आज 800 वर्षों बाद पुनः नालंदा में ज्ञान का सूर्योदय हो रहा है नालंदा (बौद्ध) विश्वविद्यालय के रूप में |…माननिय नितीश कुमार मुख्य- मंत्री बिहार


nalanda universty reopenednalanda nitish kumarआज का दिन मेरे जीवन के सबसे सुखद दिनों में से एक है | इतिहास ने आज पुनः करवट ली है!

विश्व जब ज्ञानार्जन के संस्थानों से अपरिचित था, उस समय मगध साम्राज्य में नालंदा विश्वविद्यालय स्थापित था | दूरसंचार का तंत्र नहीं था, फिर भी नालंदा विश्वविद्यालय ने विश्व में अपनी पहचान बनाई | समस्त भारत और चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मोंगोलिया, तुर्की, श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देशों से आए दस हज़ार से अधिक छात्र और दो हज़ार से अधिक विद्वान शिक्षकों ने नालंदा विश्विद्यालय को दुनिया का सर्वोच्च ज्ञानकोष बना दिया | नालंदा का ज्ञान शुद्द था, बाज़ार और पेशेवर काम की ललक अथवा मिलावट नहीं थी उसमें | आर्थिक, व्यवसायिक अथवा शक्ति के बल से किसी मुल्क को परास्त करने या उसके संसाधनों को जीतने की रणनीति का केंद्र नहीं था नालंदा ! बल्कि मानव के विकास और प्रकृति से समन्वय से जुड़े शुद्ध ज्ञान का केंद्र था जिसने पांचवी शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के आठ सौ वर्षों तक मानव सभ्यता का मार्ग प्रशस्त किया | जब नालंदा विश्वविद्यालय को आक्रमणकारियों ने नष्ट किया तो इतिहास का एक दौर भी नष्ट हो गया | ज्ञान में भारत के विश्व-नेतृत्व का सूर्यास्त हो गया था | शायद वहाँ से बिहार के स्वर्णिम दौर का भी सूर्यास्त हुआ था |

आज 800 वर्षों बाद पुनः नालंदा में ज्ञान का सूर्योदय हो रहा है नालंदा विश्वविद्यालय के रूप में | नालंदा विश्वविद्यालय में आज पहला सत्र आरम्भ हो गया | आज सुबह हमने कुलपति डा० गोपा सबरवाल और उनके माध्यम से विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों, छात्रों, और प्रबंधन को बधाई दी | इस मुकाम तक पहुँचने में पूर्व राष्ट्रपति डा० अब्दुल कलाम, नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन, सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जार्ज यो, समेत अनेक देशों के विद्वजनों एवं अनेक महत्वपूर्ण लोगों की भूमिका है | साथ ही केंद्र सरकार की सक्रिय भूमिका रही है | बिहार सरकार ने भी पूरी सक्रियता से इसके लिए काम किया | विश्वविद्यालय के विज़न से लेकर, ज़मीन के अधिग्रहण, निर्माण कार्य में सहयोग, टेम्पोरेरी कैम्पस की व्यवस्था के साथ साथ हर कदम पर कार्य को तेज़ करने का प्रयास किया | इसके साथ एनडाउमेंट के रूप में एक सौ एकड़ ज़मीन देने की भी प्रतिबद्दता है | आज जब सत्र आरंभ हुआ है तो इस अवसर पर मैं नालंदा विश्वविद्यालय के समस्त भागीदारों, छात्रों, शिक्षकों, विश्व विद्यालय प्रशासन, राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को हार्दिक बधाई देता हूँ |

बिहार विश्व के ज्ञान का केंद्र था ! प्राचीन काल में जो बिहार का इतिहास है वो बिहार ही नहीं पूरे भारत का इतिहास है और कुछ मामलों में मानव सभ्यता का भी | हमने बिहारवासियों से कहा है कि जीवन भर प्रयास करेंगे कि बिहार पुनः ज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में शिखर पर पहुंचे और दुनिया को राह दिखाये | आज उस सोच ने जमीन पर पहला मज़बूत कदम रखा है | इसके लिए बिहार और देश के सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं | वाकई, आज मैं बहुत खुश हूँ ! जय बिहार, जय भारत |

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