बाबासाहब के कारवाँ का अन्तिम पड़ाव क्या है? बाबासाहब के कारवां का गंतव्य स्थान है – देश में धम्म का शासन, देश को बुद्धमय करना, अर्थात हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो भ्रष्टाचारमुक्त हो, अपराधमुक्त हो, आतंकवादमुक्त हो, गरीबीमुक्त हो. हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी लोग स्वस्थ हों, शक्तिशाली हों, प्रबुद्ध हों, खुश हों, सुखी हों, सम्पन्न हों, न्यायप्रिय हों, जहाँ जातिवाद न हो, असमानता न हो, अन्धविश्वास न हो, कुरीतियों न हो, आडम्बर न हो, अज्ञानता न हो, भेदभाव न हो, जहां लोगों में एकता, बन्धुत्व, समानता, ईमानदारी और आपसी प्रेम हो…लाला बौद्ध


bahujanबाबासाहब का कारवाँ

ग्रुप में अधिकांश मित्रों की सक्रियता और बहुत अच्छे-अच्छे ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक संदेशों का आदान-प्रदान इस बात का द्योतक हैं कि हम लोग बहुत शीघ्र बाबासाहब के काँरवा को गंतव्य स्थान तक पहुंचाने में सफल होंगे.

बाबासाहब के कारवाँ का अन्तिम पड़ाव क्या है? बाबासाहब के कारवां का गंतव्य स्थान है – देश में धम्म का शासन, देश को बुद्धमय करना, अर्थात हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो भ्रष्टाचारमुक्त हो, अपराधमुक्त हो, आतंकवादमुक्त हो, गरीबीमुक्त हो. हमें ऐसा भारत बनाना है जहाँ सभी लोग स्वस्थ हों, शक्तिशाली हों, प्रबुद्ध हों, खुश हों, सुखी हों, सम्पन्न हों, न्यायप्रिय हों, जहाँ जातिवाद न हो, असमानता न हो, अन्धविश्वास न हो, कुरीतियों न हो, आडम्बर न हो, अज्ञानता न हो, भेदभाव न हो, जहां लोगों में एकता, बन्धुत्व, समानता, ईमानदारी और आपसी प्रेम हो.

हमारे देश की समस्त समस्यों का मूल कारण ब्राह्मणवाद है. ब्राह्मणवाद को देश में सत्ता के बल पर लाया गया था, अतः सत्ता के बल से ही इसे नेस्तनाबूत (कब्र के अन्दर दफन करना) किया जा सकता है. सत्ता प्राप्त करने के लिये के दो रास्ते हैं. पहला- खूनी क्रान्ति, दूसरा- वोट (लोकसभा एवं विधान सभा के चुनाव में सम्यक प्रत्याशी को वोट करके विजयी बनाना).

सत्ता हम खूनी क्रान्ति से प्राप्त करें या सम्यक प्रत्याशी को वोट देकर?
तथागत बुद्ध और बाबासाहब के वंशज होने के नाते सत्ता प्राप्ति के लिये हम हिंसक क्रान्ति का रास्ता नहीं अपना सकते. हालांकि हमारा दुश्मन ब्राह्मणवादी सवर्ण और उसके तथाकथित भगवानों (ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, राम, परशुराम, गणेश, दुर्गा आदि-आदि) ने नाना प्रकार के हथियारों से हमारे पूर्वजों (असुर, राक्षस, दानव) की हत्या की, आज भी उन्हीं हथियारों से लैस हमारा खात्मा करने के लिये खड़े हैं. लेकिन फिर भी सत्ता प्राप्ति के लिये हमारा पहला प्रयास बुद्ध का अहिंसक रास्ता ही होगा.

कथित आजादी की प्राप्ति के बाद से अब तक सत्ता अल्पसंख्यक ब्राह्मणवादियों और पूंजीपतियों की रही है, और आज भी है. हम अपना लक्ष्य तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब केन्द्र में हमारी पूर्ण बहुमत-प्राप्त सत्ता होगी.
सत्ता को हम अभेद्य एकता और मजबूत संगठन के बिना प्राप्त नहीं कर सकते.

कथित सवर्ण ब्राह्मण, बनियां, ठाकुर भारत में अल्पसंख्यक है. देश में इनकी आबादी मात्र 15% है. देश में शेष 85% अवर्ण कौन हैं? देश के 85% अवर्ण ‘बहुजन’ हैं, जिसमें देश के SC, ST, OBC, बौद्ध, ईसाई, मुसलमान लोग समाहित हैं. लोकतांत्रिक देश में अल्पसंख्क लोगों की सरकार है. बहुसंख्यक बहुजन हासिये पर हैं. बहुसंख्यकों पर अल्पसंख्सकों का शासन स्थापित है. ये विश्व का आठवाँ अजूबा है. ये दुनियां का नायाब अजूबा है.

देश में लोकतंत्र है लेकिन जाल ब्राह्मणतंत्र का फैला हुआ है. देश के कायदे-कानून हैं, लेकिन यहां के शंकराचार्य और पुरोहित खुलेआम कहते हैं, “मेरा नाम फलांफलां शर्मा शास्त्री है, मैं अमुक विद्यापीठ का अध्यक्ष हूं, शास्त्रों को मानने वाला और कट्टर ब्राह्मण होने के नाते मैं छुआछूत मानता हूँ. मैं भारत के संविधान को नहीं मानता हूँ, मनुस्स्मृति और शास्त्रों में वर्णित नियम ही मेरा संविधान हैं”. “दलितों का मन्दिर में प्रवेश वर्जित है”…आदि आदि अभिकथन लोकतंत्र नहीं ब्राह्मणतंत्र के परिचायक हैं. देश के हजारों कथित संत आश्रम अय्यासी, कदाचार और आतंकी गतिविधियों के अड्डे बनते जा रहे हैं.

देश की 90% संपत्ति ब्राह्मण बनियों के पास है. देश की लोकतांत्रिक सरकार पूंजीपतियों, उद्योगपतियों के ‘पैसे के बल’ से बनती है. देश में मुसलमानों, ईसाइयों के विरुद्ध साम्प्रदायिक दंगे मंदिरों में जमा अकूत ‘संपत्ति के बल’ से कराये जाते हैं. सुनियोजित योजना बनाकर ये ब्राह्मणवादी, पूंजीवादी सरकारें SC, ST, OBC के लोगों को आरक्षण के बावजूद सरकारी पदों पर जाने से रोक रहीं हैं. आज हजारों की संख्या में प्राइवेट मेडिकल कालेज, प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज, प्राइवेट मैनेजमेंट कालेज, प्राइवेट फार्मेसी कालेज, प्राइमरी से लेकर परस्नातक की शिक्षा के लिये तमाम प्राइवेट स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालयों के द्वारा दलितों को शिक्षा और रोजगार से वंचित किया जा रहा है.

बहुजन समाज के लोग शिक्षा से वंचित रहकर उत्तरोत्तर गरीब होते जा रहे हैं. वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिये अपने पैतृक गाँव छोड़-छोड़कर बड़े-बड़े शहरों में मजदूरी के लिये जाने को विवश हैं. वहां सुबह से देर रात तक शारीरिक श्रम करने के कारण न तो उनके पास पर्याप्त कुछ सोचने-समझने के लिये समय है और न ही समुचित ज्ञान की रोशनी.

अक्सर हमने कुछ लोगों को ये कहते सुना है कि अमुक अमुक बिरादरी के लोग ब्राह्मणवादी राजनैतिक पार्टियों के पिछलग्गू हैं या पढ़े-िलखे लोग मंदिर जाते हैं, हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा करते हैं. बात सही है. हमें उनके इस कृत्य के पीछे के कारण को समझना होगा. कारण है सम्यक ज्ञान का अभाव. हमें उन तक ज्ञान की रोशनी पहुंचानी है. रोशनी पहुँचते ही वे बिहार के मुख्यमंत्री माँझी की तरह मुखर होकर बोलने लगेंगे.

हमारे कुछ लोग कथित सवर्णों के पिछलग्गू असुरक्षा की भावना के कारण होते हैं. हमें उनको बताना होगा कि वे अकेले नहीं हैं, हम हमेशा उनके साथ हैं. येसा करने से वे जब स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे तो हमारे साथ आ जायेंगे.

अतः हमें अपने हर व्यक्ति तक पहुंचकर उन्हें समझाना है और उनमें अभेद्य एकता पैदा करनी है साथ ही अपना संगठन विस्तृत और मजबूत करना है.

जय भीम लाला बौद्ध

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