सम्राट धनानंद मगध के शक्तिशाली लोकप्रिय एवं अनीश्वरवादी राजा थे ! उनके शासन में कोई भी निर्धन नहीं था सभी धन एवं धान्य से परिपूर्ण थे जनता पूर्णतः सुखी थी क्यूंकि ब्राह्मणवादी जातिवाद नहीं था !…बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये


Dhana-Nanda1महाराज धनानंद के बारे में बहुत ही कम लिखा जाता है ! और जो भी लिखा जाता है या लिखा गया है वो एकदम ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण द्वारा विकृत होता है !

सम्राट धनानंद मगध के शक्तिशाली लोकप्रिय एवं अनीश्वरवादी राजा थे ! उनके शासन में कोई भी निर्धन नहीं था सभी धन एवं धान्य से परिपूर्ण थे जनता पूर्णतः सुखी थी क्यूंकि ब्राह्मणवादी जातिवाद नहीं था ! जातियां थी जो घृणा की  नहीं श्रम के विभिन्न विभागों का प्रतिक थी , किसी भी जाती का व्यक्ति अपनी विशिष्ठ कार्यकुशलता द्वार ग्रामप्रधान जिला प्रमुख या राजा बन सकता था  !

धनानंद नाइ समाज से निकल कर अपनी बुद्धि और कार्यकुशलता द्वारा राजा बना था ! जनता में वह पूरी तरह स्वीकार्य था उसने राज्य की सुख समृद्धि को स्थाई रखने के लिए कुछ कठोर नियम बनाये उन्ही नियमों में से एक था ब्राह्मणों का राज्य की सीमा में प्रवेश निषिद्ध करना और इसको सुनिश्चित करने के लिए उसने एक गुप्तचरों की टुकड़ी बनाई हुई थी जिसका काम था ब्राह्मणों की राज्य के बाहर की देशद्रोही गतिविधियों पर नजर रखना !

एक बार राजा ने बुद्ध्पूर्निमा पर सामूहिक भोज का आयोजन करवाया और राज्य भर की जनता को न्योता भिजवा दिया ! इस भोज में विष्णुगुप्त नामक एक ब्राह्मण घुसपैठिया भी भेष बदल कर सम्मिलित हो गया था ! उसने स्वयं को मूलनिवासियों जैसा दिखने के लिए श्यामवर्ण में बदल लिया था लेकिन बुद्धिमान गुप्तचरों की निगाहों को धोखा ना दे पाया और पकड़ा गया उसे सम्राट के सामने लाया गया सम्राट ने उसपर दया कर उसे कुछ अपमानित करके ही छोड़ दिया जो की आगे चलकर सम्राट की भयंकर भूल साबित हुई  !

यही विष्णुगुप्त आगे चलकर चाणक्य बना और सम्राट धनानंद के पतन का कारण बना ! धनानद को बर्बाद करने के लिए इस कुटिल चाणक्य ने विदेशी आक्रमणकारियों को निमंत्रण देकर देश को भयंकर युद्ध की विभीषिका में धकेल दिया !

इस ऐतिहासिक दुर्घटना को अधिक महत्त्व न दिए जाने का एक कारन यह भी है की चाणक्य ने नन्दसत्ता का पतन करवा कर चन्द्रगुप्त मौर्य को सत्ता दिलवाई और चन्द्रगुप्त का पोता महान बौद्ध सम्राट अशोक हुए !

इस सत्ताहस्तांतरण के खेल में चाणक्य स्वयं राजा नहीं बना ये उसकी कोई महानता नहीं मानी जा सकती क्यूंकि ये उसकी मज़बूरी थी की सत्ता के केंद्र में कोई मूलनिवासी ही हो !

ब्राह्मणसत्ता जनता कभी स्वीकार ना करती और विद्रोह कर देती इसलिए चाणक्य ने मूलनिवासी चन्द्रगुप्त का इस्तेमाल किया क्युकी चन्द्रगुप्त मौर्य उसके बाद बिदुसार मौर्य जैसे राजा उसके लिए वैसे ही थे जैसे ब्राह्मणों के षड्यंत्र में फंसा राजा राम

उन्होंने मौर्य वंश द्वारा भारत को अपना धार्मिक गुलाम बनाने का पूरा षड्यंत्र किया था वो तो उनके दुर्भाग्य वश और हमारे सौभाग्यवश सम्राट अशोक ब्राह्मणवाद को शीघ्र समझ गए और उन्होंने बुद्धिज्म को स्वीकार कर देश को ब्राह्मणों के भयंकर षड्यंत्रों से बचा लिया !

अनार्य भारत🙏🙏🙏

4 thoughts on “सम्राट धनानंद मगध के शक्तिशाली लोकप्रिय एवं अनीश्वरवादी राजा थे ! उनके शासन में कोई भी निर्धन नहीं था सभी धन एवं धान्य से परिपूर्ण थे जनता पूर्णतः सुखी थी क्यूंकि ब्राह्मणवादी जातिवाद नहीं था !…बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये

  1. Dear Sir, pl.change the background design of your site.It is very difficult to read the article with this background colour/design .Thanks.

  2. ये सब बेकार और निराधार तथ्य हैं ।। कोई भी व्यक्ति यह नही मान सकता कि धनानंद लोकप्रिय था । धनानंद राजनीति मे कुशल था परंतु साथ ही धनलोलुप और विलासी भी था ।। मौर्य वंश तभी तक महान था जब तक वे हिंदु रहे । तभी तक महान था और भगवान बुद्ध तो स्वयं हिंदु राजवंश के थे । उन्हें हिंदु धर्म से अल देखना उनका अपमान करना है ।

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