25 अप्रैल, 2015 को पूज्य भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससाई जी महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी को बोधगया महाविहार ( बोधगया) का प्रबंधन बौद्धों को सौंपे जाने संबंधी मेमोरेंडम देने पहुंचे। शिष्टमंडल में भंते जी के साथ बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध, अशोक शाह वानखेड़े और महोपासक आर. पी. राष्ट्रपाल जी शामिल थे।… Kapil Swaroop Bauddh


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बिगुल बज गया पुनःआन्दोलन का….
बोधगया महाबोधि महाविहार मुक्ति आन्दोलन महासम्मेलन का उदघाटन आज सुबह (25-april-2015) आम्बेडकर भवन नई दिल्ली में हुआ

 

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महाबोधि महाविहार मुक्ति के लिए दिल्ली मोर्चे में आ रहे कुछ आम्बेडकरी साथीयों को झांसी,मथुरा रेलवे स्टेशन पर पुलिस द्वारा रोका गया था । पर ख़ुशी की बात ये है की महाबोधि महाविहार मुक्ति मोर्चा सफलता पूर्वक दिल्ली पंहुचा और 25 अप्रैल, 2015 को पूज्य भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससाई जी महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी को बोधगया महाविहार ( बोधगया) का प्रबंधन बौद्धों को सौंपे जाने संबंधी मेमोरेंडम देने पहुंचे। शिष्टमंडल में भंते जी के साथ बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध, अशोक शाह वानखेड़े और महोपासक आर. पी. राष्ट्रपाल जी शामिल थे।

 

 

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महाबोधि मंदिर पर गैर बौद्ध संप्रदायों का कब्जा: उदित राज

पटना।। यूनेस्को के विश्व विरासत और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर पर गैर बौद्ध संप्रदायों का कब्जा होने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय दलित नेता उदित राज ने शुक्रवार को कहा कि कि बौद्ध धर्म की जन्मस्थली को लेकर देश और विदेशों में आंदोलन किया जाएगा।

महाबोधि मंदिर प्रबंधन को बौद्ध धर्मावलंबियों के हाथ सौंपने को लेकर राजधानी पटना में गांधी मैदान में आयोजित एक धरना कार्यक्रम में इंडियन जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष उदित राज ने कहा, बहुत दुख की बात है कि महाबोधि मंदिर प्रबंधन पर बौद्ध धर्म के अनुयायियों का नियंत्रण न होकर गैर बौद्धों का कब्जा है। भारत में मस्जिद प्रबंधन पर मुस्लिम, गुरुद्वारों पर सिख और गिरिजाघरों पर ईसाइयों के नियंत्रण की परंपरा चली आ रही है, लेकिन बिहार में महाबोधि मंदिर में अफसरशाही के कारण गैर बौद्धों का कब्जा है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र राज्य में बौद्ध संस्थाओं की स्थिति अच्छी है, लेकिन बिहार में लंबे समय से सरकार बौद्धों की उपेक्षा कर रही है। महाबोधि मंदिर के मुद्दे को लेकर थाइलैंड, श्रीलंका, वियतनाम, स्विटजरलैंड, म्यांमार, फिलीपीन, मलयेशिया आदि देशों में भी अभियान चलाया जाएगा।

राज ने कहा कि गैर बौद्धों के हाथ में महाबोधि मंदिर प्रबंधन रहने के कारण बोधगया का विकास नहीं हुआ है। अब भी बोधगया में साफ सफाई नहीं दिखाई देती है। इंडियन जस्टिस पार्टी और सम्यक महिला बाल विकास केंद्र के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बोधगया महाविहार प्रबंधन समिति अधिनियम को समाप्त करने की मांग की गई।

source:

http://navbharattimes.indiatimes.com//articleshow/12993918.cms

5 thoughts on “25 अप्रैल, 2015 को पूज्य भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससाई जी महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जी को बोधगया महाविहार ( बोधगया) का प्रबंधन बौद्धों को सौंपे जाने संबंधी मेमोरेंडम देने पहुंचे। शिष्टमंडल में भंते जी के साथ बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध, अशोक शाह वानखेड़े और महोपासक आर. पी. राष्ट्रपाल जी शामिल थे।… Kapil Swaroop Bauddh

  1. नाही हमें मन की शांति के लिए विहार जाना जरुरी है नकी पूजा करना हमें जरुरत है उनके विचारोकी उनके विचार ही हमारे जीवन का अंन्धकार दूर कर सकते है यह मेरा वैयक्तिक मत है कुछ गलती हुई हो तो हमें माफ़ कीजिये जरूर नमो बुद्धाय नमोधम्माय

    • मई महीने का सन्देश सूत्र:अगर हमने अपने इतिहास से सीखकर बौद्ध धम्म के लिए कुछ नए नियम नहीं बनाये तो इतिहास फिर हमें सबक सिखा देगा इसलिए “हर पूर्णिमा को बौध विहार पर संगठित वंदना” का नियम अनिवार्य करना होगा | ये भारत के 6000 जातियों में बंटे सभी मूलनिवासियों को संगठित करने का बहेतरीन माद्यम है| इसके दो फायेदे होंगे एक तो धार्मिक ज्ञान से जीवन बेहतर होगा दुसरे हमारा संगठन बल साबित होगा |विहारों से हमारे समाज को बढ़ाने वाली नीति को जनसाधारण और जनसाधारण की जरूरतों को ऊपर बैठे अपने समाज के बुद्धिजीवियों तक पहुचाया जा सकेगा| …समयबुद्धा

  2. THIRTY CRORE FOLLOWERS OF DR AMBEDKAR WHEN WILL DO AGITATION ON THE ROAD AT THAT TIME THE KEY OF MAHABODHI MAHAVIHAR WILL BE IN THE HANDS OF BUDDHIST PEOPLE

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