दलित समाज की सबसे बड़ी समस्या बाबा साहब के आरक्षण के प्रावधान के पश्चात पैदा हुआ ‘अवसरवादी वर्ग’ है… विकास जाटव


मेरे अनुसार दलित समाज की सबसे बड़ी समस्या बाबा साहब के आरक्षण के प्रावधान के पश्चात पैदा हुआ ‘अवसरवादी वर्ग’ है.
एक ऐसी समस्या है जो की दलित समाज के लिए ‘मनुवादी व्यवस्था’ से भी ज्यादा खतरनाक है. क्युकी बाबा साहब की सोच के अनुसार यह थी की आरक्षण से समाज में एक “श्रृंखला” का निर्माण हो जायेगा जिससे की एक सफल व्यक्ति समाज में कई सफल व्यक्तिओ के लिए रास्ते तेयार करेगा.
लेकिन यह “श्रृंखला” तब टूटनी सुरु हो जाती है जब आरक्षण से प्राप्त नौकरी के अवसर पर ‘चढ़ावा’ “वैष्णो देवी” या सिरडी, हनुमान मन्दिर या अपनी सुविधानुसार किसी मन्दिर में चढ़ा कर आ जाता है. जबकि समाज का एक प्रतिशत के कारण उसे नौकरी मिलती है और इस समाज के सबसे गरीब व्यक्ति ही उसके लिए मन्दिर होना चाहिए.
यह एक ऐसा वर्ग समाज में पैदा हो रहा है जो की समाज के एक % के कारन ‘समझोते के रूप” में मिली नौकरी का ‘ब्याज’ तो दूर की बात है ‘मूल’ भी वापस नही करना चाहता है.
सबसे बड़ी बात यह है की देश में बने सभी शोषित समाज के संगठन’ ऐसे अवसरवादी वर्ग व उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए ही संघर्ष कर रहे है, अगर ऐस संगठन न हो तो फिर आने वाली पीठी की तो बात दूर की है, खुद भी सही प्रकार से नौकरी ना कर पाए. फिर भी समाज का यह ‘अवसरवादी वर्ग’ अपनी अवसरवादिता को छोड़ने को तेयार ही नही है.
ऐसे अवसरवादी वर्ग माता रानी के जागरण के लिए हजारो रूपये की रशीद कटवा देगा लेकिन जब ‘अम्बेडकर जयंती’ या किसी जन-जागरूक समारोह के लिए ‘१००’ रूपये की रशीद मुश्किल से कटवाता है और फिर ‘हिसाब’ भी मांगता है. जबकि जागरण में जाकर भी दलित समाज की ‘महिलाओ’ के साथ बलात्कार जैसे घटना हो जाती है और सामाजिक जनजागरूक अभियान के कारण समाज के अधिकार सुरक्षित रह जाते है.
समाज में ऐसे अवसरवादी वर्ग को में ‘नव मनुवादी दलित वर्ग’ कहलाना ज्यादा पसंद करता हूँ. समाज का यह ‘दीमक वर्ग’ है.

 

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2 thoughts on “दलित समाज की सबसे बड़ी समस्या बाबा साहब के आरक्षण के प्रावधान के पश्चात पैदा हुआ ‘अवसरवादी वर्ग’ है… विकास जाटव

  1. विकास जाटव जी बहुत ही अच्छी बात कही आपने निसंदेह लोग आरक्षण का लाभ ले तो रहे हैं।किन्तु वे यह तक नहीं जानते कि यह लाभ उन्हें किसके प्रयासों से मिला है।वे समझते हैं कि ये सरकारी सौगात है और माता रानी के आशीर्वाद से प्राप्त है।

    • सभी को सम्राट अशोक महान ( ७ अप्रैल ), महात्मा ज्योतिबा फुले ( ११ अप्रैल ) तथा
      भारत-रत्न बाबा साहब डा. अम्बेडकर के १२३वें जन्म-दिवस पर
      आप सभी को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
      बौद्ध- युग आने वाला है.
      बहुजन बदलो अपनी सोच, भीम युग आने वाला है,
      छोड़ो मनुवाद का ख्याल, बौद्ध- युग आने वाला है |

      सदियों मूक रहा जो प्राणी
      उसका देश महान था |
      प्राणी की रक्षा करने वाला
      अद्‌भुत अशोक महान था |
      डा. अम्बेडकर ने धम्म दिलाया जो जाने वाला था,
      पढ़कर धम्म- भीम का आज कुछ होने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      धर्म – संस्कृति की रक्षा करने
      स्तूपों का निर्माण कराया था |
      सड़कों पर पेड़ों की छाया में
      ताल-सरोवरों को खुदवाया था |
      विश्व- गुरु नालंदा- भूमि जिसका वैभव एक निराला था,
      चलकर आज़ तथागत भूमि उसका दर्शन मिलने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      समझाने निज़ अधिकारों की सीमा
      जिसने यह जीवन दांव लगाया था |
      अपने ही पुत्र- शोक का संदेशा भी
      बाबा साहब को न मिल पाया था |
      मूक- नायक हम सबका आरक्षण का संविधान बनाया था,
      नमन करें हम उस मानवता को १४ अप्रैल आने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………

      गुलामगीरी में सौ- साल हैं हमने जिये
      आओ- ये स्वाभिमान के दो- पल जियें |
      आज़ादी से अब तलक होठ जो हैं सिये
      आओ अब और न इस गुलामी में जियें |
      समता-चौक था बनवाया बहन जी ने समता जो जाने वाली थी,
      विजय- धम्म की राह चलें अब जाति में कुछ न मिलने वाला है ||

      पढ़कर धम्म- भीम का आज कुछ होने वाला है ||
      बौद्ध- युग आने वाला है ………
      ———————-
      रामबाबू गौतम, न्यू जर्सी
      मार्च २७, २०१४.

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