14-MAY-2014 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना:धम्म पुनरुत्थान एव स्थातित्व प्राप्ति के लिए समयबुद्धा का प्रस्तावित नियम- पूर्णिमा मासिक संगायन अर्थात बौध विहार पर मासिक संगठित वंदना का नियम अनिवार्य करना होगा…समयबुद्धा


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14-MAY-2014 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना:धम्म पुनरुत्थान एव स्थातित्व प्राप्ति के लिए समयबुद्धा का प्रस्तावित नियम- पूर्णिमा मासिक संगायन अर्थात बौध विहार पर मासिक संगठित वंदना का नियम अनिवार्य करना होगा|

 

इतहास गवाह है की बौद्ध क्रांति को प्रतिक्रांति करके दबा दिया गया था, अधिक जानकारी के लिए बाबा साहब आंबेडकर की पुस्तक “प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति” अवश्य पढ़ें| अब हमें उन सभी कारणों को समझना और बदलना होगा जिनकी वजह से बौद्ध क्रांति विफल हुई थी|अगर हमने अपने इतिहास से सीखकर बौध धम्म के लिए कुछ नए नियम नहीं बनाये तो इतिहास फिर हमें सबक सिखा देगा इसलिए नया नियम हर पूर्णिमा को बौध विहार पर संगठित वंदना का नियम अनिवार्य करना होगा | बौध धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है हमें ये नियम बनाना होगा की कम से कम महीने में एक बार अर्थात पूर्णिमा के दिन अपने निकटतम बौध विहारों पर संगठित होना होगा| ये भारत के 6000 जातियों में बंटे सभी मूलनिवासियों को संगठित करने का बहेतरीन  माद्यम है|इसके दो फायेदे होंगे एक तो धार्मिक ज्ञान से जीवन बेहतर होगा दुसरे हमारा संगठन बल साबित होगा |विहारों से हमारे समाज को बढ़ाने वाली  नीति  को जनसाधारण  और जनसाधारण  की जरूरतों  को ऊपर  बैठे  अपने समाज के बुद्धिजीवियों  तक पहुचाया  जा सकेगा| राजनेतिक पार्टी के नाम और चिन्ह  तो बदलते रहेंगे पर किसे  चुनना है  इसका सामूहिक फैसला केवल बौध विहारों पर ही हो पायेगा| इस संगठन के पीछे राजनेतिक पार्टियाँ और हुकुमरान बौध विहारों के चक्कर काटेंगे |

 

पूर्णिमा मासिक संगायन अर्थात बौध विहार पर संगठित वंदना का नियम अनिवार्य करना होगा| इस नियम को समयबुद्धा मिशन से जुड़े लोग बहुत तत्परता से पालन करते हैं| अब आप समझ सकते हैं की आप समयबुद्धा की धम्म देशना केवल पूर्णिमा के ही दिन क्यों पाते हो|

 

बौद्ध पूर्णिमा पर संगठित होकर वंदना करने से बौद्ध धम्म ज्ञान तो निश्चित रूप से मिलेगा ही पर इसके साथ साथ अन्य जबरदस्त फायेदे भी होंगे जैसे:

 

१. असल में व्यापक प्रचार न होने के कारण बौध धम्म को समझने के लिए थोडा अध्यन करना पड़ता है इसलिए ये केवल बुद्धि-जीवी वर्ग तक ही सीमित होकर रह गया है| बहुजन या बौद्ध  विचारधारा या अम्बेडकरवादी विचारधारा का प्रचार कैसे हुआ, हम सभी जानते हैं की कहीं कभी मौके बे मौके, रैली,जयंती अदि में इकठ्ठा हुए कुछ बहुजन और साहित्य प्रकाशक द्वारा हुआ|ये मीटिंग बहुत कम हैं जरा सोच कर देखो की अगर ऐसी मीटिंग ज्यादा हों तो क्या ज्यादा तेज़ी से मिशन आगे नहीं बढेगा?हर पूर्णिमा पर संगठित होने से  विचारों का प्रचार प्रसार बहुत तेज़ी से होगा जिससे बहुजनों को जगाने में कम समय लगेगा , अपने मीडिया का काम करेगी ये मासिक मीटिंग|

 

२. बहुजनों को अपना जनसँख्या बल या जनाधार पता चलेगा जिससे उनमें अकेलेपन का डर ख़त्म होगा और संगर्ष करने को प्रोत्साहित होगा|जो छुपे बैठे हैं अपने घरों में वो भी इस जनसँख्या बल से खिचे चले आयेंगे|

 

३. बौद्ध पेशेवर व्यवसाई जैसे डॉक्टर,इंजिनियर, कारीगर,मिस्त्री,व्यवसायी,दुकानदार, अदि अनेकों लोगों को एक दुसरे की सेवाओं का लाभ मिलेगा व उनकी मार्केटिंग होगी परिणामस्वरूप आमदनी बढ़ेगी|इतना ही नहीं रोजगार चुनाव के लिए ऐसे अनुभवी पेशेवरों का मार्गदर्शन भी मिलेगा|कोलेज,स्कूल अदि में एडमिशन में भी मार्गदर्शन मिलेगा|बहुत ज्यादा फायेदे हैं,जरा सोचोगे तो समझ जाओगे| भीड़ को देखते हुए हर महीने मेला या बाजार सा भी लग जायेगा जिससे कुछ लोगों की आमदनी होगी|बौद्ध मूर्तियाँ और साहित्य आसानी से खरीदा बेक जा सकेगा|

 

४. दबे छुपे होने की वजह से या अन्य कई वजह से शादी सम्बन्द अदि के लिए जान पहचान बनेगी|सालाना शादी लायक बच्चों की किताब भी निकली जा सकती है परिचय सम्मलेन भी करवाया जा सकता है| इस दिशा में भी बहुत फायेदा होगा|

 

५. बह्जनों के स्थाई झंडे बौद्ध धम्म के भारत में पतन और उत्थान न होने की मूल कारन पर भी सह सहमती से काम होगा जिनमे प्रमुख हैं१. धन और शक्ति की सिधान्तिक उपेक्षा २. अनईश्वरवाद की नासमझी ३. धम्म विरोधी की जबरदस्त मौकापरस्ती४. इसके धम्म आचार्यों को भीख मांगना५. अच्छे प्रवचन करने वाले न होना६. जनाश्रित न होकर राज आश्रित होना |इनमे से सबसे मुख्य है धन संचय की उपेक्षा, यकीनन धन संचय भ्रस्टाचार और अशांति का कारन बनता है पर समय गवाह है की इसके बिना धम्म शिक्षा महत्वहीन हो गई है,पराजित होकर युगों तक गुलामी की,असुरक्षित होकर अन्य धर्मों में आश्रय खोजने लगे|आज भी बौद्ध विहारों पर नीरसता छाई हुई है, दुसरे तो  तो छोड़ो अपने लोग ही वहां नहीं फटकना चाहते|आज हमारे लोग जब भी संगर्ष को उठते हैं तो धन के आभाव में सब ठंडा हो जाता है और अपनी दुर्दशा कबूल करने को मजबूर हो जाते हैं|इसके विपरीत धम्म विरोधी धन के महत्व को समझते हैं और हमेशा धर्म के नाम पर धन संचय में लगे रहते हैं| ये धन हर प्रकार से उनका संवर्धन करता हैं|ये धन उनके हर पाप कर्म को शुभ कर्म बना देता है और हमारे लोग शिकायत करते हुए जीते हैं और मर जाते हैं|हमें ऐसी व्यस्था बनानी है जिसमें हर पूर्णिमा को लोग यथा शक्ति दान दे जो की बौद्ध विहार की मासिक वेतन का काम करेगा| क्योंकि धम्म से सभी लाभान्वित होते हैं तो ये सबकी जिम्मेदारी है न की केवल कुछ प्रेरित बौद्धों की|इस मासिक वेतन से विहारों का रखाव और उन्नति होगी,उसमें आश्रित धम्म आचार्यों को फिर भीख नहीं मंगनी पड़ेगी|

 

६. हमें बौद्ध धम्म आचार्यों को भिखारी नहीं धम्म अधिकारी बनान होगा| उनकी सभी भौतिक जरूरतों की जिम्मेदारी बौद्ध समाज को लेनी होगी|मेरी निजी राय  है की बौद्ध धाम के अगुवा जिनपर धम्म प्रचार की जिम्मेदारी है उनको ही कमजोर बनाये रखने और भीख मंगवाने में बौद्ध धम्म का उद्धार नहीं हो पायेगा| विहारों के मासिक वेतन या चंदे में से नियमित तनख्वा देनी होगी| इस ठीक किसी कम्पनी या विभाग की नौकरी की तरह बनाना होगा|भगवन बौद्ध ने जब भिक्षा मांगी थी तब परिस्थिथि दूसरी थी,केवल बुरी परिस्थिथि में भिक्षा मांगना जायज़ ठराया जा सकता है| भिक्षु व्यस्था और ग्रीक स्टाइल चीवर का सिद्धांत भगवन बुद्धा के  बहुत बाद स्थापित किया गया|बौद्ध भिक्षु को राजनेतिक सरक्षण जब मिलेगा तब मिलेगा पर तब तक जनता से संरक्षण मिलना ही चाहिए|ये समझा जा सकता है की जहाँ धन है वह भ्रस्टाचार हो सकता है इसी वजह से बौद्ध धम्म में ये व्यस्था नहीं है|भ्रस्टाचार बुरी चीज़ है पर गुलामी,घृणा,अपमानित मौत,बलात्कार,नरसंघार,दबंगई अदि उससे भी ज्यादा बुरी चीज़ है| अब फैसला आपके हाथो में है आप व्यस्था परिवर्तन चुनकर अपना भला करते हो बौध्मय भारत का भला करते हो या केवल बौद्ध बातों तक ही सीमित रहते हो|ये व्यस्था बौद्ध धम्म के पूर्ण उत्थान होने तक लागू रहनी चाहिए|

 

७. किसी भी कौम का साहित्य और इतिहास उसके लोगों के मन,वचन और कर्मों को दिशा देते हैइसलिए हार को नहीं विजय गाथा को प्रचारित करना चाहिए। हारको भी नज़रन्दाज नहीं करना बल्कि उसके सबक से अपना साहित्य बनाओ |

 

…समयबुद्धा

 

BAHUJAN HITAYE BAHUJAN SUKHAYE

 

https://samaybuddha.wordpress.com/2014/05/14/14may2014-buddh-poornima-samaybuddha-dhamm-deshna/

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बहुजन शिकायत तो बहुत करते रहते हैं अपनी दुर्दशा की, मीडिया द्वारा दरकिनार करने की पर जब उनको वेकपित मीडिया का समाधान दिया जाता है तब वे उसे अनसुना कर देते हैं ।समयबुद्धा मिशन बहुत समय से बहुजनों को जगाने की कोशिश कर रहा है पर अफ़सोस वो ध्यान ही नहीं दे रहे। यही वो आदत है जिसकी वजह से बहुजन अपनी दुर्दशा के लिए खुद जिम्मेदार रहे हैं और आज भी हैं।
समयबुद्धा मिशन बहुजन समाज को अम्बेडकर और बुद्ध मार्ग द्वारा खुशहाल बनाने के लिए समर्पित है| बुद्धा और आंबेडकर के विचारों का प्रचार प्रसार करने के लिए ही समयबुद्धा वेबसाईट समर्पित है| शिक्षित और सक्षम वर्ग ही बदलाव लाता है पर ऐसा देखा गया है की समय का आभाव या अन्य कारणों से यही वर्ग बौद्ध और अम्बेडकरवादी विचारधारा और साहित्य पर ध्यान नहीं दे पाता। शिक्षित और सक्षम वर्ग इन्टरनेट खूब इस्तेमाल करता है, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस वेबसाईट को चलाया जा रहा है। ये वेबसाईट ऐसा प्लेटफार्म प्रदान करती है जहाँ अम्बेडकर और बुद्ध विचारधारा को हमारे लोग आपस में शेयर कर सकते हैं इस वेबसाईट पर अनेकों पुस्तकें और लेख फ्री में उपलब्ध हैं, आप स्वेव भी लेख लिख सकते हैं|.इस वेबसाइट पर उपलब्ध फ्री किताबों का अध्ययन करें |आप खुद यहाँ इस वेबसाइट पर उपलब्ध बौद्ध धम्म की जानकारी पढ़ें और अपना ज्ञान बढ़ाएं, बौद्ध धम्म ज्ञान को अपने जीवन में उतारें| भगवान् बुद्ध द्वारा बताये गए मार्ग और शिक्षा को हिंदी में जानने के लिए,बौद्ध विचारक एव दार्शनिक ‘समयबुद्धा’ के धम्म प्रवचनों के लिए , बौद्ध धम्म पर अपने विचार और लेख लिखने के लिए व् अनेकों बौद्ध धम्म और अम्बेडकरवाद की पुस्तकों को मुफ्त में पाने के लिए आप इस वेबसाइट को अपनी ईमेल से ज्वाइन करें, अपने सभी साथियों को ज्वाइन करवाएं| तरीका इस प्रकार है:

https://samaybuddha.wordpress.com/ पर जाकर बाएँ तरफ दिए Follow Blog via Email में अपनी ईमेल डाल कर फोल्लो पर क्लिक करें, इसके बाद आपको एक CONFIRMATION का बटन बनी हुए मेल आएगी निवेदन है की उसे क्लिक कर के कनफिरम करें इसके बाद आपको हर हफ्ते बौध धर्म की जानकारी भरी एक मेल आयेगी| ये ठीक ऐसे है जैसे कोई साप्ताहिक हिंदी बौद्ध पत्रिका हो और वो भी फ्री में, पसंद न आने पर अनसब्सक्राइब भी कर सकते हैं|

भले ही हमारा मीडिया में शेयर न हो हमें अपना मीडिया खुद बनना है। आप बौद्ध धम्म के प्रचार प्रसार में मदत करें, आप केवल अपने १० बहुजन साथियों की जिम्मेदारी ले|अगर हम में से हर कोई हमारे समाज के फायदे की बात अपने दस साथिओं जो की हमारे ही लोग हों को मौखिक बताये या SMS या ईमेल या अन्य साधनों से करें तो केवल 7 दिनों में हर बुद्धिस्ट भाई के पास हमारा सन्देश पहुँच सकता है | इसी तरह हमारा विरोध की बात भी 9 वे दिन तक तो देश के हर आखिरी आदमी तक पहुँच जाएगी | नीचे लिखे टेबल को देखो, दोस्तों जहाँ चाह वह राह, भले ही हमारा मीडिया में शेयर न, हो हम अपना मीडिया खुद हैं :

1ST DAY =10
2ND DAY =100
3RD DAY =1,000
4TH DAY =10,000
5TH DAY =100,000
6TH DAY =1,000,000
7TH DAY =10,000,000
8TH DAY =100,000,000
9TH DAY =1,000,000,000
10TH DAY =1,210,193,422

अगर आपको कोई लेख ऐसा लगता है जिसका आप प्रचार करना चाहते हैं तो उसे कॉपी कर के प्रिंट और फोटो कॉपी कर के अपने लोगों में बाँट भी सकते हैं, क्योंकि इन्टरनेट का इस्तेमाल हर कोई तो नहीं करता | कई लोग जो नौकरी करते हैं उनको प्रिंट और फोटो कॉपी की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध होती है|बिना अपना धन खर्च किये भी आप इस तरह धम्म प्रचार कर सकते हो| ज्यादा नहीं बस दस शिक्षित युवा लोगो को चुन लो और उनतक सन्देश पहुचने की जिम्मेदारी ले लो|

बौद्ध साहित्य बहुत विस्तृत है, केवल बौद्ध भंते और बौद्ध लीडर उतना नहीं कर सकते जितना की हम सब मिल कर कर सकते हैं| अगर आपके पास भी बौद्ध धम्म की जानकारी है और आप बौद्ध धम्म पर लिखते हो तो आपसे अनुरोध है की आप बौद्ध धर्म पर अपने आर्टिकल हिंदी में jileraj@gmail.com पर भेजे जिसे हम आपके नाम और फोटो सहित या जैसा आप चाहें यहाँ पब्लिश करेंगे| आईये किताबों में दबे बौध धम्म के कल्याणकारी ज्ञान को मिल जुल कर जन साधारण के लिए उपलब्ध कराएँ |

भगवान् बुद्धा ने कहा है “सत्य जानने के मार्ग में इंसान बस दो ही गलती करता है ,एक वो शुरू ही नहीं करता दूसरा पूरा जाने बिना ही छोड़ जाता है “

 

 

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