31 JULY 2015 के पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा कि विशेष धम्म देशना: सावधान !! ये जो आज़ादी की जिंदगी जी रहे हो ये ज्यादा दिनों की नहीं है, देखो चारों तरफ पूँजीवाद हावी होता जा रहा है,आज़ादी फ्री की नहीं होती, इसकी कीमत चुकानी पड़ती है या तो पहले संगर्ष कर के या बाद में जुल्म सहकर| डॉ आंबेडकर के संगर्ष की बदौलत इतने साल आज़ादी से जी लिए पर उनकी मेहनत का कोटा भी तो खत्म होगा, हमने नया क्या जोड़ा…समयबुद्धा


caste-system-3सावधान !!!!! ये जो आज़ादी की जिंदगी जी रहे हो ये ज्यादा दिनों की नहीं है, देखो चारों तरफ ब्राह्मणवाद/पूँजीवाद हावी होता जा रहा है| ध्यान रखना आज़ादी फ्री की नहीं होती| इसकी कीमत चुकानी पड़ती है या तो पहले या बाद में|

-अपना समय और धन निकालकर अगर अम्बेडकरवाद और बुद्धवाद को बढ़ावा देकर ब्राह्मणवाद से सतर्क रहते हो तो ये प्रीपेड होगा

-और अगर अपने को “हिन्दू दलित” समझ कर बस मजे मजे में अपने पूर्वजों के हत्यारों क पूजा करते हुए टाइम पास करते हो, कोई संगर्ष नहीं करते हो तो ब्राह्मणवाद का शिकंजा धीरे धीरे कसता जायेगा और फिर एक दिन गुलाम बन जाओगे वो पोस्टपेड होगा|

और तब तुमको न्याय मिलने का कोई चांस न होगा| मन हो या न हो , ताकत हो या न हो सवर्णों की गुलामी करनी ही होगी, और उसके बदले कीमत नहीं मिलेगी, सड़ा गला खाना मिलेगा बस, अच्छा जीवन ,इलाज ,शिक्षा और अधिकार तो भूल ही जाओ|पहले की तरह तुम्हारे बच्चे इलाज न मिल पाने की वजह से तड़प तड़प कर मरेंगे क्योंकि कोई डॉक्टर अछूतों को नहीं छूएगा|पहले की तरह जब प्यास लगेगी तो गन्दा पानी पीना पड़गा सवर्ण का साफ़ पानी पी लिया तो मार मार कर चमड़ी उधेड़ दी जाएगी| आप चिंता मत करो आप की तो नौकरी लग गयी है आपको अब मंदिर भी जाने दिया जाता है, सवर्णों के यहाँ थोड़ा बहुत पूछ भी मिलने लगी है, आपको कुछ नहीं होगा जो भी होगा आपकी आने वाली पीढ़ियों को होगा|

चिंता न करो ब्राह्मणवाद धीरे धीरे अपना दबाव बनता है पीढ़ियां लग जातीं हैं, उदाहरण के लिए

– सार्वजानिक शिक्षा व्यस्था (सरकारी स्कूल) आज संविधान लागू होने के लगभग साठ साल के अन्दर ही महत्व हीन कर दी गई और गुरुकुल शिक्षा व्यस्था को अंग्रेजी स्कूल के नए रूप में लागू कर दिया गया|सरकारी स्कूल में अक्सर देखा गया है की न तो वहां पढ़ाने वाले हैं न पढने वाले|पहले ज़माने के अनपढ़ के समतुल्य आज सार्वजानिक शिक्षा व्यस्था से निकले व्यक्ति से की जा सकती है और गुरुकुल के से पास सत्ताधारी की तुलना आज के प्राइवेट स्कूल से पास हो रहे लोगों से की जा सकती है|

– बाबा साहब के जाने के चंद सालों में ही ऐसी स्थिति आ गई है की जब भारत की सारी बहुजन जनता सवर्णों के चंगुल में फस गयी है, बाबा साहब द्वारा दिलाई आज़ादी खत्म होती जाambedkar julm hinsa रही है| आप लोगों को याद होगा,याद नहीं है तो इतिहास में सुना होगा की ब्राह्मणवाद जब अपने चरम पर था तब देश के सभी संसाधनों जैसे शिक्षा, धन, धरती,अनाज, पानी, इलाज आदि पर सवर्णों का राज था, प्रेमचंद की कहानी “ठाकुर का कुआँ” सुनी होगी, ऐसी बहुत कहानियां हैं| आपको याद होगा की कैसे जीवन की हर चीज़ के लिए आप सवर्णों की गुलामी करने को मजबूर थे, उनके खेतों में काम करते थे तो जीते थे वरना भूखों मर जाते था, ज्यादा विद्रोही होकर हतियार उठा लेते थे तो आतंकवादी/माओवादी/राक्षश/डकैत आदि घोषित कर के  पाली हुए सेना से मरवा डालते थे|

-आज़ादी के बाद आप नौ से छह बजे तक ही नौकरी करते थे पर अब पूँजीवाद या ब्राह्मणवाद के चलते आपके आने का तो समय है पर जाने का कोई समय नहीं| पहले तनख्वा में गुज़ारा हो जाता है अब दिन रात खटने के बाद भी अच्छी शिक्षा और अच्छे इलाज़ नहीं करवा पाते|पहले आपका बॉस अफसर होता था अब कोई सवर्ण की कम्पनी होती है जिसमें आपका बॉस कोई अफसर भले ही हो पर मालिक सवर्ण होता है जो कानून से नहीं अपने फायदे से आप अकेले से दो तीन लोगों का काम खीच के लेता है| सवर्णों की ये कम्पनियाँ ठीक वैसी ही हैं जैसी पहले जागीरदारों के खेत होते थे, तुम उनमे मजदूरी करते थे तो खाते थे वार्ना भूखे मर जाते थे|

ठीक आज भी वैसा ही स्थिति बनती जा रही है बल्कि  नब्बे प्रतिशत बन चुकी है, ध्यान दो की जब आपका बच्चा पैदा होता है तो वो हस्पताल सवर्ण का होता है क्योंकि सरकारी चिकित्सा व्यस्था बेकार की जा चुकी है, फिर जब वो पढाई करने लायक होता है तो अच्छी पढाई उसे सवर्णों के स्कूलों में ही मिलती है सरकारी शिक्षा व्यस्था बर्बाद की जा चुकी है| फिर जब वो बड़ा होता है नौकरी करना चाहता है तब जो कम्पनियाँ होतीं है वो भी सवर्णों की ही होतीं है क्योंकि बाकि के लोगों को कम्पनियाँ चने नहीं देती सवर्णों की यूनियन| मतलब आपका जीवन हर तरह से सवर्णों के कब्जे में जाता जा रहा है| प्राइवेटीकरण तो  होना ही था पर इसका ब्राह्मणी करण करके केवल सवर्णों को ही मालिक बना डाला है, बहुजन बस मजदूर बन कर रह गया है ये अन्याय है|जी तोड़ मेहनत करके अगर वो कुछ कम भी ले तो अच्छी शिक्षा या अच्छा इलाज के एक झटके में ही उसकी सारी जमा पूँजी सवर्णों की तिजोरियों में पहुंच जाती है|

RSS_20141004आपको अहसास हुआ की पिछले साठ सालों में ही ब्राह्मणवाद का शिकंजा इतना कस गया, नहीं न आपके बच्चों को भी पता नहीं चलेगा की वो कब गुलाम बन गए| ऐसे ही धीरे धीरे देश के सभी संसाधनों के मालिक सवर्ण बनते जायेगे, क्या आपको नहीं पता प्राइवेटईकरन इसी को तो कहते हैं, वो तो शुक्र मनाओ अभी मल्टी नेशनल कम्पनियाँ है क्योंकि भारत को टेक्नोलॉजी भी तो चाहिए, इसलिए अंग्रेजों की कमपनियों में काम करने वाले को अंग्रेजी पालिसी के तहत इंसान समझा जाता है| पर तब क्या होगा जब सवर्ण पूरी तरह से मालिक हो जायेगे, चिंता न करो आपपर नहीं बीतेगी आपकी आने वाली पीढ़ियों पर बीतेगी अभी तो डॉ अबमेडकर की मेहनत द्वारा आपकी आज़ादी का प्रीपेड रिचार्ज चल रहा है, आप तो चैन की नींद सो जाओ और मीडिया जिसे बोले अच्छा है उसे ही वोट दे दो| आपको कोई ये सब समझाए तो उसे दुधकार देना ये कहकर की ‘अब ऐसा कुछ नहीं तू क्यों कट्टरपन्ति जातिवादी बातें करता है’|

अभी डॉ अम्बेडकर के संविधान के पलटने में कुछ समय बाकि है , सो जाओ आपके मालिक जो करें उनको करने दे कोई अगर अपने धर्म को बढ़ा रहा है दान कर रहा है मंदिर बनवा रहा है, खाखी चड्डी पहनकर लाठी, तलवार, बंदूक लेके सुबह पांच बजे ही मीटिंग कर रहा है,आपको गुलाम बनाने की नीतियां और युक्तियाँ खोजी और समझी समझायी जा रही ,करने दो उनको अपनी विचारधारा का प्रचार,क्या हुआ जो सरकारी अफसर और कलेक्टर और जज इस कट्टर विचारधारा में डूबते जा रहे हो, आपको थोड़े ही भुगतना है|

आप कुछ मत करना अपनी आज़ादी को बचाने को, अभी डॉ अम्बेडकर संविधान थोड़े दिन और चलेगा आपका जीवन तो काट ही देगा आगे बच्चे जाने और उनका भविष्ये …. क्या अम्बेडकर और बुद्ध लगा रखा है पका दिया यार….और बोलो बाबा जी जी जय , चलो सत्संग चलते हैं या बोलो गणपत चल दारू ला ….. या बोलो माता मईया की जय …भजन गाओ घंटा बजाओ क्योंकि जैसे दो हज़ार साल तक इन बाबाओं देवताओं ने तुमको ब्राह्मणवाद से बचाये रखा वैसे ही फिर बचा लेंगे क्योंकि तुम भूल गए हो की ये वही देवी देवता हैं बाबा हैं जिनके यहाँ तुम घुस नहीं सकते थे और अगर घुस जाते थे तो मार पड़ती थी अछूतों और ये देवी देवता और बाबा तुमको बचा लेते थे है न| मुझे मालूम है इसको पढ़ कर भी नहीं समझोगे इसीलिए तो नीच कहे जाते हो….

sfnac2yब्राह्मणवाद का डिजाइन और मकसद ये रहता है की कैसे दस प्रतिशत बुद्धिजीवियों को संगठित करके नब्बे प्रतिशत जनता और संसाधनों पर कब्ज़ा किया जाए| इसी मकसद के लिए धर्म, ईश्वर, वर्ण व्यस्था और जातिवादी व्यस्था बनाई और सदियों से चलाई जा रही है|अपने आस पास देखो देश की नब्बे प्रतिशत पूँजी और संसाधन किसके पास हैं और केवल दस प्रतिशत पूँजी और संसाधन में नब्बे प्रतिशत जनता को ठूस रखा है,क्या ये अपकृतिक बटवारा अन्याय नहीं है? ब्राह्मणवादी विचारधार कामयाब इसलिए हैं क्योंकि ये धन और शक्ति के संचय पर केंद्रित रहते है और इनको केवल दस प्रतिशत जनता को ही साधना होता है जो आपस में “फायदे” की वजह से एक दुसरे के जबरदस्त सहयोगी हो जाते हैं|वहीँ बुद्धवाद को नब्बे प्रतिशत बहुजन को फायदे की जगह न्याय से साधना पड़ता है जो की बहुजन की अनदेखी और नासमझी के कारन बहुत मिश्किल है|

भारत का अम्बेडकरवादी संविधान बुद्धवादी यही इसीलिए जनता पर गुज़रे ज़माने के मुकाबले कोई अत्याचार नहीं होते, अगर कुछ होते भी है तो उसकी वजह ये है की ब्राह्मणवादी संविधान को ठीक से लागू नहीं करते|ब्राह्मणवादियों की क्रूरता,अन्याय,दमन आदि और बहुजन जनता के बीच में संविधान खड़ा है, सोचो अगर संविधान न हो तो क्या हाल हो|ब्राह्मणवादी हमेश ये कोशिश करेंगे की शक्ति एक जगह या व्यक्ति पर केंद्रित हो और उसको ये अपने इशारे पर नचाएँ| जबकि बुद्धवादी व्यस्था में शक्ति का बटवारा करके तनशाही को रोकती है| इसका उदाहरण है की भारत के संविधान में शक्ति किसी एक राजा को नहीं दी, शाशन की शक्ति बटी है जनता के वोट देने के अधिकार में, न्याय पालिका,कार्ये पालिका, विधायिका, सेना और राज्ये सरकार व् केंद्र सरकार| तबी तो इस बुद्धवादी व्यस्था में अगर राजा गलत फैसले ले या अन्यायी हो तो बाकि के शक्ति-हिस्सेदार उसे हटा सकते हैं, जनता का भला ही बुधवादी व्यस्था है| पर ब्राह्मणवादी व्यस्था में शक्ति का एक ही केंद्र बनाया जाता है जैसे कोई राजा या कोई ईश्वर, तथाकथित ईश्वर भी शक्ति का केंद्र ही है जिसके आड़ में ब्राह्मणवादी जनता का शोषण करते हैं|

ye baudh nahin dalit haiबहुजन विरोधी मनुवाद का मुख्य हथियार ये है कि वो कुछ भी बुरा करने से पहले जनता कि मानसिकता उसके हिसाब से ढाल देते हैं , माहौल बनाते हैं और फिर तीर छोड़ देते हैं|आज मीडिया में कहीं भी न्याय,समानता,रास्ट्रवाद और सामाजिक एकता सुनाई और दिखाई नहीं पड़ती| टीवी पर जिंतनी भी फिल्मे आ रहीं हैं या अब बन रहीं हैं उसमे दो ही बात है एक वो पैसा कमाए दूसरा उसमें सामंतवादी मानसिकता को लोगों के दिमाग में बैठा दे| हर फ़िल्म में किसी न किसी तरह कोई एक बाहुबली होता है जिससे जनता और पुलिस डरती है, न्याय व्यस्था और समानता सभी जगह से गायब|फिर एक हीरो आता है वो भी मार काट मचाकर वापस उसी तरह कि व्यस्था कायम करता है, पहले दूसरा डिक्टेटर था फिर हीरो डिक्टेटर बन जाता है, फिर जनता उसकी पूजा करती है| इस सब कहानी में ये बताना कभी नहीं भूलते कि हीरो बहुत बड़ा हिन्दू देवी देवता भक्त है| खासकर कि साउथ इंडिया कि फिल्मों में इसी अन्यायी मानसिकता कि जबर दस्त डोज समाज को पिलाई जा रही है| इस सब अन्यायी मानसिकता के प्रचार में संविधान द्वारा दिए गए हक़, संवेधानिक शाशन कि तारीफ कहीं नहीं दिखाई जाती|आज जब भारत का सुनहरा समय चल रहा है उसे अराजकता के तौर पर लोगों के मन मस्तिष्क में बैठाया जा रहा है|किसी मुद्दे पर भीड़ इकट्ठी कर कर के संविधानिक व्यस्था के खिलाफ भड़का कर बदलवाने के एक्सपेरिमेंट हर स्तर पर चल रहे हैं जिनसे भावी रणनीति तैयार होगी|ऐसे में एक दिन ऐसा आ जाये जब इस सब अव्यस्था के लिए संविधान को दोषी ठहरकर लोगों को उसके खिलाफ भड़का दिया जाए….ऐसे में बहुजन साथ देकर वापिस अपने ऊपर सामंती राज स्वीकार कर लेंगे.सावधान|

ध्यान रहे इस देश में आज संविधान के आलावा बहुजन लोगों SC+ST+OBC+Minorities का कोई नहीं , आपको नहीं लगता आपको इसकी रक्षा करनी चाहिए, काम से काम इन बातों को अपने लोगों तक पंहुचा तो सकते हो |इग्नोर या नज़रअंदाज़ करने से दुःख शुरू होता है|

सवर्णों और दलितों में जो सबसे बड़ा फर्क मुझे समझ में आया वो ये है की जैसे ही सुख के दिन आते हैं दलित अपने समाज और संगर्ष को छोड़ देता है जबकि सवर्ण इसके उलट जितना संपन्न होता जाता है उतना ही संगर्ष और अपने समाज के उत्थान के लिए समर्पित होता जाता है| हमारे सक्षम वर्ग को ये समझना होगा की अम्बेडकरवाद संगर्ष के चलते उनकी जिन्दगी में आज जो सम्पन्नता आई है उससे अर्जित ज्ञान,धन और समय का ५% हिस्सा इसी संगर्ष पर खर्च करना होगा वरना वो नीं दूर नहीं ये ५% बचने के चक्कर में पूरा १०० % छीनने वाले का सामना अकेले करना पड़ेगा|

for solution of all these problems please read following dhamm deshna

4-Apr-2015 पूर्णिमा धम्म संघायन पर समयबुद्धा विशेष धम्म देशना: हमारी समस्या दैविक नहीं है इसलिए देवपूजा और मन्दिरबाजी से कुछ न हुआ न ही होगा, हमारी समस्या सामाजिक और राजनीति है, इसका समाधान भी सामाजिक और राजनैतिक संगर्ष से ही होगा|इसके लिए हमारे लोग के पास चर्चा का प्लेटफार्म (बौद्ध विहार संस्था) को दुरुस्त करना होगा …समयबुद्धा

https://samaybuddha.wordpress.com/2015/04/04/4-apr-2015-samaybuddha-vishesh-poornim-dhamm-deshna/

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