4-Apr-2015 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना: हमारी समस्या दैविक नहीं है इसलिए देवपूजा और मन्दिरबाजी से कुछ न हुआ न ही होगा, हमारी समस्या सामाजिक और राजनीति है, इसका समाधान भी सामाजिक और राजनैतिक संगर्ष से ही होगा|इसके लिए हमारे लोग के पास चर्चा का प्लेटफार्म (बौद्ध विहार संस्था) को दुरुस्त करना होगा …समयबुद्धा


ambedkar rajniti“भारत में बहुजन उत्थान की समस्याएं व संभावित समाधान”  ये वो टॉपिक है जिसपर सरे समाज को मंथन करने की जरूरत है, इस सोच विचार और चर्चा को ‘ब्रेन स्त्रोमिंग’ कहते हैं  , ये एक वैज्ञानिक तरीका है जो सभी बड़े कॉर्पोरेट हाउस, रिसर्च  वगेरा में इस्तेमाल होता है | इस तरीके में एक ही समस्या सभी लोगों को दे दी जाती है और सभी लोग अपने अपने हिसाब से उसका समाधान खोजते हैं| फिर सब एक जगह मिल कर सभी समाधान पर चर्चा करते हैं और उपयुक्त समाधान चुन लिया जाता है|ये तो आप समझ ही सकते हैं की जो समाधान किसी एक ने कल्पना में भी नहीं सोचे होंगे वो कोई दूसरा सोच कर प्रस्तुत कर सकता है, इस तरह बेहतरीन समाधान तक पंहुचा जा सकता है|

“हमारे लोगों के आगे क्या समस्याएं हैं”. पहले हम समस्याओं ली एक लिस्ट बनाते हैं फिर एक एक समस्या पर समाधान और नीति बनाएंगे | हम से से किसी एक को इस दिशा में  सभी मतलब की बातें और सुझाव कहीं एक जगह इकठा करना होगा | बोलो तैयार है आप लोग|ब्राह्मणों की बुराई भर कर लेने से कुछ न होगा, ये जीवन का सूत्र है की जो जितना संगर्ष करता है उसको उतना ही मिलता है, आप खुद से पूछो की आप डॉ आंबेडकर संगर्ष सूत्र शक्षित/जागरूक बनो, संगठित रहो, संगर्ष करो पर कितना काम करते हो| जब तक आपका और आपकी कौम का संगर्ष आपके विरोधियों के संगर्ष से ज्यादा न होगा आपको कुछ नहीं मिलेगा||

मेरे हिसाब से सबसे बड़ी और पहली समस्या है की हमारे लोग के पास चर्चा का प्लेटफार्म (बौद्ध विहार) सही से काम नहीं कर रहा है जैसे जाटों के पास गाव की पंचायती चौपाल , मुसलमान के पास मस्जिद, ब्राह्मणों के पास आर एस एस की शाखाएं और मंदिर तंत्र है| जब हमारे लोग चर्चा करेंगे तभी विचारों का प्रसार होगा, जब विचार फैलेंगी तभी संगठन मजबूत होगा और तभी हमारी राजनीती मजबूत होगी| और अंततः हम सब सुखी होंगे| आज जब साहब कांशीराम का आंदोलन उत्तर प्रदेश में कमजोर हो रहा है तो वह का आम किसान आंबेडकरवाद और बुद्धवाद को भी कमजोर समझ इसे छोड़ते जा रहे हैं और वापस मन्दिरबाजी, देवी देवता बजी शुरू कर रहे हैं, परिणाम आप समाज सकते हैं की ये लोग फिर गुलाम बनने की तरफ चल पड़े हैं| कारन क्या हो सकता है, कारन यही है की इन लोगों तक बौद्ध विचारधारा नहीं पहुंच रही, किताब ये पड़ेंगे नहीं, मीडिया में तो हमारा कहीं कुछ है ही नहीं| इस सब का एक ही समाधान है  हमारे लोग के पास चर्चा का प्लेटफार्म और चर्चा में हिस्सेदारी सुनिश्चित करी होगी|

अंग्रेजी की एक कहावत का हिंदी रूपांतरण इस प्रकार है “अगर सरकार किसी को रोटी देती है तो वो एक दिन खायेगा, अगर रोटी बनाना सिखाती है तो वो सारी जिंदगी कामके खायेगा और अगर सरकार धर्म सिखाती है तो वो निकम्मा बनकर प्रार्थना करते करते मर जायेगा| बौद्ध धम्म का सार सूत्र है “अत्त दीपो भव:” अर्थात अपना दीपक (या सहारा) खुद बनो| यही कारन है की बौद्ध धम्म में कभी भी कोई भी किसी को भी किसी सरकार या ईश्वर या गुरु या देवी देवता आदि किसी के भी भरोसे रहना नहीं सिखाता, बल्कि बौद्ध धम्म का मकसदव्यक्ति में ऐसी सत्बुद्धि पैदा करना है जिससे वो अपना सहारा खुद बन सके|जनता हितेषी मौर्या साम्राज्य के पतन से लेकर आंबेडकर संविधान लागू होने तक लगभग दो हजार सालों तक पिछड़े लोग जुल्म सहते रहे, जलील होकर मरते रहे| पर कोई ईश्वर,कोई देवी देवता या गुरु बचाने नहीं आया|देखकर दुःख होता है की जिस बाबा साहब डॉ आंबेडकर में हजारों सालों की गुलामी से आज़ादी दिलाई लोग उनकी तो नहीं मानते पर जिस धर्म,ईश्वर,देवी,देवता,गुरु और पुरोहितवाद के नाम पर हजारों साल जुल्म सहे उनके पैरों पर पड़े जोर शोर से गिड़गिड़ा रहे हैं| सावधान ये आज़ादी ज्यादा दिनों की नहीं है अगर आपने अपने झोपड़े “बौद्ध धम्म” को दुरुस्त करने की बजाये पराये धर्मों के महलों में गिड़गिड़ाना नहीं छोड़ा| शिक्षित बनो संगठित रहो और संगर्ष करके अपना सहारा खुद बनो, जब तुम्हारे ईश्वर देवी देवता गुरु ने दो हज़ार साल तक तुम्हारी नहीं सुनी तो अब कैसे सुन लेगा| ध्यान रहे ये ईश्वर भी वैसे ही है जैसा इसके बने वाले हैं, ये भी तुम्हारे साथ वही बर्ताव करता है जैसा इसको बनाने वाले करते हैं |

ध्यम रहे हमारी समस्या दैविक नहीं है इसलिए देवपूजा और मन्दिरबाजी से कुछ न हुआ न ही होगा, हमारी समस्या सामाजिक और राजनीति है, इसका समाधान भी सामाजिक और राजनैतिक संगर्ष से ही होगा|

हमारे लोग अक्सर कहते पाये जा सकते हैं की केवक शिक्षा से ही हमारा भला हो पायेगा, ये बात अधूरा सच है पूरा सच बाबा साहब कह चुके हैं, शिक्षा के साथ | साथ संगठन और संगर्ष भी चाहिए| हमारे शिक्षित लोग ही तो साथ नहीं हैं पढा-लिखा होना और जागृत होना दोनो में अंतर है । किताबों को पढ लेने से,या डिग्रियां हासील कर लेने से कोइ जागृत नहीं कहा जा सकता । हर शिक्षित व्यक्ति जागृत ही हो,एसा नहीं है ।
जागृति का प्रथम सिद्धांत है÷ अपने दोस्त की पेहचान होना ।
जागृति का दुसरा सिद्धांत है÷ अपने दुश्मन की पेहचान होना ।
जाग्ति का तिसरा सिद्धांत है÷ अपनी ताकत और कमजोरी मालुम होना ।
जागृति का चौथा सिद्धांत है÷ दुश्मन की ताकत और कमजोरी मालुम होना ।

और जागृति का पांचवां सिद्धांत है÷ अपने महापुरुषों का इतिहास मालुम होना ।
यह पांच बातें अगर आपको मालुम है, और आप अनपढ भी हो,फिर भी आप जागृत कहे जा सकते हो । और अगर आप को ये पांच बातें नहीं मालुंम है,और आप शिक्षित भी हो,फिर भी आप जागृत नहीं हो । आप डॉक्टर, वकील इंजिनियर,प्रोफेसर,IPS,IAS,हो सकते हो । मगर आप जागृत नहीं कहे जा सकते। बाबा साहब जानते थे की जो लोग समझदार हैं वो तो समझ से हिंदुत्व को त्यागेंगे पर कुछ लोग समझ नहीं पाएंगे की क्यों और क्या त्यागना और क्या अपनाना है  है इसीलिए उन्होंने बाईस प्रतिज्ञा करवायीं थी|

हम बिखरे होए लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत है ज्यादा से ज्यादा एक जगह संगठित होकर एक दूसरे और समाज के प्रति जागरूक और सहयोगी बनने की| मैं देख रहा हूँ की अब हम पहले के मुकाबले अधिक संगठित हैं और परिणाम समाज में हमारा वर्चस्व बढ़ रहा है, राजनीती में दखल बढ़ रहा है,हमारी आर्थिक समृद्धि बढ़ रही है, सवर्णों के जुल्म कम हो रहे हैं, हमारे लोग संगठन  का महत्व समझ गए हैं| आप खुद देखिये की इस्लाम में हर शुकरवार को नमाज के नाम पर संगठित होकर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, जाटों में हुक्का चौपाल और पंचायत के नाम पर संगठित होकर अपनी समस्याओं का समाधान खोज जाता है, ब्राह्मण मंदिर नामक संस्थान के जरिये अपने अजेंडे को संगठित होकर समाज पर लागू करते हैं|परिणाम आप समाज सकते हैं की इन तीनो प्रकार के लोगों पर अत्याचार सहने की खबरे कभी सुनाई नहीं पड़ती| शायद अब आप समझ सकते हैं की लोग क्यों मंदिर मस्जिद, चौपाल, धर्मशाला आदि बनाते हैं, हम लोग भी अपने बौद्ध विहार बनाने लगे हैं| अब हमारे लोग भी आंबेडकर जयंती,गौतम बुद्ध जयंती, राजनैतिक रैलियां, बैठकें, आदि के नाम पर समाज में अपना संगठन साबित करते जा रहे हैं और इससे हमारा सामाजिक वर्चस्व बढ़ा रहा है| हमारा वर्चस्व इतना बढ़ा की राष्ट्रीय स्वेव सेवक संघ ने २०१४ में चमार जाती को शूद्र से निकाल कर क्षत्रिये ही घोषित कर दिया, पर क्षत्रिये बने रहने पर भी हम हिंदुत्व के गुलाम ही रहेंगे| पर अगर हम अपने बौद्ध धम्म को बढ़ा पाये तो हम ब्राह्मणों के बराबर बैठेंगे इतना ही नहीं इससे कहीं आगे बढ़कर हम अपना हक़ भी पा लेंगे| संगठन के इतने ज्यादा फायदे हैं की अगर लिस्ट बनायीं जाए तो हज़ार से भी ज्यादा ऐसे फायदे होंगे तो आम जनता के जीवन को सीधे फायदा पहुचाते है, और अपरोक्ष और दूरगामी फायदे तो और भी बहुत ज्यादा हैं| ध्यान रहे की आप मेहनत करते हो तो आपको संसाधन जैसे घर.गाड़ी,शिक्षा,दवाई आदि मिलते हैं पर अगर आपका समाज संगठित होकर मेहनत करता है  तो आपकी मेहनत की सुरक्षा होती है और आपसे आपकी कमाई कोई नहीं छीन सकता कोई आपपर जुलम नहीं कर सकता| हम कितना ऊपर पहुचेंगे ये इस बात पर तय होती है की हमारा समाज कितना सशक्त है| आप खुद परखें आप अपने समाज के और सवर्णों के दसवी फेल की दशा आज देखो और फिर ५ साल बाद देखना , बहुत फर्क मिलेगा|  कोई देवी देवता कोई धर्म हमारा भला नहीं कर सकता, अगर कर सकते तो दो हज़ार सालों तक हर जुल्म की आह में हमारे समाज ने इन्हीं देवी देवता और भगवानों को पुकारा पर डॉ आंबेडकर के आने तक कुछ न हुआ, जुल्म बदस्तूर चालू रहे|डॉ आंबेडकर सूत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संगर्ष करो” ही है जिससे हमारा भला हो पाया है और होता रहेगा|

मैं जोर देके कहना चाहता हूँ की हमारे पास आंबेडकरवाद/बुद्धवाद ऐसा जबरदस्त हतियार है जिससे गुलामी की बेड़िया न केवल काटी जा सकतीं हैं बल्कि उनको सदा के लिए दूर भी रखा जा सकता है| बस करना यही है की हमें उस हथियार को उठाना होगा और उसका इस्तेमाल खुद सीखना होगा, ये कोई और नहीं करेगा| अगर समय पर नहीं चेते तो गुलामी दूर नहीं सावधान

….समयबुद्धा

 
बहुजन हिताए बहुजन सुखाये

4 thoughts on “4-Apr-2015 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना: हमारी समस्या दैविक नहीं है इसलिए देवपूजा और मन्दिरबाजी से कुछ न हुआ न ही होगा, हमारी समस्या सामाजिक और राजनीति है, इसका समाधान भी सामाजिक और राजनैतिक संगर्ष से ही होगा|इसके लिए हमारे लोग के पास चर्चा का प्लेटफार्म (बौद्ध विहार संस्था) को दुरुस्त करना होगा …समयबुद्धा

  1. जय भीम.. नमो बुद्ध.. प्रबुद्ध भारत…

  2. Hamari sansthaye our Buddha Vihar may Lagatar ekta ekjut tha ke Vishay may manthan hona chahiye main Sahamat hu Samay Buddha ke Vicharose Main Abhari hun Samay Buddha ke Sabhi Adhikari our Karmachariyoka Jay Bhim,

  3. Pingback: 31 JULY 2015 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना: सावधान !! ये जो आज़ादी की जिंदगी जी र

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