बहुजन/बौद्ध सम्राट अशोक महान कि जयंती (7April14)पर समयबद्ध विशेष देशना,सभी बहुजनों को अशोक महान जयंती कि हार्दिक शुभकामनाएं


bahujan baudh samrat ASHOKA The Greatकभी आपने कभी सोचा कि

• जिस सम्राट के नाम के साथ संसार भर के इतिहासकार “महान” शब्द लगते हैं
• जिस सम्राट का राज चिन्ह अशोक चक्र भारत देश अपने झंडे में लगता है,
• जिस सम्राट का राज चिन्ह चारमुखी शेर को भारत देश रास्ट्रीय प्रतीक मानकर सारकार चलता है,
• जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान सम्राट अशोक के नाम पर अशोक चक्र दिया जाता है
• जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ जिसने अखंड भारत (आज का नेपाल,बांग्लादेश,पूरा भारत,पाकिस्तान और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर राज किया हो|
• जिस सम्राट के शाशन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल मानते हैं|
• जिस सम्राट के शाशन काल में भारत विश्व गुरु था सोने की चिड़िया था, जनता खुशहाल और भेदभाव रहित थी|
• जिस सम्राट के शाशन काल जी टी रोड जैसे कई हाईवे रोड बने,पूरे रोड पर पेड़ लगाये गए, सराये बनायीं गईं इंसान तो इंसान जानवरों के लिए भी हॉस्पिटल खोले गए, जानवरों को मरना बंद कर दिया गया|

ऐसे महन सम्राट अशोक कि जयंती उनके अपने देश भारत में क्यों नहीं मनायी जाती न कि कोई छुट्टी घोषित कि गई है?

अफ़सोस जिन लोगों को ये जयंती मनानी चाहिए वो लोग अपना इतिहास ही नहीं जानते और जो जानते हैं वो मानना नहीं चाहते| कमाल देखिये ऐसे महान इतिहास से जुड़े जोड़ खुद को दलित समझकर शोषित हो रहे हैं| ओशो के प्रवचनों का एक हिस्सा देखिये :

“स्त्री है दीन ! उसको पुरुष ने कह रखा है,कि तुम दीन हो ! और मजा यह है कि स्त्री ने भी मान रखा है कि वह दीन है!असल में हजारों साल तक भारत में शुद्र समझता था कि वह शुद्र है; क्योंकि हजारों साल तक ब्राहमणों ने समझाया था कि तुम शुद्र हो ! अम्बेडकर के पहले, शुद्रों के पांच हजार साल के इतिहास में कीमती आदमी शुद्रों में पैदा नहीं हुआ ! इसका यह मतलब नहीं कि शुद्रों में बुद्धि न थी और अम्बेडकर पहले पैदा नहीं हो सकता था ! पहले पैदा हो सकता था,लेकिन शुद्रों ने मान रखा था कि उनमें कभी कोई पैदा हो ही नहीं सकता ! वे शुद्र हैं, उनके पास बुद्धि हो नहीं सकती ! अम्बेडकर भी पैदा न होता, अगर अंग्रेजों ने आकर इस मुल्क के दिमाग में थोडा हेर-फेर न कर दिया होता तो आंबेडकर भी पैदा नहीं हो सकता था ! हालांकि जब हमको हिंदुस्तान का विधान बनाना पड़ा, कान्सिटटयूशन बनाना पड़ा, तो ब्राहमण काम नहीं पड़ा, वह शुद्र अम्बेडकर काम पड़ा ! वह बुद्धिमान से बुद्धिमान आदमी सिद्ध हो सका !लेकिन दौ सौ साल पहले वह भारत में पैदा नहीं हो सकता था ! क्योंकि शूद्रों ने स्वीकार कर लिया था, खुद ही स्वीकार कर लिया था कि उनके पास बुद्धि नहीं है ! स्त्रियों ने भी स्वीकार कर रखा है कि वे किसी न किसी सीमा पर हीन हैं !”…. ओशो रजनीश – नारी और क्रांति (पेज संख्या.१७)
विश्व इतिहास के केवल तीन लोग के नाम के साथ ‘महान’ लिखा जाता है उसमें से एक हैं हमारे बहुजन सम्राट अशोक महान हैं|विश्व इतिहास में कई महानायक हुए हैं जिनकी कीर्ति विश्व में फैली। एक इतिहासकार के अनुसार ‘किसी व्यक्ति के यश और प्रसिद्धि को मापने का मापदंड असंख्य लोगों का हृदय है – जो उसकी पवित्र स्मृति को सजीव रखता है और जो अगणित मनुष्यों की वह जिह्वा है जो उसकी कीर्ति का गान करती है।उन्हें विश्व इतिहास में ‘महान’ की उपाधि से विभूषित किया है। आज भी इतिहास ग्रंथों में उनका नाम इसी उपाधि के साथ प्रत्यय के साथ मिलता है। ‘महान कही जाने वाली ये तीन विभूतियाँ हैं अशोक महान, सिकंदर महान और अकबर महान।

सम्राट अशोक महान की उन्हीं की मात्रभूमि भारत में नज़रअंदाज क्यों किया जा रहा है?भारत में ब्राह्मणवादी मीडिया ऐसे राजाओं का खूब गुणगान करता है को ब्राह्मण समर्थक रहे हो चाहे वो कितने ही चरित्रहीन और अत्याचारी क्यों न हों, वहीँ दूसरी तरफ बहुजन राजाओं का नाम भी नहीं लेना चाहते| क्या इसके पीछे भी वही घृणा की भावना है जो भगवान् बुद्धा,गुरु रविदास, गुरु कबीर, बाबा साहब डॉ आंबेडकर जैसे महानतम बहुजन महापुरुषों की महानता को न देख पाने की इच्छा के पीछे है| बात साफ़ है सम्राट अशोक समानता और न्याय का समर्थक थे उन्होंने ब्राह्मणों को विशेषाधिकार नहीं दिया बल्कि जातिवाद और वर्णव्यस्था जैसे ब्राह्मणी षड्यंत्रों को पराजित कर के न्याय और समानता कि व्यस्था स्तापित कि, सारे इतिहासकार जानते हैं कि इसी से नाराज ब्राह्मणवादी व्यस्था के समर्थकों ने विद्रोह कर के मौर्या वंश के शाशन काल को ख़त्म किया था|

डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने कहा है

“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रेरणा मिलती है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”

“कोई समुदाय स्वयं को केवल तभी गतिमान रख सकता है जब वह राजसत्ता पर अपना नियंत्रणकारी प्रभाव रख सकने लायक हो। राजसत्ता पर नियंत्रणकारी प्रभाव रख कर मामुली से मामुली जनसंख्या वाला अल्पमत समुदाय भी किस तरह समाज मेँ अपनी सर्वोच्च हैसियत बरकरार रख सकता है, भारत मेँ ब्राह्मणोँ की वर्चस्वपूर्ण स्थिति इस की जीती – जागती मिसाल है।राजसत्ता पर.नियंत्रणकारी प्रभाव निहायत जरुरी है क्योँकि इसके बिना राज्य की नीति को एक दिशा देना संभव नही है, और प्रगती का सारा दारोमदार तो राज्य की नीति पर ही होता है।”

अन्य धर्मों कि तरह बौद्ध धम्म किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं अपितु ये तो समस्त मानवता के लिए है, बौद्ध धम्म वास्तव में कोई धर्म ही नहीं, ये तो बिना ईश्वर और बिना धर्मों कि ऐसी व्यस्था है जहाँ मानव सुख, न्याय व्यस्था,समानता, हर प्राणी पर दया और मनुवादी व्यस्था के विरुद्ध क्रांति थी और है|पर धन और राजनेतिक सरक्षण के बिना न तो जनता इसे जानती है न ही मानती है जबकि इसका डिजाइन जनता के भले के लिए ही है|धर्म वाही फलता फूलता है जिसे राजनेतिक सरक्षण प्राप्त होता है, और राजनीती वही फलती फूलती है जिसे धार्मिक जनभावना का समर्थन प्राप्त होता है|धर्म का प्रचार ‘राजनेतिक शक्ति’ और ‘धन’ से ही हो पता है,पिछले ढाई हज़ार सालों से बौद्ध धम्म की दुर्दशा इन्हीं दोनों के न होने से रही है|जरा सोच कर देखिये अगर सम्राट अशोक और उनकी राजनेतिक व् धन की शक्ति न होती तो क्या बौध विचारधारा धर्म का रूप में दूर दूर तक फ़ैल पाती| क्या कोई मना कर सकता है की सम्राट अशोक के पास ये क्षमता हिंसक संगर्ष से आई थी, हिंसा संगर्ष का ही हिस्सा होती है|किसी कौम के सभ्यता विकास में उपदेशक और उद्धारक्(या प्रचारक) दोनों की भूमिका सामान रूप से महत्वपूर्ण है | जरा सोच कर देखिये कि अगर सम्राट अशोक महान ने बौध धम्म के प्रचार और उद्धार में शक्ति न लगाई होती तो हम भगवान् बुद्धा को भी संत कबीर या संत रविदास की ही तरह सीमित स्तर तक ही समझ पाते| बाबा साहब अम्बेडकर अशोक महान कि तरह आज बौध धम्म के उद्धारक् हैं और रहेंगे| हम जितना ज्यादा अपने उपदेशक और उद्धारकों के व्यक्तित्व का महिमागान और अनुसरण करेंगे उतना ही हम संगठित और शक्तिशाली होंगे, क्योंकि ये महापुरुष सर्वमान्य झंडे का काम करते हैं, जिसके नीचे बहुजन कौम संगठित होकर संगर्ष करने को तत्पर होगी| शायद अब आप समझ सकते हैं कि क्यों बहुजन विरोधी अपने पुराने राजाओं का गुणगान करते नहीं थकते, शायद अब आप समझ सकते हो कि क्यों हमें सम्राट अशोक महान कि जयंती हर साल माननी चाहिए|

सम्राट अशोक महान पर हिंदी में एक पुस्तक इस वेबसाइट पर फ्री में डाउनलोड के लिए उपलब्ध है, कृपया डाउनलोड करें और पढ़ें | इस पुस्तक के मध्यान से बहुजन समाज को बहुजन सम्राट अशोक महान कि महानता कि एक छोटी से झलक दिलाना और ध्यान आकर्षित करना है| ये सिर्फ शुरुआत है, सम्राट अशोक महान पर बहुत कुछ करना अभी बाकि है|

हे बहुजनों! सम्राट अशोक महान को अपने मन वचन और कर्मों में बसा लो, आपकी विजय निश्चित है |

सम्राट अशोक महान पर समयबुद्धा कि धम्म देशना

2 thoughts on “बहुजन/बौद्ध सम्राट अशोक महान कि जयंती (7April14)पर समयबद्ध विशेष देशना,सभी बहुजनों को अशोक महान जयंती कि हार्दिक शुभकामनाएं

    • सभी को सम्राट अशोक महान ( ७ अप्रैल ), महात्मा ज्योतिबा फुले ( ११ अप्रैल ) तथा
      भारत-रत्न बाबा साहब डा. अम्बेडकर के १२३वें जन्म-दिवस पर
      आप सभी को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
      बौद्ध- युग आने वाला है.
      बहुजन बदलो अपनी सोच, भीम युग आने वाला है,
      छोड़ो मनुवाद का ख्याल, बौद्ध- युग आने वाला है |

      सदियों मूक रहा जो प्राणी
      उसका देश महान था |
      प्राणी की रक्षा करने वाला
      अद्‌भुत अशोक महान था |
      डा. अम्बेडकर ने धम्म दिलाया जो जाने वाला था,
      पढ़कर धम्म- भीम का आज कुछ होने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      धर्म – संस्कृति की रक्षा करने
      स्तूपों का निर्माण कराया था |
      सड़कों पर पेड़ों की छाया में
      ताल-सरोवरों को खुदवाया था |
      विश्व- गुरु नालंदा- भूमि जिसका वैभव एक निराला था,
      चलकर आज़ तथागत भूमि उसका दर्शन मिलने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      समझाने निज़ अधिकारों की सीमा
      जिसने यह जीवन दांव लगाया था |
      अपने ही पुत्र- शोक का संदेशा भी
      बाबा साहब को न मिल पाया था |
      मूक- नायक हम सबका आरक्षण का संविधान बनाया था,
      नमन करें हम उस मानवता को १४ अप्रैल आने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      गुलामगीरी में सौ- साल हैं हमने जिये
      आओ- ये स्वाभिमान के दो- पल जियें |
      आज़ादी से अब तलक होठ जो हैं सिये
      आओ अब और न इस गुलामी में जियें |
      समता-चौक था बनवाया बहन जी ने समता जो जाने वाली थी,
      विजय- धम्म की राह चलें अब जाति में कुछ न मिलने वाला है ||

      पढ़कर धम्म- भीम का आज कुछ होने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………
      ———————-
      रामबाबू गौतम, न्यू जर्सी
      मार्च २७, २०१४.

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