना डॉ आंबेडकर ने इसी भटकाव को रोकने के लिए किया है और ये बात उन्होंने खुद कही है|हमें आखिर कहीं किसी बिन्दु पर तो एक मत होना ही होगा वरना विरोधी अपनी चाल चल जायेंगे और हम सही गलत की बहस ही करते रह जायेंगे,अब फैसला आपके हाथ में है

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प्रश्न 3  हमारा मुख्य त्यौहार क्या है?

            बुद्ध जयन्ती (बुद्ध पूर्णिमा, वेसाक या हनमतसूरी) बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। बुद्ध जयन्ती वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता हैं। इस दिन 563 ई.पू. में भगवान बुद्ध  संकिसा  लुम्बिनी मे जन्म हुआ था , इसी पूर्णिमा के दिन ही 483 ई.पू. में 80 वर्ष की आयु में, देवरिया जिले के कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया था। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन अर्थात वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। ऐसा पूरी दुनिया में  किसी अन्य के साथ आज तक नही हुआ है।बौध धर्म में पूर्णिमा का बहुत महत्व होता है हर महीने की पूर्णिमा का विशेषअर्थ होता है |

14 april… डॉ आंबेडकर जयंती
25 disembar मनुस्मृति धन दिवस :   अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पढ़िए  https://samaybuddha.wordpress.com/2013/12/25/manusmriti-burning-day-s-r-darapuri-buddhist-dalit-bahujan/
14 october… धम्मक्रांति दिवस aktubar

धम्म क्रांति दिवस 14-OCT :  बौद्ध धम्म ही बहुजनों का असल धर्म था है और रहेगा, डॉ अंबेडकर ने धर्म परिवर्तन नहीं करवाया बल्कि अपने धम्म में लौटाया है |अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पढ़िए

https://samaybuddha.wordpress.com/2013/10/14/dalit-dharm-ki-avdharna-v-baudh-dhamm-kanval-bharti-part-3/

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प्रश्न 4  मुख्य बौद्ध  प्राचीन तीर्थ  क्या है?

(1) लुम्बिनी : जहाँ भगवान बुद्ध का जन्म हुआ,यह स्थान नेपाल की तराई में पूर्वोत्तररेलवे की गोरखपुर-नौतनवाँ लाइन के नौतनवाँ स्टेशन से 20 मील और गोरखपुर-गोंडा लाइनके नौगढ़ स्टेशन से 10 मील दूर है।
(2) बोधगया : जहाँ बुद्ध ने ‘बोध’ प्राप्तकिया।भरत के बिहार में स्थित गया स्टेशन से यह स्थान 7 मील दूर है।
(3) सारनाथ :भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश जहाँ से बुद्ध ने दिव्यज्ञान देना प्रारंभकिया।बनारस छावनी स्टेशन से पाँच मील, बनारस-सिटी स्टेशन से तीन मील और सड़क मार्गसे सारनाथ चार मील पड़ता है।
(4) कुशीनगर :जहाँ बुद्ध का महापरिनिर्वाणहुआ।पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले से 51 किमी की दूरी पर स्थित है।

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प्रश्न 5बौध धम्म में परम शक्ति इश्वर कौन है?

भगवान् बुद्ध ने स्वयं के इश्वर होने,किसी इश्वर का अवतार होने या किसी इश्वर का दूत होने से साफ़ इनकार किया है,उन्होंने स्वयं को मार्गदाता कहा है| किसी और के इश्वर होने के प्रश्न पर वे मौन हो कर गुजरते हुए समय की तरफ इशारा किया है ,जिसे समय गुजरने के साथ कुछ बौध सम्प्रदाए में इंकार या अनीश्वरवाद  समझा गया, जबकि कुछ सम्प्रदायें में भगवान् बुद्ध को ही इश्वरिये शक्ति के रूप में स्वीकार कर लिए|

बौध धम्म पूर्णतः वैज्ञानिकता पर आधारित धर्म है जहाँ प्रमाणिकता के बिना कुछ भी स्वीकार्य नहीं, जबकि अन्य सभी धर्मों के सिद्धांत केवल आस्था और परंपरा के बल पर चल  रहे हैं| अब भी दुनियां में ऐसा बहुत कुछ है जो वैज्ञानिकता और इंसान के समझ के परे है जिसे अन्य धर्म अपने धर्म से जोड़कर जनता को अपने साथ मिलाये रखते हैं| बुद्ध धम्म में ऐसा नहीं है, भगवान् बुद्ध ने इस विषय में कहा है की “सर्वोच्च सत्य अवर्णननिये है” | पर ये भी एक सच्चाई है की जब किसी व्यक्ति के जीवन में भीषण दुःख या परालौकिक घटनाएँ होतीं हैं तब केवल इश्वर रुपी काल्पनिक सहारा ही उसे ढाढस  बंधता है| बौध धम्म की सभी बातें सभी को अच्छी लगती हैं पर अनीश्वरवाद की बात से पीछे हट जाता है , 10% बुद्धिजीवी वर्ग तो अनीश्वरवाद को समझ सकता है पर मानते वे भी नहीं हैं |इसपर 90% आम आदमी को तो अटूट विशवास है की कोई न कोई  सर्वशक्तिमान तो है जो दुनियां चलता है|आम आदमी चमत्कार को नमस्कार करता है,उसे कोई ऐसा चाहिए ही चाहिए जिसके आगे वो अपने सुख दुःख रख सके| वो सच्चाई जानना ही नहीं चाहता ऐसे में उन तक भगवान् बुद्ध का सन्देश कैसे पहुंचेगा? यही कारण रहा की ये महा-कल्याणकारी धर्म हर आदमी तक आज भी नहीं पहुँच पा रहा है |

असल में व्यापक प्रचार न होने के कारण बौध धम्म को समझने के लिए थोडा अध्यन करना पड़ता है इसलिए ये केवल बुद्धि-जीवी वर्ग तक ही सीमित होकर रह गया है|उन्हें बाकि बातें समझने के लिए जीवित गुरु के प्रवचनों की आवश्यकता होती है, मौलवी,पादरी,पुरोहित,सत्संग अदि इसी जरुरत का एक उदाहरण है | इसी बात का फायदा उठाकर अन्य धर्म बहुसंख्यक आम जनता को काल्पनिक आस्था,चमत्कार और कर्मकांडों में फसाकर सत्य से दूर कर देते हैं |शायद  इसी इश्वरिये कल्पना की जरूरत के चलते सभी धर्म किसी इश्वरिये नाम पर केन्द्रित होते हैं,यहाँ तक की कुछ अभिनज्ञ अनुयाई  भगवान् बुद्ध को ही इश्वरिये शक्ति के रूप में पूजते हैं |

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प्रश्न 6  भगवन बुद्ध कौन हैं क्या वो इश्वरिये शक्ति नहीं, क्या वो मेरे मन्नत पूरी नहीं करेंगे?

गौतम बुद्ध वास्तव में कौन हैं, उनकी शिक्षा क्या है, उनका मकसद और उपलब्धि क्या है अदि समझने के लिए उनके बारे में ओशो द्वारा बताई प्रस्तुत सात प्रमुख बातें जरूर पढ़ें या विडियो सुने |अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पढ़िए

https://samaybuddha.wordpress.com/2013/10/31/bhagwan-buddha-meri-dristi-me-osho-lord-buddha-buddhism/#comments

विडियो 

 

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प्रश्न 7   हमारा पूजा स्थल या मंदिर क्या है?

हमारा धार्मिक स्थल है “बौद्ध विहार” जहाँ पर गौतम बुद्ध और बाबा साहब आंबेडकर कि मूर्तियां लगी होती हैं| ध्यान रहे हम इनकी वंदना करते हैं पूजा नहीं करते इसलिए पूजा स्थल शब्द ही गलत होगा|

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प्रश्न 8  बहुजनों को अन्य धर्मों में कन्वर्ट की जगह अपने बौद्ध धम्म में ही क्यों लौटना उचित है?

मुझे सुन कर बहुत दुःख होता है जब कोई बहुजन दुसरे बहुजन के बारे में ये कहता है की वो बौध धर्म में कन्वर्ट हो गया| उस बेचारे की भी क्या गलती जो अपना इतिहास ही नहीं जानता उससे और क्या उम्मीद की जाए|इतिहास में भी बहुत बड़ी गड़बड़ और मिलावट है क्योंकि इतिहास जीतने वाला लिखवाता है और बौद्ध धम्म के विरोधीयों ने कैसा इतिहास लिखा होगा ये समझा जा सकता है|ये बात अपने दिमाग में अच्छी तरह बैठा लो की बौद्ध धम्म ही भारत की बहुसंख्यक जनता का धर्म था जिसे कई प्रकार के षडियंत्रों  द्वारा मात दी गई थी|अधिक जानकारी के समयबुद्धा की वेब साईट पर फ्री में उपलब्ध पुस्तक DECLINE AND FALL OF BUDDHISM(A tragedy in Ancient India) by Dr. K. Jamanadas डाउनलोड करें और पढ़ें | आगे से कन्वर्ट वाली बात न कहें बल्कि ये कहें की बहुत सह लिए अब हम सब वापस अपने धर्म बौद्ध धम्म में लौट रहे हैं|.

अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पढ़िए

https://samaybuddha.wordpress.com/2012/10/29/why-bahujan-should-return-back-in-buddhism/

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प्रश्न 9  पर मैंने सुना है कि बौद्ध धम्म हमें मानसिक रूप से कमजोर बनता हैं, ऐसे में पहले से ही दबाए- सताए बहुजनों कि बौद्ध धम्म कैसे मदत करेगा?

ध्यान रहे हर बात का समय होता है जब आप शक्तिशाली हो तब आपको अहिंसा, करुणा, मैत्री और क्षमा की शिक्षा काम आएगी पर जब विपत्ति का समय हो तब केवल क्षमता बढ़ाना और अपने विरोधियों के खिलाफ संगर्ष करने से कल्याण होगा|

अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पढ़िए

https://samaybuddha.wordpress.com/2014/01/16/samaybuddha-poornima-buddhism-dhamm-deshna-16jan2014/

 

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प्रश्न 10  बुद्ध धर्म के सिद्धांत क्या हैं?

बुद्ध धम्म कौतुहुल और जिज्ञासा से कम नही है , जितना  इसे जानने का प्रयत्न्न करोगे उसमे उतना ही समाते चले जाओगे। जहाँ एक ओर सारे मत , धर्म और मतावलम्बी अपने-२ उपासकों या अनाम ईशवर को महाँमडित करने का प्रयत्न्न करते हैं वही यह मत मन के कोने को छूते , झकझोरते और पूर्वग्रहों से मुक्त करता प्रतीत होता है ।हमारी नजर मे बुद्ध एक बेहतरीन मार्गदर्शक थे, चिकित्सक थे , शास्ता थे ,गुरु थे,महामानव थे और अप्रमाद योगी थे । सारी मनुष्य जाति मे बुद्ध ने जितनी संभावनाओं को जन्म दिया , किसी दूसरे मनुष्य ने नही दिया । साधारण से दिखने वाले बुद्ध के वचन क्रांति के उदघोष हैं और यही कारण है बुद्ध के वचनों के साथ क्रांति की ऐसी आँधी आती है जो हमारी जड मान्यताओं को तोड जाती है और हमारे लिये छॊड जाती है हमारी शुद्द निजता , हमारा एकांत मन । मन से विदा हो जाती है सब भीड –भाड , समाज की भेड्चाल और प्रथम बार व्यक्ति जानता है व्यक्ति होना ।

नीरव ह्र्दय
नि:स्तब्ध मन
शून्य नयन
निरभ्र गगन
सहज ध्यान

आज सत्संग की लहर चली है पर इस शब्द का मतलब है सत्य का संग, असल मैं बौध मार्ग को जानना ही सत्ये का संग होना है| क्योंकि बौध धर्म का लक्ष्य सत्ये की खोज था तो बौध साहित्य में ही सत्संग शब्द प्रथम बार इस्तेमाल हूया| तो अगर आपमें वाकई सत्य जानने की इच्छा है तो बुद्धा के मार्ग को जानो

नमो बुद्धाय

भगवान् बुद्धा ने कहा है

“तुम किसी बात को केवल इसलिये मत स्वीकार करो कि यह अनुश्रुत है, केवल इसलिये मत स्वीकारो कि यह हमारे धर्मग्रंथ के अनूकूल है या यह तर्क सम्मत है , केअवल इसलिये मत स्वीकरो कि यह यह अनुमान सम्मत है , केवल इसलिये मत स्वीकारो कि इसके कारणॊं की सावधानी पूर्वक परीक्षा कर ली गई है , केवल इसलिये मत स्वीकरो कि इस पर हमने विचार कर अनुमोदन कर लिया है , केवल इसलिये मत स्वीकारो कि कहने वाले का व्यक्तित्व आकर्षक है, केवल इसलिये मत स्वीकारो कि कहने वाला श्रमण हमारा पूज्य है । जब तुम स्वानुभव से यह जानो कि यह बातें अकुशल हैं और इन बातों के चलने से अहित होता है , दुख होता है तब तुम उन बातों को छॊड दो !”

Lord Buddha ( Angutra Nikaya , vol 1, 188-193 )

Do not believe in anything (simply)
because you have heard it.
Do not believe in traditions because they
have been handed down for many generations.
Do not believe in anything because it is
spoken and rumoured by many.
Do not believe in anything (simply)because
it is found in your religious books.
Do not believe in anything merelely on the authority
of your teachers & elders.
But after observations & analysis,
when you find anything that agrees with reason
and is conducive to the good & benefit of one & all
then accept it & live upto it .
Buddha
( Angutra Nikaya , vol 1, 188-193 )

बुद्ध सिद्धांत बहुत व्यापक है जिसे यहाँ देना संभव नहीं, फिर भी कुछ बातें यहाँ प्रस्तुत हैं:

* त्रिशरण-शील:

बुद्धम शरणम् गच्छामि- मैं बुद्ध व बुद्धि की शरण में जाता हूँ.

धम्मम शरणम् गच्छामि-मैं धम्म(धर्म) की शरण में जाता हूँ

संघम शरणम् गच्छामि-मैं संघ की शरण में जाता हूँ.

*पञ्चशील:

-पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी – मैं जीव हत्या से विरत (दूर) रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.

-अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी – जो वस्तुएं मुझे दी नहीं गयी हैं उन्हें लेने (या चोरी करने) से मैं विरत रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.

-कामेसु मिच्छाचारा  वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी – काम (रति क्रिया) में मिथ्याचार करने से मैं विरत रहूँगा ऐसा व्रत लेता हूँ.

-मुसावादा वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी – झूठ बोलने से मैं विरत रहूँगा, ऐसा व्रत लेता हूँ.

-सुरामेरयमज्जपमादट्ठाना वेरमणी सिक्खापदम् समदियामी – मादक द्रव्यों के सेवन से मैं विरत रहूँगा, ऐसा वचन लेता हूँ

ये पांच वचन बौद्ध धर्म के अतिविशिष्ट वचन हैं और इन्हें हर गृहस्थ इन्सान के लिए बनाया गया था

*चार आर्य सत्यबुद्ध का पहले धर्मोपदेश, जो उन्होने अपने साथ के कुछ साधुओं को दिया था, इन चार आर्य सत्यों के बारे में था ।

दुःख : इस दुनिया में  दुःख व्याप्त है – जैसे जन्म, बीमारी, बूढे होने, मौत, बिछड़ने , नापसंद,चाहत सब में दुःख है ।
दुःखप्रारंभ : तृष्णाया अत्यधिक चाहतदुःख का मुख्य कारण है

दुःखनिरोध : तृष्णा से मुक्ति पाई जा सकती है ।
दुःखनिरोधकामार्ग : तृष्णा से मुक्ति अष्टांग मार्ग के अनुसार जिन्दगी जीने से पाई जा सकती है ।

*अष्टांग मार्गबौद्ध धर्म के अनुसार, चौथे आर्य सत्य- दुःख निरोध पाने का रास्ता – अष्टांग मार्ग है। जन्म से मरण तक हम जो भी करते है उसका अंतिम मकसद केवल ख़ुशी होता है,तो  निर्वाण(स्थायी ख़ुशी)  सुनिश्चित करने के लिए हमें जीवन में इस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए:

१. सम्यकदृष्टि : चार आर्य सत्य में विश्वास करना
२. सम्यकसंकल्प : मानसिक और नैतिक विकास की प्रतिज्ञा करना
३. सम्यकवाक : हानिकारक बातें और झूठ न बोलना
४. सम्यककर्म : हानिकारक कर्में न करना
५. सम्यकजीविका : कोई भी स्पष्टतः या अस्पष्टतः हानिकारक व्यापार न करना
६. सम्यकप्रयास : अपने आप सुधारने की कोशिश करना
७. सम्यकस्मृति : स्पष्ट ज्ञान से देखने की मानसिक योग्यता पाने की कोशिश करना
८. सम्यकसमाधि : निर्वाण पाना और अहंकार का गायब होना

 *प्रतीत्यसमुत्पाद

प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत कहता है कि कोई भी घटना केवल दूसरी घटनाओं के कारण ही एक जटिल कारण-परिणाम के जाल में विद्यमान होती है।प्राणियों के लिये, इसका अर्थ है कर्म और विपाक(कर्म के परिणाम) के अनुसार अनंत संसार का चक्र होता है| कुछ भी सच में विद्यमान नहीं है,हर घटना मूलतः शुन्य होती है।

 *अहिंसा – ध्यान रहे अन्याय सहना अहिंसा नहीं है, हमारी अहिंसा जंगल में हाथी के सामान है| इसका सही मतलब है  की हमें पहल करके हिंसा नहीं करनी चाहिए पर  खुद को बलशाली बना कर आत्मरक्षा के लिए भी हर तरह से तयार रहना चाहिए, क्योंकि अगर आप शांति चाहते हो युद्ध के लिए तयार रहना जरूरी है |

*सामाजिक समानता बुद्ध धम्म में सभी मानव सामान हैं कोई छोटा-बड़ा/ऊँचा-नीचा नहीं माना जायेगा, सबको एक सामान खुशहाली के अवसर मिलनेचाहिए |

*करुणा- सभी जीवों पर दया करो और यथा संभव मदत करते रहो

*शील – अपनी जिन्दगी को शीलवान अर्थात अपने  उसूलों के पक्के रहकर गुज़रो
*प्रज्ञा – अपने ज्ञान और विवेक को सारी जिन्दगी बढ़ाते और इस्तेमाल करते रहो

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