डा. भीमराव अम्बेडकर : एक युग पुरुष….RANCHI EXPRESS


डा. भीमराव अम्बेडकर : एक युग पुरुष

बहुजन ह्रदय  सम्राट बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की जयंती  (14-APRIL-14)  कि हार्दिक शुभकामनायें

AMBEDKAR best photo

कितनी भी पाबन्दियां क्यों न हों, चाहे जितना अन्धकार क्यों न हो, रास्ता कठिनाइयों से भवा पड़ा हो, किन्तु जो यह मानकर चलता है कि उड़ा पाल मांझी बढ़ाव नाव आगे, तो वह एकदिन गन्तव्य स्थान पर पहुंच ही जाता है।

डा. भीम राव अम्बेडकर का जन्म ऐसी परिस्थिति में हुआ था जब देश में सामन्तवादी ताकतों का बोलबाला था तथा सवणों के अन्दर इस तरह की मानसिकता थी कि वे जानवर को स्पर्श करना धर्म समझते थे, किन्तु दलितों को स्पर्श करना उनके लिए अधर्म था। डा. अम्बेडकर बचपन से ही उन सवालों को लेकर चिन्तित रहते थे कि-

‘कांटे तो काटे से ही निकाले जाते हैं,
क्यों जातिवादी जातियता से घबराते हैं,
तुम बाह्मण हम शुद्र कैसे?
तुम क्षत्रिय हम वैश्य कैसे?
तुम पावन हम पतित कैसे?

उपर्युक्त सवालों के प्रति उनके दिल में चुभन थी और उन्होंने अवर्णनीय कष्ट, प्रबलतम विरोध, घनघोर अभाव एवं अमानवीय पीड़ा का सामना करते हुए उपर्युक्त प्रश्नों का हल ढूंढनिकाला। उन्होंने कहा कि जब तक वर्ण नहीं टूटता तब तक वर्ग नहीं बदलेगा और बिना वर्ग तोड़े समता आयेगी नहीं, समता लाने के लिए वर्ग और वर्ण दोनों ही तोड़ना पड़ेगा, क्योंकि समता के बिना प्रजातंत्र चल ही नहीं सकता है। यदि प्रजातंत्र को बचाना है तो वर्ण और वर्ग दोनों को ही तोड़ना पड़ेगा।

बाबा साहेब ने सर्वप्रथम 2 जनवरी, 1920 को ‘मुकनायक’ पत्रिका निकाली तथा उसमें समाज के समस्त वर्गों को समझाने की कोशिश की कि सभी इंसान बराबर है और एक इंसान यदि दूसरे इंसान से घृणा करता है, छूत मानता है तो यह सबसे बड़ा अधर्म है तथा वैसे लोग अपराधी माने जायेंगे। उन्होंने राष्ट्र के समक्ष ऐसा सार रखा जो बुध्द की प्रज्ञा, मोहम्मद साहेब की सचेत समता और ईशा मसीह की मैत्री को बराबर का दर्जा दिया। पुनः वे सन् 1924 के 20 जुलाई के दिन ‘बहिष्कृत हितकरणी’ की सभी में अपना आन्दोलन शुरू किया तथा 2 मार्च, 1929 को नासिक में स्थित कालाराम मंदिर में दलितों को प्रवेश दिलाकर यह साबित कर दिया कि दलितों में भी भगवान के प्रति आस्था है, तो किसी की भी आस्था को तोड़ना नहीं चाहिए।
कबीर पंथी परिवार

बाबा साहेब का पूरा परिवार कबीरपंथी था इस कारण से उन्हें भक्ति भावना प्रदान हुआ। मान्यवर  ज्योतिबा फूले ने ब्राह्मणवाद से विरोध करने का सहयोग दिया और महामानव तथागत बुध्द के आदर्शों ने उन्हें मानसिक और दार्शनिक पीपासा बुझाने वाला अमृत प्रदान किया।
उन्होंने महसूस किया कि बाबा जब तक लोग शिक्षित नहीं होंगे तब तक अधिकारों के प्रति संगठित नहीं हो सकते और संगठित हुए बिना वे अधिकारों के लिए संघर्ष नहीं कर सकते। अतः उन्होंने समस्त दलितों को शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो का संदेश देकर समाज को जगाने के लिए खड़े हो गये, क्योंकि वे जानते थे कि दलितों के जीवन के चारों क्षेत्रों यानी सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन में जब तक इनकी स्थिति मजबूत नहीं होगी तब तक दलितों का उत्थान संभव नहीं है। इसे मजबूत करने के लिए हिन्दुस्तान में एक आन्दोलन छेड़ दिया।
पेट में भूख ऐसी आग है कि जब तक पेट में जलती है, तब तक तो अन्न से शमन हो सकती है, लेकिन जब इसकी लपटें दिमाग तक पहुंचती हैं तो फिर भूख अन्न से नहीं बुझती वह आग तो क्रांति से ही बुझती है।

‘हद से बढ़ जाती है जब आमदी की मजबूरी
अमन पसन्द बगावत की बात करते हैं
अगर अब चुप रहे तो वक्तें मुश्किल कौन बोलेगा
तुम्हारे सिर चलेगी, तेगे कातिल कौन बोलेगा।’

डा. भीमराव अम्बेडकर सिर्फ समाज सुधारक ही नहीं, सिर्फ देशभक्त ही नहीं, बल्कि दुनिया ने विद्वान के रूप में भी जाना। सर्वप्रथम कोलम्बिया विश्वविद्यालय, अमेरिका ने 5 जून, 1 952 को विधान विशेषज्ञ डा. अम्बेडकर को एल.एल.बी. डिग्री से विभूषित किया तथा अनेकों डिग्रियां अम्बेडकर ने विदेशों में प्राप्त कीं तथा दुनिया के छठे विद्वान के रूप में वे जाने गये जो भारत के लिए गौरव की बात था।

बाबा साहेब की योग्यता से ब्रिटिश सरकार भी अवगत हो चुकी थी तथा भारत के वाइसराय ने 2 जुलाई, 1942 को उन्हें अपनी कार्यकारिणी समिति का सदस्य नियुक्त किया और उनकी योग्यता और कर्मठता को देखकर उहें श्रम मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया। सन् 1946 ई. में वे संविधान सभा के सदस्य चुने गये। 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा में संविधान प्रारूप समिति की नियुक्ति की गयी।

14 नवम्बर, 1948 को संविधान सभा के संविधान में संविधान का प्रारूप प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि ‘तमाम भारतीयों से मेरी अपील है कि जिस जात-पात से सामाजिक जीवन में अलगाव आया है,र् ईष्या, द्वेष तथा घृणा का जन्म हुआ है, उसे त्याग कर एक आदर्श राष्ट्र बने। यदि इस संविधान से आम लोगों की भलाई और प्रगति नहीं हुई तो दोष संविधान का नहीं होगा, बल्कि यह कहा जायेगा कि संविधान को चलाने वाले लोग ही गलत हैं।’
सत्ता में गरीबों का हिस्सा

डा. अम्बेडकर ने सिर्फ दलितों के उत्थान के लिए ही काम नहीं किया बल्कि देश के नारी & OBC उत्थान में भी सहयोग दिया। बालश्रम पर रोक लगायी तथा हिन्दू, मुस्लिम, सीख और ईसाई को समान रूप दिया। वे एक सच्चे देशभक्त थे तथा राष्ट्र में लोकतंत्र का स्थापना चाहते थे, इस बात का सबूत देखने को मिल जब अंग्रेज सरकार ने अपनी सत्ता सिमटती देख 1930 में गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया। डा. अम्बेडकर भी पिछड़ी जातियों के प्रतिनिधि के रूप में सम्मेलन में शामिल होकर उन्होंने अंग्रेजी सरकार के विरुध्द आवाज उठाते हुए कहा कि ‘भारत की सभी पिछड़ी जातियों की मांग है कि ब्रिटिश सरकार की जगह द्वारा चुना हुई जनता की सरकार बने। हमने इतने जुल्म और अत्याचार सहे हैं कि हमारे जख्म अभी हरे हैं। अंग्रेज सरकार ते 150 वर्षों के शानकाल में देश का कल्याण नहीं हुआ तो ऐसी सरकार की भारत में कोई आवश्यकता नहीं है। इस बात को सुनकर गांधी ने भी गर्व महसूस करते हुए प्रसन्नता व्यक्त किया था। डा. अम्बेडकर का मानना था कि भारतवर्ष में 85 प्रतिशत गुलाम नागरिकों की दो ही प्रमुख समस्याएं हैं, निरादर और दरिद्रता। सही पहचान थी बाबा साहेब में कि जब तक सत्ता के अन्दर गरीबों का साझेदारी नहीं होगी तब तक उनकी तकदीर में बदलाव नहीं आयेगा। इसलिए उन्होंने संविधान में इस बात का प्रावधान किया कि सत्ता की साझेदारी में गरीबों का हिस्सा होना चाहिए।
राष्ट्र में लोकतंत्र की स्थापना हुई तथा संविधान के अनुसार देश को चलाने का संकल्प लिया गया, लेकिन आजादी के 65 वर्ष बीतने चले और नियोजित विकास कार्यक्रम शुरू हुए 61 वर्ष हो गये, अर्थव्यवस्था समतावादी उद्देश्यों को प्राप्त करने में सभी सरकारें असफल रही हैं और आज भी दलितों, आदिवासियों तथा अन्य पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यक वर्ग के मजदूरों का सामाजिक उत्पीड़न और निरन्तर आर्थिक शोषण होता रहा है। यह विश्वास किया जाता है कि पंचवर्षीय योजनाओं के अन्तर्गत अपनाये गये भूमि सुधार और आर्थिक विकास के तरीके से रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के उन गरीब लोगों, जिनकी कठिनाइयां शिक्षित नहीं होने के कारण बढ़ी है, उनको लाभ होगा और उन्हें कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उनके मध्य और शेष आबादी के मध्य असमानता पैदा हुई है, वह घटी नहीं है बल्कि उसे और बढ़ावा दिया गया।
नयी आर्थिक नीति दबे, पिछड़े और दलित वर्गों के लिए संकट में डालने वाली साबित हुई। जिन पेशों से मजदूरों को प्रोत्साहन मिलता था उन पेशों में बुनाई, जूता बनाना, तेल निकालना, दूध की डेयरी, मछली पालन, ताड़ी निकालना आदि आते हैं, उनको निगमित क्षेत्रों द्वारा समाप्त कर दिये गये हैं जिससे ग्रामीण दस्तकार बेरोजगार हो गये हैं। किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता में भारी कमी की जा रही है, जिससे छोटे और सीमान्त किसानों को खेती करने के बहुत कम लाभ हो रहा है। ग्रामीण जनता गरीब होने में दलित और पिछड़े वर्गों के लोग इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
डा. अम्बेडकर की अध्यक्षता में तैयार किया गया भारतीय संविधान का प्रारूप तथा संसद के प्रथम सत्र में सफलतापूर्वक पारित कराया गया। वर्तमान भारतीय संविधान देश के नागिरकों के लिए एक प्रकार से मनोवांछित विकास के अधिकारों को पथप्रसस्त करने वाला मैगना कार्य बनकर सामने आया किन्तु राज्य की नीति निर्धारण हेतु निदेशक सिध्दांतों वाला अध्याय देश के अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए एक विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि कोई भी सरकार आये या जाये उनको ये सिध्दांत, इन सिध्दांतों को ध्यान में रखकर नीति निर्धारण के लिए बाध्य करते हैं। जैसा कि वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य है उससे तो यही पता चलता है कि किसी भी सरकार द्वारा इन सिध्दांतों को निष्ठापूर्वक ध्यान में नहीं रखा जाता है। राजनीतिक इच्छा की कमी है। जब तक राजनीतिक वर्ग थोड़ी सी कटिबध्दता का प्रदर्शन करता है तब तक स्वच्छ और सख्त कानून शासक वर्ग का समर्थन नहीं कर पाता और शराबे करके लोगों को गुमराह करने का भ्रम फैलाते हैं, अफवाह फैलाते हैं, ताकि संविधान के अनुच्छेद 335 के प्रावधानों के अनुसार सरकारी कामकाज सामान्य जनता के हित को अंजाम ना दिये जा सके और अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4) के अनुसार हमारे अधिकारों के प्रावधान कागजी शेर बनकर रह जाते हैं।
इस मुद्दे पर सभी दलित वर्ग के लोगों को अपने बीच के मतभेद भुलाकर एकजुट होकर पुनः खड़े होने की आवश्यकता है, ताकि अपनी चेतना एवं स्वाभिमान को उपलब्ध कर सकें।
राज बदला, मिजाज नहीं
आजादी के 65 वर्ष बाद भी देश की स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं आया। राज बदला, लेकिन मिजाज नहीं बदला, शासन बदला, लेकिन प्रशासन वही रहा। आंकडें के अनुसार बिना भोजन के स्कूल जाने वालों की संख्या 24 प्रतिशत है, जबकि यह प्रतिशत पाकिस्तान में 12, बांग्लादेश में 11 और पेरू में 14 है, एक मात्र नाइजीरिया ही ऐसा देश है, जहां इसका प्रतिशत 24 है। पांच में एक परिवार (17 प्रतिशत) का कहना है कि खाने के लिए धन जुटाने के उद्देश्य में उनके बच्चे स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हैं। भारत के 24 प्रतिशत परिवारों का कहना है कि उनके बच्चे सारे दिन बिना खाए रहते हैं। लगभग 66 प्रतिशत परिवार हैं जिनका कहना है कि आकाश छूती महंगाई उनकी भुखमरी का कारण है। वर्तमान भारत में 10 करोड़ से भी अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।
आज देश भ्रष्टाचार, असंतोष, पदलिप्सा, महंगाई, असंगठन जैसी बुराइयों से कराह रहा है। वरिष्ठता दिखाने के लिये निर्दोषों की हत्यायें हो रही हैं। निर्दोष लोग के ऊपर जुल्म ढाये जा रहे हैं तथा मानवाधिकार का खुलमखुला उल्लंघन हो रहा है। एक पक्ष हत्या का विरोध कर रहा है तो दूसरा पक्ष समर्थन कर समाज में अशांति फैला रहा है। अमीर अमीर बनते जा रहा है और गरीबों की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
हालांकि 65 वर्षों में संविधान के अनुसार सभी वर्गों की सत्ता में साझेदारी हुई है और यह अभिलाषा और आकांक्षा कुछ चन्द लोगों की नहीं, कोई सरकार की नहीं, बल्कि जो मेहनत और उत्पीड़न के अन्दर बंधे हुए हैं, उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति हुई है। सरकार के सीमाओं के बाहर जो समाज की व्यवस्था है और उस व्यवस्था की जो चुनौकियां थी, उनको डा. भीमराव अम्बेडकर ने स्वीकारा और संजोया भी। यदि सचमुच देश एवं राज्य के शासकगण संविधान की मूल भावनाओं को सही-सही समझें और अपनायें तो इस देश की यह दुर्दशा नहीं होती जो आज दिखाई देती है।
अगर वास्तव में हम बाबा साहेब आदर्शों को मानने के लिए वचनबध्द हैं, तो दिल और दिमाग से वर्ण और वर्गवाद के फासले को खत्म करना होगा। यही वह रहा है जो देश को संस्कार देगा, अंगुलियां जुटकर मुट्ठी बन जायेंगी, हम एक हो जायेंगे और हमारी एक ही कोशिश होगी एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में अपने आप को समर्पित होना।

http://ranchiexpress.com/158225

3 thoughts on “डा. भीमराव अम्बेडकर : एक युग पुरुष….RANCHI EXPRESS

  1. भगवान तथागत बुद्ध के नाम से पहले महात्मा शब्द का प्रयोग न करें

    • ये आपकी भी वेबसाइट हैं, आप भी थोड़ा योगदान दें | आपको जहाँ कहीं भी कोई कमी लगती है कृपया उसे सुधार कर आप हमें jileraj@gmail.com ईमेल पर भेजें, हम आपका सुधार हुआ आर्टिकल इस वेबसाइट पर अपडेट कर देंगे | सुधारने के लिए आप http://www.easyhindityping.com वेबसाइट का प्रयोग कर सकते हैं |आप बस आर्टिकल को यहाँ से कॉपी करें http://www.easyhindityping.com पर पेस्ट करें, सुधारें फिर कॉपी कर के हमें ईमेल कर दें |

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