खबर: बिहार के मुख्य मंत्री जीतन राम मांझी बोले- सीएम रहते हुआ भेदभाव (छुआछूत), पूजा के बाद धुलवाई गई मंदिर की मूर्तियां| अरे भाई जब बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने साफ़ साफ़ समझा दिया की तुम हिन्दू नहीं हो बौद्ध हो और जब तक खुद को हिन्दू समझते रहोगे अपमानित होते रहोगे चाहये कुछ भी बन जाओ, अगर नहीं मानोगे तो गलती किसकी है| हिंदुत्व से बचने के लिए बाइस प्रतिज्ञा करें थी भूल गए क्या


jitan ram manjhiबिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि पिछले दिनों  उन्हें मुख्यमंत्री रहते हुए भी छुआछूत का शिकार होना पड़ा।

मांझी ने बताया कि उन्हें छुआछूत का एहसास उस वक्त हुआ, जब एक मंदिर में पूजा के बाद लोगों ने मंदिर परिसर और मूर्ति को धो दिया। इतना ही नहीं, उस घर को भी धो दिया गया, जहां वो कुछ वक्त के लिए ठहरे थे।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की जयंती के अवसर पर यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए मांझी ने जातिवाद की आलोचना करते हुए कहा, ‘बिहार विधानसभा उपचुनाव के सिलसिले में मैं मधुबनी गया था। बड़े शौक से लोग मुझे एक मंदिर में ले गए। यह बात हमको पता नहीं थी, पर बाद में राम लखण राम रमण जी (जदयू  नेता और खनिज मंत्री) ने बताया कि आपके जाने के बाद मूर्ति को धुलवाया गया।’

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने उच्चवर्गों के लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें जब काम लेना होता है तो वे दलित मुख्यमंत्री के आगे दंडवंत होते वक्त नहीं गंवाते, पांव पर गिर जाते हैं। लेकिन अगर कोई दलित मुख्यमंत्री मंदिर में चला जाता है तो उसे तथाकथित रूप से पवित्र करने में जुट जाते हैं।

बिहार के दूसरे दलित नेता चिराग पासवान ने कहा कि उन्हे नहीं लगता कि ऐसी घटना हुई होगी, लेकिन अगर ऐसी कोई घटना है तो इसे मुख्यमंत्री को भुनाना नहीं चाहिए।

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दलित अपनी बेइज़्ज़ती करने खुद जाते हैं,जब ब्राह्मण नहीं चाहते की ये लोग मंदिर जाएँ तो जाते क्यों हो? जब बाबा साहब ने तुमको अपना खुद का अपना धर्म बौद्ध धम्म में लौटा दिया तो फिर क्यों खुद को हिन्दू दलित समझते हो क्या तुम भूल गए मनुविधान की सजाएँ, मंदिर प्रवेश पर मार दिया जाना, शास्त्र सुन लेने पर कान में पिग्ला शीशा डलवाना आदि आदि…. ब्राह्मणों ने तुमको मंदिर से दूर रखने की हर संभव कोशिश की पर तुम ही नहीं मानोगे तो गलती किसकी है
हम तो ये मान लेते हैं कि हमारे छूने से ये भगवान अपवित्र और गंदे हो जाते हैं । इसका मतलब क्या है ? इसका सीधा सा मतलब है कि ये भगवान हमसे कमजोर हैं, जो हमसे खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं और हम इनसे ताकतवर हैं । इनको जब पता है कि इनके छूने से हम गंदे हो जायेंगे तो इनको हमसे बचना चाहिए और दूरी बना लेनी चाहिए लेकिन ये हमसे दूर जाने में भी सक्षम नही हैं । इससे पता चलता है कि ये चलने फिरने में भी अक्षम हैं । ये खुद अपनी मदद भी नही कर सकते हैं । अपवित्र होने के बाद भी इनको साफ करने के लिए किसी धूर्त इन्सान की ही जरुरत पड़ती है । ये नही कि खुद गंगा जाये और नहाकर वापिस अपनी जगह आ जाये लेकिन ये खुद नहा धोकर साफ भी नही हो सकते । नहाने धोने के लिए भी इंसानों पर ही निर्भर हैं । अगर ये इनको नहीं नहलाएं तो यूँ ही गंदे अपवित्र पड़े रह जायेंगे । सोचिये जो भगवान खुद ना तो हमसे खुद को अपवित्र होने से बचा सकता है और ना ही हमसे बचने के अपनी जगह बदल सकता है और जो ना खुद नहा धो सकता है, वो ऐसा भगवान आपकी क्या मदद कर सकता है ? निस्संदेह ही वो भगवान हमसे कमजोर है और जो भगवान हमसे कमजोर है वो हमारी क्या मदद कर सकता है ? कोई भी अगर सिर झुकाता है तो अपने से बड़े और शक्तिशाली के आगे झुकाता है और एक हम मूर्ख हैं जो अपने से कमजोर और अशक्त के सामने झुके मरे जा रहे हैं । कभी भी माँगा उससे जाता है जो देने में सक्षम हो और हम उससे माँगते हैं जो खुद दूसरों पर आश्रित है । अपनी मानसिकता बदलिए और छोड़ दीजिये ऐसे भगवानों को जो ना खुद की मदद कर सकता है और जो ना कहीं चल फिर सकता है ।

बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी जी ने बताया है कि भोलाराम पासवान शास्त्री की जयंती के अवसर पर उन्होंने एक मंदिर में पूजा की । जिसके बाद मूर्ति को धुलवाया गया ।

मुख्यमंत्री जी ऐसी राजनीती का क्या फायदा जो आपको छुआछूत और भेदभाव से ना बचा सके । अगर आप खुद को भेदभाव से नहीं बचा सकते तो जो साधारण शोषित वंचित समाज के लोग हैं, उनको इस भेदभाव से कैसे बचा सकते हो ?
आप मुख्यमंत्री होने के नाते जरुरी था कि आप इस पर बयानबाजी करने के बजाय उन लोगो पर कठोर कार्यवाही करते जिन्होंने इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया है । अगर राज्य में इसके लिए पर्याप्त कानून नही है तो नया कानून लाते और सुनिश्चित करते कि उस कानून पर कठोरता से अमल हो जिससे कि कोई भी किसी के साथ इस प्रकार का भेदभाव करने का साहस ना कर सकें लेकिन आप तो बयानबाजी कर सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं ।
अभी अमर उजाला में एक खबर पढ़ी है कि बिहार के एक गाँव के 350 दलित दबंगों के डर से गाँव छोड़ गए । अगर एक दलित नेता के मुख्यमंत्री रहते ऐसा हो रहा है तो किसी गैरदलित के शासन में क्या हाल होगा ?
बयानबाजी छोड़कर समाज को जागृत और मजबूत करिए मुख्यमंत्री जी । 

जेडीयू ने किया घटना से इनकार — खनन मंत्री राम लषन सिंह ने कहा, ”मुख्यमंत्री को इस बारे में मैंने कोई जानकारी नहीं दी है। बेवजह इस प्रकरण में मेरा नाम आया। मुख्यमंत्री ने प्रसंगवश मेरा नाम ले लिया। मैं तो यह भी नहीं जानता कि मुख्यमंत्री किस मंदिर की बात कर रहे हैं। हो सकता है कि मुख्यमंत्री को किसी तीसरे व्यक्ति ने इसकी सूचना दी होगी। जिस समय मंच पर मुख्यमंत्री के साथ मैं बात कर रहा था, उस समय पूर्व सांसद महेश्वर हजारी व सुखदेव पासवान भी वहां मौजूद थे। ऐसी कोई बात मैंने नहीं की।” वहीं, पार्टी के एमएलसी विनोद सिंह ने कहा, ”मूर्ति को धुलवाने जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री 18 अगस्त को अंधराठाढ़ी के परमेश्वरी मंदिर में पूजा करने गए थे। रमण तो वहां थे भी नहीं। मंदिर में मैं और ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा थे। रमण को किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी दी होगी। लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री को बताने की बजाए इसकी जांच करानी चाहिए थी। मैं दुर्गापूजा के बाद पटना आने पर मुख्यमंत्री को सच्चाई से अवगत कराऊंगा।”
आगे की स्लााइड में पढ़ें मांझी ने नरेंद्र मोदी को बताया अच्छां पीएम… 29.9.2014

भाई हम सब हिन्दू हैं ।
ठीक है हम हिन्दू हैं तो कुछ सवालों के जवाब दीजिये ।
पूछो
आपके घर में राम की तस्वीर है ?
हाँ है ।
कृष्ण की तस्वीर हैं ?
हाँ है ।
आप इनकी पूजा भी करते हो ?
हाँ करते हैं ?
तो क्या आपके घर में रविदास की तस्वीर है ?
कोई जवाब नही
क्या आपके घर में वाल्मीकि की तस्वीर है ?
फिर कोई जवाब नही ।
अगर हम हिन्दू हैं तो रविदास और वाल्मीकि की तस्वीर क्यों नही है ? अगर हम हिन्दू हैं तो क्या ये हिन्दू नहीं थे ?
आप राम, कृष्ण और अन्य देवी देवताओं के मंदिर बनाते हो ?
हाँ बनाते हैं ।
तो क्या आपने कभी संत रविदास और वाल्मीकि के भी मंदिर बनाये हैं ?
कोई उत्तर नहीं ।
आप राम कृष्ण और अन्य मंदिरों में जाते हो ?
हाँ जाते हैं ।
तो क्या आप कभी रविदास और वाल्मीकि के मंदिर भी गए हो ?
फिर कोई उत्तर नही ।
क्या आप राम कृष्ण और अन्य मंदिर बनाने के लिए चंदा एकत्र करते हो ?
हाँ करते हैं । तो क्या आपने कभी रविदास और वाल्मीकि के मंदिर के लिए भी चंदा एकत्र किया है ?
कोई उत्तर नहीं ।
अगर सभी हिन्दू हैं और सभी समान हैं तो फिर ये भेदभाव क्यों हैं ?
ये भेदभाव इसलिए है कि हम हिन्दू नहीं हैं और सारा कारण जातिवादी भेदभाव है । अगर हम हिन्दू होते तो आप रविदास और वाल्मीकि के मंदिर भी बनाते और उनकी तस्वीर भी घर में लगाते लेकिन आप ऐसा नहीं करते क्योंकि हम हिन्दू नहीं हैं ।

 

हद होती है धूर्तता और दुष्टता की । बहुत से लोग कहते हैं कि पहले छुआछूत इसलिए होता था क्योंकि अछूत गंदे रहते थे । चलो ठीक है इस बात को मान लेते हैं लेकिन कुछ सवाल बाकि हैं । बाबू जगजीवन राम जो भारत के उपप्रधान मंत्री थे । उनसे बाबू संपूर्णानंद की मूर्ति का अनावरण करवाने के बाद मूर्ति को दूध से धुलवाया गया था ।
बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी जी से पूजा करवाने के बाद मूर्ती को धुलवाया गया ।
एक अधिकारि के रिटायर होने पर उस कमरे को गौ मूत्र से धुलवाया गया ।
निश्चित ही ये सभी ना तो गंदे रहते हैं / थे और ना ही मृत पशुओं का माँस खाते हैं / थे फिर भी इनके साथ इस प्रकार का जातिगत भेदभाव किया गया । ये जातिगत भेदभाव इसलिए नहीं किया गया कि ये गंदे रहते थे बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि आप लोगो की मानसिकता ही गन्दी थी । गंदगी आपके दिमाग में है और हमेशा रहेगी । सफाई की जरुरत आपके दिमाग की है । अगर गौमूत्र डालना है तो अपने दिमाग में डालिए । अपनी मानसिक सफाई करिए बाकि सब अपने आप साफ़ हो जायेंगे ।

उन्होंने हजारों सालों तक पीढ़ी दर पीढ़ी भगवान के नाम का डर,ढोंग,अंधविश्वास फैलाकर ब्रेनवाॅश किया है।
आज भी प्रचार साधनों पर कब्जा किए ये लोग अंधविश्वास फैलाने में पूरी ताकत से लगे हैं।
लेकिन सच्चाई न छुपी है न छुपेगी.. इनके हजारों वर्षों के षड़यंत्रो का भंडाफोड़ हो रहा है।
“सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से”

राहुल सांकृत्यायन ने कहा है कि इन पंडे ठगहरों का आदर्श रहा है-
“रोटी खाइये घी-शक्कर से,और
दुनिया ठगिये मक्कर से(पाखंड से)
भारत का इतिहास चिल्ला-चिल्ला कर कहता है कि पंडा प्रारंभ से ही अत्यंत संकीर्ण,क्रूर,हिंसक,परपीड़क,परजीवी,ठग एवं धूर्त रहा है।
दुनिया के सभी धर्मों में ‘सेवा’ को सामाजिकता का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पक्ष माना गया है,लेकिन बामन धर्म में ‘सेवा’ को अत्यंत घृणा की नजरों से देखा गया है।
इनका बाप मनु अपनी स्मृति के चौथे अध्याय के छठे श्लोक में कहता है- कि ‘सेवा’ तो कुत्ते की वृत्ति होती है। श्रम करने वाले, सेवा करने वालों को इन्होंने अपने बामन धर्म में नीच और शूद्र कहा है।

Sudhir Kumar Jatav

https://www.facebook.com/sk2035?fref=nf

तुम्हे अपनी ग़ुलामी,गरीबी,अछूतपन,पिछड़ापन सब खुद दूर करनी होगी उसके लिए कोई नेता,भगवान,फरिस्ता,धर्म नहीं आएगा!!अगर तुमने मन में ठान लिया है तो तुम जरुर जीतोगे,और ग़ुलामी से लड़ नहीं सकते तो तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता,तुम्हारे पास इन सबके खिलाफ लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है!!आज भी हमारे देश में हमारे लोगो पर अन्याय अत्याचार हो रहे है उसके काफी हद तक जिम्मेदार हम खुद भी है क्यूंकि हम लड़ना नहीं चाहते,हमें आदत पड़ी है ग़ुलामी की चाहे किसी की भी करो…आज भी कोई हमारे बहन बेटियो को छेड़ देता हो उनके साथ अन्याय करता है ,कोई भी दिन दहाड़े हमारे लोगो को मार देता है लेकिन उसका कुछ नहीं होता क्यूंकि हम लोग करना नहीं चाहते कुछ,जिस पे होती है वही दुखी होता है बाकी सब तमाशा देखते है ,और ये जब तक होता रहेगा जब तक तुम खुद लड़ाई नहीं करोगे अपनी ग़ुलामी के खिलाफ,गरीबी के खिलाफ,जातिवाद के खिलाफ!!ये सब उस दिन बंद हो जायेगा जब सब मिलकर इनका मुकाबले करेंगे इनकोमुह तोड़ जबाब देंगे!!अब इनको मुह तोड़ जबाब शिक्षित होकर ,संगठित होकर संघर्ष करके ही दिया जा सकता है ,हर क्षेत्र में आगे बढे ,अपने वोट बैंक को समझे और खुद की सरकार बनाये किसी केआगे न झुके तब!!जिस दिन तुम बकरी बनना छोड़ कर शेर बन जाओगे उस दिन कोई तुम्हारे सामने नहीं देखेगा ,फिर अन्याय अत्याचार तो दूर की बात है ,इन लोगो को अभी तक करारा जबाब नहीं मिला है इसलिए इनके हौसले बुलंद है ,जिस दिन पलट के जबाब दे दोगे उस दिन से इनके गंदे मनसूबे चकनाचूर हो जायेंगे!!इसलिए हमें अपनी ताकत में भरोषा करे हुए खुद आगे बढ़ना है अपनी जंजीरो को तोडना है !!
जय भीम।।।।

गौतम बुद्ध के प्रवचन में एक व्यक्ति रोज आता था और बड़े ध्यान से उनकी बातें सुनता था। बुद्ध अपने प्रवचन में लोभ, मोह, द्वेष और अहंकार छोड़ने की बात करते थे। एक दिन वह व्यक्ति बुद्ध के पास आकर बोला- ‘मैं लगभग एक महीने से आपके प्रवचन सुन रहा हूं। पर क्षमा करें, मेरे ऊपर उनका कोई असर नहीं हो रहा है। इसका कारण क्या है? क्या मुझमें कोई कमी है?’
बुद्ध ने मुस्कराकर पूछा- ‘यह बताओ, तुम कहां के रहने वाले हो?’
उस व्यक्ति ने कहा- ‘श्रावस्ती।’
बुद्ध ने पूछा- ‘श्रावस्ती यहां से कितनी दूर है?’, उसने दूरी बताई।
बुद्ध ने पूछा- ‘तुम वहां कैसे जाते हो?’
व्यक्ति ने कहा- ‘कभी घोड़े पर तो कभी बैलगाड़ी में बैठकर जाता हूं।’
बुद्ध ने फिर प्रश्न किया- ‘कितना समय लगता है?’, उसने हिसाब लगाकर समय बताया।
बुद्ध ने कहा- ‘यह बताओ क्या तुम यहां बैठे-बैठे श्रावस्ती पहुंच सकते हो?’
व्यक्ति ने आश्चर्य से कहा- ‘यहां बैठे-बैठे भला वहां कैसे पहुंचा जा सकता है। इसके लिए चलना तो पड़ेगा या किसी वाहन का सहारा लेना पड़ेगा।’
बुद्ध मुस्कराकर बोले- ‘तुमने बिल्कुल सही कहा। चलकर ही लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। इसी तरह अच्छी बातों का प्रभाव भी तभी पड़ता है जब उन्हें जीवन में उतारा जाए। उसके अनुसार आचरण किया जाए। कोई भी ज्ञान तभी सार्थक है जब उसे व्यावहारिक जीवन में उतारा जाए। मात्र प्रवचन सुनने या अध्ययन करने से कुछ भी प्राप्त नहीं होता।’
उस व्यक्ति ने कहा- ‘अब मुझे अपनी भूल समझ में आ रही है। मैं आपके बताए मार्ग पर आज से ही चलूंगा।’ बुद्ध ने उसे आशीर्वाद दिया

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