बोधिसत्व, भारत- रत्न, बाबा साहब डा. भीम राव अम्बेडकर के ५९वें महापरिनिर्वाण दिवस पर: “अगर एक पल के लिए ‘धम्म’ हाथ में ले लेते”… ( रामबाबू गौतम, न्यू जर्सी )


 चैत्य- भूमि पर.   ५९वें महापरिनिर्वाण (Dec. 6th, 1956) दिवस पर,
 बोधिसत्व, भारत- रत्न, बाबा साहब डा. भीम राव अम्बेडकर 
                    को शत- शत नमन के साथ- 
अगर एक पल के लिए ‘धम्म’ हाथ में ले लेते,
दीक्षा- भूमि और बाबा साहब को समझ लेते |
गये कब हम उस जगह पर जहां लाखों खड़े थे,
ज़िंदगी में कभी तो वह ‘दीक्षा-भूमि’ देख लेते |
                      पल जो हमारे उनकी गुलामी में कटते रहे थे,
                      अधिकार क्या वो बाबा साहब के बिन ले लेते? |
                      गुरुकुलों तक सीमित थे शिक्षा के स्कूल सारे,
                      संविधान के बिना क्या हम डा.-इंजी. बन लेते |
भूमिका लिखी धम्म की आखिरी वक्त ‘गौतम’,
भूमिका में क्या है लिखा? उस बात को पढ़ लेते |
 आज़ भी वक्त है उठो- समझो नारी को उठाओ,
 घूंघट- सिंदूर भरने से अपनी नारी को बचा लेते |
                        दे दिया है भीम ने तुमको इतना सोचने के लिए ,
                        धम्म हाथ लेके डा. अम्बेडकर को नमन कर लेते |
                         दादर, चैत्य- भूमि पर जब मैंने अपने पग धरे थे,
                         निकलते इन आँसुओं को हम वहां कैसे रोक लेते? |
                                        ————–
             ( रामबाबू गौतम, न्यू जर्सी )
   ( दिसम्बर ५, २०१४ )

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