ब्राह्मणवादी मीडिया का दिया हुआ कलंक है “दलित” शब्द इसे त्यागो संवेधानिक नाम जैसे SC/ST/OBC/Minorities इस्तेमाल करो| श्रमण,बहुजन,मूलनिवासी अन्ये नाम हैं, अंतिम स्थाई और सटीक नाम है= “बौद्ध:…Team SBMT


dalit tyago

जो कौम अपना नाम भी खुद नहीं रख सकती विरोदियों का दिया कलंकित नाम “दलित” को ढो रही है वो उन ब्राह्मणवादियों से क्या मुकाबला करेगी जो सदियों से संगर्ष/ षडियंत्र  कर रहे हैं|ब्राह्मणवादी ताकतें फूले-आंबेडकरी आंदोलन को कमजोर बनाने के लिए महानायक बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को ‘दलित’ कहकर उनका अपमान कर रही है. इसके साथ ही जिन लोगों ने भारत में बौद्ध धम्म को अपनाया है उनको भी ‘दलितबौद्ध’ कहना प्रारंभ किया है. इतना ही नहीं बल्कि दलित और बौद्ध यह दोनों समानार्थि शब्द के रुप में प्रचारित करने का कार्य भी हो रहा है. ‘दलित’ और ‘हिंदू’ ये दोनों पहचाने नागों के विरोध में है. इन दोनों पहचानों तथा जाति की पहचानों को बाबासाहेब अम्बेडकर ने नकारा था.

जब भगवन बुद्धा ने हमको बहुजन और श्रमण कहा जब साहब कांशीराम ने हमें बहुजन बनाने को कहा, जब बाबा साहब ने कभी हमें दलित नहीं कहा, तो फिर हमारे लोग अपने लिए विरोधियों का दिया हुआ नाम दलित क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं|ज्ञात हो कि शूद्र ,अछूत,राक्षश की तरह “दलित” शब्द भी धम्म विरोधियों द्वारा फैलाया गया भ्रामक जाल है जो भारतीय बहुजनों की इस पीढ़ी और आने वाली पीढयों को मानसिक रूप से कमजोर बनाये रखेगा। दलित शब्द कलंक है इसे त्यागो,अपने लिए ऐसे सम्भोधन चुनो जो आपकी शक्ति दिखाए कमजोरी नहीं| दलित शब्द कमजोरी बताता है,खुद को बौद्ध कहो और गौरवशाली विजेता बौद्ध इतिहास से जोड़ो |खुद को बहुजन कहो, बहुजन शब्द जनसंक्या बल दर्शाता है जिसमें सभी 6000 जातियां में बटे भारतीय लोग आते हैं| इज्ज़त मांगी नहीं जाती कमाई जाती है,जब तुम अपनी इज्ज़त खुद करोगे तभी तो दुनिया भी करेगी…समयबुद्धा

हमारे समाज को अपना “दलितपन” छोड़ना होगा….!

मैं भारत के दलितों की दुर्दशा देखकर बहुत दुखी हूँ| लेकिन मैं अधिक दुखी दलितों का “दलितपन” देखकर होता हूँ|”दलितपन” दलितों की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है|”दलितपन” एक प्रकार का “भिख्मंगपन” बन गया है|जिस प्रकार कोइ भिखारी कभी शासक नहि बन सकता उसी प्रकार बिना अपना “दलितपन” छोड़ें कोई समाज शासक नही बन सकता| माँगने वाले हाथों को देने वाले हाथ बनाना होगा| यानी कि उन्हे शासनकर्ता जमात बनना होगा| अगर आप शासक नही बन पाते है तो हमारी समस्याओ का कोई हल नही हो सकता है| लेकिन दलित अथवा भिखारी रहते हुय आप शासक नही बन सकते है| इसलिए आपको अपना “दलितपन”छोड़ना होगा|अगर आप शासक बन जते है तो आपकी सभी समस्याओं का हल आप स्व्यं कार सकते है…. मा. कांशीराम जी…..

 

One thought on “ब्राह्मणवादी मीडिया का दिया हुआ कलंक है “दलित” शब्द इसे त्यागो संवेधानिक नाम जैसे SC/ST/OBC/Minorities इस्तेमाल करो| श्रमण,बहुजन,मूलनिवासी अन्ये नाम हैं, अंतिम स्थाई और सटीक नाम है= “बौद्ध:…Team SBMT

  1. Whatever name the Scheduled Castes may have they will be recognized and equally hated by Hindus. Babasaheb Dr. Ambedkar called them Depressed Classes. The same applies to that also. Dalit is at least the phrase that gives them a sense of unity. As far as I understand, this phrase was the choice of Dalits themselves. And unity is the best message.

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