बुद्ध ने जिस पुनर्जन्म की बात की है वो एकदम वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित है…बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये


hUMAN LIFE CYCLE REINCARNATION
बुद्ध ने जिस पुनर्जन्म की बात की है वो एकदम वैज्ञानिक सिद्धांतो पर आधारित है

विज्ञान कहता है ब्रह्माण्ड परिवर्तनीय है पल प्रतिपल इसकी उर्जा बदलती है पुरानी उर्जा क्षीण होती है उसकी जगह नई उर्जा स्थानातरित हो जाती है ! एक पदार्थ के लिए जो उर्जा क्षीण हो जाती है वही दुसरे को नवीन भी करती है उदहारण – पेड़ पौधों के लिए oxigen क्षीण उर्जा है और हमारे लिए वही जीवन दाई !

अब मनुष्य या अन्य जीव जिस oxigen को क्षीण बनाते है उसी उर्जा का disordarरूप है कार्बन डाई आक्साइड

मतलब पेड़ पौधों ने foto sinthesis द्वारा जो सौर उर्जा प्राप्त की उसे oxizaneमें रूपांतरित कर दिया

इस तरह उर्जा का पुनर्जन्म होता है disordar enerjy के रूप में ! ये क्षीण उर्जा दुसरे पदार्थ के लिए नविन उर्जा के रूप में होती है और वहां से क्षीण अवस्था में रूपांतरित होती है

सूर्य की प्रचंड उर्जा गर्मी पैदा करती है गर्मी से जल वास्पित होता है उससे बादल बनते है उससे वर्षा होती है पहाड़ों पर हुई वर्षा ग्लेशियर बनातेहै है उससे नदिया बनती है नदियों से पर्यावरण पर्यावरण से मौसम चक्र इससे जीवन चक्र चलता है

भूमिगत ऊष्मा क्षीण होकर magma बनता है मैग्मा से लावा , लावा विस्फोटित होकर अपनी क्षीण अवशता में चट्टान बनते हैं चट्टान रेत बनती है , रेत मिटटी के रूप में क्षीण होती है मिटटी क्षीण होकर पोषक बनती है और वनस्पतियो को उर्जा देती है वनस्पतियों की क्षीण अवस्था जिव जंतुओं को पोषक तत्व प्रदान करती है

यही है असली पुनर्जन्म जो किसी आत्मा के बिना होता है

महात्मा बुद्ध कहतें हैं “मेरी बात भी केवल इसलिए ना मानो की उसे तथागत गौतम ने कहा उसपर अध्यन करो ध्यान लगाओं उसको तर्क की कसौटी पर कसो जब तुम्हें अपने अनुभवों से उस बात की सत्यता का अनुभव हो तब उसे मानो अन्यथा मत मानो”

बुद्धिज्म पूर्णतः विज्ञान ही है उसको आप मानिये या नहीं मानिये कोई किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं है !

आप विज्ञान को मानते है सभी बातों को तर्क की कसौटी पर कसते हैं आप के दिल में मानवता के लिए करुणा है , आप जीव मात्र से भी प्रेम करते है ,आप बदलाव चाहते है , दुखों के कारणों को ढूंड रहे है , ब्रह्माण्ड के रहस्यों में रूचि है , आप के अन्दर सत्य को जान्ने की तीव्र जिज्ञासा है यही तो बौद्धमत है बुद्धि का मत मतलब वैज्ञानिक विचारधारा

आप स्वीकार करो न करो परन्तु आप एक सच्चे बौद्ध हो

यही बुद्दिज्म है इसके आलावा सब बकवास और मिलावट है

मानव का शरीर पांच तत्वों से बना है वो है carben , nytrojan , oxyzen , fasfores, hydrozen इसी को बुद्ध ने कहा पंचतत्व ! ध्यान रखना की पंचतत्व की अवधारणा केवल बुद्ध ने की ! बाद में ब्राह्मणों ने इस अवधारणा का अपहरण कर उसे अपनी पोथियों में अपने अनुसार विस्लेषित किया !

पुनर्जन्म या रूपांतरण जिव के मरने के बाद इन पांच तत्वों का होता है ! किसी आत्मा का नहीं !

ब्राह्मण पोथी गीता के अनुसार आत्मा अजर अमर है यानि न वो पैदा होती है न मरती है

सौ साल पहले दुनिया की पूरी आबादी 3 अरब थी आज 7 अरब है सौ सालों में ये 4 अरब आत्माएं कहा से आगई ?

…शकील प्रेम

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