साईं बाबा के नगरी शिरडी में एक युवक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसके मोबाईल फोन में बाबासाहेब भीम राव अंबेडकर का रिंगटोन बजने लगा। दलित युवक को हत्यारों ने बाइक से कुचककर मार डाला।


dalit killed for ambedkar ring toneशिरडी।मंदिरों के शहर शिरडी में एक दलित युवक पर बेरहमी से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई।कहा जा रहा है कि इस युवक की हत्या उसके मोबाइल के रिंगटोन की वजह से की गई।उसका रिंगटोन डॉ. भीमराम आंबेडकर पर एक गाना था।चार हमलावरों को अरेस्ट कर लिया गया है और बाकी चार फरार हो गए हैं।नर्सिंग स्टूडेंट सागर शेजवाल विवाह समारोह में शामिल होने शिरडी आया था। 16 मई को दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे वह लोकल बियर शॉप पर अपने दो चचेरे भाइयों के साथ गया था।डेप्युटी सूपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस विवेक पाटील ने कहा कि सागर पर उसके रिंगटोन को लेकर 8 युवकों ने हमला बोला था। पाटील ने कहा, ‘आठ युवक बियर शॉप के पास एक टेबल पर बैठे थे।जब सागर का मोबाइल बजा तो रिंगटोन आंबेडकर पर सॉन्ग था।वहां बैठे युवकों ने सागर से कहा कि वह मोबाइल का स्विच ऑफ कर ले।पुलिस को दिए बयान में सागर के चचेरे भाई ने बताया कि उसका रिंग टोन में यह गाना था-तुम चाहे करो जितना हल्ला, मजबूत होगा भीम का किला।इसी रिंगटोन के बाद वहां बैठे युवकों ने सागर पर बियर की बोतल से हमला बोला।इसके साथ ही उन्होंने मुक्के भी खूब मारे। सागर को फिर इन्होंने मोटर साइकल पर खींच जंगल के करीब लाया और बाइक से कुचल दिया।सागर का नंगा शव करीब साढ़े छह बजे शाम में रुई गांव के पास बरामद किया गया। कई जगह की हड्डियां टूटने से सागर की मौत हुई है।पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक सागर के शरीर में करीब 25 जख्म थे।सभी हमलावर स्थानीय प्रभुत्वशाली मराठा और ओबीसी समुदाय से हैं।इन्होंने सागर के शरीर पर लगातार बाइक चढ़ाई।सागर के पिता सुभाष शेजवाल ने कहा, ‘मैं समझ सकता हूं कि वे कितनी क्रूरता से हमले किए होंगे।लड़ाई किसी वक्त हो सकती है लेकिन ऐसी क्रूरता देखने लायक है।वे छोटी सी बात पर इस हद तक क्यों गए?
सीसीटीवी फुटेज
बियर शॉप पर शुरुआती हमले सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए हैं।21 मिनट के फुटेज में हमलावरों की क्रूरता साफ दिख रही है।इस मामले में पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से अहम सबूत मिल गए हैं।इस मामले में पुलिस पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बियर शॉप के पास में ही शिरडी पुलिस स्टेशन है। बियर शॉप के मैनेजर संदीप ने कहा कि मैंने 1.45 p.m पर पुलिस को कॉल किया था लेकिन इन्होंने आने में लंबा वक्त लिया।सागर के चचेरे भाई वहां से किसी तरह जान बचाकर भागे।

 

साईं बाबा के नगरी शिरडी में एक युवक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसके मोबाईल फोन में बाबासाहेब भीम राव अंबेडकर का रिंगटोन बजने लगा। दलित युवक को हत्यारों ने बाइक से कुचककर मार डाला।

Read more at: http://hindi.oneindia.com/news/india/shocking-dalit-youth-killed-for-keeping-ambedkar-song-as-ringtone-357217.html

 

http://hindi.oneindia.com/news/india/shocking-dalit-youth-killed-for-keeping-ambedkar-song-as-ringtone-357217.htmldalit killed for ambedkar ring tone

7 thoughts on “साईं बाबा के नगरी शिरडी में एक युवक की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसके मोबाईल फोन में बाबासाहेब भीम राव अंबेडकर का रिंगटोन बजने लगा। दलित युवक को हत्यारों ने बाइक से कुचककर मार डाला।

  1. जो हिन्दू है दलिद्द यानि दलित है जो दूसरों के मंदिर में जाता है ऐसे ही मार खायेगा इसमें किसी और का कोई दोष कहाँ है ।।

  2. dr k k patthak

    आरक्षण तो बेकार की चीज़ हो गयी है ।
    भारत में अब ये राजनीति से सरोबार हो गयी है ।।
    जिन्हें वास्तव में मिलना चाहिए आरक्षण , वो पब्लिक तो कतार से बाहर हो गयी है।।
    पाकर आरक्षण का लाभ बन गए जाने कितने ही नवाब , दम भरते फिरते हैं अपनी अपनी जात का , क्योंकि शानोशौकत के चक्कर में भूल गए अपनी औकात हैं ।।
    नहीं जानते बेचारे अपनी बेचारगी के समय को ,भूल बैठे हैं अपनी मासूमियत को ,खो गए हैं भौतिक संसाधनों में , भूल गए हैं अपने गरीब भाई को , क्योंकि जातिवाद का जहर ही ऐसा है जो मानवता को ताख पर रखता है और आपस में ऊँच नीच का भाव परोसता है ।।
    ऐ भारत के निवासी मुझे शिकवा तुझसे यही है कि तू साधू पन को त्याग कर पिछलग्गु बन गया है , और जो धरती बुद्ध जैसी पराकाष्ठा को जन्म लेने पर विवश कर देती थी ,जो कभी दुनियाँ में सर्वश्रेष्ठ सिंधु सभ्यता के नाम से जानी जाती थी ,आज वो पंगु होकर नामर्द हो गयी है । तो जागो भारत के सपूतों और छा जाओ दुनियाँ पर राज करो और अपने घर से जातिवाद अस्पर्शयवाद असमानता को गोली मारो ,और बन जाओ वीर पुनः आपनी इस धरती को संवारो ।।
    ।।नमो बुद्धाय ।।
    ।।भवतु सब्ब मंगलं ।।
    [5/29, 7:44 PM] dr k k patthak: [5/29, 7:26 PM] dr k k patthak:
    जात जात में जात है ज्यों केलन मैं पात।।
    जै मानुसि ना जुरि सकैं जौ लौ जात मैं जाति ।।
    सआभार संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज from गुरुग्रंथ साहिब ।।

    मरिगो ब्रह्मा कासीं कै बासी ।।
    मरिगो मूये शिवा अविनाशी ।।
    मरिगो मूये क्रस्न मुरारी ।।
    मरिगो बौद्ध निरंकारा।।
    मरि मरि गए दसों औवतारा ।।
    एकहूँ ना इनमैं सिरजनहारा ।।

    साभार पच्चेक बुद्ध कबीर दास जी महाराज ।।

    किभ सचियारा हूविये किभ कुड़े तुट्टे पाल।।
    हुकुम रजाई चल्लना नानक लिखिया नाल।।

    साभार from गुरुग्रंथ साहिब वाणी शिक्ख साहेब पच्चेक बुद्ध गुरु नानक देव जी महाराज ।।
    [5/30, 6:41 AM] dr k k patthak: कबीरसदास जी द्वारा बुद्ध वचन को ही दोहराया गया है और सभी सिक्ख गुरुओं ने भी पुरातन बुद्ध परम्परा को बनाये रक्खा ।। कबीरदास जी कह रहे हैं कि भाई कोई जगतकर्ता ईश्वर नहीं सभी मरणशील हैं जिसका जन्म हुआ वह मृत्यु को प्राप्त होगा ही जिस प्रकार कोई भी अवतार और ब्रह्मा आदि भी मरणशील हैं ।। भगवान् बुद्ध कहते हैं सभी कुछ अनित्य i.e. unstable i.e. everything being changed always .

    [5/30, 7:30 AM] dr k k patthak:
    samaybuddha.wordpress.com पर ज्ञानवर्धक एवं विश्लेशानात्मक लेख पढ़कर अत्यंत हर्ष भी होता है । परन्तु एक बात जिस पर भारतीय बुद्ध सम्प्रदाय को बड़ा ही गहन मंथन करना चाहिए कि कम से कम ये लोग जो निचले तबके हैं उनमें एक यह भाव जगाना कितना महत्वपूर्ण होगा कि वे समझें इस बात को कि धर्म को जानना कितना महत्वपूर्ण है । क्योकि धर्म को जाने बिना तो मनुष्य दूसरों की अध्यात्मिक (=मानसिक ) गुलामी ही करने पर मजबूर रहता है और उसकी आनेवाली संतानों में भी उन्नति की कोई अभिलाषा उत्पन्न नहीं होने पाती । मैंने ये अनुभव किया कि व्यक्ति यदि नास्तिक विचार वाला है या हो गया है तो वह इस भौतिक जगत में उन्नति कर सकता है परन्तु इस बात की भी अत्यधिक संभावना है कि उसकी आने वाली पीढियां उसके विचारों पर ना चल पायें और फिर सत्काय दृष्टि वाली मान्यता में फंस जाएँ तथा अन्धविश्वासी हो अपनी उन्नति को आत्मा-परमात्मा के सिद्धांत वाली दृष्टि में फंसकर भाग्यवादी बन जाएँ । तो विषय ये महत्पूर्ण है कि इन अंधश्रद्धा में फंसी जनता को निकालने का क्या उपाय है हमारे देश भारत में । काफी मंथन के बाद मैंने ये पाया कि इनके भीतर शिक्षा के साथ -२ अध्यात्मिक शिक्षा भी देने की जरूरत है इसका एक तरीका ज्यादा बेहतर ये ही हो सकता है कि लोगों को कर्म और कर्मफल के सिद्धांत को बताया जाए और धर्म को धार्मिक कथाओं द्वारा लोगों को समझाएं जैसा कि स्वयं भगवान् बुद्ध किया करते थे । बुद्ध ने अपने विचारों को मनवाने के लिए उपाय कौशल्य का प्रयोग करते हुए तीन प्रकार से धर्म की व्याख्या किया करते थे १-कथा सूत्रों द्वारा २-सूत्रों की व्याख्या को धार्मिक कहानी में परिष्कृत करके ३-धर्म के गूढ़ विषय को बिल्कुल खोलकर सूक्ष्म व्याख्या द्वारा । ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि संसार में तीन प्रकार की समझ वाले लोग सामान्यतया हैं १-जो समझना नहीं चाहते बस अध्यात्मिक गुरु के मूह से जो शब्द निकल गए वो उनके लिए पूजनीय बन जाते हैं । २-कुछ जो उन सूत्तों को सामान्य व्यवहार जो समाज में प्रचलित हैं उनसे मिलान करके ही मानेंगे । ३-तीसरे वे जो धर्म की वास्तविकता को समझना चाहते है उसके गूढ़ तथ्यों को जाने बिना वे नहीं रह सकते । तो जैसा उपासक की प्रकृति हो उसको उसी रूप में मार्ग देना चाहिए । किसी नएव्यक्ति को अपने विचार तो बताएं पर उसकी पूर्व श्रद्धा पर एकदम चोट ना करें उसके विचारों को अपने विचारों में लपेट लें और उसे विश्वास दिला दें कि आप जो कह रहे हैं उसका अनुभव किया आपने तो ही कह रहे हैं । तो वो आपकी बात माने उसके लिए एक शांत ,ज्ञानी और अध्यात्म को गहराई से जानने और समझाने वाले गुरु की सहायता तो चाहिए ही
    क्योंकि भारत के लोगों में जो सदियों-२ के लम्बे सफ़र के कारण धार्मिक अंधविश्वास के बीज हैं उनको नास्तिक वाद या केवल विज्ञान के बल पर नहीं मिटाया जा सकेगा । और बहुजन ऐसे ही इस पुरोहितवाद के चक्कर में फंसा रहेगा ।

    ।। भवतु सब्ब मंगलं ।।

    वास्तव में मैंने ये देखा अभी तक कि आज के समय में हमारे देश में जो भी ज्यादातर बौद्ध धम्म को मानने वाले लोग हैं वे अधिक्तर नास्तिकवाद की बातें करते हैं | सदैव ही inferiorty काम्प्लेक्स से ग्रसित देखे जाते हैं | सदैव ही धम्म मार्ग को बताने की शुरुवात हिन्दू धम्म सम्प्रदाय अथवा ईश्वरवाद की बुराइयों से करते हैं |

    अपनी ऊर्जा बिना वजह ही वेदिक विचारधारा को पुनः-२ बतानें में लगाते रहते हैं , सदा ही ब्राह्मण की बुराई करते फिरते हैं और ये भी नहीं समझ पाते की उनमें खुद कितना ब्राह्मणवाद भरा पड़ा है |आपने देखा होगा कि भारत वर्ष क्या दुनिया में कहीं भी लोग अपने नाम के आगे ब्राह्मण शब्द को सर नेम के रूप में प्रयुक्त नहीं करते हैं क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि ब्राहमण कोई जाति भी नहीं है वह तो एक अवस्था है और मुझे नहीं लगता कि ब्राह्मण अवस्था को प्राप्त मनुष्य भी यहाँ भारत में कोई है अरहत अवस्था का तो क्या होगा ?और सम्प्रदाय तो सारे के सारे ही मुझे पाखण्डवाद का अड्डा दिखाई देते हैं परन्तु फिर भी मनुष्य को किसी ना किसी सम्प्रदाय में तो रहना ही पड़ता है / जीना है | तो मान लिया कि यदि आप बुद्ध में श्रृद्धावान हो गए हैं तो बौद्ध सम्प्रदाय में चले गए होंगे परन्तु यदि आप बौद्ध सम्प्रदाय की भी सभी बातों पर श्रृद्धावान नहीं हैं तो बुद्ध धम्म को तो बिलकुल भी समझने की चेष्टा कर ही नहीं रहे | यदि किसी को लगे कि यह मार्ग अच्छा है और इससे मेरा भला हो रहा है और मैं इसे दूसरों को भी बताऊँ तो सोच तो अच्छी है पर यदि बताने का और समझाने में आपके उपायकौशल्य (acceptable representation) नहीं है तो सारी ऊर्जा व्यर्थ ही गवा रहे हो कि आपकी बात को लोग समझ ही नहीं रहे |

    भगवान गौतम बुद्ध कहते हैं कि दूसरे क्या ? गलत मान्यता रखते हैं उस पर बिना वजह बिना किसी के पूछे क्रश भाषा में व्याख्यान नहीं करना चाहिए क्योंकि आपकी बात को पूर्ण रूप से जिसने अभी स्वीकार भी नहीं किया है तो वह अपनी पूर्व श्रृद्धा के प्रति कैसे आपके द्वारा बतायी बुराई स्वीकार करेगा | तो लोगों को उनके अंधविश्वास से बाहर निकालने के लिए सर्वप्रथम अपनी बात को अध्यात्मिक वाक्य से ही शुरू करें तो वो आपकी बातों पर attention जरूर देगा | बहुत सारे लोग जो अपने को बौद्ध कहते फिरते हैं उन लोगों को मुझे नहीं लगता कि बुद्ध में कोई श्रृद्धा है वे तो बस अपनी हीनता वाले भाव को छिपाने के लिए अपनेआप को बौद्ध कहते फिर रहे हैं ,और सीधे-२ कटुवाणी हिंदु मूर्तियों पर निकालकर करते हैं |

    उन्हें पता नहीं कि ये जो मूर्तियाँ आज दिख रही हैं भारत में तो ये शुरुवात सर्वप्रथम बौद्ध सम्प्रदाय ने ही शुरू की थी | मूर्ती वास्तव में है क्या पहले ये तो पता करें और देखिये पुरोहित वर्ग को कि वो किस प्रकार दूसरों के बनाए महल पर चढ़कर उसे अपना बताने लगता हैं यह भी एक चातुर्य है भाई कि आप लोग तो अपना भी खो देते हो और दुसरे तुम्हारा पैतृक / पुरातन संपदा को अपना बताकर आम जनता को भ्रमित करके उनके गुरु बन जाते हैं क्योंकि वे लोग जानते हैं कि कैसे इस भौतिक संसार में लोगों पर राज किया जाता है उनके मनो को अपना गुलाम बनाकर | जातिवादी परम्परा में पुरोहित को ये पता है कि संख्या मायने नहीं रखती बल्कि ज्ञान मायने रखता है | और किसी सम्प्रदाय के लिए कोई व्यक्ति नहीं महत्वपूर्ण होता है विचार महत्वपूर्ण होता है तो वो लोग कभी भी नहीं बोलते कि क्यों नमस्कार शब्द बोल रहे हो या राम-राम शब्द बोल रहे हो अथवा गुड मॉर्निंग शब्द बोल रहे हो क्योंकि उन्हें पता है कि ये एक persional psychological विषय है अरे कुच्छ भी बोलता फिरे पर अध्यात्मिक राह पर चले तो जैसा हम कहें वैसा ही करे , इसके लिए हमारे देश में पुरोहित वर्ग के कितने ही बुद्धिजीवी अपना पूर्ण जीवन तक समर्पित कर देते हैं |

    भारत में कितने ही संघ हैं जो रात दिन इसी बात पर मंथन करते रहते हैं कि ये जो लोग पुरोहित वर्ग के नहीं हैं ये किसी और सम्प्रदाय में ना चले जाएँ और नए-२ अंधविश्वास apply करते रहते हैं जिससे लोग उनके वाद को आराम से मानते रहें , और पुरोहित वर्ग का हित सधता रहे | वो कभी नहीं कहते ऐसे शब्द जिन शब्दों से जनसामान्य में उनके प्रति विरोध की भावना भड़क जाए – ये समय के अनुसार व्यवहार करते हैं जैसा काल वैसा वास इस सिद्धांत को समझते हैं| ये तो बात ठीक है कि आप जय भीम बोलें और बाबा साहेब की पूजा भी करें परन्तु बौद्ध अभिवादन में तो केवल नमो बुद्धाय ही बोलें क्योंकि अगर बौद्ध धम्म सम्प्रदाय को बढ़ावा यदि भारत में बाबा साहेब ने दिया और आप लोग उनके द्वारा प्रेरित हो बौद्ध धम्म सम्प्रदाय में चले गए हैं तो अच्छी बात है , तो इस प्रकार तो महाराज अशोक को भी नमो बुद्धाय से पूर्व जय अशोक या महाराज अशोक बोलना चाहिए क्योंकि उन्होंने तो अपने पुत्र-पुत्रियों तक को भी धम्म के प्रचार में लगा दिया था | तो psychology को समझो कि अध्यात्मिक गुरु/ भगवान गौतम बुद्ध के साथ आप कुछ बी ना लगाएं ना आगे ना पीछे , फिर आप देखना कि लोग आपके अध्यात्म को जरूर मानने लगेंगे आपकी जाति क्या/ धम्म क्या / अन्य जातियों के लोग भी |

    तो भगवान गौतम बुद्ध ने बताया कि धम्म तो सबका एक है पर सम्प्रदाय अलग-२ हैं क्योंकि अविद्या है ( unknownness) है | पहले जाने कि ये जीव -जगत है क्या ? ये संसार है क्या ? ये कैसे चल रहा है ? भगवान गौतम बुद्ध ने कहा है कि ये संसार छः धातुओं से निर्मित है (१)अग्नि(२)वायु(३)आपो=तरल(४)पृथ्वी(५)आकाश i.e. vacuum (६) विञ्ञान = consciousness और यह विञ्ञान ८९ या १२१ प्रकार का होता है अर्थात consciousness भी कोई एक इकट्ठी नहीं जिसे अन्य सम्प्रदाय निर्विकारी आत्मा या जीव या रूह या soul कहते हैं | अतः भगवान् बुद्ध ने जो बताया वो तो अभी पूरा modern science भी ज्ञात नहीं कर पायी । परंतु लोगो को यह भी भ्रम होता है तिपिटक पढकर कि बुद्ध पुनर्जन्म बताते हैं तो जब आत्मा को मना कर रहे हैं तो फिर पुनर्जन्म किसका कैसे बताते हैं । भगवान् बुद्ध ने जन्म मृत्यु और जन्म के चक्र को वास्तविक और वैज्ञानिक तरीके से ही बताया है । बुद्धत्व प्राप्ति में भगवान् बुद्ध ने पटिच्च समुप्पाद को अन्वेषित किया अर्थात जो पूर्व के बुद्धों ने खोजा जिसे जन्म जरा दुःख मृत्यु पुनर्जन्म चक्र या भव चक्र भी कहा जाता है ।। इसके १२ अंग हैं १ली अविज्जा अर्थात unknownness about the बुद्ध धम्म संघ अर्थात जब तक व्यक्ति ये नहीं जान पाता कि यह संसार क्या है सब कुछ बदल क्यों रहा है कोई भी सदा के लिए नहीं रहता सभी प्राणी दुःख के सागर में डूब रहे हैं और एक दिन इस दुःख के सागर मृत्यु नामक मार के फंद्दे में पड़ जाते है ।। यह जीवन कहाँ से पैदा होता है और क्यों पैदा होता है ये बुढ़ापा क्यों होता है क्यों कोई ज्यादा बुद्धिमान है और कोई कम कोई क्यों ज्यादा भौतिक सुख साधन वाला और कोई इतना दलिद्द क्यों होता है even in same family एक ही माता पिता के सभी बच्चे एक जैसी प्रज्ञा वाले नहीं होते । अर्थात इस भव चक्र के मायाजाल को ना समझ पाना ही अविज्ज़ा है । २सरा संखार जिसे english में memory कह सकते हैं । वैसे संखार का अर्थ है खड्डे वाला अर्थात जब अविज्ज़ा के कारण कितने ही कर्म करता है जीव तो एक नए प्रकार की consciousness उत्पन्न हो जाती है और यह निरंतर जल धारा के समान घटित होता है तभी तो हर नए दिन और कुछ समयबाद व्यक्ति की मान्यताएं भी बदलती जाती हैं । अतः संखार यानि पानी पर लकीर की तरह या जमीन पर लकीर की तरह अथवा पत्थर पर लकीर की तरह जो रेखा खींचता है कोई वह है संखार जो कर्म करने से रेखा के समान खिंचा हैं । ३ विञ्ञान अर्थात नश्वर आत्मा या नश्वर जीव भी कह लो चाहो तो समझने के लिए । यह विञ्ञान उठ खड़ा हुआ संखार के कारण और इसके कारण ४ वाँ रूपनाम i.e. body & life ५वाँ षडायतन अर्थात चक्षु इन्द्रिय सोत्त इन्द्रिय घ्राण इन्द्रिय रस इन्द्रिय काय इन्द्रिय मनइन्द्रिय और इन सबके कारण ६वाँ फस्स i.e. touch of all things in various manner to these six organ system । इस फस्स के कारण ७वाँ वेदना i.e. feeling after touch to six organ system ८वाँ तञ्हा अर्थात तृष्णा i.e. will to accept or decline or hate ९वाँ उपादान i.e. attachments or hatefullness to good or bad १०वाँ भव अर्थात जीव और रूप i.e विञ्ञान और body में जो निरंतर कुछ ना कुछ घटित हो रहा है जिससे बदलते -२ रूपनाम अर्थात जरा ध्यान दें भगवान् बुद्ध ने कहा भी है कि पहले कलल i.e. embryo होता है और फिर वृक्ष में जैसे शाखाएं फुट निकलती हैं ठीक वैसे ही नया रूपनाम जन्म लेता है जिसके कारण ११वीं जाति अर्थात योनि होती है । जाति के होने से १२ वीं ये सब अर्थात ज़रा means decay i.e. oldness मृत्यु शोक परिदेव रोना पीटना होता है ।।
    इस प्रकार यह चक्र जब तक चलता रहता है जब तक व्यक्ति अर्हत यानि सभी प्रकार के राग i.e. affections द्वेष hatred will मोह i.e. stupidness i.e. मूढ़ता से रहित नहीं हो जाता है ।। अर्थात जब तक अविज्जा यानि unknownness है अविद्या है तो संखार बनाता है जीव और मृत्यु के समय जो ज्यादा दृढ संखार खींचा था वही उठ खड़ा होता है उसी के अनुसार नया विञ्ञान उठ खड़ा होता है और फिर नया जन्म पुराने संखार की देन है तो पूर्व जन्म के कर्म भी जो बचे भोगता है किसी ना किसी जाति अर्थात योनि ।।
    ref- अंगुत्तर निकाय | मज्झिम निकाय । दीघनिकाय । विसुद्धिमग्ग ।।

    तो अपने सम्प्रदाय को पहले स्वयं जाने और परिपक्व होकर दूसरों को बताएं उल्टा-सीधा धम्म की व्याख्या करने से और सम्प्रदायों की बुराई करने से कोई आपको appreciate नहीं करेगा |

    drkaushal96@yahoo.com
    drkaushal1996@gmail. com

    https://dharmindia.wordpress.com और इस address को खोलकर धर्म के बारे में पढ़ें और अपने comments भी पोस्ट करें इस web site को खूब फैलाएं घर बैठे धम्म और समाजसेवा हो जायेगी आपकी ।।
    ।।नमो बुद्धाय ।।
    ।। भवतु सब्ब मंगलं ।।

  3. खाते डॉ बी आर अंबेडकर का दिया अध्यात्म ना अपने गुरुओं का ना डॉ साहेब का बताया मानते हैं । मूर्खों की यही दशा होती है आगे आगे देखिये होता है क्या ?

  4. बुद्ध ना तो सुकरात हैं और ना ही तिपिटक बाइबिल या कुरआन या वेद
    जो बुद्ध वचन हैं ८४००० सूत्र जिन्हें तीन पिटकों में संकलित किया गया है
    जो व्यक्ति फिजिक्स एस्ट्रोफिजिक्स स्पेस साइंस और आज के सबसे बड़े वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स को ना जाने आइंस्टीन जैसों के वक़्तवय न जाने वो बुद्ध की तुलना कर सकता है किसी भी ऐरे गैरे से ।

    जिसे ना योग पता ना कभी ध्यान लगाया जो आनापान नहीं कर सकता
    जो विपस्सना नहीं जानता
    जो अँधा हो आधा वैज्ञानिक वादी
    जो कहे कुछ लिखे कुछ

    वो तो बुद्ध को भगवान् भी नहीं मानता
    बुद्ध को महात्मा जैसे गंदे पूर्व प्रत्यय जोड़ता हो

    पर मुझे तो इतना पता है जो बुद्ध की निंदा करता है उसे दुक्कट का दोस लगता है ।।

  5. [6/17, 7:21 PM] dr k k patthak: बुद्ध ना तो सुकरात हैं और ना ही तिपिटक बाइबिल या कुरआन या वेद
    जो बुद्ध वचन हैं ८४००० सूत्र जिन्हें तीन पिटकों में संकलित किया गया है
    जो व्यक्ति फिजिक्स एस्ट्रोफिजिक्स स्पेस साइंस और आज के सबसे बड़े वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स को ना जाने आइंस्टीन जैसों के वक़्तवय न जाने वो बुद्ध की तुलना कर सकता है किसी भी ऐरे गैरे से ।

    जिसे ना योग पता ना कभी ध्यान लगाया जो आनापान नहीं कर सकता
    जो विपस्सना नहीं जानता
    जो अँधा हो आधा वैज्ञानिक वादी
    जो कहे कुछ लिखे कुछ

    वो तो बुद्ध को भगवान् भी नहीं मानता
    बुद्ध को महात्मा जैसे गंदे पूर्व प्रत्यय जोड़ता हो

    पर मुझे तो इतना पता है जो बुद्ध की निंदा करता है उसे दुक्कट का दोस लगता है ।।
    [6/17, 7:24 PM] dr k k patthak: सूत्र:ध्यान रहे दलित वही है जो संगठित होकर काम न करें और वक्त पड़ने पर धोखा दे दे, अगर ये दोनों कमिया ठीक हो जाएँ तो दलित दलित नहीं रहता वो राजा बन जाता है| उदाहरण के लिए इस देश में अगर हम दलितों की संख्या २० करोड़ मानें और ये मानें की हम खुद अपना भला अपने बल बूते पर करेंगे तो हिसाब लगा लो की, अगर सभी एक दिन का एक रुपया निकले तो १ दिन में बीस करोड़ और एक महीने में ६०० करोड़ बनता है और एक साल में ७२०० करोड़| अब हिसाब लगाओ की कुल ३० राज्ये हैं और हम तीस साल तक ऐसा करें और हर साल एक ही राज्ये में ७२०० करोड़ रुपया दलितों की दशा सुधरने में लगाएं तो केवल तीस साल में ही वो फर्क आ जायेगा जो पिछली कई सदियों में नहीं आया| गरीब से गरीब भी एक दिन का एक रुपया दे सकता है| आपकी दशा सुधारने कोई नहीं आएगा अगर आपने अपनी दशा सुधार की ठान ली तो केवल आधी सदी में ही आप दलित से राजा बन जाओगे| रुपया की भी छोड़ दो ये लोग अपना फ्री का वोट भी एक ही जगह पहले ही तय करके डालें तो हमारे दुश्मन ही हमारे वोट के लिए हमारे काम करने को भागे भागे फिरेंगे| संगठित होकर मेहनत करो सफल जरूर हो जाओगे|…समयबुद्धा
    [6/17, 7:40 PM] dr k k patthak: और इस कला का उपयोग ब्राह्मण पुरोहित सभी से हिन्दू धर्म के नाम पर एक रूपया प्रतिदिन तो छोड़ो प्रतिदिन ५० रुपये के हिसाब से लेता है उसका आधार है धर्म और धर्म स्थलों पर चढ़ावा ।

    उसका लाभ वो बनिया जात के साथ मिलकर करता है जिसका पता उस नीच जाति वैश्यों को भी नहीं चल पाता और बाकी तो रहे अंधे उन्हें बाँट दिया ,अब तो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र भी नहीं ।

    जो कभी इकट्ठा हो सकें उसके लिए जाल धर्म रुपी हिन्दू का बुना और ६७७५ से अधिक जातियों में बाँट दिया ।

    जो भी विरोध करेगा उसका सत्यानाश कर देंगे धर्म का सहारा लेकर ।।

    तो अगर समझ सकते हो तो समझ जाओ और इस फॉर्मूले का तोड़ है मेरे पास पर समाज को ऊपर उठाने के लिए मुझे भी बहुत सारे हाथों की जरूरत है तो जो स्वाभिमान से जीना चाहते हैं

    आगे आएं मैं सप्ताह के शनिवार शाम से पूरे रविवार रात तक एक मिशन चलाना चाहता हूँ केवल धर्म नो पॉलिटिक्स ।।

    नमो बुद्धाय ।।
    भवतु सब्ब मंगलं ।।
    [6/17, 7:53 PM] dr k k patthak: ये बांटना कोई तलवार से नहीं होता रोज़ रोज़ किसी को जो कहने लगो वो ज्यादातर लोग खुद्द को वैसा ही समझने लगते हैं ।।

    • Religion is dead without oxygen from political support, Buddhism in example in INDIA. Note Politich is religion for current time and religion is politics of AGES. Never try to dicsriminate in politics and religion, otherwise all uor knowledge on religion wil become just words and of no use….rest as you like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s