विश्व इतिहास के सबसे घटिया इंसान – मनु की मूर्ति को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर से हटाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान की जरूरत है…Dilip C MANDAL


विश्व इतिहास के सबसे घटिया इंसान – मनु की मूर्ति को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर से हटाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान की जरूरत है। यह राजस्थानियों के आत्मसम्मान के भी खिलाफ है, क्योंकि ऐसी मूर्ति न सुप्रीम कोर्ट में है, न किसी और हाई कोर्ट में।

ज़ाहिर है कि राजस्थान के लोग इस काम को नहीं कर पाए। क्यों नहीं कर पाए, यह आश्चर्यजनक है। क्या राजस्थान में ऐसा भी कोई इंसान, या राजनीतिक पार्टी है, जो मनु की मूर्ति के पक्ष में है।

अगर है, तो वे बड़े गंदे लोग हैं।

जाति का प्रश्न एक पल के लिए छोड़ भी दीजिए, तो मनु की मूर्ति इसलिए भी हटनी चाहिए कि उसने हर जाति की औरतों के बारे में बडी निकृष्ट बातें लिखी हैं। किसी को छोड़ा नहीं है।

वह ठीक आदमी नहीं था।

 

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=919071581520167&set=a.720491174711543.1073741830.100002520002974&type=1&theaterrajasthan high court manu

 

from Facebook wall of Dilip C MANDAL

 

Advertisements

3 thoughts on “विश्व इतिहास के सबसे घटिया इंसान – मनु की मूर्ति को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर से हटाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान की जरूरत है…Dilip C MANDAL

  1. Des ko mukti ke liye murdon ki pasaan ki murtion se ladna padega murti sabki public place se hatni chahiye mahamana buddh ne murti puja ka birodh kiyaa tha bes kimti lamino par murde kabij hain ye puja ghar nahi kabja ghar hain dhndhe ki dukane hain daridrata aur niradar kayaim rakhne ke kendr hain byakti puja aur murti puja manavta aur swabhiman ke dusman hain
    Thanks

    • मूर्ति से क्या तकलीफ है आपको सिरफ राजनीति करनी है भाई सभी की मदद करो गरीबों की सेवा करो ये क्या फाल्तु की बात लेकर बैठ गये एक पत्थर की मूर्ति किसी का क्या कर लेगी किसी भी व्यक्ति ने अपनी प्रसन्नता से लगाया है तो उसे लगे रहने दीजीये

      • हम सभी को अपने जीवन में डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन की लिखी पुस्तक “मनुस्मृति क्यों जलाई गयी” जरूर पढ़नी चाहिए

        मनुवादी अथवा ब्राह्मणवादी व्यवस्था के अधीन रामचरित मानस , व्यास स्मृति और मनु स्मृति प्रमाणित करती है कि भारत का समस्त पिछड़ा वर्ग एवं अछूत वर्ग शूद्र और अतिशूद्र कहलाता है जैसे कि तेली , कुम्हार , चाण्डाल , भील , कोल , कल्हार , बढई , नाई , ग्वाल , बनिया , किरात , कायस्थ , भंगी , सुनार इत्यादि । मनुविधान अर्थात मनुस्मृति में उक्त शूद्रों के लिए मनु भगवान द्वारा उच्च संस्कारी कानून बनाये गए हैं जिनको पढ़ कर उनका अनुसरण करने से उक्त समाज के सभी लोगों का उद्धार हो जायेगा और हमारा भारत पुनः सोने की चिड़िया बन जायेगा । आपके समक्ष मनु भगवान के अमृतमयी क़ानूनी वचन पेश हैं –
        -जिस देश का राजा शूद्र अर्थात पिछड़े वर्ग का हो , उस देश में ब्राह्मण निवास न करें क्योंकि शूद्रों को राजा बनने का अधिकार नही है ।
        -राजा प्रातःकाल उठकर तीनों वेदों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मणों की सेवा करें और उनके कहने के अनुसार कार्य करें ।
        -जिस राजा के यहाँ शूद्र न्यायाधीश होता है उस राजा का देश कीचड़ में धँसी हुई गाय की भांति दुःख पाता है ।
        -ब्राह्मण की सम्पत्ति राजा द्वारा कभी भी नही ली जानी चाहिए , यह एक निश्चित नियम है , मर्यादा है , लेकिन अन्य जाति के व्यक्तियों की सम्पत्ति उनके उत्तराधिकारियों के न रहने पर राजा ले सकता है ।
        -नीच वर्ण का जो मनुष्य अपने से ऊँचे वर्ण के मनुष्य की वृत्ति को लोभवश ग्रहण कर जीविका – यापन करे तो राजा उसकी सब सम्पत्ति छीनकर उसे तत्काल निष्कासित कर दे ।
        -ब्राह्मणों की सेवा करना ही शूद्रों का मुख्य कर्म कहा गया है । इसके अतिरक्त वह शूद्र जो कुछ करता है , उसका कर्म निष्फल होता है ।
        -यदि कोई शूद्र किसी द्विज को गाली देता है तब उसकी जीभ काट देनी चाहिए , क्योंकि वह ब्रह्मा के निम्नतम अंग से पैदा हुआ है ।
        -यदि शूद्र तिरस्कार पूर्वक उनके नाम और वर्ण का उच्चारण करता है , जैसे वह यह कहे देवदत्त तू नीच ब्राह्मण है , तब दश अंगुल लम्बी लोहे की छड़ उसके मुख में कील दी जाए ।
        -निम्न कुल में पैदा कोई भी व्यक्ति यदि अपने से श्रेष्ठ वर्ण के व्यक्ति के साथ मारपीट करे और उसे क्षति पहुंचाए , तब उसका क्षति के अनुपात में अंग कटवा दिया जाए ।
        -ब्रह्मा ने शूद्रों के लिए एक मात्र कर्म निश्चित किया है , वह है – गुणगान करते हुए ब्राह्मण , क्षत्रिय और वैश्य की सेवा करना ।
        -शूद्र यदि ब्राह्मण के साथ एक आसन पर बैठे , तब राजा उसकी पीठ को तपाए गए लोहे से दगबा कर अपने राज्य से निष्कासित कर दे ।
        -यदि शूद्र गर्व से ब्राह्मण पर थूक दे तब राजा दोनों ओंठों पर पेशाब कर दे तब उसके लिंग को और अगर उसकी ओर अपान वायु निकाले तब उसकी गुदा को कटवा दे ।
        -यदि कोई शूद्र ब्राह्मण के विरुद्ध हाथ या लाठी उठाए , तब उसका हाथ कटवा दिया जाए और अगर शूद्र गुस्से में ब्राह्मण को लात से मारे , तब उसका पैर कटवा दिया जाए ।
        -इस पृथ्वी पर ब्राह्मण – वध के समान दूसरा कोई बड़ा पाप नही है । अतः राजा ब्राह्मण के वध का विचार मन में भी लाए ।
        -शूद्र यदि अहंकारवश ब्राह्मणों को धर्मोपदेश करे तो उस शूद्र के मुँह और कान में राजा गर्म तेल डलवा दें ।
        -राजा बड़ी बड़ी दक्षिणाओं वाले अनेक यज्ञ करें और धर्म के लिए ब्राह्मणों को स्त्री , गृह शय्या , वाहन आदि भोग साधक पदार्थ तथा धन दे ।
        -जानबूझ कर क्रोध से यदि शूद्र ब्राह्मण को एक तिनके से भी मारता है , वह 21 जन्मों तक कुत्ते बिल्ली आदि पापश्रेणियों में जन्म लेता है ।
        -ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न होने से और वेद के धारण करने से धर्मानुसार ब्राह्मण ही सम्पूर्ण सृष्टि का स्वामी है ।
        -शूद्र को भोजन के लिए झूठा अन्न , पहनने को पुराने वस्त्र , बिछाने के लिए धान का पुआल और फ़टे पुराने वस्त्र देना चाहिए ।
        -बिल्ली , नेवला , नीलकण्ठ , मेंढक , कुत्ता , गोह , उल्लू , कौआ किसी एक की हिंसा का प्रायश्चित शूद्र की हत्या के प्रायश्चित के बराबर है अर्थात शूद्र की हत्या कुत्ता बिल्ली की हत्या के समान है ।
        -शूद्र लोग बस्ती के बीच में मकान नही बना सकते । गांव या नगर के समीप किसी वृक्ष के नीचे अथवा श्मशान पहाड़ या उपवन के पास बसकर अपने कर्मों द्वारा जीविका चलावें ।
        -ब्राह्मण को चाहिए कि वह शूद्र का धन बिना किसी संकोच के छीन लेवे क्योंकि शूद्र का उसका अपना कुछ नही है । उसका धन उसके मालिक ब्राह्मण को छीनने योग्य है ।
        -धन संचय करने में समर्थ होता हुआ भी शूद्र धन का संग्रह न करें क्योंकि धन पाकर शूद्र ब्राह्मण को ही सताता है ।
        -राजा वैश्यों और शूद्रों को अपना अपना कार्य करने के लिए बाध्य करने के बारे में सावधान रहें , क्योंकि जब ये लोग अपने कर्तव्य से विचलित हो जाते हैं तब वे इस संसार को अव्यवस्थित कर देते हैं ।
        -शूद्रों का धन कुत्ता और गदहा ही है । मुर्दों से उतरे हुए इनके वस्त्र हैं । शूद्र टूटे फूटे बर्तनों में भोजन करें । शूद्र महिलाएं लोहे के ही गहने पहने ।
        -यदि यज्ञ अपूर्ण रह जाये तो वैश्य की असमर्थता में शूद्र का धन यज्ञ करने के लिए छीन लेना चाहिए ।
        -दूसरे ग्रामवासी पुरुष जो पतित , चाण्डाल , मूर्ख , धोबी आदि अंत्यवासी हो उनके साथ द्विज न रहें । लोहार , निषाद , नट , गायक के अतिरिक्त सुनार और शस्त्र बेचने वाले का अन्न वर्जित है ।
        -शूद्रों के समय कोई भी ब्राह्मण वेदाध्ययन में कोई सम्बन्ध नही रखें , चाहे उस पर विपत्ति ही क्यों न आ जाए ।
        -स्त्रियों का वेद से कोई सरोकार नही होता । यह शास्त्र द्वारा निश्चित है । अतः जो स्त्रियां वेदाध्ययन करती हैं , वे पापयुक्त हैं और असत्य के समान अपवित्र हैं , यह शाश्वत नियम है ।
        -अतिथि के रूप में वैश्य या शूद्र के आने पर ब्राह्मण उस पर दया प्रदर्शित करता हुआ अपने नौकरों के साथ भोज कराये ।
        -शूद्रों को बुद्धि नही देना चाहिए अर्थात उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नही है । शूद्रों को धर्म और व्रत का उपदेश न करें ।
        -जिस प्रकार शास्त्रविधि से स्थापित अग्नि और सामान्य अग्नि , दोनों ही श्रेष्ठ देवता हैं , उसी प्रकार ब्राह्मण चाहे वह मूर्ख हो या विद्वान दोनों ही रूपों में श्रेष्ठ देवता है ।
        -शूद्र की उपस्थिति में वेद पाठ नही करना चाहिए । ब्राह्मण का नाम शुभ और आदर सूचक , क्षत्रिय का नाम वीरता सूचक , वैश्य का नाम सम्पत्ति सूचक और शूद्र का नाम तिरस्कार सूचक हो ।
        -दस वर्ष के ब्राह्मण को 90 वर्ष का क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र पिता समान समझ कर उसे प्रणाम करे ।
        -मनु के उपवर्णित विधानों से अनुमान लगाया जा सकता है कि शूद्रों अतिशूद्रों पर किस प्रकार और कितने अमानवीय अत्याचार हुए हैं । इस प्रकार के क्रूर और –रोंगटे खड़े कर देने वाले विधान लिखे गए हैं । मनु के इन अमानवीय विधानों से भारत का हाथी जैसा मूल निवासी बहुसंख्यक समाज मानव होते हुए भी पशु के समान जीवन जीने को मजबूर हो गया ।

        https://samaybuddha.wordpress.com/manusmriti-jalai-kyon-gayi/

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s