लघुकथा -नवअहिंसावादी -ये कहानी सभी को जरूर पढ़नी चाहिए और समझने की कोशिश करनी चाहिए की इसका सन्देश कितना महत्वपूर्ण है ….बोधिसत्व भाई एस० प्रेम अनार्ये


Wolf_Lamb_Community wolf-sheep-hand-puppetलघुकथा

-नवअहिंसावादी-

शेर लकड़बग्घों भेड़ियों के अत्याचारों से त्रस्त जंगल की बेचारी हिरणे बहुत परेशान थी दिन रात भय का माहौल , उन्हें अपने से ज्यादा बच्चों के भविष्य की चिंता थी एक दिन कुछ समझदार और पढ़े लिखे हिरणों ने तय किया अब और नहीं , जंगल में सबको जीने का हक़ होना चाहिए अत्याचार हम ही बार बार क्यों सहे ? हमें संगठित होना पड़ेगा , अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी पड़ेगी नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब हमारी प्रजाति विलुप्ति की कगार पर पहुँच जायेगी !!

हिरणों की विशाल भीड़ अपने अपने नेताओं के नेतृत्व में झुण्ड में बदले , अलग अलग झुण्ड एक संगठन की अगुआई में विशाल समूह बने , और अंततः यह विशाल समूह हिरणों के उन्नत जागरूक और होशियार समाज में बदल गया !!

अब शेर लकड़बग्घों भेड़ियों के बुरे दिन शुरू होने वाले थे हिरणों के संगठित हो जाने से इन शिकारी पशुओं के पास शिकार के सरल विकल्प समाप्त हो गए अब या तो चूहों खरगोशो के शिकार से काम चलाया जाये या शाकाहारी हो कर घास चरा जाये या फिर अपनी जान जोखिम में डाल कर गैंडे हाथी या भैसों का शिकार किया जाये !!

शिकारियों ने गुप्त मीटिंग बुलाई जंगल के राजा को इस मीटिंग का अध्यक्ष बनाया गया शेर मंच पर आया और बोला …

मेरे प्यारे भाइयों और बहनों संकट की घडी आई है हम सब अपने अपने सभी मतभेदों को भुला कर इस भयंकर घडी से निपटने का रास्ता बनाने यहाँ एकत्रित हुए है साथियों जैसा की आप सब जानते हैं हमारा प्रिय और सरल आहार हमसे छूट गया है वो संगठित हो कर एक हो गए है अब समय भी वो नहीं रहा जब ऐसी विपत्ति के समय हम अवतारों का षड्यंत्र रच कर जीत जाया करते थे अब जमाना वो नहीं रहा अब दुनिया बहुत छोटी हो गई है हमने उन्हें तंग किया तो दुनिया के अन्य शांतिप्रिय जंगलों में हमारी असलियत का पर्दाफाश हो जायेगा और हम कहीं मुंह दिखाने के लायक भी नहीं बचेंगे इसलिए हिरणों को मारना अब आसान नहीं है लेकिन हम हाथी और गैंडो का शिकार भी तो नहीं कर सकते न ही हम घास खा सकते हैं अब हम क्या करे ?? इसका समाधान तत्काल कुछ नहीं है अगर आप सभी ने मेरी बात मानी तब हम इस संकट से अपनी आने वाली पीढ़ियों को बचा सकते है इसमें वक्त लग सकता है हमे अपने चरित्र में , स्वभाव में आमूल-चूल परिवर्तन भी करने पड़ सकते हैं बहुत कुछ सहन करना भी पड़ सकता है लेकिन साथियों देख लेना जीत निश्चित होगी हम फिर से जंगल में अपना वर्चस्व स्थापित कर लेंगे !!

पूरे दिन चले इस सम्मलेन में सर्वसम्मति से 5 प्रस्ताव पारित किये जाते हैं ये पांचों प्रस्ताव अलग अलग चरणों में पूरा करना होगा एक चरण पूरा होगा तब दूसरा चरण शुरू होगा !

1-अभी हमे हिरणों की करुणा मैत्री सदभाव का पालन कर उन्हें विश्वास दिलाना है की हम बदल गए हैं उन्हीं की तरह हम भी अहिंसक हो गए हैं !

2-जब हिरणों को नवअहिंसावादी पशुओ पर पूर्ण विश्वाश हो जाये तब दूसरा चरण शुरू होगा यह उनके बीच में अपनी बालाओं को भेज कर उनसे रिश्तेदारी जोड़ने की प्रक्रिया होगी !!

3- इस चरण में अपने रिश्तेदार हिरणों को नवअहिंसावादियों का मानसिक गुलाम बना कर उन्हें अपने ही नेतृत्व और नेताओ के विरुद्ध खड़ा करना होगा !!

4- इस चरण में शिकारी जानवरों को अपने नव रिश्तेदारों का साथ देकर उन्हें हिरणों का नेतृत्व देने के लिए विरोधी नेताओ से युद्ध करके उन्ही के हाथों उनके नेताओं को मरवाना होगा !!

5- इस अंतिम चरण में हमे उनकी संस्कृति इतिहास और संगठन को छलपूर्वक बर्बाद करना होगा और उसके स्थान पर हमे अपनी असमानतावादी संस्कृति और धर्म स्थापित करनी होगी और इसी धर्म और संस्कृति के सहारे उन्हें यह विष्वास  दिलाना होगा की तुम्हारे दुखो का कारण तुम्हारा भाग्य और भगवान् है बस हो गया काम …

सदियों तक हिरणों की पीढ़ियां हमारा शोषण सहती रहेंगी और कभी उफ्फ तक नहीं करेंगी ……

सीख – जब तक हिरण रहोगे मरते रहोगे जिन्दा रहना है तो हाथी बनो !!

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