डॉ अम्बेडकर के कहा था कि मेरी दिलाई सुविधाएं आज हैं पर कल नहीं होंगी इसलिए व्यवसायी बने, स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनने की जरुरत है। .. Nikhil Sablania


डॉ भीमराव अम्बेडकर का सन्देश: व्यवसायी बने, आत्मनिर्भर बनें
क्या आप स्कूली शिक्षा ठीक से नहीं कर पाए या कॉलेज नहीं जा पाए ? क्या आप नौकरी करना पसंद नहीं करते और चाहते हैं कि आप व्यापार करें? क्या आप रिटायरमेंट के बाद कोई कारोबार या निवेश की सोच रहे हैं? क्या आप विद्यार्थी हैं और बिल गेट्स या स्टीव जॉब्स की तरह सफल व्यापारी बनाना चाहते हैं? क्या आप एक ऐसे भारतीय हैं जो यह सोचते हैं कि विदेशी कंपनियों में नौकरी की जगह अपने खुद के धंधे होने चाहिए और आप खुद ऐसा करना चाहते हैं ? क्या आपके पास धन नहीं है पर फिर भी आप व्यापार या निवेश करना चाहते हैं ? ऐसे बहुत से जटिल प्रश्नों के उत्तर आपको इन पुस्तकों में मिल जाएंगे। व्यवसाय और निवेश की वित्त शिक्षा आपको मानसिक रूप से तैयार करेगी कि आपको किस प्रकार व्यवसाय या निवेश में कदम रखना है। जरुरी नहीं आपके पास कोई शिक्षा की डिगी हो। केवल आपको सरल हिंदी आनी चाहिए जिससे आप इन्हे पढ़ सकें। भारत में पहली बार अमरीका के उन वित्त शिक्षा लेखको की यह पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध है जो न केवल ऐसे सफल लेखक हैं जिनकी पुस्तकों की प्रतिया करोड़ों में बिक चुकी है और जो दुनिया भर में वित्त शिक्षा देते हैं, बल्कि ऐसे लेखक भी हैं जो कि सफल व्यापारी और निवेशक भी है।
पिछले एक वर्ष से मैं कुछ इस प्रकार की शिक्षा की तलाश में था जो हमारे लोगों में व्यवसाय और वाणिज्य सम्बब्धी वित्त शिक्षा का ज्ञान प्रवाह कर सके। बाबा साहिब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने भी कहा था कि मेरी दिलाई सुविधाएं आज हैं पर कल नहीं होंगी इसलिए हमे आत्मनिर्भर बनना होगा। आज भारत से लेकर अमरीका तक नौकरियां सरकारी और गैर सरकारी, दोनों ही क्षेत्रों में सिकुड़ रही हैं। मेरी एक साल की खोज और दो सालों के अध्यन्न के बाद यह पुस्तकें मेरे हाथ लगी हैं जिन्हे मैं ज्यादा-से-ज्यादा लोगों तक पहुंचा कर उन्हें वित्तीय शिक्षा देना चाहता हूँ। इसके लिए मैंने कई हज़ारों रुपयों का जोखिम उठा कर यह पुस्तकें खरीदी है और अपने लोगों में यह शिक्षा देने का प्रण लिया है। अब आपको इस शिक्षा को ग्रहण करना है। आपको यह पुस्तकें खरीदनी है जिससे की यह कारवां और अधिक लोगों तक पहुँच सके। आपको इस कारवां को न केवल अपने वर्गों में बल्कि भारत के उन सभी हिन्दीभाषी वर्गों में ले जाना है जिन्हें इनकी जरुरत है और चाहे वह किसी भी जाती या धर्म से हो क्योंकि गरीबी की मार सब ही झेलते हैं और अमीरी की शिक्षा बहुत कम स्रोतों से मिल पाती है। आप चाहें विद्यार्थी हों, नौकरीपेशा, व्यापारी, कारोबारी अथवा किसी भी क्षेत्र से हों यह पुस्तकें सभी के लिए उपयोगी हैं। हिंदी भाषा में अनुवादित हुई यह पुस्तकें अमरीका के उन लेखकों द्वारा लिखी गई है जो न केवल लेखक हैं बल्कि अरबो खरबो रूपये की सम्पति के मालिक भी और जिसे उन्होंने अपनी वित्तीय शिक्षा को मजबूत करके बनाया है। तो आप भी इन पुस्तकों को पढ़ें और वित्तीय शिक्षा को सीखें और अपने परिवार को सिखाएं। यह पुस्तकें सरल हिंदी में है और आसानी से समझ आ जाती हैं। मैं आपको यह वादा करता हूँ कि इन पुस्तकों को खरीदना आपके जीवन का सबसे अच्छा निवेश होगा जो न केवल आपको बल्कि आपके द्वारा आपके परिवार और आनेवाली पीढ़ियों को व्यवसाय और निवेश सम्बन्धी वित्तीय शिक्षा दे देंगे।
अब आप आज ही इस सात पुस्तकों का सैट ऑनलाईन ओर्डेर करके या फोन पर आर्डर करके घर बैठे प्राप्त करें और इस अमूल्य शिक्षा को ग्रहण करें। पुस्तकें आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके आर्डर करें अथवा फोन करें म. 8527533051. (Rs 2000, 7 पुस्तकें)
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डॉ अम्बेडकर के कहा था कि मेरी दिलाई सुविधाएं आज हैं पर कल नहीं होंगी इसलिए स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनने की जरुरत है। 
 

जब विदेश में डॉ अम्बेडकर अपनी पी एच डी की थीसिस लिख रहे थे तो उनके दिमाग में शायद भारत का वह शोषित और पिछड़ा समाज रहा होगा जो निर्धनता के कारण निम्नन साधनों से भी वंचित था। बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने अपनी रिसर्च का विषय चुना ‘भारत में रुपये की समस्या :इसका उद्भव और समाधान’ और अपनी उस रिसर्च में भारत की मुद्रा (करेंसी) रूपये के विषय के साथ-साथ अर्थव्यवस्था और वाणिज्य पर भी बहुत गहराई से अध्यन्न करके उसे लेखनी के माध्यम से आनेवाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित किया। अपने इस कार्य से बाबा साहिब आनेवाली पीढ़ियों को यह सन्देश देना चाहते थे कि उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा वाणिज्य एवं मुद्रा ज्ञान का संग्रह करके स्वयं का आर्थिक विकास करना है जिससे कि वह अपना शोषण समाप्त कर सके।

परन्तु यह बहुत दुखद बात है कि डॉ अम्बेडकर की इस हिदायत के देने के बावजूद, कि आज मेरे दिलाई सुविधाएं हैं पर कल नहीं होंगी, लोगों ने बाबा साहिब की इस बात को नजर अंदाज कर दिया। लोग भूल गए कि डॉ अम्बेडकर शोषित और पिछड़े समाज को नौकरी लेनेवाला नहीं बल्कि नौकरी देनेवाला बनाना चाहते थे। डॉ अम्बेडकर शुरू से ही चाहते थे कि गरीब, शोषित और पिछड़ा तबका व्यवसायी बने। भारत में ऐसे बहुत से सम्प्रदाय हैं जो अधिका-अधिक व्यवसायों से जुड़े हैं और अपनी आर्थिक शक्ति के होने के कारण, अपनी बहुत कम जनसंख्या होते हुए भी, अपनी आर्थिक शक्ति से एक मजबूत समाज है।

असल में किसी भी देश का समाज तब एक मजबूत समाज बनता है जब वहाँ अधिाक-से-अधिक लोग व्यवसायी हों और कम-से-काम लोग वेतन भोगी हों। व्यवसाय वह कुंजी है जिसके माध्यम से मनुष्य अधिका-अधिक लोगों से जुड़ता है और उसके जुड़ने का माध्यम ‘मुद्रा’ और वह ‘समान’ या ‘सेवा’ होते हैं जिन्हे वह लोगों तक पहुंचता या पहुंचाती है। तो जितने अधिक लोगों से एक व्यवसायी जुड़ती या जुड़ता है उतना ही वह उनको समझता (समझती) है और उनको समझ कर जब वह अपना सामान या सेवा देता (देती) है तो उतनी ही मुद्रा बढ़ती है। इससे न सिर्फ व्यवसायी आर्थिक रूप से मजबूत बनता है बल्कि मानव का विकास भी होता है और सामान और सेवाओं को और अधिक विकसित (बेहतर) बनाने हेतु, वैज्ञानिकी और कला का विकास भी होता है।

क्या डॉ अम्बेडकर का सन्देश केवल पिछड़े और शोषित समाज के लिए है? जी नहीं, ऐसे कतई भी नहीं है कि उनका सन्देश केवल कुछ वर्गों के लिए है। परन्तु हाँ यह बात जरूर है कि जितनी जरूररत पिछड़े और शोषित समाज को वाणिज्य और मुद्रा के ज्ञान की जानकारी की जरुरत है उतनी भारत में विकसित समूहों को नहीं है। जहाँ तक भारत से बाहर और विकसित देशों की बात है जहाँ प्रत्येक व्यक्ति वाणिज्य और मुद्रा की शिक्षा लेता है, उन देशों में ऐतिहासिक तौर पर जातिवादी जैसी कोई सामाजिक बुराई नहीं रही जिसकी वजह से केवल दो-चार समूहों को छोड़ कर शेष लोग शिक्षा और व्यवसायों से वंचित रहे हों। इसलिए वहाँ यह शिक्षा वर्षों से सबको मिलती आ रही है और सब ही लगभग शिक्षित है सो इस शिक्षा को आगे बढ़ा रहे है है और ज्यादा से ज्यादा इसकी गहराईयों में जा रहे हैं। परन्तु भारत में इसलिए यह शिक्षा आवश्यक हो जाती है की एक तो यहाँ एक बड़ा वंचित समाज है जो हर तरह से पिछड़ा और शोषण का शिकार है और दूसरा यह कि विकसित तबके की भी निरंतर जनसंख्या बढ़ने के कारण उसमें भी वंचित लोगों की संख्या बढ़ गई है सो उन्हें भी इस शिक्षा की बहुत जरुरत है। इसलिए भारत में वाणिज्य और मुद्रा की उस शिक्षा की बहुत आवश्यकता है जो कि हमें एक सफल व्यवसायी या निवेशक बना सके।

मैंने इस कार्य को करने का जिम्मा अपने ऊपर लिया है। मैंने प्रण लिया है कि मैं जिस प्रकार सामाजिक अन्याय के खिलाफ डॉ अम्बेडकर की मुहीम को पिछले चार सालों से आगे बढ़ा रहा हूँ, उसी मुहीम को आगे बढ़ाते हुए अब मैं डॉ अम्बेडकर के उस विचार को भी आगे बढ़ाना चाहता हूँ जो उनके मस्तिक्ष में अपनी पी एच डी की थीसिस लिखते समय थे। मैंने चाहता हूँ कि हिंदी बोलनेवाली हमारी जनसंख्या, चाहे वह किसी भी जाती या धर्म से हो, जो भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं मैं उन्हें वाणिज्य और मुद्रा की शिक्षा दे कर मजबूत बनाऊं। पिछले ढाई वर्षों से मैं इंटरनेट के माध्यम से यह शिक्षा ले रहा हूँ और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा कर आर्थिक रूप से स्वतन्त्र व सशक्त हो रहा हूँ और मैं यह इसलिए कर पाया कि मेरी इंग्लिश भाषा पर पकड़ अच्छी थी। परन्तु मैं जनता हूँ कि हमारे भारत में, और खासकर हिन्दीभाषी क्षेत्र में और उसमें भी दलित, पिछड़े और आदिवासी और अन्य गरीब लोगों में इंग्लिश की पकड़ उतनी नहीं है। सो इसके लिए मैंने हिंदी में वाणिज्य और मुद्रा की वह पुस्तकें उपलब्ध कराने का निश्चय किया है जिन्हें मैं पढ़ चुका हूँ और उनसे शिक्षा प्राप्त करके एक सफल व्यवसायी बन चुका हूँ। अब मैं चाहता हूँ कि आप भी उस शिक्षा का लाभ उठाएं। पुस्तकों की कीमत देखते हुए यह संशय या संकोच मन में न पालें कि कीमत ज्यादा है। अगर आर्थिक विकास का ज्ञान चंद रुपयों में मिल जाए और आपकी और आपके आनेवाली पीढ़ी की जिंदगियां संवर जाए तो उस ज्ञान को प्राप्त करने की कीमत देने में कंजूसी करना मूर्खता होगी। मैं भी तो पहले पुस्तकें खरीद कर उन्हें आगे बेच रहा हूँ और यह रिस्क उठा रहा हूँ। मैंने अपना समय पहले इंग्लिश सीखने में दिया और फिर पुस्तकें पढ़ने और व्यवसाय में। मुझे तो सफलता ही मिली है। अब मेरा यह ज्ञान और डॉ अम्बेडकर का सपना मैं सब तक ले जाना चाहताा हूँ। आप यह ध्यान रखें कि मैं हिन्दीभाषी क्षेत्र में वह पहला व्यक्ति हूँ जो यह कदम उठा रहा है कि आप तक यह शिक्षा पहुंचा रहा है। यह पुस्तकें वैसे तो हिंदी भाषा में वर्षों से प्रकाशित हो चुकी है परन्तु लोगों को इनकी और इनके भीतर लिखे ज्ञान की जानकारी मैं इस प्रकार पहली बार दे रहा हूँ।

आप अधिक-से-अधिक इन्हें खरीदें और स्वयं पढ़ने के साथ-साथ मित्रों को भी इन्हें भेंट करें। इससे एक तो आप और आपके साथ के लोग इस शिक्षा से विकसित होंगे और साथ-ही-साथ मेरा व्यापार बढ़ने से मैं और भी ऐसे लोगों तक इस शिक्षा को पहुंचाउंगा जिन तक इंटरनेट नहीं पहुँच पाता या जो पुस्तकें नहीं खरीद पाते। पर वह सब तब ही हो पाएगा जब आप एक बार यह पुस्तकें खरीदेंगे। पुस्तकें मुझ से ही से खरीदे क्योंकि मैं ही इस मुहीम को शुरू कर रहा हूँ और इस मुहीम के आर्थिक लाभ का सही हकदार हूँ। दूसरे विक्रेताओं के लिए यह पुस्तकें मात्र हैं परन्तु मेरी लिए लोगों की जिंदगियां संवारने का माध्यम और मेरे जीवन का एक ध्येय। तो आज ही पुस्तकें सीधे हमारे वेबसाईट पर जा कर आर्डर करें। पेमेंट आप ऑनलाईन बैंकिंग, डेबिट कार्ड अथवा क्रेडिट कार्ड से भी कर सकते हैं। अथवा बैंक में रूपये जमा करवाने के लिए इस नंबर पर फोन करे – 8527533051. हम पुस्तकें भारत में कहीं भी डाक द्वारा भेज देंगे।

तो इस मुहीम का हिस्सा बनिए और डॉ अम्बेडकर की सोच को आगे बढ़ाने और भारत को एक स्वावलम्बी और स्वतन्त्र भारत बनाने के लिए ज्यादा-से-ज्यादा यह पुस्तकें लोगों को भेंट करें।  आज के दौर में आर्थिक निर्भरता गुलामी से भी बदतर है।  आर्थिक स्वतंत्रता केवल और केवल व्यवसाय और निवेश देता है। एक व्यवसायी बनाना कोई मुश्किल नहीं है। भारत में ही सर पर टोकरा रख कर सामान बेचने वाले या पेट्रोल पम्प पर काम करने वाले बड़े-बड़े व्यवसायी और निवेशक बन गए है। जरुरी नहीं है कि आपके पास कोई पैतृक खजाना हो। अमरीका में सड़क पर सब्जी बेचनेवाला आज अमरीका के सबसे बड़े खाने के स्टोर्स का मालिक है। तो अब आप ज्यादा इन्तजार नहीं करिए और तुरंत इन पुस्तकों को खरीद कर पढ़ डालिए।

व्यवसाय एवं निवेश सीखने वाली पुस्तकें आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके आर्डर करें अथवा फोन करें म. 8527533051. (Rs 2000, 7 Books)

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NIKHIL Sablania

 

1-11-2014

ग्रामीण छात्र को भाया डॉ भीमराव अम्बेडकर का सन्देश: कहा व्यवसायी बनूंगा

 

मुझे यह बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि कल रांची के आदिवासी क्षेत्र के एक छात्र ने हमारी व्यवसाय और निवेश की शिक्षा देने वाली सात पुस्तकों का सैट खरीदा। जो बात खुश करनेवाली है वह यह है कि उन्होंने डॉ भीमराव अम्बेडकर के उस सन्देश पर चलते हुए हमारी यह पुस्तकें खरीदी जिसमें कि डॉ अम्बेडकर ने कहा था कि मेरी दिलाई सुविधाएं आज हैं पर कल नहीं होंगी, इसके लिए हमें आत्मनिर्भर बनाने की जरुरत है। रांची के छात्र ने जब हमें फोन किया तो यह कहा कि वह डॉ अम्बेडकर की इस सोच पर चलना चाहते हैं। वह नौकरी के सहारे मुहताज न रह कर व्यवसायी बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि वह अपने पैरों पर खड़े हों जिससे कि अपने परिवार और समाज को भी कुछ दे सकें। जब उन्होंने पहली बार मुझे फोन किया तो उनके पास पुस्तकों को खरीदने के पूरे पैसे भी नहीं थे। पर एक हफ्ते में उन्होंने और रूपये जोड़े और पुस्तकें खरीद लीं। उनकी यह सोच प्रशंसनीय है। इस सोच से न केवल उन्होंने मेरा ही उत्साहवर्धन किया बल्कि मुझे विशवास है कि वह एक दिन सफल व्यवसायी और फिर निवेशक भी जरूर बनेंगे। आनेवाले समय में मैं जिस तरह भी हो सका उनका मार्गदर्शन करता रहूंगा।

प्रिय मित्रों, आपमें से बहुत से लोग डॉ अम्बेडकर पुस्तकालय, बौद्ध फेडरेशन आदि कुछ-न-कुछ संस्था चलाते हैं। यदि आप अपनी संस्थान के लोगों तक भी यह विचार पहुंचाएं कि अब हमें आगे बढ़ते हुए केवल नौकरियाँ ही नहीं बल्कि व्यवसाय और निवेश की तरफ भी अपना रुख लेना चाहिए और डॉ अम्बेडकर के उस विचार को आगे बढ़ाना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी दिलाई सुविधाएं आज हैं पर कल नहीं होंगी और हमें आनेवाले समय के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा, तो इससे समाज को एक नई राह मिलेगी। भारत में एक तरफ तो एक-दो प्रतिशत की जनसंख्या वाले ऐसे समुदाय जो व्यवसायों से जुड़े हैं वह आर्थिक रूप से इतने मजबूत हैं कि देश की सत्ता बदलने का दम-ख़म रखते हैं। और फिर दूसरी तरफ दलित, आदिवासी और पिछड़ा समाज है जो कि अपनी विशाल जनसंख्या होने पर भी आर्थिक रूप से पिछड़ा है। इसलिए जरूरत है आर्थिक रूप से उठने की। आर्थिक रूप से हम तब ही उठ सकते हैं जब तक कि हम व्यवसाय और निवेश में अपने पैर न जमा लें।

यह सच है कि हमारे पास न केवल धन की ही कमी है, बल्कि हमारे पास व्यवसाय और निवेश की कोई शिक्षा भी नहीं है। पिछले सत्तर सालों में हमारे पूर्वजों ने नौकरी को ही रोजी-रोटी का साधन बनाया और व्यवसाय व निवेश से और दूर हो गए। व्यवसाय और निवेश की शिक्षा के अभाव में जब हम इन क्षेत्रों में कदम रखते हैं तो अनुभवहीनता और व्यवसाय और निवेश की शिक्षा न होने के कारण असफल हो जाते हैं। अकसर यह कहा जाता है कि पैसे से ही पैसा बनता है। परन्तु यह बात पूरी तरह सही नहीं है। पैसा शिक्षा से भी बनता है। यदि किसी को वयवसाय और निवेश की सही शिक्षा मिल जाती है तो उसके प्रयास सही और सटीक होते हैं। ऐसे में उसे वह अनुभव प्राप्त होता है जो कि उसे आगे भी सफल बनाता है। व्यवसाय और निवेश की शिक्षा के अभाव में उसके प्रयास निरंतर असफल होते हैं और वह ऐसे अनुभव पाता है जिससे उसे निराशा हाथ लगती है। इसलिए अक्सर लोग वयवसाय में हाथ डालने से कतराते हैं या निवेश में असफल हो जाते हैं।

परन्तु हमने यह प्रण उठाया है कि हम आपको सही शिक्षा और मार्ग दें। हमने जो सात पुस्तकें आपके लिए चुनी हैं उनका मैं खुद दो सालों से अध्यन्न कर चुका हूँ और उनकी शिक्षा न केवल अपने काम धंधों में ही लगाता हूँ बल्कि और लोगों को भी आज व्यवसाय और निवेश सम्बन्धी शिक्षा देता हूँ। यह सात पुस्तकें अमरीका के उन लेखकों द्वारा लिखी गई हैं जो न केवल लेखक ही हैं बल्कि सफल व्यवसायी और अरबपति दौलतमंद भी हैं। यह सात पुस्तकें न्यूयार्क में सर्वाधिक बिकनेवाली पुस्तकों की श्रेणी (न्यूयार्क बेस्ट सेलर्स) में रह चुकी हैं। इनके प्रमुख लेखक का इस साल दिल्ली और बेंगलोर में सेमीनार था जिसमें पांच हजार रूपये की फीस देकर बहुत से लोगों ने यह शिक्षा ग्रहण की। मैंने भी ऐसे सेमीनार रखने का निश्चय किया है जिससे कि मैं आपसे रूबरू हो कर और अच्छे से यह शिक्षा दे सकूं और अपने अनुभव बता सकूं। सेमीनार के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं। परन्तु तब तक आप यदि हमारी सात पुस्तकों का अध्यन्न कर लें तो आपको व्यवसाय और निवेश की शिक्षा आसानी से मिल जाएगी और आप जब भी कोई व्यवसाय या निवेश करेंगे तो यह शिक्षा पाने से आपके ज्ञान के चक्षु कुछ इस प्रकार खुल जाएंगे कि आप न केवल हार ही न मानेंगे बल्कि सफल भी रहेंगे।

हमारी सात पुस्तकें सरल हिंदी में लिखी हैं। आप न केवल इन्हें स्वयं ही पढ़ सकते हैं बल्कि उपहार के रूप में किसी को भेंट भी कर सकते हैं। किसी भी उम्र के कोई भी हो, सभी के लिए यह पुस्तकें हैं। व्यवसाय चाहे करें या न करें निवेश तो आपको किसी न किसी रूप में एक दिन करना ही पड़ेगा। कोई प्रॉपर्टी खरीदनी हो, किसी बैंक की स्कीम में रूपये लगाने हों या और किसी भी रूप में कैसे अपने रूपये को लगाना है या नहीं लगाना है, इसका निर्णय तो आपको कई बार लेना ही पड़ेगा। इसके लिए जरूरी है कि आप व्यवसाय और निवेश की शिक्षा पहले से ले लें।

आपको यदि डॉ अम्बेडकर के विचार और कार्यों को आगे बढ़ाना हैं तो आपको एक-न-एक दिन आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। आप यदि बाबा साहिब अम्बेडकर के सच्चे अनुयायी हैं तो आपको एक-न-एक दिन नौकरी लेनेवाला नहीं बल्कि नौकरी देनेवाला बनाना पड़ेगा। जब भारत सरकार ने एक समुदाय के किसी भवन को क्षति पहुंचाई और फिर यह पेशकश रखी कि वह सरकारी खर्चे से क्षतिग्रस्त भवन को ठीक करवा देंगे तो उस समुदाय के लोगों ने सरकार की पेशकश ठुकरा दी और स्वयं ही अपने भवन को न केवल ठीक ही किया बल्कि और भवनों का भी निर्माण खुद के रुपयों से किया। ऐसा वे इसलिए कर पाए क्योंकि उस समुदाय के अधिकांश्तर लोग व्यवसाय और निवेश से जुड़े हैं। ऐसे ही आज आपको दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज को अग्रसर करना है। आपको डॉ अम्बेडकर का कार्य पूरा करना है कि समाज को आगे बढ़ाना है। आपके पास ज्यादा समय नहीं है। आप भूल जाइए कि नौकरी जैसी कोई चीज़ है। आप निश्चय करें कि आप भी एक दिन अम्बानी या टाटा की तरह बड़े व्यवसायी और निवेशक बनेंगे। इस निश्चय के साथ कार्य करिए। आप सौ प्रतिशत नहीं तो पचास प्रतिशत तो सफल जरूर होंगे। उतनी सफलता भी एक बहुत बड़ी सफलता होगी।

इसी के साथ मैं अपना यह लेख यहीं रोकता हूँ और यह आशा करता हूँ कि आप न केवल यह पुस्तकें खरीद कर पढ़ेंगे और भेंट करेंगे बल्कि डॉ अम्बेडकर का यह सन्देश भी आगे बढ़ांएगे कि अब आपको आत्मनिर्भर बनना है। आपको पानी के बुलबुले नहीं बल्कि सुनामी की लहर बनना है। वह लहर जो शक्तिशाली होती है। वह लहर जिसके आगे कोई नहीं टिक पाता। आपको अपने निश्चय और कार्य में ऐसी लहर बनना है जो कि मजबूत हो और विशाल हो। तो बढ़िए आगे और व्यवसाय और निवेश की शिक्षा लेकर आप खुद को एक ऐसी ही सुनामी की लहर बनाईए। – जय भीम। – निखिल सबलानिया

व्यवसाय एवं निवेश सीखने वाली पुस्तकें आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके आर्डर करें अथवा फोन करें म. 8527533051. (Rs 2000, 7 Books).


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