जातिवाद और आतंकवाद- हर साल भारत में जितने लोग आतंकवाद से मरते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग जातिवाद से मरते हैं,आतंकवाद अभी कुछ सैलून से शुरू हुआ है पर जातिवाद चार हज़ार सालों से मूलनिवासी लोगों को मार रहा है, इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाने वाले ही जातिवादी हैं| डॉ डी0 एस0 अशोक


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बिहार का बाथे पुर टोला नरसंघार, हरयाणा का भागना बलात्कार कांड,महाराष्ट्र का मिर्चपुर कांड  आदि आदि लिसी बहुत लम्भी ये तो हाल के ही है जिनपर मीडिया में कुछ बात हो गयी वार्ना औसि बातें तो मीडिया में आती ही नहीं है न

जातिवाद और आतंकवाद………………………………..
1. आतंकवादी सिर्फ कुछ क्षेत्र या अधिकारों की मांग करते हैँ।
2. जातिवादी लोगो को अधिकारोँ से वंचित करते हैँ।
3. आतंकवादी साल मेँ एक या दो बार बड़ी घटना करता है।
४. जातिवादी हर दिन अत्याचार करता है और कई किस्म की क्रुरता जैसे हत्या, हिंसा बलात्कार करते है।
५. आतंकवाद असमानता के आधार पर नहीँ चलता वह अपना अधिकार मांगता है।
६. जातिवाद का आधार ही असमानता है।
७. आतंकवादी  महिलाओं के साथ छेड़छाड़ नहीँ करता।
८. और यह दोनोँ काम धर्म और जाति के नाम पर जातिवादी हमेशा करते हैँ।
९. आतंकवादी खुद को खुलेआम आतंकवादी नहीँ घोषित करते। उनमेँ मानवीय शर्म होती है।
१०. जातिवादी लोग खुलेआम खुद को जातिवादी घोषित करते हैँ, यही नहीँ जातिवादी होने पर गर्व महसूस करते हैँ।
११. आतंकवादियोँ को कानून का भय हैँ। वह आतंकवाद को गर्व का विषय नहीँ मानते, उनके लिए आतंकवाद एक अस्थाई कार्यक्रम है।
१२. जातिवादी्योँ को पुलिस या प्रतिरक्षा व्यवस्था का भय नहीँ, वह कई बार उसका दुरुपयोग भी करते है। यहाँ तक की वह कानून और न्याय व्यवस्था का मदद भी पाते हैँ।
१३. आतंकवाद को आपसी बातचीत और सहमति से शांत किया जा सकता है।
१४. जातिवाद मेँ समझौता का कोई स्थान नहीँ है।
१५. कुछ समझोता करने पर आतंकवादी को आतंक से हटाया जा सकता है।
१६. पर जातिवादी बहुत कुछ खो कर भी जातिवाद का रास्ता नहीँ छोड़ते।
१७. आतंकवाद खाना कपड़ा और मानवाधिकार के लिए क्रांति विद्रोह करता है।
१८. जातिवादी असमानता के अधिकार को स्थापित कर अपने बेरोक अधिकार की लड़ाई छेड़ते हैँ, वह मानवाधिकार के दर्शन के खिलाफ हैँ ।
१९. आतंकवादी दूसरोँ के अधिकारों के खिलाफ नहीँ है।
२०. जातिवादी किसी अधिकार या न्याय के पक्ष मेँ नहीँ बल्की अधिकारों के हनन के पक्ष मेँ है।
२१. आतंकवादियोँ को खरीदा नहीँ जा सकता है वह बिकाऊ नहीँ होते हैँ।
२२.जातिवादी 100% भ्रष्ट हैँ ।
DR DS Ashok

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